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सदी की सबसे बड़ी ब्रेकिंग न्यूज़: क्रोधित गंगा पहुँचीं शिव के पास!

सदी इस सबसे बड़ी ब्रेकिंग न्यूज़ की जानकारी संघ-बीजेपी के पास भी पहुँच चुकी है। वहाँ खलबली मच गयी है। अपने गिनती के बचे दिनों को देखकर बीजेपी के सभी दिग्गज अलग-अलग तरह से लूट-पाट के लिए जुगत भिड़ाने में जुट गये हैं।

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Cartoon on Politician
Pictured Credit : BBC

[व्यंग्य: विश्व के सर्वप्रथम पत्रकार देवर्षि नारद की ज़ुबानी]

अभी-अभी देवाधिदेव शिव के दरबार में पृथ्वी लोक से गंगा मैया का आगमन हुआ है! वो फूट-फूटकर रो रही हैं! देवी गंगा को इस हाल में देख शिव और पार्वती ज़बरदस्त ढंग से आश्चर्यचकित हैं! शिव ने बड़ी मुश्किल से गंगा को ढाढ़स बँधाया और उनसे अपनी व्यथा बताने को कहा।

गंगा ने कहा, “मैं अब भारतवर्ष में नहीं रहना चाहतीं! अभी तक अपार प्रदूषण झेलते हुए भी मैं इसलिए अपने कर्त्तव्य-पथ पर डटी रहती थीं क्योंकि करोड़ों लोगों की मुझमें ये आस्था थी कि गंगा-स्नान से उनके सारे पाप धुल जाते हैं और कर्मों के बही-खाते में सिर्फ़ और सिर्फ़ पुण्यों का ही बोलबाला रहता है! लेकिन अब ऐसा नहीं रहा!”

शिव बोले, “अरे, तो अब अचानक क्या हो गया तो तुम ऐसे फूट पड़ीं…!”

गंगा बताने लगीं कि “अब तो बीजेपी ही अपने आप में एक ऐसे पवित्र जल कुंड में परिवर्तित हो चुकी है जिसमें स्नान करके बड़े से बड़े पापी, भ्रष्टाचारी, दुराचारी, अनाचारी, राष्ट्रद्रोही, ज़ारकर्मी, तस्कर, घोटालेबाज़, बलात्कारी, पाकिस्तान के दलाल वग़ैरह अचानक पवित्र, पूज्यनीय और आदरणीय हो जाते हैं! लिहाज़ा, अब भारत में मेरी कोई उपयोगिता बची नहीं! इसलिए मैं वहाँ अब एक पल भी नहीं रहना चाहती! इतना ही नहीं, बीजेपी और यहाँ तक कि ख़ुद प्रधानमंत्री ने मेरी साफ़-सफ़ाई करवाने की ख़ूब क़समें खायीं। यहाँ तक कि उसने तो मेरे अवैध पुत्र होने तक का दावा कर दिया! इसके बावजूद मेरी सेहत में रत्ती भर भी सुधार नहीं आया! और, अब तो वो आस्था भी मिट गयी कि गंगा नहाने से सारे पाप धुल जाएँगे। ऐसे में साफ़ है कि सारी इज़्ज़त-प्रतिष्ठा को गँवाकर मैं अब एक पल भी भारत में नहीं रहना चाहती! मुझे वापस स्वर्ग में लौटना है! बस, आप सिर्फ़ इसका इन्तज़ाम करवा दीजिए…!”

शिव ने कहा, “अरे, एक नरेश अग्रवाल के बीजेपी में पहुँचकर साफ़-सुथरा करार दिये जाने से तुम इतना टूट गयीं। अरे, तुमने से सदियों से न जाने कैसे-कैसे लोगों को झेला है!”

गंगा कहने लगीं, “आप ठीक कहते हैं, प्रभु। लेकिन पहले इक्का-दुक्का लोग ही मुझसे जुड़ी आस्था के साथ खिलवाड़ करते थे। उसे मैं किसी तरह बर्दाश्त कर लेती थी। लेकिन अब तो हद्द ही हो गयी है। अब तो सुबह का पापी अगर शाम तक बीजेपी में शामिल हो जाये तो मोदी भक्त उसे पापी नहीं, बल्कि पापा कहने लगते हैं। ऐसा घोर अनर्थ देखकर अब मेरा सब्र ज़बाब दे चुका है।”

ये सुनकर शिव विचारमग्न हो गये। फिर बोले, “अच्छा, गंगा ये बताओ कि उस जन्मजात दलबदलू नरेश अग्रवाल के अलावा तुम्हें और किसकी-किसकी करतूतों ने आहत किया?”

