समय से पहले जन्मे बच्चों के लिए स्तनपान जरूरी | WeForNewsHindi | Latest, News Update, -Top Story
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समय से पहले जन्मे बच्चों के लिए स्तनपान जरूरी

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Breastfeeding-
File Photo

समय पूर्व जन्मे शिशुओं में स्तनपान दिल संबंधी बीमारियों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। समय पूर्व पैदा हुए युवा वयस्कों में दिल से जुड़े विशेष लक्षण दिखाई देते हैं।

इनमें छोटे हार्ट चेंबर, अपेक्षाकृत उच्च रक्तचाप, और दिल की मांसपेशियों में असमान वृद्धि शामिल है। डबलिन आयरलैंड के द रोतुंडा अस्पताल के प्रोफेसर व शोधकर्ता अफीफ अल-खुफ्फश ने कहा, “वर्तमान साक्ष्य अध्ययनों से आए हैं और यह शुरुआती स्तनपान से लंबे समय तक दिल के स्वास्थ्य में सुधार बने रहने की बात उजागर करते हैं।”

शोध में समय से पूर्व पैदा हुए 30 वयस्कों का अध्ययन किया गया, जिन्होंने स्तनपान किया था और 16 समय से पूर्व जन्मे वयस्कों जिन्हें जन्म के दौरान फार्मूला बेस्ड डाइट दी गई, उनका अध्ययन किया गया।

उनका विस्तृत दिल संबंधी मूल्यांकन किया गया। इनकी आयु 23 से 28 वर्ष के बीच रही। इसमें दिल की एमआरआई भी शामिल थी।

–आईएएनएस

लाइफस्टाइल

विश्वप्रसिद्ध पश्मीना शॉल को हिमाचल दे रहा बढ़ावा

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शिमला, 3 जून (आईएएनएस)। दुनिया भर में मशहूर पश्मीना शॉल को हिमाचल प्रदेश बढ़ावा दे रहा है। इस बारे में बुधवार को पशुपालन मंत्री ने जानकारी दी। 

चांगथांगी नाम की यह भेड गरीबी से त्रस्त जनजातियों की अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

पशुपालन मंत्री वीरेंद्र कंवर ने आईएएनएस को बताया कि राज्य में सालाना 1,000 किलोग्राम पश्मीना ऊन का उत्पादन होता है और इसका उत्पादन पांच साल में दोगुना करने का लक्ष्य है।

ये बकरियां कश्मीर की प्रसिद्ध पश्मीना शॉल के लिए ऊन उपलब्ध कराती हैं, जो दुनिया भर में इसकी भारी मांग को पूरा करती हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत चंबा जिले के लाहौल-स्पीति और किन्नौर जिलों और पांगी में बर्फ से निर्मित क्षेत्रों में परिवारों को चंगथंगी और चेगू नस्ल की 638 भेड मुहैया कराएगा।

इस वित्तीय वर्ष में ही यह पशुधन उपलब्ध कराया जाएगा।

वर्तमान में, पशमीना का उत्पादन मुख्य रूप से दारचा, योची, ररिक-चिका गांवों और लाहौल में मेयर घाटी के अलावा किन्नौर जिले के स्पीति, नाको, नामग्या और लियो में किब्बर, लंग्जा और हेंगंग के अलावा चंबा की पांगी घाटी में होता है।

राज्य में लगभग 10 संगठित शॉल निर्माण इकाइयां काम कर रही हैं। लगभग 90 फीसदी पश्मीना ऊन का उपयोग शॉल, स्टोल और मफलर जैसे अन्य उत्पाद बनाने में किया जाता है और बाकी का उपयोग हाई-एंड कोट ट्वीड्स बनाने में होता है।

बता दें कि पश्मीना उत्पादकों को पारिश्रमिक मूल्य मिल रहा है। वर्तमान में, कच्चे पश्मीना की कीमत लगभग 3,500 रुपये प्रति किलोग्राम है।

संगठित और असंगठित क्षेत्र में, राज्य में लगभग 12,000 कारीगर काम कर रहे हैं। वहीं ये राज्य 2,500 चंगथंगी बकरियों का घर है।

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लाइफस्टाइल

डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने इस दवा के इस्तेमाल पर दुनिया को किया सतर्क

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Tedros Adhanom Ghebreyesus WHO
डब्ल्यूएचओ डायरेक्टर जनरल टेड्रोस एडहैनम घेब्रियेसुस (फाइल फोटो)

कोरोना महामारी के दौरान एहतियात के तौर पर लोग इससे बचने के लिए बिना डॉक्टर की सलाह लिए तरह-तहर की दवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। इतना ही नहीं कोरोना के मरीजों को भी तमाम देशों में कई तरह की दवाएं दी जा रही हैं। ऐसे में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने चेताया है। डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि कोरोना महामारी के दौरान एंटीबायोटिक्स के अधिक इस्तेमाल से खतरा बढ़ गया है। डब्ल्यूएचओ ने कहा कि एंटीबायोटिक्स के अधिक इस्तेमाल से बैक्टीरिया की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ रही है और इस वजह से अब अधिक मौतें होंगी।

द गार्जियन डॉट कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक, डब्ल्यूएचओ डायरेक्टर जनरल टेड्रोस एडहैनम घेब्रियेसुस ने कहा कि एंटीबायोटिक्स के अधिक इस्तेमाल का बुरा असर न सिर्फ कोरोना महामारी के दौरान, बल्कि उसके बाद के वक्त में भी देखने को मिलेगा।

