Connect with us

ब्लॉग

सदी की सबसे बड़ी ब्रेकिंग न्यूज़: क्रोधित गंगा पहुँचीं शिव के पास!

सदी इस सबसे बड़ी ब्रेकिंग न्यूज़ की जानकारी संघ-बीजेपी के पास भी पहुँच चुकी है। वहाँ खलबली मच गयी है। अपने गिनती के बचे दिनों को देखकर बीजेपी के सभी दिग्गज अलग-अलग तरह से लूट-पाट के लिए जुगत भिड़ाने में जुट गये हैं।

Published

on

Cartoon on Politician
Pictured Credit : BBC

[व्यंग्य: विश्व के सर्वप्रथम पत्रकार देवर्षि नारद की ज़ुबानी]

अभी-अभी देवाधिदेव शिव के दरबार में पृथ्वी लोक से गंगा मैया का आगमन हुआ है! वो फूट-फूटकर रो रही हैं! देवी गंगा को इस हाल में देख शिव और पार्वती ज़बरदस्त ढंग से आश्चर्यचकित हैं! शिव ने बड़ी मुश्किल से गंगा को ढाढ़स बँधाया और उनसे अपनी व्यथा बताने को कहा।

गंगा ने कहा, “मैं अब भारतवर्ष में नहीं रहना चाहतीं! अभी तक अपार प्रदूषण झेलते हुए भी मैं इसलिए अपने कर्त्तव्य-पथ पर डटी रहती थीं क्योंकि करोड़ों लोगों की मुझमें ये आस्था थी कि गंगा-स्नान से उनके सारे पाप धुल जाते हैं और कर्मों के बही-खाते में सिर्फ़ और सिर्फ़ पुण्यों का ही बोलबाला रहता है! लेकिन अब ऐसा नहीं रहा!”

शिव बोले, “अरे, तो अब अचानक क्या हो गया तो तुम ऐसे फूट पड़ीं…!”

गंगा बताने लगीं कि “अब तो बीजेपी ही अपने आप में एक ऐसे पवित्र जल कुंड में परिवर्तित हो चुकी है जिसमें स्नान करके बड़े से बड़े पापी, भ्रष्टाचारी, दुराचारी, अनाचारी, राष्ट्रद्रोही, ज़ारकर्मी, तस्कर, घोटालेबाज़, बलात्कारी, पाकिस्तान के दलाल वग़ैरह अचानक पवित्र, पूज्यनीय और आदरणीय हो जाते हैं! लिहाज़ा, अब भारत में मेरी कोई उपयोगिता बची नहीं! इसलिए मैं वहाँ अब एक पल भी नहीं रहना चाहती! इतना ही नहीं, बीजेपी और यहाँ तक कि ख़ुद प्रधानमंत्री ने मेरी साफ़-सफ़ाई करवाने की ख़ूब क़समें खायीं। यहाँ तक कि उसने तो मेरे अवैध पुत्र होने तक का दावा कर दिया! इसके बावजूद मेरी सेहत में रत्ती भर भी सुधार नहीं आया! और, अब तो वो आस्था भी मिट गयी कि गंगा नहाने से सारे पाप धुल जाएँगे। ऐसे में साफ़ है कि सारी इज़्ज़त-प्रतिष्ठा को गँवाकर मैं अब एक पल भी भारत में नहीं रहना चाहती! मुझे वापस स्वर्ग में लौटना है! बस, आप सिर्फ़ इसका इन्तज़ाम करवा दीजिए…!”

शिव ने कहा, “अरे, एक नरेश अग्रवाल के बीजेपी में पहुँचकर साफ़-सुथरा करार दिये जाने से तुम इतना टूट गयीं। अरे, तुमने से सदियों से न जाने कैसे-कैसे लोगों को झेला है!”

गंगा कहने लगीं, “आप ठीक कहते हैं, प्रभु। लेकिन पहले इक्का-दुक्का लोग ही मुझसे जुड़ी आस्था के साथ खिलवाड़ करते थे। उसे मैं किसी तरह बर्दाश्त कर लेती थी। लेकिन अब तो हद्द ही हो गयी है। अब तो सुबह का पापी अगर शाम तक बीजेपी में शामिल हो जाये तो मोदी भक्त उसे पापी नहीं, बल्कि पापा कहने लगते हैं। ऐसा घोर अनर्थ देखकर अब मेरा सब्र ज़बाब दे चुका है।”

ये सुनकर शिव विचारमग्न हो गये। फिर बोले, “अच्छा, गंगा ये बताओ कि उस जन्मजात दलबदलू नरेश अग्रवाल के अलावा तुम्हें और किसकी-किसकी करतूतों ने आहत किया?”

