Connect with us
congress-workers-gujarat congress-workers-gujarat

ओपिनियन

झूठ और अर्धसत्य की बदौलत मोदी ने चुनाव तो जीता लेकिन दिल नहीं!

गुजरात मॉडल का हर वक़्त बख़ान करने वाले नरेन्द्र मोदी को गुजरात में प्रचार के लिए इतना अधिक वक़्त लगाना पड़ा, मानो वो देश के प्रधानमंत्री नहीं बल्कि राज्य के मुख्यमंत्री हों। इतना ही नहीं, चुनाव प्रचार के दौरान तो प्रधानमंत्री अपने ‘विकास के गुजरात मॉडल’ की बातें करने से भी कतराते रहे।

Published

on

बीजेपी ने गुजरात ज़रूर जीता है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अच्छी तरह जानते है कि अपने गृहराज्य में उन्हें हार मिली है। चुनाव के नतीज़े साफ़ बता रहे हैं कि जनता ने नोटबन्दी को कैसे ख़ारिज़ किया है और कैसे जीएसटी को गब्बर सिंह टैक्स बनाकर लागू किया गया। संख्या बल भले ही मोदी के साथ हो, लेकिन जिस पद पर वो आसीन हैं, उसकी गरिमा निश्चित रूप से गिरी है। वो ख़ुद भी आज बहुत कमतर हो चुके हैं।

काँग्रेस के लिहाज़ से सबसे महत्वपूर्ण ये है कि वो न सिर्फ़ बीजेपी की संख्या को दहाई तक ही सीमित रखने में सफल हुई, बल्कि जिस तरह से बीजेपी के व्यक्तिगत हमलों का सामना करके राहुल गाँधी उभरे हैं, उसने ये साबित कर दिया है कि उनमें देश की सबसे पुरानी पार्टी का नेतृत्व करने की क्षमता मौजूद है। राहुल गाँधी ने साबित किया है कि धर्मनिरपेक्षता, समाज के सभी तबकों का सम्मान, वैचारिक मतभेद रखने वालों का भी आदर और ध्येय में ईमानदारी के बग़ैर भारत को महान नहीं बनाया जा सकता। गुजरात ने प्रधानमंत्री को ये भी बता दिया है कि ‘काँग्रेस मुक्त भारत’ की हवा का रुख़ अब क्या है!

गुजरात चुनाव में सारी तिकड़में लगायी गयीं। पाकिस्तान, झूठ, अफ़वाह, मनगढ़न्त दावे और वादे, राजनीतिक विरोधियों का चरित्र-हनन जैसे हरेक हथकंडों को अपनाकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के उस सर्वोच्च पद की गरिमा को भी तार-तार कर दिया, जिस पर वो आसीन हैं। मोदी और उनकी पार्टी की जीत वैसी ही है, जैसे मुक्केबाज़ी के खेल में प्वाइंट्स के आधार पर विजेता घोषित किया जाता है। गुजरात ने बहुत क़रीब से देखा है कि ख़ुद को ‘विकास-पुरुष’ बताने वालों ने कैसे बीजेपी के साम्प्रदायिक एजेंडा को हवा दी। इसीलिए, बीजेपी और प्रधानमंत्री दोनों की प्रतिष्ठा को भारी चोट पहुँचाने में काँग्रेस सफल रही।

हिमाचल प्रदेश ने दशकों से चली आ रही अपनी परम्परा के मुताबिक, सरकार को बदलने का फ़ैसला किया। लेकिन वहाँ भी जीत के बावजूद बीजेपी को इस तथ्य पर गहराई से विचार करना चाहिए कि क्या वजह रही है कि उसके मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष, दोनों को ही चुनाव में मुँह की खानी पड़ी।