गंगा ने जबाब दिया, “प्रभु, कितने ही नाम हैं! जिन्हें कल तक बीजेपी अव्वल दर्ज़े का बेईमान और भ्रष्ट बताती थी, उन्होंने जब बीजेपी में जाने का फ़ैसला तो पार्टी ने अपने जल-कुंड में स्नान करवा उन्हें पवित्र हो जाने का सर्टिफ़िकेट दे दिया। नाम तो सैकड़ों में हैं, लेकिन फ़िलहाल मुझे नारायण राणे, एस एम कृष्णा, नारायण दत्त तिवारी, विजय और रीता बहुगुणा, जगदम्बिका पाल, ब्रजेश पाठक, स्वामी प्रसाद मौर्य, नीतीश कुमार, हेमन्त बिस्व शर्मा, जीतन राम माँझी जैसों के नाम याद आ रहे हैं। अरे प्रभु, पापियों को बीजेपी के जल-कुंड में स्नान करवाकर पवित्र बनाने की जुगत के ज़रिये बीजेपी ने कई राज्यों में पूरी की पूरी पार्टी को ही ख़रीदकर उसे पवित्र बना डाला!”

अब शिव आँख बन्द करके सोचने लगे। फिर बोले, “तुम्हारी बात में तो दम है, गंगा। मैं भी देख रहा हूँ कि बीजेपी के माई-बाप यानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भारत में मूर्तियाँ तोड़ने वालों और उसे सही ठहराने वालों की जमात खड़ी कर ली है। ये भारत के हिन्दू-तालिबान हैं। गाँधी के हत्यारों का ऐसा रूप तो होना ही था। भारत में तो अब ये कहने वाले भी पैदा हो गये हैं कि सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला मस्जिद के पक्ष में आया तो वहाँ सीरिया जैसे हालात हो जाएँगे! सचमुच, यदि ऐसा हो गया तो तुम भारत में कैसे रह पाओगी?”

शिव के मुँह से अपने प्रति हमदर्दी के स्वर सुनकर गंगा ने कहा, “अरे महाराज, आलम ये है कि किसी भी ख़ुद को मेरी अवैध सन्तान बताने वाला नरेन्द्र मोदी कहीं ये बोलता भी दिख सकता है कि ‘भाईयों-बहनों, श्रीश्री की चेतावनी के बाद भारत में संविधान की कोई अब कोई ज़रूरत नहीं रही, क्योंकि यदि किसी को संविधान, क़ानून, अदालत जैसी लोकतांत्रिक संस्थाओं की परवाह ही नहीं रहेगी, तो जैसा हिन्दुत्ववादी समाज बनेगा, उसमें हरेक पाप को करने वाले के लिए सिर्फ़ बीजेपी में होने की शर्त ही पर्याप्त होगी। कोई बीजेपी वालों पर तोहमत नहीं लगा पाएगा! सभी मानकर चलेंगे कि बीजेपी का मतलब है गंगा जैसी पवित्रता! ऐसे में मैं वहाँ कैसे रह पाऊँगी? अब तो सिर्फ़ यही दिन देखना बाक़ी रह गया है कि कल तक नरेश अग्रवाल को पाकिस्तान-परस्त बताने वाले भगवा नेताओं की ओर से ये बयान भी आ जाए कि नीरव मोदी, मेहुल चोकसी, विजय माल्या और ललित मोदी भी यदि भारत लौट आए तो उन्हें बीजेपी के जल-कुंड में स्नान करवाकर नरेन्द्र मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री बना दिया जाएगा! यही नहीं, यदि दाऊद इब्राहिम, हाफ़िज़ सईद और मणिशंकर अय्यर जैसे लोग भी बीजेपी में जाकर भारत माता की सेवा की पेशकश करने लगे तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए!”

इस पर शिव ने कहा, “देखो गंगा, ये जो कुछ हो रहा है उसके बारे में कहावत है कि ‘ज्ञानी से ज्ञानी मिले, मिले नीच से नीच, पानी से पानी मिले, मिले कीच से कीच!’ फ़िलहाल, भारत को पतन का ऐसा नज़ारा झेलना होगा। यक़ीनन, 2019 तक जनता की आँखें खुल जाएँगी। तब तक उसे अच्छी तरह से समझ में आ जाएगा कि गंगा-स्नान का विकल्प बीजेपी के जल-कुंड में डूबकी लगाना कभी नहीं हो सकता। कीचड़ से भरे घड़े पर दूध की मलाई डाल देने से उसका स्वभाव नहीं बदल जाता! इसीलिए, मेरा आग्रह है कि तुम थोड़ा सा और बर्दाश्त करो। 2019 तक यदि जनता ने बीजेपी के होश ठिकाने नहीं लगाये तो तुम मैं वचन देता हूँ कि तुम्हें भारत से बुला लिया जाएगा!”