गंगा ने जबाब दिया, “प्रभु, कितने ही नाम हैं! जिन्हें कल तक बीजेपी अव्वल दर्ज़े का बेईमान और भ्रष्ट बताती थी, उन्होंने जब बीजेपी में जाने का फ़ैसला तो पार्टी ने अपने जल-कुंड में स्नान करवा उन्हें पवित्र हो जाने का सर्टिफ़िकेट दे दिया। नाम तो सैकड़ों में हैं, लेकिन फ़िलहाल मुझे नारायण राणे, एस एम कृष्णा, नारायण दत्त तिवारी, विजय और रीता बहुगुणा, जगदम्बिका पाल, ब्रजेश पाठक, स्वामी प्रसाद मौर्य, नीतीश कुमार, हेमन्त बिस्व शर्मा, जीतन राम माँझी जैसों के नाम याद आ रहे हैं। अरे प्रभु, पापियों को बीजेपी के जल-कुंड में स्नान करवाकर पवित्र बनाने की जुगत के ज़रिये बीजेपी ने कई राज्यों में पूरी की पूरी पार्टी को ही ख़रीदकर उसे पवित्र बना डाला!”

अब शिव आँख बन्द करके सोचने लगे। फिर बोले, “तुम्हारी बात में तो दम है, गंगा। मैं भी देख रहा हूँ कि बीजेपी के माई-बाप यानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भारत में मूर्तियाँ तोड़ने वालों और उसे सही ठहराने वालों की जमात खड़ी कर ली है। ये भारत के हिन्दू-तालिबान हैं। गाँधी के हत्यारों का ऐसा रूप तो होना ही था। भारत में तो अब ये कहने वाले भी पैदा हो गये हैं कि सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला मस्जिद के पक्ष में आया तो वहाँ सीरिया जैसे हालात हो जाएँगे! सचमुच, यदि ऐसा हो गया तो तुम भारत में कैसे रह पाओगी?”

शिव के मुँह से अपने प्रति हमदर्दी के स्वर सुनकर गंगा ने कहा, “अरे महाराज, आलम ये है कि किसी भी ख़ुद को मेरी अवैध सन्तान बताने वाला नरेन्द्र मोदी कहीं ये बोलता भी दिख सकता है कि ‘भाईयों-बहनों, श्रीश्री की चेतावनी के बाद भारत में संविधान की कोई अब कोई ज़रूरत नहीं रही, क्योंकि यदि किसी को संविधान, क़ानून, अदालत जैसी लोकतांत्रिक संस्थाओं की परवाह ही नहीं रहेगी, तो जैसा हिन्दुत्ववादी समाज बनेगा, उसमें हरेक पाप को करने वाले के लिए सिर्फ़ बीजेपी में होने की शर्त ही पर्याप्त होगी। कोई बीजेपी वालों पर तोहमत नहीं लगा पाएगा! सभी मानकर चलेंगे कि बीजेपी का मतलब है गंगा जैसी पवित्रता! ऐसे में मैं वहाँ कैसे रह पाऊँगी? अब तो सिर्फ़ यही दिन देखना बाक़ी रह गया है कि कल तक नरेश अग्रवाल को पाकिस्तान-परस्त बताने वाले भगवा नेताओं की ओर से ये बयान भी आ जाए कि नीरव मोदी, मेहुल चोकसी, विजय माल्या और ललित मोदी भी यदि भारत लौट आए तो उन्हें बीजेपी के जल-कुंड में स्नान करवाकर नरेन्द्र मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री बना दिया जाएगा! यही नहीं, यदि दाऊद इब्राहिम, हाफ़िज़ सईद और मणिशंकर अय्यर जैसे लोग भी बीजेपी में जाकर भारत माता की सेवा की पेशकश करने लगे तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए!”

