Connect with us

चुनाव

हीरा व्यापारियों को फरमान-मोदी की रैलियों में फैक्ट्री मजदूरों को ले जाकर भरो खाली कुर्सियां!

Published

on

PM Modi dhundhaka rally1-min
PM Modi dhundhaka rally, Photo Credit: The quint

नई दिल्ली- गुजरात विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान में अब कुछ ही दिन शेष रह गए है। पहले चरण का चुनाव प्रचार 7 दिसम्बर को शाम 5 बजे थम जाएगा। बीजेपी और कांग्रेस इस चुनाव में कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं। गुजरात के सूरत शहर में आज मोदी की रैली है। पिछले कई रेलियों में पीएम मोदी की रैलियों में खाली कुर्सी की खबर लगातार आ रही हैं जिससे पार्टी के लिए मुश्किलें बढ़ सकती है। वहीं पाटीदार नेता हार्दिक पटेल की रैली में लोगों की भीड़ देखकर बीजेपी के होश उड़े हुए है।

नवजीवन के खबर के मुताबिक मोदी-शाह कैंप ने रैली में खाली कुर्सियां भरने के लिए सूरत के करीबी हीरा कारोबारियों को फरमान जारी किया गया है। कहा गया है कि फैक्टरियों से मजदूरों को रैली में भेजने में सहयोग करें। ताकि इज्जत बचाई जा सके। बीजेपी से जुडे कई सूरत व्यापारी अब मोदी-शाह के एहसान चुकाने के लिए अपने कारखाने के मजदूरों को लेकर रैली-रैली जा रहे हैं।

पीएम मोदी की सूरत रैली के साथ ही गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए पहले दौर के प्रचार पर वह विराम लगाएंगे। एक वक्त था जब पीएम मोदी की चुनावी रैली में लोगों की भीड़ इस कदर होती थी जिसे देखकर मोदी भी फुले नहीं समाते थे। जबकि अब आलम ये है कि मोदी की रैलियों का हाल बुरा होने लगा है। जबकि अब होने वाली रैली में कुर्सियां खाली पड़ी रहती हैं। पिछली तमाम रैलियों में भीड़ कम होने की वजह से बीजेपी नेतृत्व ने सूरत रैली को सफल बनाने के लिए सारे पत्ते खोल दिए हैं।

खासतौर पर धानधुखा और दाहोद में मोदी की रैलियों में खाली कुर्सियों और लोगों द्वारा कथित तौर पर फेंकू-फेंकू चिल्लाने के वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद से बीजेपी नेतृत्व ने सारा जोर आज की रैली को सफल बनाने पर लगा दिया है।

खाली पड़ी कुर्सियों को भरने के लिए बीजेपी ने आनन-फानन में बैठक बुलाई। बैठक में बीजेपी के गुजरात प्रदेश अध्यक्ष जीतू वाधानी ने हीरे व्यापारियों और टेक्सटाइल व्यापारियों के साथ बैठक की।

कुछ बड़े हीरे व्यापारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि इस बैठक में यह आश्वासन दिया गया कि 18 दिसंबर को जो जीएसटी काउंसिल की बैठक होनी है, उसमें इन व्यापारियों की तमाम परेशानियों का हल निकाल लिया जाएगा। कहा जा रहा है कि बस वे पार्टी का विरोध करना बंद कर दें। ये सारे व्यापारी पाटीदार समाज के थे और इन्होंने अभी तक तकरीबन खुलकर हार्दिक पटेल का समर्थन किया था।

खबर के मुताबिक यह बैठक किरण हॉस्पिटल में हुई। गौरतलब है कि अस्पताल पाटीदार आरोग्य ट्रस्ट का है, जिसका विमोचन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल में किया था। इसके बाद इन व्यापारियों को एक लिस्ट दी गई, जिसमें यह लिखा था कि किसे अपने कितने कर्मचारी आज 7 दिसंबर की सूरत रैली के लिए लाने हैं। इसे फिर बाकी छोटे व्यापारियों को बांटा गया।

