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बिहार में ‘आधी आबादी’ असुरक्षित!

पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों पर गौर करें तो साल दर साल दुष्कर्म की घटनाओं में वृद्धि हुई है। राज्य में इस साल मार्च महीने तक 289 दुष्कर्म की घटनाएं घट चुकी हैं जबकि पिछले वर्ष राज्य के विभिन्न थानों में 1,198 दुष्कर्म की घटनाएं प्रतिवेदित हुई थी।

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Nitish Kumar

दुनिया भर में ‘ज्ञानभूमि’ और ‘मोक्ष की धरती’ के रूप में प्रसिद्ध बिहार का गया इन दिनों एक घिनौनी वारदात को लेकर चर्चा में है। यहां एक शख्स के सामने ही उसकी 55 वर्षीय पत्नी और 15 वर्षीय पुत्री के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना ने बिहार में कथित सुशासन की पोल खोलकर रख दी है।

इस बीच राज्यपाल सत्यपाल मलिक द्वारा छेड़खानी की घटना के बाद पहले राजभवन को सूचना देने के बयान ने यह साबित कर दिया है कि बिहार में आधी आबादी के साथ सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। पुलिस विभाग के आंकड़े भी इस बात की तसदीक कर रहे हैं कि हाल के वर्षों में दुष्कर्म की घटनाओं में वृद्धि हुई है।

विपक्ष के आधी आबादी के असुरक्षित रहने के दावे के बाद सत्ता पक्ष भले ही आरोपियों की गिरफ्तारी कर लेने के बयानों के बाद यह साबित करने की कोशिश में जुटी हों कि बिहार में कानून का राज है परंतु गया की घटनाओं ने बिहार शर्मसार कर दिया है, इससे किसी को इंकार नहीं है।

बिहार के भूमि सुधार एवं राजस्व मंत्री रामनारायण मंडल भी मानते हैं कि हाल के दिनों में अपराध की घटनाओं में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा, “छेड़खानी और बढ़ते अपराध पर लगाम लगाने के लिए सरकार को छेड़खानी और सामूहिक दुष्कर्म के आरोपियों का एनकाउंटर शुरू करना होगा।”

उन्होंने कहा कि वैसे तो बिहार में लगभग जंगलराज समाप्त हो चुका है लेकिन अब भी कुछ अपराधी घटनाओं को अंजाम देने से बाज नहीं आ रहे हैं।

पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों पर गौर करें तो साल दर साल दुष्कर्म की घटनाओं में वृद्धि हुई है। राज्य में इस साल मार्च महीने तक 289 दुष्कर्म की घटनाएं घट चुकी हैं जबकि पिछले वर्ष राज्य के विभिन्न थानों में 1,198 दुष्कर्म की घटनाएं प्रतिवेदित हुई थी।

इससे पहले 2016 में राज्यभर में जहां 1,008 दुष्कर्म की घटनाएं हुई थी वहीं 2015 में 1,041 व 2014 में 1,127 दुष्कर्म की घटनाएं घटी थी। इसी तरह 2013 में 1,128 जबकि 2012 में 927 दुष्कर्म की घटनाएं ही राज्य के विभिन्न थानों में दर्ज की गई थी। वर्ष 2010 में पूरे राज्य में 795 दुष्कर्म की घटनाएं घटी थीं।

पिछले दिनों राज्य के कई जिलों में छेड़खानी का वीडियो वायरल होने की घटनाओं का नया ट्रेंड प्रारंभ हुआ है। पिछले दिनों राज्य के नालंदा, जहानाबाद, कैमूर में लड़की के साथ छेडखानी का वीडियो वायरल करन की घटना प्रकाश में आई है। पुलिस इन मामलांे में संज्ञान लेकर भले ही आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी हो, परंतु समाज में फैल रहे ऐसी घटनाओं को मानसिक विकृति ही माना जा रहा है।

मनोवैज्ञानिक बिंदा सिंह दुष्कर्म और छेड़खानी की बढ़ती घटनाओं का मुख्य कारण अकेलापन को मानती हैं। वे कहती हैं, “कुछ ज्यादा उम्र के लोग पीडियोफिलिया (बाल यौन अपराध) बीमारी से ग्रस्?त रहते हैं। ऐसे में ये कम उम्र की बच्चियों को अपना शिकार बनाते हैं। उन्हें लगता है कि ये बच्चियां किसी से कुछ कहेंगी नहीं। इसके पीछे भी अकेलापन एक हद तक जिम्मेवार होता है।”

उन्होंने इसके लिए इंटरनेट को भी हद तक जिम्मेवार माना है। उनका कहना है कि आज बच्चे या युवा अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए इंटरनेट कस सहारा ले रहे हैं, जिसमें कई अश्लील सामग्री भी हैं।