इस पर शिव ने कहा, “देखो गंगा, ये जो कुछ हो रहा है उसके बारे में कहावत है कि ‘ज्ञानी से ज्ञानी मिले, मिले नीच से नीच, पानी से पानी मिले, मिले कीच से कीच!’ फ़िलहाल, भारत को पतन का ऐसा नज़ारा झेलना होगा। यक़ीनन, 2019 तक जनता की आँखें खुल जाएँगी। तब तक उसे अच्छी तरह से समझ में आ जाएगा कि गंगा-स्नान का विकल्प बीजेपी के जल-कुंड में डूबकी लगाना कभी नहीं हो सकता। कीचड़ से भरे घड़े पर दूध की मलाई डाल देने से उसका स्वभाव नहीं बदल जाता! इसीलिए, मेरा आग्रह है कि तुम थोड़ा सा और बर्दाश्त करो। 2019 तक यदि जनता ने बीजेपी के होश ठिकाने नहीं लगाये तो तुम मैं वचन देता हूँ कि तुम्हें भारत से बुला लिया जाएगा!”

इतना सुनकर व्यथित गंगा वापस पृथ्वी को लौट गयीं और 2019 का इन्तज़ार करने लगीं।

[नोट: सदी इस सबसे बड़ी ब्रेकिंग न्यूज़ की जानकारी संघ-बीजेपी के पास भी पहुँच चुकी है। वहाँ खलबली मच गयी है। अपने गिनती के बचे दिनों को देखकर बीजेपी के सभी दिग्गज अलग-अलग तरह से लूट-पाट के लिए जुगत भिड़ाने में जुट गये हैं। अमित शाह सभी नेताओं को तरह-तरह का मशविरा बाँट रहे हैं।]

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

ब्लॉग

नोटबंदी ने राजनीतिक, आर्थिक उलझनें पैदा की : अरविंद सुबह्मण्यम

“इसका प्रमुख कारण भारत की राजनीति और अर्थव्यवस्था की एक व्यापक समझ में छिपा हुआ है, इस बारे में कि लोग वोट कैसे करते हैं।”

Published

on

By

Arvind Subramanian

नई दिल्ली, 9 दिसम्बर | देश के पूर्व आर्थिक सलाहकार अरविंद सुबह्मण्यम ने नोटबंदी और जीडीपी के आंकड़ों में संबंध स्थापित करते हुए कहा है कि नोटबंदी के कारण पैदा हुई उलझन के दोहरे पक्ष रहे हैं। क्या जीडीपी के आंकड़ों पर दिखे इसके प्रभाव ने एक लचीली अर्थव्यवस्था को प्रतिबिंबित किया है, और क्या वृद्धि दर के आंकड़ों ने आधिकारिक डेटा संग्रह प्रक्रिया पर सवाल खड़ा किए हैं।

सुबह्मण्यम इस समय हार्वर्ड केरेडी स्कूल में पढ़ा रहे हैं। वह यहां पेंगुइन द्वारा प्रकाशित अपनी पुस्तक ‘ऑफ काउंसिल : द चैलेंजेस ऑफ द मोदी-जेटली इकॉनॉमी’ के विमोचन समारोह में हिस्सा लेने आए थे।

उन्होंने आईएएनएस के साथ एक बातचीत में पुस्तक के एक अध्याय ‘द टू पजल्स ऑफ डीमोनेटाइजेशन-पॉलिटिकल एंड इकॉनॉमिक’ का जिक्र किया।

उन्होंने अपनी पुस्तक में मौजूद दूसरे पजल का भी जिक्र किया, और यह पजल है भारत में पलायन और आर्थिक वृद्धि जैसी समकारी ताकतों के बावजूद क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था में विचलन। उन्होंने कहा कि राज्यों की एक गतिशीलता प्रतिस्पर्धी संघवाद के तर्क के खिलाफ होती है।

उन्होंने कहा, “अपनी नई पुस्तक के जरिए मैं इस पजल (उलझन), नोटबंदी के बाद नकदी में 86 प्रतिशत कमी की बड़ी उलझन, बावजूद इसके अर्थव्यवस्था पर काफी कम असर की तरफ ध्यान खींचने की कोशिश की है।”

सुबह्मण्यम ने कहा, “ये उलझनें खासतौर से इस सच्चाई से पैदा होती हैं कि यह कदम राजनीतिक रूप से क्यों सफल हुआ, और जीडीपी पर इसका इतना कम असर हुआ..क्या यह ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि हम जीडीपी को ठीक से माप नहीं रहे हैं, अनौपचारिक क्षेत्र को नहीं माप रहे हैं, या यह अर्थव्यवस्था में मौजूद लचीलेपन को रेखांकित कर रहा है?”

