Connect with us
Priyanka Gandhi Congress Priyanka Gandhi Congress

ओपिनियन

क्या प्रियंका मोदी की वाक्पटुता का मुकाबला कर पाएंगी?

Published

on

क्या प्रियंका वाड्रा, राहुल गांधी का ब्रहमास्त्र हैं, जिनका निशाना केवल भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) है? या कांग्रेस अध्यक्ष के निशाने पर उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा)-बहुजन समाज पार्टी (बसपा) गठबंधन भी है?

भाजपा जाहिर तौर पर कांग्रेस की मुख्य विरोधी है, लेकिन भारत की राजनीति को बमुश्किल ही श्वेत-श्याम में वर्णित किया जा सकता है। यहां कुछ अस्पष्ट स्थिति भी है, जो दोस्तों और दुश्मनों के आधार को धुंधला कर देती है।

इस बात के भी थोड़े संकेत हैं कि सपा और बसपा ने आगामी लोकसभा चुनाव के लिए राज्यस्तर पर छोटा गठबंधन कर 134 वर्ष पुरानी पार्टी को 80 में से केवल दो सीटें दी, जिससे भी कांग्रेस नाराज है।

गठबंधन से बाहर रखने के झटके को कुछ उदार शब्दों से सहज बनाने की कोशिश की गई, और उसके जवाब में सपा के अखिलेश यादव ने भी राहुल गांधी के प्रति ‘सम्मान’ का भाव दिखाया। लेकिन बसपा की मायावती कठोर बनी रहीं। उन्होंने इससे पहले मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे की बातचीत अचानक समाप्त कर दी थी।

उत्तर प्रदेश में अपमान से आहत, कांग्रेस ने राज्य की सभी 80 सीटों पर लड़ने की प्रतिबद्धता जताई। पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए प्रियंका वाड्रा की पार्टी महासचिव के रूप में नियुक्ति पार्टी के अतिरिक्त प्रयास से जुड़ा हो सकता है, जिसमें कांग्रेस उस राज्य में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश करेगी, जहां वह एक दशक से अपनी उपस्थिति नहीं दर्ज करा पाई है।

इसके अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश का प्रभारी महासचित ज्योदिरादित्य सिंधिया को बनाया गया है।

सपा-बसपा गठबंधन कांग्रेस के फिर से पुनर्जीवित होने से बहुत खुश नहीं होंगी। इस बात के भी थोड़े संकेत हैं कि परिवार के करिश्माई चेहरे को मैदान में लाने से पार्टी में उत्साह का नया संचार होगा, जिसका कार्यकर्ता लंबे समय से इंतजार कर रहे थे।

क्या यह सरगर्मी जमीनी स्तर पर काम करेगी, जहां सपा-बसपा गठबंधन ने अपने पास 75 सीटें रखी हैं? इनमें से सपा के पास 37, बसपा के पास 38 और राष्ट्रीय लोकदल के पास तीन और कांग्रेस के लिए दो सीटें छोड़ी गई हैं।

इस समय, सपा, बसपा और रालोद ये उम्मीद कर रहे हैं कि उनके पास पिछड़ी जाति, जाटवों और जाटों का अभेद्य समर्थन है।

अब वे यह उम्मीद कर रहे होंगे कि पुनर्जीवित कांग्रेस भाजपा से सवर्ण जाति का वोट छीन लेगी, जिससे धर्मनिरपेक्ष पार्टियां जातिगत समीकरण के साथ जीत सुनिश्चित कर लेंगी।

लेकिन यह भी संभव है कि सपा-बसपा-रालोद, कांग्रेस और भाजपा के बीच मतों का बंटवारा हो जाएगा। इससे भाजपा को फायदा हो सकता है, अगर सपा-बसपा-रालोद और कांग्रेस के बीच मुस्लिम मत बंट जाए।