इधर, पुलिस मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि राज्य में घटनाएं घटी हुई हैं, तो त्वरित कार्रवाई भी हो रही है। गया वाले मामले में भी अब तक 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है तथा अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।

गौरतलब है कि दो दिन पूर्व राज्यपाल ने एक समारोह में लड़कियों और महिलाओं से अपील करते हुए कहा था, “अगर आपके साथ कोई छेड़खानी करता है तो थाने बाद में जाइए, पहले फोन कॉल राजभवन में कर दीजिए। वहां के अधिकारी आपके साथ जाकर आपकी रिपोर्ट थाने में लिखवाएगा, इससे बुरी कोई बात नहीं हो सकती है कि हम अपनी बच्चियों की सम्मान की रक्षा न कर सकें।”

बहरहाल, गया की घटना के बाद विपक्ष सत्तापक्ष पर लगातार निशाना साध रही है, ऐसे में अब देखना होगा कि सरकार अपराधियों पर लगाम लगाने में कब तक सफल होती है।

–आईएएनएस

 

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कैग ने रक्षा मंत्रालय के बेंचमार्क मूल्य अनुमान में खामियां पाईं

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Rafale deal scam

नई दिल्ली, 13 फरवरी | भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (कैग) ने 36 राफेल विमान समेत प्रस्तावित रक्षा खरीद के चार सौदों के बेंचमार्क मूल्य अनुमान में खामियां पाईं हैं।

कैग ने वायुसेना की हालिया 11 अधिग्रहणों पर अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है, “लगातार बेंचमार्क के गलत होने से रक्षा रखीद प्रणाली में लागत निर्धारण विशेषज्ञता की कमी का पता चलता है।”

कैग ने कहा कि रक्षा मंत्रालय का बेंचमार्क मूल्य अनुमान और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार द्वारा 126 राफेल विमान सौदे में प्रस्तावित वास्तविक कीमत में 47 फीसदी का अंतर है।

मोदी सरकार द्वारा 36 राफेल विमान के लिए किए गए करार में बेंचमार्क और वास्तविक कीमत में 56.67 फीसदी का अंतर है। रिपोर्ट में वास्तविक राशि को गुप्त रखा गया है।

रक्षा मंत्रालय ने 15 चिनूक हेवी लिफ्ट हेलीकॉप्टर की खरीद में अनुमानित बेंचमार्क कीमत 4,119.72 करोड़ रुपये रखी है, लेकिन निविदा मूल्य 6,473.91 करोड़ रुपये है।

पांच फुल मिशन सिम्युलेटर्स की खरीद में रक्षा मंत्रालय की अनुमानित लागत 444.8 लाख डॉलर थी, लेकिन वास्तविक कीमत 796.1 लाख डॉलर थी।

कैग ने कहा कि अंतिम खरीदों की कीमतें प्राय: अनुमान के लिए लगाई गई थीं। रिपोर्ट में कैग ने कहा है, “अंतिम खरीद बहुत पुरानी थी, उत्पादन भी एक जैसे नहीं थे।”

लेखापरीक्षक ने कहा है कि ज्यादातर लागत निर्धारण, मूल्य अनुमान और कीमतों की तुलना प्राय: वायुसेना के मुख्यालय में रक्षा मंत्रालय के लागत सलाहकारों की मदद से या उनकी मदद के बिना की गई।

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अब इमामी, अपोलो के निवेशकों का धन डूबने का खतरा

जैसा कि जी के मामले में हुआ था, एमएफ्स ने गिरवी रखे शेयरों को इसलिए नहीं बेचा था कि इससे शेयरों के दाम तेजी से गिर जाएंगे और मूल रकम की वसूली नहीं हो पाएगी। इससे यह सवाल उठ खड़ा होता है कि जब गिरवी रखे शेयरों को भुनाकर कर्ज की वसूली नहीं की जा सकती तो एमएफ्स ने क्या सोचकर इतनी भारी-भरकम रकम का कर्ज शेयरों को गिरवी रखकर दिया।

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apoll hospital

नई दिल्ली, 11 फरवरी | जी के शेयरों के पतन के बाद म्यूचुअल फंड्स (एमएफ्स) और एनबीएफसीज की नसों में पहले से ही सिहरन दौड़ रही है। इस बीच सोमवार को एक नया नाम सामने आया है, जो ताजा झटके देनेवाला है। कोलकाता की कंपनी इमामी लि. पर एमएफ्स का भारी-भरकम 2,000 करोड़ रुपये का कर्ज है, जो कंपनी के प्रमोटरों को इमामी के सूचीबद्ध शेयरों को गिरवी रखकर दिया गया था। इमामी समूह पर गैर-एमएफ्स कर्जदाताओं के भी शेयरों को गिरवी रखकर बड़ी रकम का कर्ज दिया गया (प्रतिभूतियों के बदले कर्ज) है। इमामी के प्रमोटरों की कंपनी में 72 फीसदी हिस्सेदारी है, जिसमें से आधा कर्ज के बदले गिरवी रखा हुआ है।