सुबह्मण्यम ने अपनी किताब में लिखा है, “नोटबंदी के पहली छह तिमाहियों में औसत वृद्धि दर आठ प्रतिशत थी और इसके बाद सात तिमाहियों में औसत वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत।”

उन्होंने कहा, “इसका प्रमुख कारण भारत की राजनीति और अर्थव्यवस्था की एक व्यापक समझ में छिपा हुआ है, इस बारे में कि लोग वोट कैसे करते हैं।”

उन्होंने केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जीडीपी के बैक सीरीज डेटा को जारी करने के दौरान नीति आयोग की उपस्थिति को लेकर जारी विवाद का जिक्र किया। जीडीपी के इस आंकड़े में आधार वर्ष बदल दिया गया, और पूर्व की संप्रग सरकार के दौरान देश की आर्थिक विकास दर को कम कर दिया गया।

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि जीडीपी की गणना एक बहुत ही तकनीकी काम है और तकनीकी विशेषज्ञों को ही यह काम करना चाहिए। जिस संस्थान के पास तकनीकी विशेषज्ञ नहीं हैं, उसे इसमें शामिल नहीं होना चाहिए।”

सुब्रह्मण्यम ने कहा, “जब मानक बहुत ऊंचे होंगे और वृद्धि दर फिर भी समान रहेगी तो अर्थशास्त्री स्वाभाविक रूप से सवाल उठाएंगे। यह आंकड़े की विश्वसनीयता को लेकर उतना नहीं है, जितना कि आंकड़े पैदा करने की प्रक्रिया को लेकर और उन संस्थानों को लेकर जिन्होंने इस काम को किया है।”

क्या नोटबंदी पर निर्णय लेने की प्रक्रिया में वह शामिल थे? सुब्रह्मण्यम ने कहा, “जैसा कि मैंने किताब में कहा है, यह कोई निजी संस्मरण नहीं है..यह गॉसिप लिखने वाले स्तंभकारों का काम है।”

सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के बीच हाल के गतिरोध के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि आरबीआई के स्वायत्तता की हर हाल में रक्षा की जानी चाहिए, क्योंकि संस्थानों के मजबूत रहने से देश को लाभ होगा।

उन्होंने कहा, “मैंने इस बात की खुद वकालत की है कि आरबीआई को एक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए, लेकिन इसके अधिशेष कोष को खर्च के लिए नियमित वित्तपोषण और घाटा वित्तपोषण में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। यह आरबीआई पर छापा मारना जैसा होगा।”

–आईएएनएस

Continue Reading

ओपिनियन

समाज में बदलाव के लिए अपने घर में झांकने की जरूरत : निकिता आनंद

साल 2003 की मिस इंडिया का कहना है कि महिलाओं के साथ हो रहे उत्पीड़न पर लगाम लगाने व समाज में सुधार और बदलाव लाने के लिए घर से शुरुआत करनी चाहिए और बाहर के बजाय सबसे पहले घर में झांककर देखना चाहिए कि घर में क्या हो रहा है।

Published

on

By

नई दिल्ली, 7 दिसंबर | साल 2003 की मिस इंडिया टाइटल विजेता व अभिनेत्री निकिता आनंद का मानना है कि समाज में कोई भी सुधार लाने के लिए हमें सबसे पहले अपने घर में झांककर देखना चाहिए और घर से सुधार व बदलाव लाने की कोशिश करनी चाहिए।

निकिता हाल ही में राष्ट्रीय राजधानी में ‘इंटरनेशनल वीमेन पॉलिटेक्निक’ द्वारा आयोजित ‘मिराकी 2018’ कार्यक्रम का हिस्सा बनीं, जहां उन्होंेने आईएएनएस से बात की।