इसके अलावा, राहुल गांधी ने कहा था कि कांग्रेस बैकफुट पर नहीं खेलेगी, जिसकी पार्टी के निर्णय में स्पष्ट झलक दिख रही है। पार्टी ने आंध्रप्रदेश में तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) और पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस से गठजोड़ नहीं किया है, जिसका मतलब है कि कुछ राज्यों में प्रत्येक सीटों पर भाजपा के खिलाफ एक ‘धर्मनिरपेक्ष’ उम्मीदवार उतारना संभव नहीं होगा।

जिसके फलस्वरूप राष्ट्रीय स्तर पर महागठबंधन की बातों के कमजोर प्रभाव का आकलन करना आसान है।

इस लिहाज से प्रियंका गांधी के राजनीति में प्रवेश का एक अस्थिरकारी प्रभाव हो सकता है, जो मित्र जोड़ने और लोगों को प्रभावित करने के मामले में कांग्रेस के लिए हमेशा लाभदायक नहीं भी हो सकता है।

माना जा रहा है कि वह अपने बातचीत के कौशल और भीड़ के साथ एक जीवंत और सहानुभूतिपूर्ण संवाद कौशल से कांग्रेस में एक राजनीतिक ऊर्जा का प्रवाह करेगी, जिससे प्रधानमंत्री बनने का उनके भाई का दावा और मजबूत हो सकता है।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच.डी.कुमारस्वामी पहले ही, राहुल गांधी को धर्मनिरपेक्ष दलों का प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनाने के द्रमुक नेता एम.के.स्टालिन के प्रस्ताव का समर्थन कर चुके हैं।

धर्मनिरपेक्ष पार्टियों के बीच इस उठा-पटक से भाजपा खुश होगी। इसके साथ ही भाजपा की सहयोगी शिवसेना ने प्रियंका गांधी के राजनीति में प्रवेश को कांग्रेस के लिए ‘अच्छे दिन’ कहा।

शिवसेना के एक प्रवक्ता ने हालांकि इंदिरा गांधी और उनकी पोती के बीच आमतौर पर स्पष्ट समानता को दोहराया है। इसके अलावा एक और प्रवक्ता ने उस ‘रिश्ते’ की बात की, जो नेहरू-गांधी परिवार के साथ भारत के लोगों से बना है।

भाजपा नरेंद्र मोदी के वाक्पटुता पर निर्भर है, लेकिन इस क्षेत्र में प्रियंका वाड्रा के हमलों से भाजपा को सावधान रहना होगा। क्योंकि वह इस तरह की चुनौती पेश कर सकती हैं, जिसका भाजपा ने बीते साढ़े चार वर्षो में सामना नहीं किया है।

भाजपा को इसके अलावा भीड़ को आकर्षित करने की प्रियंका वाड्रा की कला को भी सावधानी से देखना होगा कि क्या वह नेहरू व इंदिरा गांधी के करिश्मे को दोहरा सकती हैं।

ओपिनियन

पाकिस्तान को पानी रोकने पर विशेषज्ञों की राय बंटी

Published

on

By

indus water treaty

नई दिल्ली, 16 फरवरी | सीआरपीएफ की टुकड़ी पर गुरुवार को पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले के बाद कड़ी कार्रवाई करने की मांग को देखते हुए विशेषज्ञ पश्चिम और पूरब की तरफ बहने वाली सिंधु और ब्यास नदियों का पानी पाकिस्तान जाने से रोकने पर विचार कर रहे हैं। वहीं, कुछ इसकी संभाव्यता पर शक जता रहे हैं।

जल संसाधन मंत्रालय के सेवानिवृत्त शीर्ष अधिकारी एम. एस. मेनन का कहना है कि पाकिस्तान को दिए जानेवाले पानी को रोका जा सकता है। उन्होंने सिंधु जल समझौते पर लंबे समय से काम किया है।

उन्होंने कहा, “हमने अधिक पानी उपभोग करने की क्षमता विकसित कर ली है। स्टोरेज डैम में निवेश बढ़ाकर हम ऐसा कर सकते हैं। झेलम, चेनाब और सिंधु नदी का बहुत सारा पानी देश में ही इस्तेमाल किया जा सकता है।”

भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हुआ सिंधु जल समझौता पूरब की तरफ बहने वाली नदियों – ब्यास, रावी और सतलुज के लिए हुआ है और भारत को 3.3 करोड़ एकड़ फीट (एमएएफ) पानी मिला है, जबकि पाकिस्तान को 80 एमएएफ पानी दिया गया है।

विवादास्पद यह है कि संधि के तहत पाकिस्तान को भारत से अधिक पानी मिलता है, जिससे यहां सिंचाई में भी इस पानी का सीमित उपयोग हो पाता है। केवल बिजली उत्पादन में इसका अबाधित उपयोग होता है। साथ ही भारत पर परियोजनाओं के निर्माण के लिए भी सटीक नियम बनाए गए हैं।

एक दूसरे सेवानिवृत्त अधिकारी, जो मंत्रालय में करीब दो दशकों तक सिंधु आयुक्त रह चुके हैं। उनका कहना है कि पाकिस्तान को पानी रोकना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि यह अंतराष्ट्रीय संधि है, जिसका भारत को पालन करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा, “मैं नहीं समझता कि इस प्रकार का कुछ करना संभव है। पानी प्राकृतिक रूप से बहता है। आप उसे रोक नहीं सकते।”

पूर्व अधिकारी ने कहा कि अतीत में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई है, लेकिन लोग ऐसी मांग भावनाओं में बहकर करते रहते हैं।

Continue Reading

ओपिनियन

काले धन को सफेद करने के लिए भावांतर योजना शुरू की गई थी : कमलनाथ

Published

on

kamal nath

प्रमुख राज्यों और सहयोगियों को संभालने वाले एक सशक्त कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस महासचिव कमलनाथ ने मध्यप्रदेश की सत्ता के केंद्र भोपाल को बखूबी अपना लिया है। विशुद्ध राजनीति की कला में माहिर राज्य के 18वें मुख्यमंत्री जिन्होंने भारत को कांग्रेस मुक्त करने की भाजपा के विजय रथ को रोक दिया है, उन पर अब एक बड़ी जिम्मेदारी है। जन्मजात रणनीतिक और सामरिक सोच के धनी नेता अब राज्य में हर उस चीज को दुरुस्त करने के काम में जुट गए हैं जो गड़बड़ाई हुई है।

राज्य में खेती और ग्रामीण संकट के साथ ही संभवत: बेरोजगारी वह एकमात्र सबसे बड़ा कारण रही, जिसने कांग्रेस को जीत दिलाई।

इस संकट की गंभीरता के बारे में पूछे जाने पर नाथ ने इसके उन्मूलन के उपायों पर बात करते हुए कहा, “राज्य में रोजगार की स्थिति बहुत बुरी है। जिन संसाधनों का प्रयोग राज्य के विकास को गति देने के लिए किया जा सकता था, उनका व्यर्थ जाना बेहद दुखद है। पद संभालने के पहले दिन ही, मैंने राज्य में 70 प्रतिशत स्थानीय युवाओं को उद्यमों में रोजगार देना अनिवार्य कर दिया ताकि उन्हें औद्योगिक प्रोत्साहन मिले।”

उन्होंने कहा, “समय के साथ हम ऐसी और योजनाएं लेकर आएंगे, जिनसे रोजगार पैदा होंगे और उद्यमों के सशक्तीकरण के लिए काम करेंगे। हमारी सरकार युवाओं के कौशल विकास, रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए उद्यमों के विकास और शिक्षा की गुणवत्ता पर ध्यान दे रही है। गणतंत्र दिवस के मौके पर हमने एक नई योजना ‘युवा स्वाभिमान योजना’ की घोषणा की। इसके तहत हम साल में पूरे 100 दिन राज्य के युवाओं को काम देंगे। कृषि संकट के मामले में, पिछले कुछ सालों में मंदसौर दो बार किसानों के लिए कृषि संकट के क्षेत्र में भाजपा की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोलने का मुख्य केंद्र बना।”

दिल्ली में बैठे हुए भी, हर किसी ने मध्यप्रदेश में कृषि संकट और किस प्रकार मंदसौर इसके खिलाफ विरोध का केंद्र बना, इस बारे में सुना।