समस्या यह है कि इमामी के शेयरों की दैनिक ट्रेडिंग की मात्रा मुश्किल से 10-12 करोड़ रुपये है। इमामी के शेयर अपने उच्च स्तर से फिलहाल आधी कीमत पर हैं और आगे कभी भी भरभराकर गिर सकते हैं। साल 2015 में इमामी ने केश किंग का 1,684 करोड़ रुपये में अधिग्रहण किया था और इसके लिए 950 करोड़ रुपये शेयर गिरवी रखकर कर्ज के रूप में जुटाए थे। उसने केश किंग और संबंधित ब्रांड्स को एसबीएस बॉयोटेक से खरीदा था, जिस सौदे को विश्लेषकों ने उस वक्त काफी महंगा करार दिया था।

सोमवार को इंट्राडे कारोबार में कंपनी के शेयरों में 11 फीसदी गिरावट दर्ज की गई, जो कि चार सालों के न्यूनतम स्तर 336 रुपये प्रति शेयर रही, हालांकि बाद में कुछ सुधार देखा गया और चार फीसदी की गिरावट के साथ 368 रुपये प्रति शेयर की दर पर बंद हुए।

जैसा कि जी के मामले में हुआ था, एमएफ्स ने गिरवी रखे शेयरों को इसलिए नहीं बेचा था कि इससे शेयरों के दाम तेजी से गिर जाएंगे और मूल रकम की वसूली नहीं हो पाएगी। इससे यह सवाल उठ खड़ा होता है कि जब गिरवी रखे शेयरों को भुनाकर कर्ज की वसूली नहीं की जा सकती तो एमएफ्स ने क्या सोचकर इतनी भारी-भरकम रकम का कर्ज शेयरों को गिरवी रखकर दिया।

इसके अलावा अपोलो हॉस्पिटल के शेयरों की कीमत में सोमवार को कारोबार में 11 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। यह कंपनी के शेयरों में पिछले सात सालों में किसी एक दिन हुई सबसे बड़ी गिरावट है, जिससे निवेशक घबराए हुए हैं। कंपनी में प्रमोटरों की 34 फीसदी हिस्सेदारी है और उन्होंने अपने करीब 75 फीसदी शेयर गिरवी रखे हैं, जिससे निवेशक समुदाय में भय का माहौल है।

सोमवार को कंपनी के शेयरों में आई भारी गिरावट के पीछे मद्रास उच्च न्यायालय का अपोलो की उस याचिका पर अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार करना है, जिसमें मांग की गई थी कि तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे. जयललिता को 2016 में उनकी मृत्यु से पहले अपोलो अस्पताल में किए गए इलाज की शुद्धता और पर्याप्तता को देखने के लिए एक जांच आयोग के गठन पर रोक लगाई जाए।

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ओपिनियन

काले धन को सफेद करने के लिए भावांतर योजना शुरू की गई थी : कमलनाथ

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kamal nath

प्रमुख राज्यों और सहयोगियों को संभालने वाले एक सशक्त कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस महासचिव कमलनाथ ने मध्यप्रदेश की सत्ता के केंद्र भोपाल को बखूबी अपना लिया है। विशुद्ध राजनीति की कला में माहिर राज्य के 18वें मुख्यमंत्री जिन्होंने भारत को कांग्रेस मुक्त करने की भाजपा के विजय रथ को रोक दिया है, उन पर अब एक बड़ी जिम्मेदारी है। जन्मजात रणनीतिक और सामरिक सोच के धनी नेता अब राज्य में हर उस चीज को दुरुस्त करने के काम में जुट गए हैं जो गड़बड़ाई हुई है।

राज्य में खेती और ग्रामीण संकट के साथ ही संभवत: बेरोजगारी वह एकमात्र सबसे बड़ा कारण रही, जिसने कांग्रेस को जीत दिलाई।

इस संकट की गंभीरता के बारे में पूछे जाने पर नाथ ने इसके उन्मूलन के उपायों पर बात करते हुए कहा, “राज्य में रोजगार की स्थिति बहुत बुरी है। जिन संसाधनों का प्रयोग राज्य के विकास को गति देने के लिए किया जा सकता था, उनका व्यर्थ जाना बेहद दुखद है। पद संभालने के पहले दिन ही, मैंने राज्य में 70 प्रतिशत स्थानीय युवाओं को उद्यमों में रोजगार देना अनिवार्य कर दिया ताकि उन्हें औद्योगिक प्रोत्साहन मिले।”