निकिता से जब पूछा गया कि मॉडलिंग में उनका कैसे आना हुआ तो उन्होंने आईएएनएस को बताया, “मैं आर्मी बैकग्राउंड से हूं मेरे पिता डॉक्टर हैं। 10वीं के बाद या 12 वीं के आसपास मेरी मॉडलिंग शुरू हो गई थी और मैंने काफी लोकल पेजेन्ट्स भी जीते हैं और साथ ही साथ प्रोफेशनल रैंप वॉक भी शुरू कर दिया था और मैं एनआईएफटी की स्टूडेंट थीं तो फैशन डिजाइनिंग भी हो रही थी और फैशन रैंप वॉक भी हो रहा था। मुझे मिस इंडिया के लिए पार्टिसिपेट करने का ख्याल आया और थोड़ा सोचने के बाद हिस्सा ले लिया और फिर मैंने मिस इंडिया का टाइटल जीत लिया।”

टीएलसी के शो ‘ओ माई गोल्ड’ की मेजबानी कर चुकीं निकिता को वास्तविक जीवन में गोल्ड के बजाय प्लेटिनम ज्यूलरी ज्यादा पसंद है। शो के बारे में उन्होंने कहा, “इस शो के लएि हमने पूरे देशभर में ट्रैवल किया जो दिलचस्प था। इसमें हमने गोल्ड के बारे में बात की थी, क्योंकि भारत में पारंपरिक आभूषण के तौर पर ज्यादातर पीले सोने का इस्तेमाल होता है। शो करके मुझे मुझे दक्षिण भारतीय और बंगाली ज्यूलरी के बारे में बहुत कुछ जानने को मिला, लेकिन मुझे निजी तौर पर गोल्ड के बजाय प्लेटिनम और डायमंड ज्यूलरी ज्यादा पसंद है। मैं इनेक आभूषण ज्यादातर पहनती हूं।”

साल 2003 की मिस इंडिया का कहना है कि महिलाओं के साथ हो रहे उत्पीड़न पर लगाम लगाने व समाज में सुधार और बदलाव लाने के लिए घर से शुरुआत करनी चाहिए और बाहर के बजाय सबसे पहले घर में झांककर देखना चाहिए कि घर में क्या हो रहा है।

उन्होंेने कहा, “महिलाओं के साथ उत्पीड़न की बहुत सारी घटनाएं होती हैं। भारत में हर रोज हर क्षण कहीं न कहीं नाइंसाफी होती है। ऐसे लाखों केस होते होंगे जो कि रिपोर्ट नहीं होते हैं। किसी भी क्षेत्र में किसी भी किस्म के इंसान में बदलाव लाने का काम हमेशा शिक्षा से ही होता है। अपने बच्चों को क्या सिखाते हैं यह मायने रखता है। लोगों की मानसिकता होती है कि पहले बाहर देखो, वहां क्या खराब हो रहा है। लेकिन अपने घर में नहीं झांककर देखते कि उनके घर में क्या हो रहा है।”

निकिता ने कहा कि बच्चा स्कूल से ज्यादा वक्त घर में बिताता है, तो घर में अच्छे संस्कार व माहौल देने की कोशिश करनी चाहिए, तभी वह अच्छा नागरिक बन सकेगा। समाज में सुधार और बदलाव लाने की कोशिश घर से की जानी चाहिए। इस तरह की घटनाओं पर लगाम लगाने और समाज में बदलाव लाने के मानसिकता में बदलाव लाना बेहद जरूरी है।

उनका मानना है कि ‘हैशटैगमीटू’ मूवमेंट को आगे बढ़ाया जाना चाहिए, जिससे और महिलाओं को भी आगे आकर अपनी दास्तां बयां करने का प्रोत्साहन मिले।

उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि इस मूवमेंट को आगे बढ़ाना चाहिए, आवाज तो हर किसी की है तो क्यों एक हिस्से को बोलने दिया जाए और एक हिस्से को दबाया जाए वो नहीं होना चाहिए। जब हम समानता की और सशक्तिकरण की बात करते हैं तो इसका मतलब यही है न कि सबको समान अधिकार मिले। अगर किसी और के आगे आने से और उसकी कहानी आगे आने से किसी और को प्रोत्साहन मिलता है तो ये एक अच्छी बात है। किसी भी महिला के लिए अपने हुए दर्दनाक वाकये को याद करना मुश्किल होता है। उसकी भावना को समझने की कोशिश करनी चाहिए।”