वापस गुजरात का रुख़ करें तो साफ़ दिखता है कि सत्ता की ख़ातिर बीजेपी कुछ भी कर सकती है। इस तथ्य की क्या व्याख्या हो सकती है कि गुजरात मॉडल का हर वक़्त बख़ान करने वाले नरेन्द्र मोदी को गुजरात में प्रचार के लिए इतना अधिक वक़्त लगाना पड़ा, मानो वो देश के प्रधानमंत्री नहीं बल्कि राज्य के मुख्यमंत्री हों। इतना ही नहीं, चुनाव प्रचार के दौरान तो प्रधानमंत्री अपने ‘विकास के गुजरात मॉडल’ की बातें करने से भी कतराते रहे। क्योंकि उन्हें मालूम है कि मौजूदा दौर में टीवी चैनलों से भी ज़्यादा तेज़ी से ख़बरें फैलती हैं, जिससे ये पता चलते देर नहीं लगेगी कि अन्य राज्यों के मुक़ाबले शिक्षा, स्वास्थ्य, आदिवासी कल्याण और ग़रीबी के मोर्चों पर गुजरात कहाँ खड़ा है? सच्चाई तो ये है कि ‘विकास के मोदी मॉडल’ में प्रधानमंत्री के चहेते पूँजीपति दोस्तों को जहाँ एक ओर खुलकर रेवड़ियाँ बाँटी गयी हैं, वहीं दूसरी ओर अमीर और ग़रीब के बीच की खाई बहुत बढ़ गयी है। 1994 में देश के 20 बड़े राज्यों में मौजूद ग़रीबी के लिहाज़ से जहाँ गुजरात का स्थान सातवाँ था, वो 2011 में नीचे गिरकर दसवें स्थान पर जा पहुँचा। इसीलिए आदिवासी और अन्य पिछड़े समुदायों की दशा आज भी दयनीय बनी हुई है और उन्हें दो वक़्त की रोटी के लिए भारी जद्दोज़हद करनी पड़ती है। नर्मदा बाँध की ऊँचाई बढ़ने के बावजूद गुजरात के बड़े हिस्से में किसान सिंचाई के पानी के लिए तरस रहे हैं। इसी तरह, राज्य के बड़े हिस्से को आज भी पर्याप्त बिजली नहीं मिल रही है। इसीलिए ये आश्चर्यजनक नहीं है कि प्रधानमंत्री और बीजेपी को अपने ‘विकास’ के दावों को ताक़ पर रखना पड़ा और पाकिस्तान का दामन थामना पड़ा। लेकिन चुनाव के नतीज़ों ने बता दिया कि क्या झूठ है और क्या अर्धसत्य!

‘मियाँ मुशर्रफ़’ का राग फिर आलापा गया। प्रधानमंत्री ने राम जन्मभूमि से जुड़े मुक़दमें में एक वकील के रूप में रही मेरी भूमिका पर सवाल उठाये। सुप्रीम कोर्ट में 5 दिसम्बर को इसकी सुनवाई हुई थी। कोर्ट में कही गयी मेरी बातों को राष्ट्रीय मुद्दा बनाया गया और उसे काँग्रेस के नज़रिये की तरह पेश किया गया। इससे ऐसा लगा कि चुनाव में किसानों की आत्महत्या, ग़रीबी का स्तर, सामाजिक स्तर में गिरावट, नोटबन्दी का दुष्प्रभाव, नादान तरीक़े से लागू किया गया जीएसटी, असंगठित क्षेत्र की तबाही, सूरत की कपड़ा मिलों से कामग़ार की छँटनी और लाखों अन्य लोगों की रोज़ी-रोटी के छिन जाने, जैसे मुद्दों की कोई अहमियत ही नहीं है।

प्रधानमंत्री ने एक बार भी नोटबन्दी और जीएसटी के दोषपूर्ण क्रियान्वयन के लिए न तो माफ़ी माँगी और न ही अफ़सोस जताया। लेकिन एक काँग्रेसी के घर पर आयोजित हुए रात्रिभोज में पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री ख़ुर्शीद महमूद कसूरी की मौजूदगी को देश के ख़िलाफ़ साज़िश बनाकर पेश किया गया। ख़ुद प्रधानमंत्री ने इसे राष्ट्रद्रोही हरक़त बताया। जबकि उनकी सारी बातें मनगढ़न्त थीं। इसीलिए मतदाताओं ने उनकी तिकड़म को भाँप लिया। उन्हें मालूम है कि किसी पाकिस्तानी मेहमान के साथ डिनर करना राष्ट्रविरोधी नहीं हो सकता। हालाँकि, बीजेपी की अपनी परिभाषा के मुताबिक़, शपथ-ग्रहण समारोह में नवाज़ शरीफ़ का स्वागत करना और उन्हें अचानक जन्मदिन की बधाई देने के लिए लाहौर जा पहुँचना तो निश्चित रूप से राष्ट्रविरोधी होना चाहिए।