इतना ही नहीं यह भी योजना बताई गई है कि कौन किस चौराहे पर अपनी फैक्ट्री के कितने मजदूरों को बीजेपी के खेस (कमल छाप मफलर) के साथ लेकर आएगा। प्रमुख रूप से ये उन्ही इलाकों में मजदूरों को जुटाएंगे, जहां फैक्ट्रियां हैं। इस तरह से आज बीजेपी समर्थक मालिकों की फैक्ट्रियों में काम नहीं होगा, या आधे दिन का काम होगा।

माना जा रहा है कि मोदी किसी भी तरह अपनी रैली में खाली कुर्सी पड़ी नहीं देखना चाहते। जिसके लिए उन्होंने आला-अधिकारियों को आनन-फानन में बैठक कर ये आदेश दिया कि किसी भी तरह खाली कुर्सी न रहें।

स्टोरी इनपुट- नवजीवन

चुनाव

हिमाचल चुनाव : कई सीटों पर कांटे की टक्कर के बाद जीते नेता

हिमाचल प्रदेश में 1985 के बाद से हर पांच साल बाद चला आ रहा फेरबदल इस बार भी जारी रहा। राज्य में मुकाबला दोनों मुख्य पार्टियों भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के बीच था, जिसके नतीजे में भी जोरदार टक्कर दिखाई दी।

Published

on

Election Himachal

हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 में सत्ता परिवर्तन की इबारत लिखी जा चुकी है। हिमाचल प्रदेश में 1985 के बाद से हर पांच साल बाद चला आ रहा फेरबदल इस बार भी जारी रहा। राज्य में मुकाबला दोनों मुख्य पार्टियों भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के बीच था, जिसके नतीजे में भी जोरदार टक्कर दिखाई दी। चुनाव में कुछ सीटों पर जीत हार का अंतर हजार मतों से भी कम का रहा। जिनमें से विधानसभा सीट संख्या-68 किन्नौर में टक्कर खासी रोमांचक रही। किन्नौर विधानसभा सीट पर कांग्रेस के जगत सिंह नेगी ने भाजपा के तेजवंत सिंह नेगी को मात्र 120 मतों से शिकस्त दी। बता दें कि यह दोनों नेता 2003 विधानसभा चुनाव के बाद से चार बार एक दूसरे के खिलाफ लड़ चुके हैं जिसमें से तीन बार जगत सिंह नेगी ने बाजी मारी है जबकि 2007 में तेजवंत सिंह नेगी ने जीत हासिल की थी।

वहीं विधानसभा सीट संख्या -39 बड़सर में कांग्रेस के इंद्र दत्त लखनपाल ने भाजपा के बलदेश शर्मा को कांटे के मुकाबले में 439 मतों से हराया। बता दें कि 2012 विधानसभा चुनाव में लखनपाल ने 2658 वोटों से जीत हासिल की थी।

विधानसभा सीट संख्या- 4 डलहौजी में कांग्रेस की दिग्गज नेता आशा कुमारी को जीत हासिल करने के लिए ऐड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ा। आशा ने भाजपा के डी.एस. ठाकुर को कड़े मुकाबले में 556 मतों से हराया। दिन के शुरुआती रुझानों में आशा, ठाकुर से पीछे थी लेकिन अंतिम चरणों में वह ठाकुर को शिकस्त देने में सफल रही। सीट पर कड़े मुकाबले का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2012 का विधानसभा चुनाव में उन्होंने 7365 मतों के भारी अंतर से जीता था।

इसके अलावा विधानसभा सीट संख्या- 54 कसौली में भारतीय जनता पार्टी के राजीव सैजल ने कांग्रेस उम्मीदवार विनोद सुल्तानपुरी को केवल 442 वोटों से पटखनी दी। बता दें कि कसौली में हुए 2012 विधानसभा चुनाव में राजीव ने केवल 24 वोटों से अपने निकटतम प्रतिद्वंदी को शिकस्त दी थी।

