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स्वास्थ्य

दिल्ली-एनसीआर में मौजूदा प्रदूषण से अस्थमा के दौरे पड़ सकते हैं…

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मेट्रो रेस्पिरेटरी सेंटर के डायरेक्टर एवं चेयरमैनदेश एवं पल्मोनोलॉजिस्ट, डॉ. दीपक तलवार, ने दिल्ली एनसीआर में खतरनाक प्रदूषण स्तर के मद्देनजर सभी अस्थमा रोगियों को अस्थमा के दौरों के बारे में आगाह किया है।

उन्होंने रोगियों से घर के अंदर रहने और धूल कणों व प्रदूषक तत्वों से बचने की सलाह दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, भारत 1.5 से 2 करोड़ लोग अस्थमा से पीड़ित हैं, जबकि कुछ अध्ययनों ने यह संख्या 3 करोड़ तक आंकी है।

इनमें से लगभग 5 से 10 प्रतिशत रोगियों में मुश्किल किस्म का अस्थमा है, क्योंकि उन्हें इसके तीव्र दौरे पड़ते रहते हैं और उनके जीवन की गुणवत्ता खराब है। साथ ही भरपूर उपचार के बावजूद वे शारीरिक रूप से अक्षम हैं। डॉ. तलवार ब्रोन्कियल थर्मोप्लास्टी पेश करने के अवसर पर बोल रहे थे, जो कि मुश्किल अस्थमा का प्रबंधन करने के लिए एक नयी, अत्यधिक उन्नत और अभिनव थेरेपी है।

उन्होंने कहा, “हजारों अस्थमा रोगियों को वर्षो से तीव्र और लगातार रहने वाले अस्थमा का सामना करना पड़ रहा है तथा इनहेलर्स और नेबुलाइजर्स के माध्यम से दवा के निरंतर सेवन के बावजूद उन्हें सांस लेने में जबरदस्त कठिनाई होती है। इस तरह के दवा प्रतिरोधी रोगियों के लिए एक अच्छी खबर यह है कि ब्रोंकियल थर्मोप्लास्टी नामक यह नयी अभिनव थेरेपी सांस लेना आसान और बेहतर कर सकती है।”

उन्होंने कहा कि फेफड़ों के अंदर कुछ मांसपेशियां होती हैं जिन्हें ‘स्मूद मसल्स’ कहा जाता है, जो अस्थमा के दौरे के दौरान कठोर हो जाती हैं, जिससे सांस लेने में कठिनाई होती है। ब्रोंकियल थर्मोप्लास्टी फेफड़ों में हवा का प्रवाह बढ़ाने के लिए हीट का इस्तेमाल करके इन मांसपेशियों पर दबाव पैदा करती है।

डॉक्टर इस प्रोसीजर को तीन सत्रों में पूरा करता है। प्रत्येक सत्र एक घंटे का होता है और हर बार फेफड़ों के अलग-अलग हिस्सों का इलाज किया जाता है। मेट्रो सेंटर फॉर रेस्पिरेटरी डिसीज, एनसीआर और यूपी में पहला ऐसा केंद्र है जो गंभीर अस्थमा रोगियों को बीटी की पेशकश करता है और अब तक तीन रोगी मेट्रो सेंटर फॉर रेस्पिरेटरी डिसीज में डॉ. दीपक तलवार की निगरानी में सफलतापूर्वक ब्रोन्कियल थर्मोप्लास्टी ले चुके हैं।

— आईएएनएस

स्वास्थ्य

जॉनसन एंड जॉनसन पाउडर से बच्चों को कैंसर का खतरा : रिपोर्ट

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जॉनसन एंड जॉनसन के प्रोडक्ट्स को सभी जगह पंसद किया जाता हैं। भारत की बात करें तो यहां जॉनसन एंड जॉनसन के प्रोडक्ट्स को ही बच्चों के लिए बेस्ट माना जाता है।

लेकिन एक नई रिपोर्ट में इस कंपनी को लेकर जो खुलासा हुआ है उससे आपके होश उड़ जाएंगे। मशहूर कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन पर लंबे समय से आरोप लग रहे थे कि इसके बेबी पाउडर (Baby Powder) से कैंसर होता है। इस बात का खुलासा अब रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में हुआ है।

रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में कंपनी के इंटरनल डॉक्यूमेंट्स का हवाला देते हुए कहा है कि कंपनी एग्जेक्यूटिव से लेकर माइन मैनेजर, वैज्ञानिक, डॉक्टर और यहां तक कि वकील भी इस बात से अवगत थे। यह जानते हुए भी कंपनी सालों से यह प्रोडक्ट बेच रही है। रॉयटर्स की इस रिपोर्ट के मुताबिक उसने कंपनी के कई डॉक्यूमेंट्स का अध्ययन किया जिसमें सामने आया कि 1971 से 2000 तक जॉनसन एंड जॉनसन के रॉ पाउडर और बेबी पाउडर की टेस्टिंग में कई बार एस्बेस्टस होने की बात सामने आई।

इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कंपनी ने कॉस्मेटिक टैल्कम पाउडर में एस्बेस्टस की मात्रा को लिमिट करने के की कोशिशों के खिलाफ अमेरिकी रेगुलेटर्स पर दबाव भी बनाया। इसमें वह काफी हद तक सफल भी हुई। इस रिपोर्ट के बाद अमेरिकी शेयर बाजार में कंपनी के स्टॉक में शुक्रवार को 10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