इतना सुनकर व्यथित गंगा वापस पृथ्वी को लौट गयीं और 2019 का इन्तज़ार करने लगीं।

[नोट: सदी इस सबसे बड़ी ब्रेकिंग न्यूज़ की जानकारी संघ-बीजेपी के पास भी पहुँच चुकी है। वहाँ खलबली मच गयी है। अपने गिनती के बचे दिनों को देखकर बीजेपी के सभी दिग्गज अलग-अलग तरह से लूट-पाट के लिए जुगत भिड़ाने में जुट गये हैं। अमित शाह सभी नेताओं को तरह-तरह का मशविरा बाँट रहे हैं।]

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पर्यावरण के लिए सबसे बड़ा ख़तरा: 90% प्लास्टिक कचरा रिसाइकिलिंग नहीं होता

केमिकल से बनी प्लास्टिक की बोतलों में केमिकल मिलना शुरू हो जाता है और सारा केमिकल पानी या कोल्ड ड्रिंक में मिल जाता है और वह पानी जहर हो जाता है और वहीं पानी हम पी भी रहे हैं।

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Plastic Water Bottles

नई दिल्ली, 24 जून | भारत के अधिकांश राज्यों में प्लास्टिक कंपनियां स्कूली बच्चों के प्रयोग में आने वाली प्लास्टिक की बोतलों में पीवीसी (पाइपों में प्रयोग होने वाला प्लास्टिक) और बीपीए (बिसफेनोल ए नामक एक रसायन) जैसे रसायनों का प्रयोग करती हैं, जो उनकी सेहत के लिए बहुत ही हानिकारक है। इन बोतलों में पानी या फिर कोल्ड ड्रिंक पीने लायक न रहकर जहर बन जाता है, जिसका सेवन मासूम बच्चे ही नहीं बल्कि युवा भी दिन ब दिन अपने दैनिक जीवन में कर रहे हैं।

‘माई राइट टू ब्रीथ’ के संस्थापक सदस्य और पर्यावरणविद् जयधर गुप्ता ने आईएएनएस के साथ बातचीत में कहा, “गर्मी के दिनों में इनका प्रयोग अधिक होता है और जब यह बोतले कंपनियों से निकलकर दुकानों और गोदामों में जाने के लिए ट्रकों में लोड होती हैं तो उस वक्त बाहर का तापमान अगर 35-40 डिग्री है तो ट्रक के अंदर का तापमान 50 से 60 डिग्री होता है, इस दौरान विभिन्न केमिकल से बनी प्लास्टिक की बोतलों में केमिकल मिलना शुरू हो जाता है और सारा केमिकल पानी या कोल्ड ड्रिंक में मिल जाता है और वह पानी जहर हो जाता है और वहीं पानी हम पी भी रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “खाने से लेकर पीने की हर चीज में प्लास्टिक का उपयोग हो रहा है। हैरत की बात यह है कि प्रयोग होने वाली इस प्लास्टिक में 90 फीसदी से ज्यादा प्लास्टिक रिसाइकिल होने के लायक ही नहीं है। लोगों ने खुद ही इस हानिकारक चीज को अपने दैनिक जीवन में अपनाया है। पूरे भारत में हम रोजाना दो करोड़ प्लास्टिक की बोतलें कचरे में फेंकते हैं चाहे आप कहीं भी जाओं चाहे वह राजमार्ग हो, घूमने फिरने की जगह हो आपको हर जगह यह प्लास्टिक की बोतलें मिलेंगी।

जयधर गुप्ता ने कहा कि आठ से 10 प्रतिशत ही यह बोतलें रिसाइकिल होती हैं बाकी लैंडफिल साइटों पर फेंक दी जाती हैं। यह प्लास्टिक बायोडिग्रेडबल नहीं है यह हजारों साल तक हमारी दुनिया में रहेंगी।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की 2015 में आई रिपोर्ट बताती है कि भारत के प्रमुख 60 बड़े नगरों में प्रति दिन करीब 4,059 टन प्लास्टिक कचरा पैदा होता है। इस सूची में दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरू और हैदराबाद जैसे शहर शीर्ष पर हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि देश में प्रति दिन करीब 25,940 टन प्लास्टिक कचरा उत्पन्न होता है।

जयधर ने कहा, “पैकेजिंग उद्योग सबसे ज्यादा प्लास्टिक कचरा उत्पादित करते हैं। इनमें बोतल, कैप, खाने का पैकेट, प्लास्टिक बैग आदि शामिल हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार समुद्र को प्रदूषित करने वाले शीर्ष पांच प्रदूषकों में से चार पैकेजिंग उद्योग से निकलने वाला प्लास्टिक है।”