साथ ही विधानसभा सीट संख्या- 15 नगरोटा में भाजपा के अरुण कुमार ने कांग्रेस के जी. एस. बाली को 519 मतों से हराया है। जी. एस बाली ने 2012 के विधानसभा चुनाव में 2743 मतों से जीत दर्ज की थी।

इसके साथ ही कांग्रेस की नाक का सवाल बन चुकी विधानसभा सीट संख्या-53 सोलन को कांग्रेस के डॉ. धनी राम शांडिल बचाने में कामयाब रहे। उन्होंने भाजपा के राजेश कश्यप को कड़े मुकाबले में मात्र 617 वोटों से हराया। गौरतलब है कि सोलन कई चुनावों से कांग्रेस की सुरक्षित सीटों में से एक रही है। 2012 के विधानसभा चुनाव में शांडिल ने 4472 मतों से जीत हासिल की थी।

हिमाचल में 9 नवंबर को मतदान हुआ था।

Continue Reading

चुनाव

हिमाचल चुनाव : भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व मुख्यमंत्री उम्मीदवार हारे

Published

on

satti dhumal

हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव-2017 के नतीजे सामने आने के बाद राज्य में सत्ता की बागडोर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के हाथ में आ चुकी है, लेकिन मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अपनी सीट बचाने में नाकाम रहे। भाजपा के मुख्यमंत्री उम्मीदवार और दो बार के मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल सुजानपुर सीट पर 2933 वोटों से शिकस्त का सामना करना पड़ा। इस सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार रजिंदर राणा ने उन्हें मात दी है।

वर्ष 2012 में निर्दलीय चुनाव जीतने वाले राणा इस सीट पर दोबारा जीत हासिल करने में सफल रहे हैं। राणा ने 2012 के चुनाव में 14166 मतों से जीत हासिल की थी। उन्हें किसी समय धूमल का करीबी कहा जाता था। धूमल ने इस चुनाव में अपनी सीट बदली थी।

वहीं भाजपा प्रदेश इकाई अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ऊना विधानसभा सीट पर 3196 वोटों से हार गए हैं। इस सीट पर कांग्रेस के सतपाल सिंह रायजादा ने जीत दर्ज की है। सत्ती पिछले तीन चुनावों से इस सीट पर अजेय रहे थे। ऊना को भाजपा का गढ़ भी कहा जाता था।

–आईएएनएस

Continue Reading

चुनाव

हिमाचल चुनाव : 2 निर्दलियों ने भाजपा उम्मीदवारों को हराया

Published

on

Himachal Pradesh Assembly Election

हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 के नतीजे सामने आने के बाद जहां एक तरफ राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई है। तो वहीं दूसरी तरफ दो सीटें ऐसी हैं जहां लोगों ने निर्दलीय उम्मीदवारों को चुनकर विधानसभा भेजा है। देहरा और जोगिंदर नगर सीट से निर्दलीय उम्मीदवारों ने भाजपा को भारी मतों से हराया है।

विधानसभा सीट संख्या-10 देहरा से निर्दलीय उम्मीदवार होशियार सिंह ने भाजपा उम्मीदवार रविंदर सिंह रवि को 3914 वोटों के अंतर से हराया है। बता दें कि 2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के रविंदर सिंह रवि ने इस सीट पर 15293 वोटों से जीत दर्ज की थी।

वहीं सीट संख्या-21 जोगिदर नगर से निर्दलीय उम्मीदवार प्रकाश राणा ने भाजपा के गुलाब सिंह ठाुकर को 9156 मतों के भारी अंतर से हराया है। गौरतलब है कि 2012 विधानसभा में गुलाब सिंह ठाकुर ने यहां से 5916 मतों से जीत दर्ज की थी। गुलाब सिंह ठाकुर को भाजपा के कद्दावर नेताओं में शुमार किया जाता है।

Continue Reading

Most Popular