सीएनएन ने लिखा कि 2002 के बाद यह कंपनी के शेयर्स में सबसे बड़ी गिरावट है। 19 जुलाई 2002 को कंपनी के शेयर्स में 16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। तब कंपनी की एक पूर्व कर्मी ने कंपनी पर रिकॉर्ड में गड़बड़ी का आरोप लगाया था। इतना ही नहीं साल 2018 अगस्त में अमेरिका की मिसौरी की एक अदालत ने बेबी पाउडर से कैंसर होने की बात साबित होने के बाद कंपनी पर करीब 32 हजार करोड़ रुपये का भारी-भरकम जुर्माना भी लगाया था।

कंपनी लगातार इन आरोपों को खारिज करती रही है। मीडिया सूत्रों के मुताबिक जॉनसन एंड जॉनसन ने रॉयटर्स की इस रिपोर्ट को एक तरफा और गलत बताया है। कंपनी ने कहा, “रॉयटर्स का आर्टिकल एकतरफा और झूठा है। कंपनी का बेबी पाउडर सुरक्षित और एस्बेस्टस फ्री है।

कंपनी ने आगे कहा, “कंपनी, रेगुलेटर्स, इंडिपेंडेंट लैब्स और शैक्षिक संस्थानों की तरफ से कराए गए हजारों टेस्ट्स में से किसी में भी यह बात सामने नहीं आई कि कंपनी के पाउडर में एस्बेस्टस होता है। कंपनी ने कहा कि दशकों से फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन और अन्य ग्लोबल रेगुलेटर्स को सहयोग देती रही है। कंपनी ने कहा कि वह टेस्टिंग के लिए सबसे एडवांस्ड मैथड का इस्तेमाल करती है।

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स्वास्थ्य

सिनेमा, संग्रहालय जाने से बुजुर्गों में अवसाद का जोखिम हो सकता है कम

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सिनेमा, थिएटर या संग्रहालय जैसी सांस्कृतिक गतिविधियों के नियमित रूप से संपर्क में रहने से बुजुर्ग अवसाद से दूर रह सकते हैं। एक नए अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है। अवसाद एक बड़ा मुद्दा है, जिससे लाखों लोग प्रभावित होते हैं, विशेषकर बुजुर्ग।

अध्ययन में सामने आया कि वे लोग जो प्रत्येक दो-तीन महीने में फिल्में, नाटक या प्रदर्शनी देखते हैं, उनमें अवसाद विकसित होने का जोखिम 32 फीसदी कम होता है, वहीं जो महीने में एक बार जरूर यह सब चीजें करते हैं उनमें 48 फीसदी से कम जोखिम रहता है।

ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन की वरिष्ठ रिसर्च एसोसिएट डेजी फैनकोर्ट ने कहा, “लोग मनोरंजन के लिए सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ते हैं लेकिन हमें इसके व्यापक फायदों के बारे में जागरूकता फैलाने की जरूरत है।”

ब्रिटिश जर्नल ऑफ साइकियाट्री में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, इन सांस्कृतिक गतिविधियों की शक्ति सामाजिक संपर्क, रचनात्मकता, मानसिक उत्तेजना और सौम्य शारीरिक गतिविधि के संयोजन में निहित है, जो उन्हें प्रोत्साहित करती है।

फैनकोर्ट के मुताबिक, अगर हम तनाव या कुछ अलग सा महसूस करना शुरू कर देते हैं तो सांस्कृतिक जुड़ाव वह सामान्य चीज है, जिससे हम हमारे मानसिक स्वास्थ्य की सक्रिय रूप से मदद कर सकते हैं ताकि वह उस बिंदु तक न पहुंचे, जहां हमें किसी पेशेवर चिकित्सा मदद लेने की जरूरत आ पड़े।
अध्ययन के लिए, शोधकर्ताओं ने 50 से ज्यादा की उम्र के 2,48 से अधिक लोगों का अध्ययन किया।

–आईएएनएस

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राष्ट्रीय

ऑनलाइन दवा खरीद पर रोक

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प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

दिल्‍ली हाईकोर्ट ने दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पर रोक लगा दी है। ये रोक पूरे देश के लिए है। इससे पहले मद्रास हाईकोर्ट भी इस पर रोक लगाने का आदेश दे चुका है।

दिल्‍ली उच्‍च न्‍यायालय के मुख्‍य न्‍यायाधीश जस्टिस राजेंद्र मेनन और जस्टिस वीके रॉय की खंडपीड ने एक पीआईएल की सुनवाई पर फैसला सुनाया।

गौरतलब है कि सितंबर में स्वास्थ्य मंत्रालय ने दवाओं की ऑनलाइन बिक्री का एक ड्राफ्ट तैयार बनाया था। इस ड्राफ्ट के अनुसार, ऑनलाइन दवा की बिक्री के लिए ई फार्मेसी को एक केंद्रीय प्राधिकार के पास पंजीकरण करवाना होगा। इन कंपनियों को मादक द्रव्यों की बिक्री की अनुमति नहीं होगी। ऑनलाइन फार्मेसी को केंद्रीय औषध मानक नियंत्रण संगठन में भी पंजीकरण करवाना जरूरी है लेकिन दवा कंपनियां ऐसे करने से बचती हैं। ऑनलाइन दवा बिक्री के लिए ठोस कानून न होने से कंपनियां मनमानी पर उतर आई हैं।

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