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आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने पीएम से की मुलाकात

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एन चंद्रबाबू नायडू ने पीएम से की मुलाकात

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन.चंद्रबाबू नायडु ने यहां शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और उनसे आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम में की गईं सभी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने का आग्रह किया। घंटे भर चली बैठक के दौरान तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) के अध्यक्ष ने मोदी से अधिनियम के तहत अधूरे वादों पर चर्चा की और 17 पृष्ठों का ज्ञापन सौंपा।

तेदेपा व उसकी सहयोगी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संबंधों में हाल के समय में तनाव के संकेतों के बीच यह बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

नायडु ने मोदी से डेढ़ साल बाद मुलाकात की है। उन्होंने मोदी से अगले साल होने वाले लोकसभा व आंध्र प्रदेश विधानसभा के एक साथ होने वाले चुनावों के मद्देनजर लंबे समय से लंबित मांगों पर तत्काल कदम उठाए जाने की अपील की।

तेदेपा केंद्र के साथ अपने धैर्य के कमजोर पड़ने के संकेत पहले ही दे चुकी है। पार्टी के सांसदों ने शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन मोदी से मुलाकात की थी और उन्हें एक ज्ञापन भी सौंपा था।

नायडु चाहते हैं कि केंद्र पोलावरम परियोजना के लिए 58,000 करोड़ रुपये को तत्काल मंजूरी दे। उन्होंने मोदी से नए राज्य की राजधानी अमरावती के विकास के लिए केंद्रीय बजट में पर्याप्त राशि सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

वह यह भी चाहते हैं कि मोदी राज्य विधानसभा की सीटें 175 से बढ़ाकर 225 करने के लिए तत्काल कदम उठाएं, जिसकी प्रतिबद्धता पुनर्गठन अधिनियम में की गई है।

नायडु ने मोदी से कहा कि राज्य के विभाजन के कारण आंध्र प्रदेश वित्तीय समस्याओं का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि अधिनियम के तहत की गई प्रतिबद्धताओं को लागू करने में देरी से समस्याएं और बढ़ेंगी।

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संसद सत्र : मोदी ने सांसदों से सहयोग मांगा, कांग्रेस ने राफेल पर जेपीसी

कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि कांग्रेस राफेल मामले में जेपीसी जांच की मांग करेगी और ईवीएम के कथित दुरुपयोग का मामला उठाएगी।

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Rahul Modi
PM Modi and Rahul Gandhi (File PIc)

नई दिल्ली, 10 दिसंबर | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को संसद के शीतकालीन सत्र के सुचारु संचालन के लिए विपक्षी दलों से सहयोग मांगा, जबकि कांग्रेस ने राफेल सौदे की जेपीसी जांच और ईवीएम व किसानों की समस्या पर चर्चा की मांग की। लोकसभा चुनाव से पहले इस अंतिम पूर्णकालिक सत्र के लिए सरकार के एजेंडे में 46 विषय हैं, जिसमें 45 विधेयक हैं।

बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने मीडिया से कहा, “प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा है कि लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष दोनों बेहतर शासन के लिए अपने सुझाव साझा करते हैं।”

तोमर ने कहा, “मोदी ने कहा कि सरकार नियम और प्रक्रियाओं के मुताबिक सभी मुद्दों पर चर्चा करने के लिए तैयार है और संसद के सुचारु संचालन के लिए विपक्ष के सुझाव मानने के लिए तैयार है।

उन्होंने कहा, “मोदी ने राजनीतिक पार्टियों से सत्र के दौरान सकारात्मक माहौल बनाने और लोगों से जुड़े मामलों को साथ मिलकर सुलझाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह हमारी मुख्य जिम्मेदारी है कि हम संसद का सुचारु संचालन सुनिश्चित कर देश और देश के लोगों की सेवा करें।”

तोमर ने कहा कि बैठक में मौजूद सभी राजनीतिक पार्टियों ने संसद के सुचारु संचालन में सहयोग का आश्वासन दिया।

यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार राफेल लड़ाकू विमान सौदे में जेपीसी जांच के लिए तैयार होगी? उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास राफेल, किसानों की दुर्दशा और अर्थव्यवस्था से संबंधित कई मामले हैं, लेकिन उन्हें अपनी प्राथमिकताएं तय करनी होगी, क्योंकि सत्र केवल चार सप्ताह का है।

उन्होंने कहा, “ये चीजें कार्य मंत्रणा समिति में तय हो सकती हैं।”

मंत्री ने कहा कि राम मंदिर पर कानून ‘आज की चर्चा का हिस्सा नहीं था’।

तोमर ने कहा, “जब इस दिशा में कुछ सामने आएगा, तो हम आपको बताएंगे।”

कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि कांग्रेस राफेल मामले में जेपीसी जांच की मांग करेगी और ईवीएम के कथित दुरुपयोग का मामला उठाएगी।