प्लास्टिक के विकल्प के सवाल पर जयधर गुप्ता ने कहा, “सबसे अच्छा विकल्प है कि जैसे हम पुराने जमाने में करते थे कि स्टील की बोतलें, थरमस इत्यादि। जब भी हम कहीं भी चले तो घर से इन्हें आप अपने साथ रखें। समस्या यहीं है कि हम लोग सहुलियतों के चक्कर में मारे जा रहे हैं जैसे जैसे लोग अमीर होते जाएंगे वह सहुलियतों के जाल में फंसते जाएंगे। यह बहुत आसान चीज है कौन ले जाएगा। इस सहुलियतों के कारण लोगों ने पर्यावरण की दुर्दशा कर दी है।”

उन्होंने कहा, “आज से 20 से 25 साल पहले लोग बाजार से सामना लेने के लिए घर के थैले, बर्तन, इत्यादि चीजें ले जाया करते थे लेकिन आज के वक्त में लोगों ने इन चीजों को अपने साथ ले जाना बंद कर दिया है। वह बाजारों से सामना प्लास्टिक की थैलियों में लाते हैं, जिन्हें रिसाइकिल किया ही नहीं जा सकता। लोगों को जानने की जरूरत है कि यह प्लास्टिक उनके लिए खतरा है।”

जयधर गुप्ता ने बाजारों में बिकने वाली प्लास्टिक की थैलियों पर उदाहरण देते हुए कहा कि कोई भी सब्जी वाला, छोटे दर्जे का दुकानदार प्लास्टिक में प्रयोग होने वाला माइक्रोन जैसी चीजों को नहीं समझता। प्लास्टिक में वही माइक्रोन काफी घातक सिद्ध होते हैं और आगे जाकर प्रदूषण बढ़ाते हैं।

प्लास्टिक की बोतलों की गुणवत्ता में सुधार के सवाल पर उन्होंने कहा, “इसमें सुधार की गुंजाइश नहीं है, इसमें सुधार करने से यह सिर्फ महंगी ही होगी। सबसे पहले तो हमें इन सबसे खुद को अलग करना है, हमें हर उस चीज को न कहना है, जिसे एक बार प्रयोग कर कूड़े में फेंक दिया जाता है। विदेशों में भी जब कागज की थैलियों का प्रयोग किया जा सकता है तो भारत में क्यों नहीं। विदेशों में उन थैलियों के लिए पैसा लिया जाता है इसलिए लोगों ने अपनी आदत में सुधार किया है। विदेशों ने प्लास्टिक को खत्म करने का संकल्प लिया है और वह कर भी रहे हैं। सरकार को इसे समाप्त करने के लिए कानून बनाना चाहिए।”

प्लास्टिक पर लगाम लगाने के सवाल पर उन्होंने कहा, “सरकार को चाहिए कि प्लास्टिक को एक लग्जरी चीज घोषित करें ताकि लोगों की इसकी खरीद से बचें। सिंगापुर में इस तरह की योजना है कि अगर आपको प्रदूषण करना है तो इसका पैसा दो। यह बहुत ही आसान फार्मूला है। इसे भारत में लागू किया जाना चाहिए।”

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि गोवा में सभी लोग अपने अपने घरों से कूड़ा निकालकर हर रात उसमें आग लगा देते हैं, यहां हर घर में धुआं ही धुआं है। यहां पर भी किसान अपनी फसल जला रहा हैं और हर घर अपना कूड़ा जला रहा है। यहां कोई रोक नहीं है हर रेहड़ी वाला, सब्जी वाला प्लास्टिक की थैलियों में सामान बेच रहा है, वह कहां जाएंगी। उन्हें या तो समुद्र में बहा दिया जाएगा या फिर जला दिया जाएगा।

–आईएएनएस

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ज़रा हटके

मधुबनी पेंटिंग से बदली पटना के विद्यापति भवन की रंगत

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Madhubani Painting

पटना, 24 जून | बिहार के मुख्यमंत्री आवास पहुंचने वाला कोई भी व्यक्ति अब दुनियाभर में विख्यात लोक कला मधुबनी पेंटिंग की विविध कलाकृतियों को देख यहां की प्राचीन कला-संस्कृति से न केवल रूबरू होगा बल्कि उनकी बारिकियों को भी समझेगा।

बिहार के मधुबनी स्टेशन परिसर को मधुबनी पेंटिंग से सजाने-संवारने के बाद गांव के कलाकर अब राजधानी पटना तक की दीवारों पर अपनी कला को उकेर कर उन्हें खूबसूरत बनाने में जुटे हैं। पटना स्थित प्रसिद्घ विद्यापति भवन की दीवारों पर भी कलाकार मधुबनी पेंटिंग उकेर कर इस भवन की रौनक बढ़ा रहे हैं।

बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र खासकर दरभंगा और मधुबनी के अलावा नेपाल के कुछ क्षेत्रों में मधुबनी पेंटिंग की खास पहचान है। रंगोली के रूप में शुरू हुई यह कला धीरे-धीरे आधुनिक रूप में कपड़ों, दीवारों एवं कागज पर उतर आई है। मिथिला की महिलाओं द्वारा शुरू की गई इस घरेलू चित्रकला को पिछले कुछ दशकों में पुरुषों ने भी अपना लिया है।

मधुबनी पेंटिंग को बिहार की गलियों और घरों तक पहुंचाने का संकल्प लिए स्वयंसेवी संस्था ‘क्राफ्टवाला’ के कलाकार अब राजधानी पटना पहुंचे हैं। पटना के विद्यापति मार्ग स्थित चेतना समिति के विद्यापति भवन में मिथिला चित्रकला की आर्ट गैलरी का निर्माण ‘क्राफ्ट विलेज’ जितवारपुर से आए कलाकारों की टीम द्वारा किया जा रहा है।

क्राफ्टवाला के संस्थापक राकेश झा आईएएनएस को बताते हैं, “इस कार्य का उद्देश्य विद्यापति भवन में मधुबनी पेंटिंग के परम्परागत स्वरूप को प्रदर्शित करना है, जिसके तहत मिथिला क्षेत्र के लोक संस्कारों जैसे विवाह, मुंडन, जनेऊ आदि में प्रयुक्त विभिन्न प्रकार के अल्पना (अरिपन), कोहबर (कोबर), सीतायन (सीता का जीवन चरित्र), लोक नायकों की गाथा आदि का चित्रण मधुबनी पेंटिंग शैली में किया जा रहा है।”

उन्होंने कहा कि चेतना समिति वषोर्र् से मिथिला की लोक कला संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रयत्नशील रही है। ऐसे में विद्यापति भवन को बिहार का पहला मधुबनी पेंटिंग आर्ट गैलरी बनाने का दायित्व क्राफ्टवाला को सौंप समिति ने हमें गर्व का पल प्रदान किया है।

चेतना समिति के उमेश मिश्र बताते हैं कि विद्यापति भवन को मधुबनी पेंटिंग से सजाने का उद्देश्य आने वाली पीढी को मिथिला पेंटिंग से केवल रूबरू कराना है।

राकेश झा कहते हैं कि क्राफ्टवाला की टीम ने मधुबनी पेंटिंग को जगह-जगह बढ़ाने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि इसके तहत मधुबनी स्टेशन से मधुबनी पेंटिंग की शुरूआत की गई थी, उसे देखकर लोग अब कई स्थानों पर मधुबनी पेंटिंग बनाने लगे हैं।

पटना के 1 अणे मार्ग मुख्यमंत्री आवास परिसर की दीवारों पर भी मधुबनी पेंटिंग बनाई गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पेंटिंग की तस्वीर ट्विटर पर साझा भी की है।

विद्यापति भवन में क्राफ्टवाला के प्रोजेक्ट प्रमुख कौशल कहते हैं, “विद्यापति भवन की दीवारों पर करीब 20 कलाकारों द्वारा मधुबनी पेंटिंग बनाई जा रही हैं। भवन में विद्यापति के चित्रण के अलावे राम-सीता, राधा-कृष्ण और बिहार के अन्य संस्कृतियों को भी चित्र के जरिए प्रस्तुत किया जाएगा।”

इधर, भवन की दीवारों में पेंटिंग करने में जुटी कलाकार रेणु देवी कहती हैं, इस कार्य से न केवल अपनी कला दिखाने का अवसर मिलता है बल्कि मधुबनी पेंटिंग को भी राज्य के लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में महाकवि विद्यापति और मिथिला लोक नृत्य, मिथिला लोककलाओं को भी प्रदर्शित किया जा रहा है।

मधुबनी पेंटिंग को मिथिला पेंटिंग भी कहा जाता है। किंवदंतियों के मुताबिक यह कला मिथिला नरेश राजा जनक के समय से ही मिथिलांचल में चली आ रही है। आधुनिक समय में मधुबनी चित्रकला को पहचान बिहार के मधुबनी जिले के जितवारपुर गांव की रहने वाली सीता देवी ने दिलाई। इस गांव की तीन कलाकारों जगदंबा देवी, सीता देवी और बौआ देवी को पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

–आईएएनएस

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दुनिया के सबसे रोमांटिक डेस्टीनेशंस में से एक है सैंटा मोनिका

सैंटा मोनिका आपको पूरे दिन व्यस्त रखने और आपका मनोरंजन करने वाले आकर्षणों से भरपूर है।