गुजरात चुनाव ने एक अन्य संवैधानिक संस्था, चुनाव आयोग की गरिमा को भी काफ़ी नीचे पहुँचा दिया। चुनाव कार्यक्रम के ऐलान में इसलिए देरी की गयी, ताकि प्रधानमंत्री ऐन चुनाव के वक़्त पैकेज़ों की घोषणा कर सके। इसी तरह, चुनाव प्रचार थमने के बाद राहुल गाँधी के टीवी इन्टरव्यू पर तो नोटिस जारी हुए, जबकि प्रधानमंत्री ने वोट डालने के बाद जिस नाजायज़ तरीके से अपना रोड-शो किया, ऐन मतदान वाले दिन जिस तरह से सी-प्लेन की यात्रा की गयी, उससे साफ़ है कि चुनाव आयोग पक्षपातपूर्ण तरीके से काम करता रहा। इसीलिए यदि चुनाव आयोग का ही आचरण पक्षपातपूर्ण रहेगा तो निश्चित रूप से लोकतंत्र ख़तरे में है। मीडिया और ख़ासकर इलेक्ट्रानिक मीडिया की ओर से भी तमाम सवालों पर सफ़ाई आना बाक़ी है।

प्रधानमंत्री और बीजेपी को ये समझना पड़ेगा कि अंकों के हिसाब से तो उन्होंने चुनाव जीत लिया लेकिन दिलों को वो नहीं जीत पाये। दिलों को जीतने के लिए समाज के हरेक तबक़े की ख़ुशहाली और विकास ज़रूरी है। यदि प्रधानमंत्री ने अपनी कार्यशैली बदलकर उन लोगों का दिल जीतने की कोशिश नहीं की जिन्होंने उन्होंने सत्ता दी है तो ये जीत बेमानी है। 2019 में, यही उन्हें हराएगा।

(साभार: डीएनए। लेखक, काँग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री हैं।)

ओपिनियन

संशय भरे आधुनिक युग में हिंदू आदर्श धर्म : थरूर

वह धर्म जो सर्वज्ञानी सृजनकर्ता पर सवाल करता हो वह मेरे विचार से आधुनिक और उत्तर आधुनिक चैतन्य के लिए अनोखा धर्म है।

Published

on

Shashi-Tharoor

न्यूयॉर्क, 21 सितंबर | कांग्रेस सांसद व लेखक शशि थरूर के अनुसार, हिंदू एक अनोखा धर्म है और यह संशय के मौजूदा दौर के लिए अनुकूल है। थरूर ने धर्म के राजनीतिकरण की बखिया भी उधेड़ी।

न्यूयॉर्क में जयपुर साहित्य महोत्सव के एक संस्करण में के बातचीत सत्र के दौरान गुरुवार को थरूर ने कहा, “हिंदूधर्म इस तथ्य पर निर्भर करता है कि कई सारी बातें ऐसी हैं जिनके बारे में हम नहीं जानते हैं।”

मौजूदा दौर में इसके अनुकूल होने को लेकर उन्होंने कहा, “पहली बात यह अनोखा तथ्य है कि अनिश्चितता व संशय के युग में आपके पास एक विलक्षण प्रकार का धर्म है जिसमें संशय का विशेष लाभ है।”

सृजन के संबंध में उन्होंने कहा, “ऋग्वेद वस्तुत: बताता है कि ब्रह्मांड की उत्पत्ति कहां से हुई, किसने आकाश और धरती सबको बनाया, शायद स्वर्ग में वह जानता हो या नहीं भी जानता हो।”

