खेल

विश्लेषण: पद्म भूषण के लिए अगर दीपा कर्माकर के नाम की सिफारिश होती तो बात कुछ और होती…

PV SINDHU AND DIPA KARMAKAR1
पीवी सिंधु और दीपा कर्माकर (फाइल फोटो)

पीवी सिंधु को पद्म भूषण मिलने वाला है… खेल मंत्रालय ने इसके लिए उनके नाम की सिफारिश की है… सिंधु कोर्ट पर जीतती हैं तो कुछ मौकों पर उन्हें हार भी मिलती है… लेकिन वो कभी झुकती नहीं… वो महिला शक्ति की झंडाबरदार हैं… लिहाज़ा उन्हें पद्म भूषण दिया जा सकता है… ठीक सिंधु की ही तरह जिमनास्ट दीपा कर्माकर भी हैं… उन्होंने यूरोप-अमेरिका के खेल को भारतीय पहचान दे दी… देश को उनपर बड़ा गर्व है… लेकिन इस गर्व को फिलहाल पद्म भूषण का नाम नहीं दिया गया है…

महिला शक्ति… पीवी सिंधु को कोर्ट पर देखकर सबको इसका संकेत मिलता है… और इसका इल्म सिर्फ खेलप्रेमियों को ही नहीं होता… भारत सरकार भी इसको सलाम करती है… सिंधु बैडमिंटन खेलती हैं… जीतती हैं… जश्न मनाती हैं… वो हारती भी हैं… लेकिन आखिर तक संघर्ष करती हैं… दरअसल वो किसी बाधा के आगे कभी झुकती नहीं… वो विरोधी के कद और डर के कारण कभी हथियार नहीं डालती… वो भारत का आज है… जो बेहतर कल का भरोसा दिलाती हैं… सिंधु महिलाओं को अपनी शक्ति को पहचानने के लिए लिए प्रेरित करती हैं…

और यही वजह है कि खेल मंत्रालय ने स्टार शटलर पीवी सिंधु के नाम का प्रस्ताव पद्म भूषण सम्मान के लिए किया है…
ये देश का तीसरा सबड़े बड़ा नागरिक सम्मान है… सिंधु की सीनियर बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल को 2016 में पद्म भूषण से नवाजा जा चुका है… अब साइना से आगे निकल रही… उनके जैसी ही चैंपियन पीवी सिंधु की बारी है… 2016 रियो ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीतने वाली सिंधु ने लगातार कई खिताब अपने नाम किए हैं…
उन्होंने 2016 में चाइना ओपन खिताब अपने नाम किया… इस सुपर सीरीज़ प्रीमियर टाइटल को जीतने वाली वो पहली भारतीय शटलर हैं…
इसके बाद इसी साल यानी 2017 में सिंधु ने केरोलिना मारिन को शिकस्त देकर इंडिया ओपन खिताब को अपने नाम किया…
सिंधु को ओलंपिक फाइनल में मारिन के हाथों हार का सामना करना पड़ा था… हालांकि इसके बावजूद वो बैडमिंटन में सिल्वर मेडल जीतने वाली पहली भारतीय बनीं… लेकिन ये हार सालने वाली थी… जिसका बदला स्टार इंडियन शटलर ने अगले ही साल ले लिया… इंडिया ओपन में स्पेन की मारिन को सीधे गेम्स में हराकर पीवी सिंधु ने कोर्ट पर अपनी बादशाहत कायम कर ली…

इसके बाद पिछले दिनों नोजोमी ओकुहारा को हराकर सिंधु ने कोरिया ओपन खिताब जीता…
सिंधु को ये जीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर मिली… लिहाज़ा हैदराबादी शटलर ने इस खिताब को प्रधानमंत्री मोदी के नाम किया…
सिंधु के तीनों ही खिताब ओलंपिक रजत पदक के बाद आए हैं… हालांकि पीवी सिंधु जापान ओपन सुपर सीरीज़ के दूसरे राउंड में हार गईं… लेकिन सबको पता है कि उनका सफर अभी कई और महान उदाहरण पेश करेगा…

दीपा कर्माकर भी एक ऐसी ही एथलीट हैं… दीपा दुनिया की बेस्ट जिमनास्ट्स में से एक हैं… दुनिया में अबतक सिर्फ पांच जिमनास्ट्स ने ही प्रोडुनोवा किया है… दीपा उनमें से एक हैं… रियो ओलंपिक में वो चौथे नंबर पर आई थीं… जिसके बाद उन्हें पद्म श्री से नवाजा गया था… वो 2014 ग्लासगो ओलंपिक में ब्रॉन्ज़ जीत चुकी हैं… जबकि 2015 एशियन चैंपियनशिप में भी दीपा को कांस्य पदक मिला था… रियो ओलंपिक में सिक्किम की दूरदराज़ से आईं दीपा ने जिस तरह से प्रोडूनोवा किया उसके बाद से उनका नाम चंद ऐसी शख्सियतों में शामिल हो गया… जो हार-जीत से इतर जिंदगी को असीम ऊंचाई देने की प्रेरणास्रोत बन गई हैं… दरअसल दीपा भारतीय महिलाओं की शक्ति को नए सिरे से पारिभाषित करती हैं… सिंधु देश को दीवाना बनाती हैं… तो जिमनास्टिक जैसे विदेशी खेल में हवाओं में लहारने वाली इस भारतीय लड़की को यूरोप और अमेरिका तक सलाम करता है… ऐसे में सिंधु के साथ पद्म भूषण के लिए दीपा कर्माकर को भी नोमिनेट किया गया होता तो भारतीय खेलों का अबतक का ये सफर थोड़ा और गौरवशाली होता शायद.

WeForNews Bureau

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