कमलनाथ ने भाजपा सरकार की भावांतर योजना शुरू होने और फिर उसे बंद करने के बारे में बात करते हुए कहा, “मध्यप्रदेश भारत के सबसे बड़े कृषि प्रधान राज्यों में से एक है। इसकी करीब 70 फीसदी आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर कृषि से जुड़ी है। यह बेहद दुख की बात है कि किसानों की आत्महत्या के मामले में मध्यप्रदेश देश में सबसे ऊपर है। अगर राज्य किसानों के लिए किसी आदर्श स्थिति में होता, जैसा कि पिछली भाजपा सरकार द्वारा कहा जा रहा था, तो स्थिति काफी अलग होती।”

उन्होंने कहा, “किसानों का आक्रोश और उनके प्रति सरकार की बेरुखी मंदसौर की घटना से ही स्पष्ट है। कृषि संकट का एक बड़ा कारण यह है कि किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य नहीं मिलता। भावांतर योजना केवल काले धन को सफेद करने के लिए शुरू की गई थी, इस संकट को दूर करने के लिए नहीं। यह पूरी तरह त्रुटिपूर्ण थी और इसलिए इसका विफल होना तय था।”

कमलनाथ ने कहा, “हम ‘भावांतर योजना’ को नए रूप में पेश करने जा रहे हैं और ऐसे उपाय लेकर आ रहे हैं, जिनसे किसानों को उनका हक मिलेगा। अपने वादे पर कायम रहते हुए हमने सरकार में आते ही किसानों के ऋण माफ कर दिए और राज्य के किसानों के कल्याण के लिए ऐसी और भी नीतियां बनाएंगे।”

फिर से कांग्रेस के केंद्र की सत्ता में आने के सवाल पर कमलनाथ ने कहा, “मुझे पूरा भरोसा है कि हम बहुमत के साथ सत्ता में आएंगे। पिछले चुनाव में भाजपा की जीत और कुछ नहीं, बस एक संयोग था। हालांकि आप लोगों को लंबे समय तक मूर्ख नहीं बना सकते। नोटबंदी और जीएसटी जैसी चीजें पूरी तरह विफल हुई हैं और लोग अब बदलाव चाहते हैं।”

उन्होंने कहा, “लोगों में भाजपा विरोधी भावना है और हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव के परिणामों में यह साफ दिखाई दे रहा है। अगर हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता की बात करें तो यह कम होने लगी है। हमारे प्रधानमंत्री की लोकप्रियता का ग्राफ जहां नीचे गिर रहा है, राहुल गांधी का ऊपर बढ़ रहा है।”

भाजपा और कांग्रेस का वोट शेयर काफी ज्यादा था और अंत में केवल मामूली अंतर से ही कांग्रेस को जीत हासिल हुई। कांग्रेस के पक्ष में बाजी जाने में किस चीज की भूमिका रही?

इस सवाल पर दून स्कूल और कोलकाता के सेंट जेवियर स्कूल से शिक्षित कमलनाथ ने कहा, “वक्त है बदलाव का। राज्य के लोग विकास की धीमी गति से थक चुके थे और बदलाव चाहते थे। हमारी रैलियों में भी सरकार विरोधी भावना साफ नजर आई।”

उन्होंने कहा, “अब राज्य के लोग दोनों सरकारों के बीच के अंतर को साफ महसूस कर रहे हैं। एक प्रदर्शन कर रही है और दूसरी ने कभी नहीं किया। मुझे पूरा भरोसा है कि लोग कांग्रेस को समर्थन देंगे जिसकी राज्य के विकास और सम्पन्नता के लिए काम करने की मजबूत इच्छाशक्ति है।”

Continue Reading

ओपिनियन

मोदी की किसान आय योजना सही उपाय नहीं : चिदंबरम

Published

on

By

chidambaram

नई दिल्ली, 9 फरवरी | पूर्व वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने अंतरिम बजट में सरकार द्वारा किसानों के लिए की गई सीधी आय सहयोग योजना (डायरेक्ट इनकम सपोर्ट स्कीम) को विलाप बताया।

