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राजनीति

संसद में पास हुआ ग्रेच्युटी बिल

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फाइल फोटो

ग्रेच्युटी से संबंधित उपदान भुगतान (संशोधन) विधेयक 2018 को संसद में ध्वनिमत से मंजूरी मिल गई। अब प्राइवेट सेक्टर में काम कर रहे लोगों को 20 लाख रुपए तक टैक्‍स फ्री ग्रेच्‍युटी मिल सकेगी।

राज्यसभा में श्रम मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने गुरुवार को उपदान भुगतान (संशोधन) विधेयक 2017 को पारित करने के लिये पेश किया। जिस पर बिना चर्चा किए ध्वनिमत से मंजूर कर दिया गया।

इससे पहले पिछले हफ्ते इस बिल को लोकसभा में पास कर दिया है। केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए पहले ही 20 लाख रुपए तक टैक्‍स फ्री ग्रेच्‍युटी का प्रावधान है।

अभी संगठित क्षेत्र में 5 साल और इससे ज्यादा अवधि तक नौकरी कर चुके कर्मचारी नौकरी छोड़ने या रिटायर होने के बाद 10 लाख रुपये तक की टैक्स फ्री ग्रेच्युटी के योग्य माने जाते हैं। लेकिन इस बिल के कानून बन जाने के बाद यह सीमा दुगुनी हो जाएगी। सातवें वेतन आयोग के कार्यान्वयन के बाद केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों के लिये ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दिया गया।

बता दें कि ग्रेच्युटी आपके वेतन, यानी आपकी सैलरी का वह हिस्सा है, जो कंपनी या आपका नियोक्ता, यानी एम्प्लॉयर आपकी सालों की सेवाओं के बदले देता है।

ग्रेच्युटी वह लाभकारी योजना है, जो रिटायरमेंट लाभों का हिस्सा है, और नौकरी छोड़ने या खत्म हो जाने पर कर्मचारी को कंपनी द्वारा दिया जाता है। कब मिलेगी-ग्रेच्युटी किसी भी ऐसे कर्मचारी को दी जानी होती है, जो नौकरी में लगातार 4 साल, 10 महीने, 11 दिन तक काम कर चुका हो।

ऐसे कर्मचारी की सेवा को पांच साल की अनवरत सेवा माना जाता है, और आमतौर पर पांच साल की सेवाओं के बाद ही कोई भी कर्मचारी ग्रेच्युटी का हकदार बनता है।

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इमरान का पीएम को पत्र, फिर से शांति वार्ता शुरू करवाने की अपील

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फाइल फोटो

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने फिर से शांति वार्ता शुरू करवाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि वो चाहते हैं कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और शाह महमूद कुरैशी के बीच वार्ता हो। खासतौर से यह वार्ता इसी महीने न्यूयॉर्क में होने वाली संयुक्त राष्ट्र संघ की आम सभा (यूएनजीए) के दौरान हो।

इमरान खान का यह पत्र पीएम मोदी के उस पत्र के जवाब में था जिसमें उन्होंने दोनों देशों के बीच सार्थक और रचनात्मक बातचीत की बात कही थी।

बता दें कि पाकिस्तान चुनाव में जीत मिलने के बाद इमरान खान ने कहा था कि यदि भारत रिश्तों को सामान्य करने की दिशा में एक कदम आगे बढ़ाएगा तो वह दो कदम आगे बढ़ाएंगे। पिछले कुछ हफ्तों से इस बात को लेकर अटकलें थी कि यूएनजीए में स्वराज और कुरैशी मुलाकात करेंगे या नहीं। खान का यह पत्र दोनों देशों के बीच मौलिक बातचीत का आधिकारिक प्रस्ताव है।