मॉडलिंग में आने की ख्वाहिश रखने वाली लड़कियों के लिए दिए संदेश में उन्होंने कहा, “सबसे पहले आपको तय करना चाहिए कि आपको कहां जाना है, क्योंकि यह आसान लाइन नहीं है, आपके पास जरूरी क्राइटेरिया होनी चाहिए जैसे रैंप वॉक के लिए एक परफेक्ट बॉडी स्ट्रक्चर और हाइट होनी चाहिए। अगर, आपको प्रिंट मॉडलिंग के लिए जाना है तो फिर आपके पास वैसा चेहरा-मोहरा, भाव-भंगिमा होनी चाहिए, जिसे कैमरा अच्छे से कैप्चर कर सकें। आप किसी भी फील्ड को बस इसलिए नहीं चुने कि वो आपको आकर्षित कर रहा है, बल्कि अच्छे से आकलन कर लें कि आप उसके लायक है या नहीं।”

निकिता ने ‘लाइफ में कभी-कभी’ और ‘फोर टू का वन’ जैसी फिल्मों में भी काम किया है। लेकिन अब वह फिल्में नहीं कर रही हैं। फिल्मों से दूरी बनाने के बारे में उन्होंने कहा, “मैंने फिल्मों में काम किया है, लेकिन मुझे टेलीविजन प्रेजेंट करना या फिर लाइव शो करना ज्यादा पसंद है। आजकल मैं गायन का भी प्रशिक्षण ले रही हूं आगे जाकर मैं गायन में भी परफार्मेस दूंगी। अगर मैं टीवी की बात करूं तो मैंने लाइफस्टाइल के अलावा स्पोर्ट्स शो भी बहुत किया है, क्रिकेट पर भी बहुत शो किया है। मुझे टीवी बहुत पसंद आता है, क्योंकि निजी जिंदगी में मैं बहुत आर्गनाइज हूं और यही चीज टीवी में भी है।”

–आईएएनएस

Continue Reading

ब्लॉग

सुबोध के बलिदान ने बुलन्दशहर को एक और मुज़फ़्फ़रनगर बनने से बचा लिया!

Published

on

Inspector Subodh Kumar

अब ये साफ़ हो चुका है कि संघ की औलादों यानी हिन्दू युवा वाहिनी, बजरंगदल, वीएचपी, एबीवीपी और बीजेपी की असली मंशा बुलन्दशहर में मुज़फ़्फ़रनगर को दोहराने की थी! दरअसल, इस भगवा ख़ानदान के तन-बदन में उस वक़्त आग लग गयी जब इसने देखा कि आलमी तबलीगी इज्तिमा (विश्व धार्मिक समागम) के बहाने लाखों मुसलमान बुलन्दशहर में इक्कठा हुए हैं। इज्तिमा का वक़्त 1 से 3 दिसम्बर का था और साज़िश ये रची गयी कि आख़िरी दिन जब मुसलमान अपने घरों को लौट रहे होंगे तब उनसे भिड़न्त कर ली जाए। वो भी इतनी ज़बरदस्त कि मुज़फ़्फ़रनगर के सूरमा  संगीत सोम और संजीव बालियान जैसे दंगा-पुरुष भी चुल्लू भर पानी ढूँढ़ना शुरू कर दें!

पुलिस की एफआईआर में नामजद अभियुक्तों के आकाओं ने बुलन्दशहर ज़िले में मुस्लिमों के धार्मिक आयोजन के बहाने दंगा करवाने का पुख़्ता इन्तज़ाम किया था। लेकिन इज्तिमा में जुटी भीड़ इतनी भारी थी कि दंगाई गिरोह वहाँ घुसकर उपद्रव करने के लिए तैयार नहीं हुआ। लेकिन दंगाई गिरोह मौके को भी हाथ से निकलने नहीं देना चाहते थे। राजस्थान और तेलंगाना में बीजेपी के पक्ष में हवा पलटने और 2019 की ज़रूरतों को देखते हुए अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर दंगाई को कोई ना कोई कारनामा तो करना ही था।

bulandshahr violence

यहीं से दंगाइयों का ‘प्लान बी’ क्रियान्वित हुआ। गाय या सुअर काटकर दंगा कराना बहुत आसान होता है। भीष्म साहनी के उपन्यास ‘तमस’ के मुताबिक़, गाय और सुअर को उम्दा दंगा सामग्री के रूप में उस दौर में देखा गया था, जब देश आज़ाद हुआ था। 70 साल में भी दंगा का ये तत्व बिल्कुल नहीं बदला। गाय ने ही अख़लाक के रूप में अपनी ताक़त की पहचान उस वक़्त भी करवाई थी जब मोदी सरकार सत्तासीन हुई थी। बुलन्दशहर में भी हिन्दुओं ने गाय काटी और उसके टुकड़ों को खेत में लगे गन्नों पर लटका दिया। ताकि उन्हें दूर से भी देखा जा सके। लेकिन मूर्खों से एक ग़लती हो गयी कि गाय को काटा कहीं और, लेकिन उसकी नुमाइश कहीं और की गयी।