उन्होंने कहा, “वह धर्म जो सर्वज्ञानी सृजनकर्ता पर सवाल करता हो वह मेरे विचार से आधुनिक और उत्तर आधुनिक चैतन्य के लिए अनोखा धर्म है।”

उन्होंने कहा, “उससे भी बढ़कर आपके पास असाधारण दर्शनग्रहण है और चूंकि कोई नहीं जानता कि भगवान किस तरह दिखते हैं इसलिए हिंदूधर्म में हर कोई भगवान की कल्पना करने को लेकर स्वतंत्र है।”

कांग्रस सांसद और ‘व्हाइ आई एम हिंदू’ के लेखक ने उन लोगों का मसला उठाया जो स्त्री-द्वेष और भेदभाव आधारित धर्म की निंदा करते हैं।

मनु की आचार संहिता के बारे में उन्होंने कहा, “इस बात के बहुत कम साक्ष्य हैं। क्या उसका पालन किया गया और इसके अनेक सूत्र विद्यमान हैं।”

उन्होंने उपहास करते हुए कहा, “इन सूत्रों में मुझे नहीं लगता कि हर हिंदू कामसूत्र की भी सलाह मानते हैं।”

थरूर ने कहा, “प्रत्येक स्त्री विरोधी या जातीयता कथन (हिंदू धर्मग्रंथ में) के लिए मैं आपको समान रूप से पवित्र ग्रंथ दे सकता हूं, जिसमें जातीयता के विरुद्ध उपदेश दिया गया है।”

–आईएएनएस

Continue Reading

ओपिनियन

जानिये क्यों गिर रहा है रुपया

Published

on

Rupee Fall

नई दिल्ली, 13 सितम्बर | केंद्र सरकार ने रुपये की गिरावट को थामने की हरसंभव कोशिश करने का भरोसा दिलाया है। इसका असर पिछले सत्र में तत्काल देखने को मिला कि डॉलर के मुकाबले रुपये में जबरदस्त रिकवरी देखने को मिली। हालांकि रुपये में और रिकवरी की अभी दरकार है।

डॉलर के मुकाबले रुपया बुधवार को रिकॉर्ड 72.91 के स्तर तक लुढ़कने के बाद संभला और 72.19 रुपये प्रति डॉलर के मूल्य पर बंद हुआ। इससे पहले मंगलवार को 72.69 पर बंद हुआ था।

रुपये की गिरावट से अभिप्राय डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी आना है। सरल भाषा में कहें तो इस साल जनवरी में जहां एक डॉलर के लिए 63.64 रुपये देने होते थे वहां अब 72 रुपये देने होते हैं। इस तरह रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ है।

शेष दुनिया के देशों से लेन-देन के लिए प्राय: डॉलर की जरूरत होती है ऐसे में डॉलर की मांग बढ़ने और आपूर्ति कम होने पर देशी मुद्रा कमजोर होती है।

एंजेल ब्रोकिंग के करेंसी एनालिस्ट अनुज गुप्ता ने रुपये में आई हालिया गिरावट पर कहा, “भारत को कच्चे तेल का आयात करने के लिए काफी डॉलर की जरूरत होती है और हाल में तेल की कीमतों में जोरदार तेजी आई है जिससे डॉलर की मांग बढ़ गई है। वहीं, विदेशी निवेशकों द्वारा निवेश में कटौती करने से देश से डॉलर का आउट फ्लो यानी बहिगार्मी प्रवाह बढ़ गया है। इससे डॉलर की आपूर्ति घट गई है।”

उन्होंने बताया कि आयात ज्यादा होने और निर्यात कम होने से चालू खाते का घाटा बढ़ गया है, जोकि रुपये की कमजोरी की बड़ी वजह है।

ताजा आंकड़ों के अनुसार, चालू खाते का घाटा तकरीबन 18 अरब डॉलर हो गया है। जुलाई में भारत का आयात बिल 43.79 अरब डॉलर और निर्यात 25.77 अरब डॉलर रहा।

वहीं, विदेशी मुद्रा का भंडार लगातार घटता जा रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार 31 अगस्त को समाप्त हुए सप्ताह को 1.19 अरब डॉलर घटकर 400.10 अरब डॉलर रह गया।