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Santa Monica Pier Area-Ocean Ave

सैंटा मोनिका का नाम सुनते ही एक ऐसा समुद्रतटीय शहर जेहन में घूमने लगता है, जो अपने अंदर कई तरह के विशेषताएं और आकर्षण समाए हुए हो। मालिबू या फिर वेनिस बीच से अलग सैंटा मोनिका समुद्रतटीय आकर्षण और तटीय इलाकों की परिष्कृत जीवनशैली का शानदार संतुलन पेश करता है। इसी कारण यह जोड़ों के लिए एक बेहद खास गंतव्य बन जाता है। इस शहर में आकर्षणों की भरमार है। अगर आप सैंटा मोनिका घूमने का मन बना रहे हैं तो आपका दिन वैश्विक ब्रांडों के बीच खरीददारी के साथ-साथ समुद्रतट पर रिलैक्स करने और दुनिया को निहारने में कब बीत जाएगा, आपको पता भी नहीं चलेगा। इसका कारण यह है कि सैंटा मोनिका आपको पूरे दिन व्यस्त रखने और आपका मनोरंजन करने वाले आकर्षणों से भरपूर है।

पेश हैं कुछ एसे ही आकर्षण के केंद्र :

सैंटा मोनिका पीयर

सैंटा मोनिका की बात हो तो सैंटा मोनिका पीयर का जिक्र न हो, ऐसा भला कैसा हो सकता है। इसकी लाल और पीले रंग की फेरीज शहर की पहचान बन चुकी हैं। पीयर में पैसिफिक पार्क के अलावा, एक फुल सर्विस एम्यूजमेंट पार्क, कई तरह के रेस्टोरेंट, बार और ऐसी कई दुकाने हैं, जहां से आप अपने लिए यागदार निशानी खरीद सकते हैं। इसके अलावा सैंटा मोनिका पीयर में 200 से अधिक गेम्स से सज्जित एर्केड है। सोलर पावर से चलने वाले पैसेफिक पार्क की फेरी व्हील अद्वीतीय अनुभव प्रदान करती है।

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दिन में यहां का पूरा आकर्षण लूफ हिप्पोड्रोम कोलोजियल में शिफ्ट हो जाता है, जहां स्ट्रीय परफारमेंस होते हैं। यहां आप काटन कैंडी का भी आनंद ले सकते हैं। हाथ में बीयर लिए जब आप यहां से मालिबू और साउथ बे का नजारा लेते हैं तो यह शानदार अनुभव प्रदान करता है। सूर्यास्त के समय आप समुद्रतट पर जाकर स्थानीय संगीत का आनंद ले सकते हैं। लहरों के बीच संगीत की धुनें कानों में रस घोल देती हैं। सैंटा मोनिका पीयर एक एसा डेल्टीनेशन है, जिसे आप कतई नहीं चूकना चाहेंगे क्योंकि यह हर उमर के लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

सैंटा मोनिका बीच पर साल के 300 दिन खिली रहती है धूप

सैंटा मोनिका बीच अपने आप में बेहद खास है। यहां साल के 300 दिन धूप खिली रहती है और यही कारण है कि नेशनल ज्योग्राफिक ने सैंटा मोनिका को टाप-10 बीच सटीज इन द वलर्ड में शामिल किया है। प्रशांत महासागर पर स्थित सैंटा मोनिका में साढ़े तीन मील लम्बा चमकता हुआ कोस्टलाइन है। सैंटा मोनिका बीच यहां आने वाले लोगों को यहां रमने और यहां की लाइफस्टाइल को अपनाने और उसमें खो जाने के अनंत अवसर प्रदान करता है। सैंटा मोनिका आने वाले पर्यटकों को बीच पर पैर रखने के साथ सबसे आकर्षक गतिविधियों का दीदार होता है और वे सबकुछ भूलकर उसमें खो जाते हैं।

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सैंटा मोनिका बीच की खोज 1875 में जान पी. जोंस ने किया था। जोंस ने इस स्थान को खरीद लिया और 8.3 वर्ग मील क्षेत्रफल वाले इस शहर की नींव रखी। तब से लेकर आज तक सैंटा मोनिका दुनिया की सबसे आकर्षक बीच डेस्टीनेशंस में जगह बना चुका है। 1909 में यहां पहला प्लेजर पीयर खुला और इसके बाद से यह स्थान हालीवुड स्टार्स के लिए पसंदीदा बन गया। साथ ही 1920 के दशक में यह इंटरनेशनल फिटनेस क्रेजी लोगों का पसंदीदा डेस्टीनेशन बना और फिर 1980 के दशक में यहां लेजेंड्री होटल कलेक्शन खुले। सैंटा मोनिका के साथ एक समृद्ध इतिहास जुड़ा है और यही कारण है कि यह लगातार दुनिया भर के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता रहता है।