इससे पहले क़रीब 500 दंगाई युवाओं के लिए लाठी-डंडे और पत्थर वग़ैरह जुटाया गया। प्रशासन को इसकी पूरी भनक थी। बेसिक शिक्षा अधिकारी ने ज़िले के स्कूलों को 11 बजे के आसपास फ़ोन किया कि जल्द से जल्द बच्चों की छुट्टी कर दी जाए तथा दूर से आने वाले अध्यापकों को भी निकल लेने के लिए कह दिया जाए। शायद, दिवंगत इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह को भी इसकी भनक लग चुकी थी। इसीलिए वो नहीं चाहते थे कि जमातियों के लौटने वाले मुख्य मार्ग पर कोई जाम लगे। जबकि दंगाईयों का इरादा गोकशी के नाम पर इज्तिमा से लौटने वाले मुसलमानों से ज़ोरदार भिड़न्त करने का था। दंगाईयों का नेतृत्व बजरंग दल, वीएचपी और एबीवीपी के छुटभैये नेताओं के हवाले था। एक स्थानीय चैनल को भी आग में घी डालने का ज़िम्मा मिला।

bulandshahar_violence

लेकिन इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह के घटनास्थल पर पहुँच जाने से दंगाईयों की सारी प्लानिंग धरी की धरी रह गयी। सुबोध ने जमातियों के लौटने के रास्ते पर लगा जाम खुलवाने के लिए पुलिस बल का प्रयोग किया। इसीलिए दंगाईयों को मुसलमानों से भिड़ने के नाम पर इकट्ठा किये गये लाठी-डंडों, पत्थर, बल्लम वग़ैहर का इस्तेमाल सुबोध के पुलिस दस्ते के ख़िलाफ़ करना पड़ा। ये दंगा नहीं कर पाने का आक्रोश था, जो फूटा पुलिस दल और ख़ासकर इंस्पेक्टर सुबोध सिंह पर। पुलिस के निशाना बनने की वजह से दंगाईयों के मंसूबों पर पानी फिर गया। लक्ष्य था बुलन्दशहर से शुरू करके पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को हिंसा की आग में झोंक देना, लेकिन इंस्पेक्टर सुबोध के बलिदान की वजह से ये सम्भव नहीं हो पाया।

दंगे के लिए इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह के इलाके को भी इसलिए चुना गया क्योंकि वही अख़लाक़ हत्याकांड के जाँच अधिकारी थे और उनके तौर-तरीक़े कट्टरपन्थी संघियों को रास नहीं आ रहे थे। ये वही सुबोध थे, जिन्होंने अख़लाक़ की हत्या के बाद संगीत सोम को प्रभावित इलाके में नहीं जाने दिया था। इसी वजह से सुबोध का तबादला करवाया गया था। यही वो सबसे अहम वजह है जिसके आधार पर शहीद सुबोध सिंह की पत्नी और बहन उनकी हत्या को सुनियोजित और पुलिस की साज़िश बताया है। सारे घटनाक्रम से साफ़ है कि सुबोध ने अपने फ़र्ज़ और इंसानियत की ख़ातिर अपनी जान की क़ुर्बानी देकर न जाने कितने लोगों की जानें बचा लीं! इसके बावजूद, लगता नहीं कि योगी-मोदी सरकार के रहते सुबोध को कभी इन्साफ़ मिल पाएगा!

Mukesh Kumar Singh

मुकेश कुमार सिंह वरिष्ठ पत्रकार

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

Continue Reading
Advertisement
indian army
राष्ट्रीय5 mins ago

शोपियां में आतंकी हमला, तीन जवान शहीद

Supreme Court
राष्ट्रीय17 mins ago

कोर्ट ने CBI से पूछा- क्‍या कलबुर्गी हत्‍या के तार अन्‍य कार्यकर्ताओं की हत्‍या से जुड़े हैं?