गुप्ता बताते हैं, “राजनीतिक अस्थिरता का माहौल बनने से भी रुपये में कमजोरी आई है। आर्थिक विकास के आंकड़े कमजोर रहने की आशंकाओं का भी असर है कि देशी मुद्रा डॉलर के मुकाबले कमजोर हो रही है। जबकि विश्व व्यापार जंग के तनाव में दुनिया की कई उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राएं डॉलर के मुकाबले कमजोर हुई हैं।”

अमेरिकी अर्थव्यवस्था में लगातार मजबूती के संकेत मिल रहे हैं जिससे डॉलर दुनिया की प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले मजबूत हुआ है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मजबूती आने से विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से अपना पैसा निकाल कर ले जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि संरक्षणवादी नीतियों और व्यापारिक हितों के टकराव के कारण अमेरिका और चीन के बीच पैदा हुई व्यापारिक जंग से वैश्विक व्यापार पर असर पड़ा है।

–आईएएनएस

Continue Reading

ओपिनियन

OPINION: झूठ के नशेड़ी, जन्मपत्री और ईवीएम

Published

on

‘बीजेपी 50 साल तक सत्ता में रहेगी!’ अमित शाह ने ये शिगूफ़ा छोड़ते ही नरेन्द्र मोदी के कान में फुसफुसाया कि ‘साहब, आपकी हिदायत के मुताबिक मैंने 50 साल का जुमला फेंक तो दिया, लेकिन बेहद दुःख के साथ आपको बता रहा हूँ कि 2019 में आपका पतन तय है। लोकसभा चुनाव आप हारने वाले हो!’

ये सुनकर मोदी ऐसे मुस्कुराने लगे जैसे वो अमित भाई से कहना चाहते हों कि ‘बचपना छोड़ो! अच्छा बताओ, तुम्हें कैसे लगा रहा है कि 2019 में हमलोग हारने वाले हैं?’

रुआँसा होकर अमित शाह ने बताया कि ‘मुझे दुनिया के दर्जनों जाने-माने ज्योतिषियों ने आपकी जन्मपत्री देखकर बताया है!’

इतना सुनते ही मोदी ठहाका लगा बैठे तो अमित शाह ने हैरानी से पूछा कि ‘इसमें हँसने की क्या बात है?’

मोदी बोले, ‘अरे अमित भाई, भक्तों को मूर्ख बनाते-बनाते, उनमें झूठ पर झूठ फैलाते-फैलाते अब तुम भी मूर्ख हो चुके हो!’

फिर मोदी ने बताया कि अरे, जिसका…

  • जन्मदिन झूठा
  • चाय बेचने की कहानी झूठी
  • अविवाहित होने का दावा झूठा
  • सारी डिग्रियाँ झूठी
  • कालाधन लाने का दावा झूठा
  • गंगा सफ़ाई का वादा झूठा
  • गोरक्षा का नारा झूठा
  • राम मन्दिर बनाने का वादा झूठा
  • पाकिस्तान को उसकी भाषा में जवाब देने की बात झूठी
  • सालाना दो करोड़ रोज़गार का वादा झूठा
  • महिलाओं को सुरक्षा देने की बात झूठी
  • महँगाई कम करने की बातें झूठीं
  • अच्छे_दिन का नारा झूठा
  • हरेक चुनावी नारा झूठा…

उसके बारे में तुमने ये कैसे मान लिया कि पूरे ब्रह्मांड में कोई ऐसा माई का लाल हो सकता है जो मेरी सही जन्मपत्री बना ले! अरे अमित भाई, मुझे एक सिद्ध ज्योतिषी ने बताया था कि जब तक मैं जनता को झूठे सपने बेचता रहूँगा, जुमलेबाज़ी करता रहूँगा, लम्बी-चौड़ी फेंकता रहूँगा, अपनी ब्रॉन्डिंग पर सारी ताक़त झोंकता रहूँगा, तब तक मेरी सत्ता बनी रहेगी, क्योंकि मैंने भारत के लोगों को झूठ का नशेड़ी बना दिया है! जनता को जब तक अपने झूठ से मूर्ख बनाते रहोगे, तब तक तुम्हारी सत्ता पर कोई संकट नहीं है। इसके अलावा, याद है ना कि हमारे पास ईवीएम है! ये वैसा ही है जैसे फ़िल्म ‘दीवार’ का वो डॉयलॉग कि ‘मेरे पास माँ है!’