उन्होंने कहा कि यह सही उपाय के बदले एक विलाप है क्योंकि इसका लाभ सिर्फ भूस्वामी को ही मिलेगा और गरीबों का एक बड़ा वर्ग वंचित रह जाएगा।

उधर, राहुल गांधी ने घोषणा की है कि उनकी पार्टी के सत्ता में आने पर देशभर के किसानों का कर्ज माफ किया जाएगा। उनकी इस घोषणा की आलोचनाओं को खारिज करते हुए चिदंबरम ने कहा कि कृषि क्षेत्र के लिए इसकी जरूरत है।

कांग्रेस द्वारा गरीबों के लिए किए गए न्यूनतम आय गारंटी के वादे का बचाव करते हुए पूर्व वित्तमंत्री ने कहा कि यह लागू होने योग्य योजना है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के घोषणा पत्र में इस योजना की रूपरेखा की व्याख्या की जाएगी कि यह किस प्रकार लागू होगी।

चिदंबरम ने अपनी किताब ‘अनडॉटेड-सेविंग द आइडिया ऑफ इंडिया’ के विमोचन के मौके पर आईएएनएस को दिए एक साक्षात्कार में कहा, “यह (सरकार की किसान राहत योजना) एक विलाप है। यह कहना सही युक्ति नहीं कि मैं आपके हर परिवार को 6,000 रुपये देता हूं। ये 6,000 रुपये किनको मिलेंगे? भूस्वामियों को यह रकम मिलेगी। भू-स्वामी खुद कृषक हो सकते हैं। लेकिन अनेक मामलों में भूस्वामी नदारद रहते हैं क्योंकि वे राज्य की राजधानी में बैठे होते हैं।”

उन्होंने कहा, “काश्तकार किसानों को पैसे नहीं मिलते हैं। खेतिहर मजदूरों को पैसे नहीं मिलते हैं। ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले खेती नहीं करने वाले सुनार, बढ़ई, लुहार, दुकानदार और दर्जी को पैसे नहीं मिलते हैं।”

कांग्रेस नेता ने कहा कि अगर सरकार गरीबों की मदद की बात कर रही है तो फिर वह अधिकांश गरीबों को छोड़कर सिर्फ भू-स्वामियों को क्यों इस योजना का लाभ दे रही है। हालांकि उनमें गरीब भूस्वामी हो सकते हैं, लेकिन उनमें अनुपस्थित रहने वाले भू-स्वामी (ऐसे लोग हैं जो गांव में रहते ही नहीं हैं और अपनी जमीन खेती के लिए किराए पर किसी काश्तकार को देते हैं।) भी शामिल हैं।

उन्होंने कहा, “इसलिए इससे गरीबों को फायदा नहीं होता है।”

मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति सुब्रह्मण्यम समेत अन्य लोगों द्वारा कृषि कर्जमाफी की आलोचना किए जाने पर चिदंबरम ने कहा कि कर्ज के बोझ तले दबे लोगों की मदद करना सरकार का कर्तव्य है।

कृष्णमूर्ति सुब्रह्मण्यम ने कृषि कर्जमाफी को नैतिक संकट बताया है।

चिदंबरम ने कहा, “कर्जमाफी को अनैतिक बताने पर मुझे हंसी आती है। तो फिर आप उद्योपतियों के लिए बैंकों को राहत (हेयरकट) देने के लिए क्यों कहते हैं। इसलिए नैतिकता के तर्क को इससे अलग रखें और सरल अर्थशास्त्र और कृषि से जुड़े लोगों की समस्या पर गौर करें।”

उन्होंने कहा, “कर्जदार किसान 90,000 से लेकर एक लाख रुपये का कर्ज कैसे चुका सकता है, क्योंकि वह आईसीयू में है। आपको सबसे पहले उनकी जिंदगी बचानी है। उनको तंदुरुस्त करना है। कर्जमाफी का यही मकसद है। अगर लोग सूखा या बाढ़ या अन्य कारणों से कर्ज में दबे हुए हैं तो सरकार कैसे कह सकती है कि मैं आपको कर्ज से राहत नहीं दूंगा।”