उन्होंने कहा, “समय के साथ हम ऐसी और योजनाएं लेकर आएंगे, जिनसे रोजगार पैदा होंगे और उद्यमों के सशक्तीकरण के लिए काम करेंगे। हमारी सरकार युवाओं के कौशल विकास, रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए उद्यमों के विकास और शिक्षा की गुणवत्ता पर ध्यान दे रही है। गणतंत्र दिवस के मौके पर हमने एक नई योजना ‘युवा स्वाभिमान योजना’ की घोषणा की। इसके तहत हम साल में पूरे 100 दिन राज्य के युवाओं को काम देंगे। कृषि संकट के मामले में, पिछले कुछ सालों में मंदसौर दो बार किसानों के लिए कृषि संकट के क्षेत्र में भाजपा की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोलने का मुख्य केंद्र बना।”

दिल्ली में बैठे हुए भी, हर किसी ने मध्यप्रदेश में कृषि संकट और किस प्रकार मंदसौर इसके खिलाफ विरोध का केंद्र बना, इस बारे में सुना।

कमलनाथ ने भाजपा सरकार की भावांतर योजना शुरू होने और फिर उसे बंद करने के बारे में बात करते हुए कहा, “मध्यप्रदेश भारत के सबसे बड़े कृषि प्रधान राज्यों में से एक है। इसकी करीब 70 फीसदी आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर कृषि से जुड़ी है। यह बेहद दुख की बात है कि किसानों की आत्महत्या के मामले में मध्यप्रदेश देश में सबसे ऊपर है। अगर राज्य किसानों के लिए किसी आदर्श स्थिति में होता, जैसा कि पिछली भाजपा सरकार द्वारा कहा जा रहा था, तो स्थिति काफी अलग होती।”

उन्होंने कहा, “किसानों का आक्रोश और उनके प्रति सरकार की बेरुखी मंदसौर की घटना से ही स्पष्ट है। कृषि संकट का एक बड़ा कारण यह है कि किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य नहीं मिलता। भावांतर योजना केवल काले धन को सफेद करने के लिए शुरू की गई थी, इस संकट को दूर करने के लिए नहीं। यह पूरी तरह त्रुटिपूर्ण थी और इसलिए इसका विफल होना तय था।”

कमलनाथ ने कहा, “हम ‘भावांतर योजना’ को नए रूप में पेश करने जा रहे हैं और ऐसे उपाय लेकर आ रहे हैं, जिनसे किसानों को उनका हक मिलेगा। अपने वादे पर कायम रहते हुए हमने सरकार में आते ही किसानों के ऋण माफ कर दिए और राज्य के किसानों के कल्याण के लिए ऐसी और भी नीतियां बनाएंगे।”

फिर से कांग्रेस के केंद्र की सत्ता में आने के सवाल पर कमलनाथ ने कहा, “मुझे पूरा भरोसा है कि हम बहुमत के साथ सत्ता में आएंगे। पिछले चुनाव में भाजपा की जीत और कुछ नहीं, बस एक संयोग था। हालांकि आप लोगों को लंबे समय तक मूर्ख नहीं बना सकते। नोटबंदी और जीएसटी जैसी चीजें पूरी तरह विफल हुई हैं और लोग अब बदलाव चाहते हैं।”

उन्होंने कहा, “लोगों में भाजपा विरोधी भावना है और हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव के परिणामों में यह साफ दिखाई दे रहा है। अगर हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता की बात करें तो यह कम होने लगी है। हमारे प्रधानमंत्री की लोकप्रियता का ग्राफ जहां नीचे गिर रहा है, राहुल गांधी का ऊपर बढ़ रहा है।”

भाजपा और कांग्रेस का वोट शेयर काफी ज्यादा था और अंत में केवल मामूली अंतर से ही कांग्रेस को जीत हासिल हुई। कांग्रेस के पक्ष में बाजी जाने में किस चीज की भूमिका रही?

इस सवाल पर दून स्कूल और कोलकाता के सेंट जेवियर स्कूल से शिक्षित कमलनाथ ने कहा, “वक्त है बदलाव का। राज्य के लोग विकास की धीमी गति से थक चुके थे और बदलाव चाहते थे। हमारी रैलियों में भी सरकार विरोधी भावना साफ नजर आई।”

उन्होंने कहा, “अब राज्य के लोग दोनों सरकारों के बीच के अंतर को साफ महसूस कर रहे हैं। एक प्रदर्शन कर रही है और दूसरी ने कभी नहीं किया। मुझे पूरा भरोसा है कि लोग कांग्रेस को समर्थन देंगे जिसकी राज्य के विकास और सम्पन्नता के लिए काम करने की मजबूत इच्छाशक्ति है।”

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