शापिंग के लिए भी परफेक्ट डेस्टीनेशन

अगर आपको समुद्रतट के अलावा शापिंग पसंद है तो सैंटा मोनिका आपके लिए परफेक्ट डेस्टीनेशन है। यहां काफी कम दूरी पर कई शापिंग डेस्टीनेशन हैं, जहां आपको शानदार सेल और काफी सस्ते में डिजाइनर मटेरियल मिल जाएंगे। आप दुनिया भर में मशहूर जिस किसी ब्रांड का नाम आप लेंगे, वह यहां मिल जाएगा। मोंटाना एवेन्यू से लेकर ब्लूमिंगडेल और नार्डस्ट्राम तक, हर जगह आपको बेहतरीन ब्रांड काफी सस्ती कीमत में मिल जाएंगे। सैंटा मोनिका में आप जहां चाहें शापिंग कर सकते हैं क्योंकि यहां आब्शंस की कोई कमी नहीं।

सबको आकर्षित करता है मोंटाना एवेन्यू

सैंटा मोनिका के उत्तरी इलाके में स्थित मोंटाना एवेन्यू सबको अपनी ओर आकर्षित करता है। यह 150 से अधिक रेस्टोरेंट्स और रीटेलर्स का घर है। डाउनटाउन सैंटा मोनिका से थोड़ी दूरी पर स्थित मोंटाना एवेन्यू प्रोमेनेड और पीयर की गहमागहमी से दूर एक शांत स्थान है। यह स्थान लेट नाइट शापिंग के लिए भले ही उपयुक्त न हो लेकिन सनराइज से लेकर सनसेट तक यह शापिंग के लिए परफेक्ट डेस्टीनेशन है। यहां शापिंग के समय ए-लिस्ट सेलीब्रिटीज, शहर से बाहर के लोग, स्ट्रालर्स लिए टहलते स्थानीय लोग दिख जाते हैं। यहां आने वाला क्राउड काफी रिलैक्स रहता है क्योंकि यहां शापिंग के अलावा खाने-पीने के भरपूर आब्शन हैं।

देसी और विदेशी पर्यटक जमकर लेते हैं नाइटलाइफ का लुत्फ

सैंटा मोनिका लाइटलाइफ न सिर्फ स्थानीय लोगों को अपनी ओर खींचता है बल्कि यहां देश और दुनिया से रात की मस्ती के लिए यहां पहुंचते हैं। लास एंजेलिस इलाके से हजारों लोग रोजाना सैंटा मोनिका आते हैं और जमकर मौज मस्ती करते हैं। सैंटा मोनिका में रात में मौज-मस्ती के कई साधन हैं। प्रशांत महासागर का रुख किए यहां के रूफटॉप रेस्टोरेंट और बार्स सबको अपनी ओर खींचते हैं।

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शांगरीला का ओएनवाईएक्स या फिर सैंटा मोनिका का सोनोमना वाइन गार्डन बार काफी लोकप्रिय हैं। रात भर चुस्कीयां लेते हुए नाचते हुए सुबह कर देने के लिए सर्किल बार या फिर बार कोपा अपने आप में खास तरह का आकर्षण है। इसके अलावा शहर में कई डाइव बार्स भी हैं, जिनमें चेज जे काफी फेमस है।

सैंटा मोनिका खाने-पीने के शौकीनों के लिए भी है शानदार जगह

सैंटा मोनिका में कई मशहूर रेस्टोरेंट हैं। यहां कई शेफ अपनी कला से लोगों के अच्छे भोजन की चाह को शांत करते हैं। फिग, हकलबरी कैफे एंड बेकरी, टार एंड रोजेज जैसे रेस्टोरेंट यहां हैं और इनके यहां आने का कारण यह है कि सैंटा मोनिका का लोकेशन शानदार है। सैंटा मोनिका फ्यूजन क्यूजीन का जन्मदाता है। यह अमेरिका का इंटरनेशनल डाइनिंग डेस्टीनेशन है क्योंकि दुनिया भर के रेस्टोरेंट चेन और शेफ यहां आकर अपनी पाककला दिखाते हैं और ढेरों धन कमाते हैं।

लक्जरी होटल्स, रेजाट्स और स्पा की है भरमार

सैंटा मोनिका में लक्जरी होटल्स, रेजाट्स और स्पा की भरमार है। इसका कारण यह है कि यह एक इंटरनेशनल डेस्टीनेशन है। यहां के होटल हालीवुड के होटलों से बिल्कुल अलग हैं। यहां के होटल सीफेसिंग हैं और लोकल टच लिए हुए हैं। यहां बीच पर अनेकों होटल और रेजाट्स मिल जाएंगे, जहां हालीवुड के इलीट लोग आराम करते देखे जा सकते हैं। होटलों और रेजार्टस के अलावा कई ऐसे बंग्लो हैं, जहां रात की जिंदगी बड़ी सुकून भरी होती है।