उन्होंने कहा कि पार्टी इसके साथ ही राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए सरकार द्वारा जांच एजेंसियों के दुरुपयोग, किसानों की दुर्दशा, रुपये के कमजोर होने, पेट्रोलियम पदार्थो की कीमतों में वृद्धि, महिलाओं की सुरक्षा और आरबीआई की स्वायत्तता को कमजोर करने की कोशिश पर भी चर्चा की मांग करेगी।

उन्होंने कहा, “हम लंबे समय से राफेल घोटाले में जेपीसी जांच की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार निर्णय लेने में विफल रही है। यह लोकतंत्र के लिए जरूरी है कि मतदाताओं का विश्वास ईवीएम पर बना रहे, लेकिन दुर्भाग्य से जब से भाजपा सत्ता में आई है, लोगों का ईवीएम से भरोसा उठ गया है, क्योंकि सत्तारूढ़ पार्टी इसका दुरुपयोग कर रही है।”

29 दिन के इस सत्र में 20 बैठकें होंगी।

–आईएएनएस

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पटेल के इस्तीफे के कारण जरूर होंगे : सी.रंगराजन

“मैंने सोचा था कि बोर्ड की अंतिम बैठक में आरबीआई और केंद्र सरकार के बीच कई मामले सुलझा लिए गए हैं और बाकी मुद्दे भी जल्द ही सुलझा लिए जाएंगे।”

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RANGARAJAN

चेन्नई, 10 दिसंबर | भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर सी. रंगराजन ने सोमवार को कहा कि वह आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल के इस्तीफे से ‘दुखी’ और ‘हैरान’ हैं। रंगराजन ने आईएएनएस से कहा, “यह दुखद है, क्योंकि आरबीआई गवर्नर के इस्तीफे का असर वित्तीय बाजार पर पड़ेगा। सरकार को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए और तुरंत एक नया गवर्नर नियुक्त करना चाहिए।”

आंध्रप्रदेश के पूर्व राज्यपाल रंगराजन ने कहा, “उन्होंने इस्तीफा देने का निजी कारण बताया है, लेकिन उनके इस्तीफे के पीछे कुछ कारण जरूर रहे होंगे।”

हैरान क्यों हैं? यह पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “मैंने सोचा था कि बोर्ड की अंतिम बैठक में आरबीआई और केंद्र सरकार के बीच कई मामले सुलझा लिए गए हैं और बाकी मुद्दे भी जल्द ही सुलझा लिए जाएंगे।”

रंगराजन वर्ष 2009-14 के दौरान प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष भी थे।

रंगराजन के अनुसार, वह समझते थे कि आरबीआई और केंद्र के बीच मुद्दे सुलझा लिए गए हैं और समितियों के गठन को लेकर एक-दो चीजों को सुलझाया जाना बाकी रह गया है।

उर्जित पटेल ने सोमवार को ‘निजी कारणों’ का हवाला देते हुए अचानक इस्तीफा दे दिया। उन्होंने आरबीआई की ओर से जारी एक संक्षिप्त बयान में कहा, “मैंने निजी कारणों से अपने मौजूदा पद से तत्काल इस्तीफा देने का निर्णय लिया है।”

उन्होंने बयान में कहा, “वर्षो तक आरबीआई में विभिन्न पदों पर काम करना मेरे लिए सौभाग्य

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माल्या के भारत प्रत्यर्पण को लंदन कोर्ट की मंजूरी

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vijay malya
विजय माल्‍या (फाइल फोटो)।

भगोड़े शराब कारोबारी को भारत लाए जाने का रास्‍ता अब साफ हो गया है। लंदन की कोर्ट ने विजय माल्‍या के प्रत्‍यर्पण को मंजूरी दी है। कोर्ट ने कहा कि वह ऊपरी कोर्ट में अपील कर सकता है।

माल्‍या ने वहां मौजूद मीडिया से कहा कि कोर्ट का जो भी फैसला आएगा वह उसे मंजूर होगा। उसने कहा कि मैंने किसी का पैसा नहीं चुराया, मैं लोन लिया हुआ पैसा चुकाने को तैयार हूं। लोन का प्रत्यर्पण से कोई संबंध नहीं है।

बैंकों की ऋण राशि का भुगतान करने के प्रस्ताव पर विजय माल्या ने कहा कि जैसा कि मैंने कहा कि कर्नाटक उच्च न्यायालय में मामला चल रहा है। इस बारे में उच्च न्यायालय को फैसला तय करने दें।

धोखाधड़ी और मनी लांड्रिंग के मामले में वांछित माल्या पर भारतीय बैंकों के करीब 9,000 करोड़ रुपये बकाया हैं। ब्रिटेन में पिछले साल अप्रैल में उसकी गिरफ्तारी हुई थी। अभी वह जमानत पर है।

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