Mizoram cm
चुनाव20 mins ago

मिजोरम के मुख्यमंत्री दोनों सीट पर हारे

congress logo
चुनाव33 mins ago

कांग्रेस ने तेलंगाना में ईवीएम से छेड़छाड़ की आशंका जताई

Virushka
मनोरंजन2 hours ago

जानिए, विरुष्का की शादी की सालगिरह में अनुष्का को क्या मिला तोहफा…

atal bihari vajpayee-min (1)
राष्ट्रीय2 hours ago

वाजपेयी के निधन पर शोक जताने के बाद राज्यसभा स्थगित

urjit patel
राष्ट्रीय2 hours ago

उर्जित पटेल का इस्तीफा खतरनाक चलन का संकेत : एआईबीईए

राष्ट्रीय2 hours ago

पार्टी से ज्यादा राष्ट्रीय हित को महत्व दिया जाना चाहिए : मोदी

mp
चुनाव2 hours ago

Madhya Pradesh Election Results 2018 Live: रुझानों में कांग्रेस बहुमत के करीब

Sachin Pilot
चुनाव2 hours ago

राजस्थान जीत कांग्रेस अध्‍यक्ष के लिए उपहार: सचिन पायलट

jewlary-
लाइफस्टाइल3 weeks ago

सर्दियों में आभूषणों से ऐसे पाएं फैशनेबल लुक…

Congress-reuters
राजनीति2 weeks ago

संघ का सर्वे- ‘कांग्रेस सत्ता की तरफ बढ़ रही’

Phoolwaalon Ki Sair
ब्लॉग3 weeks ago

फूलवालों की सैर : सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक

Bindeshwar Pathak
ज़रा हटके3 weeks ago

‘होप’ दिलाएगा मैन्युअल सफाई की समस्या से छुटकारा : बिंदेश्वर पाठक

Sara Pilot
ओपिनियन2 weeks ago

महिलाओं का आत्मनिर्भर बनना बेहद जरूरी : सारा पायलट

Raisin-
लाइफस्टाइल4 weeks ago

किशमिश को पानी में भिगोकर खाने से होते हैं ये फायदे…

Cervical
लाइफस्टाइल3 weeks ago

ये उपाय सर्वाइकल को कर देगा छूमंतर

Tigress Avni
ब्लॉग3 weeks ago

अवनि मामले में महाराष्ट्र सरकार ने हर मानक का उल्लंघन किया : सरिता सुब्रमण्यम

demonetisation
ब्लॉग3 weeks ago

नये नोट ने निगले 16,000 करोड़ रुपये

SHIVRAJ
राजनीति4 weeks ago

वोट मांगने गई शिवराज की पत्नी को महिला ने सुनाई खरी खोटी…देखें वीडियो

Jammu And Kashmir
शहर1 day ago

जम्मू-कश्मीर के राजौरी में बर्फबारी

Rajasthan
चुनाव3 days ago

राजस्थान में सड़क पर ईवीएम मिलने से मचा हड़कंप, दो अफसर सस्पेंड

ISRO
राष्ट्रीय6 days ago

भारत का सबसे भारी संचार उपग्रह कक्षा में स्थापित

ShahRukh Khan-
मनोरंजन7 days ago

शाहरुख की फिल्म ‘जीरो’ का दूसरा गाना रिलीज

Simmba-
मनोरंजन1 week ago

रणवीर की फिल्म ‘सिम्बा’ का ट्रेलर रिलीज

Sabarimala
राष्ट्रीय1 week ago

सबरीमाला विवाद पर केरल विधानसभा में हंगामा, विपक्ष ने दिखाए काले झंडे

Amarinder Singh
राष्ट्रीय2 weeks ago

करतारपुर कॉरिडोर शिलान्‍यास के मौके पर बोले अमरिंदर- ‘बाजवा को यहां घुसने की इजाजत नहीं’

मनोरंजन2 weeks ago

रजनीकांत की फिल्म ‘2.0’ का पहला गाना ‘तू ही रे’ रिलीज

The Lion King
मनोरंजन2 weeks ago

‘द लॉयन किंग’ का टीजर ट्रेलर रिलीज

Zero Movie
मनोरंजन3 weeks ago

फिल्म ‘जीरो’ का पहला गाना रिलीज

Most Popular