राजनयिक सूत्रों के मुताबिक, अपने पत्र में खान ने दोनों देशों के बीच द्वीपक्षीय वार्ता बहाली की बात कही। द्वीपक्षीय वार्ता 2015 में होने वाली थी लेकिन पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले की वजह से यह रद्द हो गई थी। इस संदर्भ में खान ने कहा कि भारत और पाकिस्तान मिलकर बातचीत से सभी मुद्दों को हल कर लेंगे। जिसमें आतंकवाद और कश्मीर का मसला शामिल है। दिसंबर 2015 में स्वराज इस्लामाबाद हर्ट ऑफ एशिया कांफ्रेंस के लिए गई थीं। यह दोनों देशों के बीच आखिरी बातचीत थी।

भारत सरकार चाहती है कि पाकिस्तान बातचीत के लिए एक अर्थपूर्ण माहौल बनाए और उन आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे जो उसकी धरती से भारत को अपना निशाना बनाते हैं। खान का पत्र ऐसे समय में आया है जब कुछ मंत्रियों का कहना है कि खान के नेतृत्व में पड़ोसी देश में कुछ भी बदलने वाला नहीं है क्योंकि उन्हें पाकिस्तानी सेना का समर्थन प्राप्त है।

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गुजरात : विधायकों के वेतन में 45000 रुपये की वृद्धि

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गांधीनगर, 19 सितम्बर | गुजरात विधानसभा ने विधायकों, मंत्रियों, विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और विपक्ष के नेता के वेतन को कम से कम 45,000 रुपये प्रति महीना बढ़ाने वाले एक विधेयक को बुधवार को सर्वसम्मति से पारित कर दिया। विधायकों के मासिक वेतन में 64 फीसदी की वृद्धि होगी, जिसके बाद उन्हें 70,727 रुपये के बजाय 1.16 लाख रुपये मिलेंगे। इसके अलावा, मंत्रियों, विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष का वेतन 86,000 रुपये से बढ़कर 1.32 लाख रुपये हो जएगा। इसमें 54 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

संशोधित वेतन फरवरी 2017 से प्रभावी होगा, जिसमें बकाया राशि में छह करोड़ रुपये का वितरण होगा। नई वेतन संरचना राज्य सरकार पर सालाना 10 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ डालेगी।

विधेयक को सदन में संसदीय मामलों के राज्य मंत्री प्रदीपसिंह जडेजा ने पेश किया।

विधेयक पेश करने के बाद, जडेजा ने सदन को सूचित किया कि 182 सदस्यीय गुजरात विधानसभा में विधायकों के वेतन में 2005 से वृद्धि नहीं हुई थी, जबकि अन्य राज्यों में उनके समकक्षों का वेतन बहुत ज्यादा है।

उदाहरण के लिए, उत्तराखंड, तेलंगाना, झारखंड और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में विधायकों का वेतन क्रमश: 2.91 लाख रुपये, 2.50 लाख रुपये, 2.25 लाख रुपये और 2.13 लाख रुपये है।

–आईएएनएस

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बीजेपी सांसद मनोज तिवारी को सुप्रीम कोर्ट का अवमानना नोटिस

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बीजेपी सांसद मनोज तिवारी को सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना नोटिस भेजा। (फाइल फोटो)

बीजेपी सांसद मनोज तिवारी को सीलिंग तोड़ने के आरोप में सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना का नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने यह कार्यवाही मॉनिटरिंग कमिटी की रिपोर्ट के आधार पर की। मनोज तिवारी को 25 सितंबर को अदालत में पेश होने का आदेश दिया गया है।

जस्टिस मदन बी लोकुर, न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने बीजेपी सांसद मनोज तिवारी को 25 सितंबर को पेश होने का निर्देश देते हुए कहा कि यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक निर्वाचित प्रतिनिधि ने शीर्ष अदालत के आदेशों की अवहेलना करने का प्रयास किया।

बता दें कि गोकुलपुरी इलाके में सील किए गए एक परिसर का ताला तोड़ने के आरोप में मनोज तिवारी के खिलाफ मंगलवार को प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। उत्तर पूर्वी दिल्ली में स्थित यह संपत्ति सील की गई थी, क्योंकि इसमें दिल्ली के मास्टर प्लान का कथित रूप से उल्लंघन करके डेयरी चलायी जा रही थी।

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