डब्ल्यूएचओ ने एंटीबायोटिक्स के अधिक इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए कहा है कि कोरोना वायरस संकट के दौरान यह ट्रेंड और बढ़ सकता है। घेब्रियेसुस ने कहा कि ऐसे मामले बढ़ रहे हैं जिनमें बैक्टीरिया से संक्रमित मरीजों पर उन दवाओं का असर नहीं हो रहा है, जिन दवाओं के जरिए पहले वे ठीक हो रहे थे।

घेब्रियेसुस ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल बढ़ गया है। इससे बीमारों की संख्या और मौतें बढ़ जाएंगी।

डब्ल्यूएचओ डायरेक्टर जनरल ने कहा कि कोरोना के सिर्फ कुछ मरीजों को ही एंटीबायोटिक्स की जरूरत होती है। उन्होंने डॉक्टरों से अपील की है कि बैक्टेरियल इंफेक्शन ना होने पर कोरोना के हल्के लक्षण वाले मरीजों पर एंटीबायोटिक थेरेपी का इस्तेमाल ना करें।

टेड्रोस एडहैनम घेब्रियेसुस ने एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस को इस वक्त की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया। उन्होंने कहा है कि यह साफ है कि दुनिया बेहद जरूरी एंटीमाइक्रोबियल दवाओं के इस्तेमाल की क्षमता खो रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि खासकर कुछ देशों में एंटीबायोटिक्स का अधिक इस्तेमाल हो रहा है। जबकि गरीब देशों में दवाओं की कमी की वजह से लोग तकलीफ में हैं और मर रहे हैं।

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राष्ट्रीय

दिल्ली : 2 महीने बाद भी पूरी तरह नहीं खुला चांदनी चौक बाजार

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नई दिल्ली, दिल्ली और केंद्र सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों के बाद दिल्ली के अधिकांश इलाकों में दुकानें व बाजार यूं तो खोल दिए गए हैं और चांदनी चौक में भी मेवों, मिठाई, कपड़ों, हार्डवेयर, फुटवेयर, स्टेशनरी, बेकरी जैसी कई दुकानें खुल गई हैं।

लेकिन यहां के थोक एवं खुदरा बाजारों में अभी भी दर्जनों दुकानें बंद ही हैं। चांदनी चौक में कई स्थानों पर दुकानें काफी छोटी हैं तो कहीं पर दुकानों के सामने ग्राहकों के खड़े होने के लिए ज्यादा जगह ही नहीं है। इनमें से कई स्थानों पर तो सोशल डिस्टेंसिंग बेहद मुश्किल है।

यहां बड़ी तादाद में ऐसी दुकानें हैं, जहां खरीदार और दुकानदार के बीच भी ढंग से सोशल डिस्टेंसिंग ही नहीं हो पा रही। दुकान में दो-तीन ग्राहक होने पर ग्राहकों और दुकानदारों के बीच महज एक-दो फीट की दूरी ही रह जाती है

चांदनी चौक में जरी और लेडीज कपड़ों के कारोबारी अशोक जैन ने कहा, “हमारी दुकानें बहुत बड़ी नहीं है और फिर दुकान के अंदर ही हमें सारा माल भी रखना होता है। दुकान में दो कर्मचारी भी हैं। ऐसे में अगर एक-दो ग्राहक आ जाएं तो फिर ज्यादा दूरी बनना संभव नहीं है।” कुछ यही हालत चांदनी चौक के फतेहपुरी इलाके में स्थित मिठाई की दुकानों पर भी दिखी।

दुकान के बाहर फुटपाथ पर खड़े लोग न तो किसी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे थे, न ही दुकानदार की ओर से सोशल डिस्टेंसिंग की कोई व्यवस्था की गई थी।

चांदनी चौक के एक अन्य व्यापारी ओ.पी. जिंदल ने कहा, “दिल्ली सरकार ने दुकानों के लिए ऑड-ईवन सिस्टम आज ही खत्म किया है। इसके बाद कल से कई और दुकानें खुलने लगेंगी। इसके अलावा कई व्यापारियों के घर ऐसे इलाकों में हैं, जिन्हें कोरोना हॉटस्पॉट मानकर सील कर दिया गया है। इसलिए फिलहाल सभी लोग अपनी दुकानें नहीं खोल पा रहे हैं।”

वहीं, करीब दो महीने बाद बाजार खुलने के बावजूद चांदनी चौक में ग्राहकों की मौजूदगी भी बेहद कम रही। यहां बल्लीमारान के समीप कुर्ते-पाजामे बेचने वाले एक दुकानदार जहांगीर ने कहा कि बाजार में फिलहाल ग्राहक न के बराबर हैं। लोग केवल आवश्यक वस्तुओं की ही खरीदारी कर रहे हैं।

बाजार में कई ऐसे दुकानदार भी हैं, जिनके पास पुराने ऑर्डर थे, लेकिन लॉकडाउन के कारण इन ऑर्डर को पूरा नहीं कर सके। अब ऐसे माल की खेप पूरी की जा रही है। आधी-अधूरी दुकानें खुलने और कम ग्राहकों के बावजूद चांदनी चौक के आसपास कई स्थानों पर छोटे टेंपो, रेहड़ी-रिक्शा व टू-व्हीलर का जाम सामान्य दिनों की भांति लगना शुरू हो चुका है।

–आईएएनएस

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