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साथ ही साथ यहां अनेकों स्पा हैं, जो दिन भर मौज-मस्ती करते, बीच पर खेलकर और सर्फि ग करते थके लोगों को सुकून देते हैं। यहां के स्पा, योगा स्टुडियोज जूसिंग बार्स काफी लोकप्रिय हैं।

कला और संस्कृति का अद्भुत संगम

सैंटा मोनिका लॉस एंजेलिस काउंटी का हिस्सा है लेकिन यह दक्षिणी केलीफोर्निया में कला और सांस्कृतिक जीवनशैली के लिए अहम किरदार निभाता रहा है। असल में यहां के आधे के करीब लोग किसी ने किसी रूप में कला से जुड़े हुए हैं। सैंटा मोनिका में अनेकों राष्ट्रीय स्तर की आर्ट गैलरियां, पब्लिक आर्ट सेंटर्स, प्रमुख म्यूजियम, थिएटर हैं जहां हमेशा कुछ न कुछ चलता रहा है और स्थानीय तथा बाहर से आए लोग परफामिर्ंग आर्ट, प्ले और कंसटर्स का लुत्फ लेते रहते हैं।

–आईएएनएस

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जहरीली हवा पेड़ों में कुपोषण पैदा कर रही

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शहर2 hours ago

बिहार में सर्जिकल स्प्रिट पीने से 4 युवकों की मौत

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मनोरंजन2 hours ago

IIFA Awards 2018 : देखें Winners की पूरी List

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राजनीति2 hours ago

देश को लूटना और लुटवाना मोदी सरकार का तकिया कलाम: कांग्रेस

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राजनीति2 hours ago

शिवसेना का मोदी से सवाल: किसानों की खुदकुशी क्या अच्छे दिन हैं?

राष्ट्रीय3 hours ago

‘शैलजा से शादी करना चाहता था मेजर निखिल’

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ज़रा हटके2 weeks ago

ये हैं दुनिया के अजीबोगरीब बेडरूम

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ज़रा हटके2 weeks ago

यहां पीने के साथ नहाने का भी उठा सकते हैं लुफ्त

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ब्लॉग3 weeks ago

इस्तीफ़े की हठ ठाने योगी को अमित शाह का दिलासा

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चुनाव2 weeks ago

भाजपा को लगा झटका, कांग्रेस ने जीती जयनगर सीट

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ज़रा हटके2 weeks ago

इस मंदिर में प्रसाद में बंटता है बर्गर और ब्राउनीज

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Viral सच3 weeks ago

बदलता जलवायु, गर्माती धरती और पिघलते ग्लेशियर

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ज़रा हटके2 weeks ago

भड़ास निकालनी हो तो इस कैफे में जाइए…

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ब्लॉग3 weeks ago

बुंदेलखंड : ‘लड़कियों वाले गांव’ में शौचालय नहीं

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किसान आंदोलन के पांचवे दिन मंडियों में सब्जियों की कमी से बढ़े दाम

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ब्लॉग3 weeks ago

बुंदेलखंड में पानी के लिए जान दे रहे जानवर और इंसान

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मनोरंजन5 days ago

‘संजू’ में रहमान का गाना ‘रूबी रूबी’ रिलीज

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मनोरंजन2 weeks ago

सलमान के बैनर की लवरात्रि का टीजर रिलीज

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मनोरंजन2 weeks ago

‘जीरो’ का नया टीजर दर्शकों को ईदी देने को तैयार

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मनोरंजन2 weeks ago

‘सूरमा’ का ट्रेलर रिलीज

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मनोरंजन2 weeks ago

जाह्नवी की फिल्म ‘धड़क’ का ट्रेलर रिलीज

मनोरंजन3 weeks ago

सपना के बाद अब इस डांसर का हरियाणा में बज रहा है डंका

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मनोरंजन3 weeks ago

फिल्म ‘संजू’ का रिलीज हुआ पहला गाना, ‘मैं बढ़िया, तू भी बढ़िया’

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मनोरंजन3 weeks ago

‘रेस 3’ का तीसरा गाना ‘अल्‍लाह दुहाई है’ रिलीज

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मनोरंजन4 weeks ago

सलमान खान की फिल्म रेस-3 का ‘सेल्फिश’ गाना हुआ रिलीज

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दिल्ली से विशाखापट्टनम जा रही आंध्र प्रदेश एक्‍सप्रेस के 4 कोच में लगी आग

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