Modi Degree

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का निजी और राजनीतिक जीवन भी तरह-तरह के झूठ से ओतप्रोत है। पत्रकार राजीव शुक्ला को सालों पहले दिये गये एक इंटरव्यू के वीडियो में मोदी कहते हैं कि ‘मैं पढ़ा-लिखा नहीं हूँ। मैंने तो दसवीं पास करने के बाद ही घर से भाग गया था।’ तब मोदी ने नहीं बताया कि उन्होंने घर से भागने से पहले चाय भी बेची थी। बाद में प्रधानमंत्री बनने के बाद दुनिया को बताया गया कि मोदी न सिर्फ़ स्नातक हैं वो भी दिल्ली विश्वविद्यालय से, बल्कि उन्होंने गुजरात यूनिवर्सिटी से ‘Entire Political Science’ में एमए भी कर रखा है। इन डिग्रियों के फ़र्ज़ी होने का विवाद गहराया तो अरूण जेटली जैसे शूरमाओं को प्रेस में सफ़ाई देने के लिए आगे आना पड़ा।

इसके बाद, गुजरात के नेता शक्ति सिंह गोहिल ने डंके की चोट पर ख़ुलासा किया था कि नरेन्द्र मोदी के 12 वीं पढ़ाई के लिए एमएन कॉलेज़ में दाख़िला लिया था। तब कॉलेज़ के रज़िस्टर में मोदी की जन्मतिथि 29 अगस्त 1949 लिखी हुई है। जबकि राजनेता के रूप में मोदी का जन्मतिथि 17 सितम्बर 1950 के रूप में पेश किया जाता है।

Modi Degree

गोहिल ने सबूत के रूप में कॉलेज़ के रज़िस्टर की कॉपी भी दिखायी। उन्होंने बताया कि 29 अगस्त 1949 का ही ब्यौरा ही गुजरात विश्वविद्यालय में भी है। तो फिर राजनेता से जुड़े रिकॉर्ड में ये 17 सितम्बर 1950 कैसे हो गया? मोदी की उम्र 13 महीना कैसे सिकुड़ गयी! ये यक्ष प्रश्न आज भी अनुत्तरित ही है।

Modi Degree Controversy

पूरे प्रसंग में मज़े की बात ये भी रही कि मोदी को एमए की डिग्री देने वाले गुजरात विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड में ये जानकारी नहीं है कि मोदी ने स्नातक यानी ग्रेज़ुएशन कब, कहाँ से और किन-किन विषयों में किया था? गोहिल का कहना है कि विश्वविद्यालय से दर्जनों बार सूचना के अधिकार के तहत मोदी का ब्यौरा माँगा गया, लेकिन हमेशा विश्वविद्यालय ने गोपनीयता के आधार पर जानकारी देने से मना कर दिया। इसीलिए गोहिल ने मोदी पर हमला किया कि वो अपने ऐसे दस सहपाठियों का नाम ही बता दें, जिन्होंने उनके साथ स्नातक किया हो।

Mukesh Kumar Singh

मुकेश कुमार सिंह वरिष्ठ पत्रकार

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

Continue Reading
Advertisement
Google
टेक1 hour ago

गलती से भी न करें गूगल से ये सवाल नहीं तो…

राष्ट्रीय2 hours ago

आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं हो सकते: सेना प्रमुख

Tahira Kashyap-
मनोरंजन2 hours ago

आयुष्मान की पत्नी को ब्रेस्ट कैंसर, शेयर की इमोशनल पोस्ट

Jasprit Bumrah
खेल2 hours ago

एशिया कप: लड़खड़ाई पाक की पारी, 60 रन पर गिरे 3 विकेट

CPIM
राष्ट्रीय2 hours ago

भोपाल में 30 सितंबर को गैर भाजपा दलों की बैठक

Anand Sharma
राजनीति3 hours ago

जेटली की सफाई पर कांग्रेस बोली- ‘पीएम को बचाने के लिए झूठ बोल रहे हैं वित्‍तमंत्री’