हालांकि वह इस बात से सहमत हैं कि यह पूर्ण समाधान नहीं है। कांग्रेस ने कहा, “इसके बाद आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि उत्पादकता और उत्पादन में बढ़ोतरी हो और किसानों को उनकी फसलों का वाजिब दाम मिले। अगर आप ऐसा करने में विफल होंगे तो 10 साल बाद आपको वैसी ही समस्या से जुझना पड़ेगा।”

रोजगार सृजन से जुड़े सवालों पर चिदंबरम ने कहा, “कांग्रेस को मालूम है कि रोजगार का सृजन कैसे होता है। हमें मालूम है कि नौकरियां देनेवाले क्षेत्र कौन-कौन से हैं। हमारे घोषणा पत्र में यह बताया जाएगा कि नौकरियां देने वाले क्षेत्रों के माध्यम से नौकरियां कैसे पैदा की जा सकती हैं।”

Continue Reading
Advertisement
hafiz saeed pakistan
अंतरराष्ट्रीय11 hours ago

पाकिस्तान ने हाफिज सईद के संगठन जेयूडी पर फिर से पाबंदी लगायी

raveena-tandon-min
मनोरंजन14 hours ago

रवीना टंडन शहीदों के बच्चों की शिक्षा के लिए मदद करेंगी

sensex-min
व्यापार14 hours ago

शेयर बाजारों में तेजी, सेंसेक्स 142 अंक ऊपर

राष्ट्रीय14 hours ago

मोदी ने दक्षिण कोरियाई विश्वविद्यालय में गांधीजी की प्रतिमा का किया अनावरण

Archana Puran
मनोरंजन14 hours ago

सिद्धू की जगह लेने की संभावना है : अर्चना

शहर14 hours ago

दिल्ली में अक्षरधाम के पास फायरिंग

व्यापार15 hours ago

ईपीएफओ की ब्याज दरों में बढ़ोत्तरी

Farmers
राजनीति15 hours ago

महाराष्ट्र में किसानों का फिर से शुरू हुआ ‘लॉन्ग मार्च’

Samsung
टेक15 hours ago

Samsung ने पहला 5G स्मार्टफोन किया लॉन्च

Supreme_Court_of_India
राष्ट्रीय15 hours ago

पूर्व न्यायाधीश जैन बीसीसीआई के लोकपाल नियुक्त किया

rose day-
लाइफस्टाइल2 weeks ago

Happy Rose Day 2019: करना हो प्यार का इजहार तो दें इस रंग का गुलाब…

Teddy Day
लाइफस्टाइल2 weeks ago

Happy Teddy Day 2019: अपने पार्टनर को अनोखे अंदाज में गिफ्ट करें ‘टेडी बियर’

vailtine day
लाइफस्टाइल1 week ago

Valentines Day 2019 : इस वैलेंटाइन टैटू के जरिए करें प्यार का इजहार

chili-
स्वास्थ्य23 hours ago

हरी मिर्च खाने के 7 फायदे

face recognition india
टेक2 weeks ago

क्या चेहरे की पहचान प्रौद्योगिकी का दुरुपयोग रोकने में सक्षम है भारत?

Digital Revolution
ज़रा हटके3 weeks ago

अरबपति बनिया कैसे बन गए डिजिटल दिशा प्रवर्तक

vijay mallya-min
ब्लॉग2 weeks ago

ईडी की जांच में हुआ खुलासा, माल्या ने कर्ज लेकर रकम देश से बाहर भेजी, लौटाने का इरादा नहीं था

Priyanka Gandhi Congress
ओपिनियन4 weeks ago

क्या प्रियंका मोदी की वाक्पटुता का मुकाबला कर पाएंगी?

Priyanka Gandhi
ओपिनियन4 weeks ago

प्रियंका के आगमन से चुनाव-पूर्व त्रिकोणीय हलचल

Rahul Gandhi and Priyanka Gandhi
ब्लॉग3 weeks ago

राहुल, प्रियंका के इर्द-गिर्द नए-पुराने कई चेहरे

Most Popular