शहर3 hours ago

Pinkathon 2018 : दिल्ली में 10000 से ज्यादा महिलाएं दौड़ीं

sensex-min (1)
व्यापार3 hours ago

फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस, फेड के फैसले का शेयर बाजार पर रहेगा असर

आतंकी
शहर3 hours ago

त्रिपुरा में हथियार-कारतूस के साथ 3 युवक गिरफ्तार

शहर4 hours ago

जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग पर भारी बारिश से यातायात बाधित

RAJU-min
राष्ट्रीय3 days ago

रक्षा मंत्री के दावे को पूर्व एचएएल चीफ ने नकारा, कहा- भारत में ही बना सकते थे राफेल

Kalidas
ज़रा हटके3 weeks ago

जहां दुनिया का महामूर्ख पैदा हुआ

Homosexuality
ब्लॉग2 weeks ago

समलैंगिकों को अब चाहिए शादी का हक

MODI-SHAH
ब्लॉग4 weeks ago

‘एक देश एक चुनाव’ यानी जनता को उल्लू बनाने के लिए नयी बोतल में पुरानी शराब

man-min (1)
ज़रा हटके2 days ago

इस हॉस्पिटल में भूत-प्रेत करते हैं मरीजों का इलाज

Bharat Bandh MP
ब्लॉग2 weeks ago

सवर्णों का ‘भारत बन्द’ तो बहाना है, मकसद तो उन्हें उल्लू बनाना है!

Jaiphal-
लाइफस्टाइल3 weeks ago

जायफल के ये फायदे जो कर देंगे आपको हैरान…

pm modi
ब्लॉग4 weeks ago

सत्ता के लालची न होते तो नोटबन्दी के फ़ेल होने पर मोदी पिछले साल ही इस्तीफ़ा दे देते!

Maharashtra Police
ब्लॉग3 weeks ago

जब सिंहासन डोलने लगता है तब विपक्ष, ‘ख़ून का प्यासा’ ही दिखता है!

rahul gandhi
चुनाव3 weeks ago

कर्नाटक निकाय चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनी कांग्रेस

rahul gandhi
राजनीति1 day ago

राहुल ने मोदी से पूछा- अब तो बताओ, ओलांद सच कह रहे हैं या झूठ

Nawazuddin-
मनोरंजन1 day ago

नवाजुद्दीन की वेब सीरीज ‘सैक्रेड गेम्स सीजन 2’ का टीजर जारी

kapil sibal
राजनीति2 days ago

सिब्‍बल ने पूछा- क्‍या यूजीसी 8 नवंबर को ‘सर्जिकल स्‍ट्राइक डे’ मनाएगा?

sadak2
मनोरंजन3 days ago

पूजा-आल‍िया संग महेश भट्ट बनाएंगे ‘सड़क 2’, टीजर जारी

Banda doctor
शहर4 days ago

उप्र : चिकित्सक पिटता रहा, एसपी-डीएम ने नहीं उठाया फोन!

rahul gandhi
राजनीति4 days ago

कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज को राहुल ने बताया बीजेपी की तानाशाही

babul
राष्ट्रीय4 days ago

दिव्यांगों के कार्यक्रम में बाबुल सुप्रियो ने दी ‘टांग तोड़ डालने’ की धमकी

nheru-min
राजनीति1 week ago

दीनदयाल की मूर्ति के लिए हटाई गई नेहरू की प्रतिमा

arjun kapoor
मनोरंजन2 weeks ago

अर्जुन कपूर की फिल्म ‘नमस्ते इंग्लैंड’ का गाना ‘तेरे लिए’ रिलीज

mehul-choksi
राष्ट्रीय2 weeks ago

मेहुल चोकसी का सरेंडर से इनकार, कहा- ईडी ने गलत फंसाया

Most Popular