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चुनाव

त्रिपुरा में बोले अमित शाह, राज्‍य में भाजपा की होगी अगली सरकार

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अमित शाह

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष अमित शाह ने सोमवार को कहा कि त्रिपुरा में अगामी 18 फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनाव में गैर वामपंथी मतों को विभाजित कर कांग्रेस, सत्तारूढ़ मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की मदद कर रही है।

शाह ने यहां मीडिया से कहा, “त्रिपुरा में गैर वाम मतों को विभाजित कर कांग्रेस एक तरह से सत्तारूढ़ मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की मदद कर रही है। हालांकि यह भाजपा को अगले सप्ताह के बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में राज्य की सत्ता में आने से नहीं रोक सकेगा।”

शाह ने कहा, “मणिपुर और असम में भाजपा का छोटा आधार था, लेकिन हम वहां सत्ता में आए। इसी तरह पहले हमारी पार्टी के पास त्रिपुरा में में उतना अधार नहीं था और राज्य के 2013 में हुए चुनाव में भाजपा को मामूली 1.54 प्रतिशत मत हासिल हुआ था। इस दफा भाजपा एक बड़ी राजनीतिक शक्ति है और हम लगातार अपना आधार बढ़ा रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रसिद्धी और भाजपा के काम ने देश के नए इलाकों और सभी क्षेत्रों में पार्टी के आधार को बढ़ाने में मदद की है।” शाह ने कहा कि त्रिपुरा देश में भाजपा शासित 20वां राज्य बनने जा रहा है।

उन्होंने कहा, “भाजपा की बढ़ती ताकत से माकपा कैडर में डर का माहौल है और वे भाजपा सदस्यों पर हमले कर रहे हैं। पुलिस और प्रशासन का एक हिस्सा माकपा कैडर के इशारे पर काम कर रहा है।”

माकपानीत वाम मोर्चे की सरकार पर निशाना साधते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि वित्त आयोग की सिफारिशों के बाद त्रिपुरा सरकार ने केंद्र सरकार से विभिन्न परियोजनाओं और योजनाओं के लिए 18 हजार करोड़ और 950 करोड़ रुपये की सहायता प्राप्त की।

भाजपा अध्यक्ष ने कहा, “वाम सरकार केंद्रीय निधि का दुरुपयोग कर रही है। 25 साल पहले बेरोजगार लोगों की संख्या 25 हजार थी और 25 साल बाद माकपा सरकार के शासन में यह आंकड़ा बढ़कर सात लाख हो गया है।”

शाह ने कहा कि भाजपा सरकार ने मणिपुर में सरकारी कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू की हैं। त्रिपुरा में सत्ता में आने के बाद इस राज्य में भी लागू की जाएंगी।

शाह ने कहा, “वाम शासन के तहत त्रिपुरा काफी पीछे चला गया है। भाजपा के सत्ता में आने के बाद त्रिपुरा देश में एक मॉडल राज्य के रूप में जाना जाएगा।” त्रिपुरा की 60 सदस्यीय विधानसभा के लिए रविवार 18 फरवरी को मतदान होगा और मतों की गिनती तीन मार्च को की जाएगी।

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चुनाव

भाजपा ने एकसाथ चुनाव की रपट खारिज की

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BJP

नई दिल्ली, 14 अगस्त | भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) ने मंगलवार को अगले वर्ष की शुरुआत में लोकसभा और 11 राज्य विधानसभाओं के चुनाव को एकसाथ कराने की रपट खारिज कर दी। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने पार्टी मुख्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, “भाजपा ऐसी किसी भी गलतफहमी को खारिज करती है।”

उन्होंने कहा कि जहां तक ‘एक देश, एक चुनाव’ के विचार का सवाल है, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने सोमवार को विधि आयोग को लिखे अपने पत्र में इस मामले में सभी हितधारकों के साथ सकारात्मक चर्चा करने की अपील की है।

पात्रा ने कहा, “जैसा कि मीडिया के कुछ वर्गो की ओर से रपट किया जा रहा है, शाह के पत्र में, लोकसभा और 11 राज्य विधानसभाओं के चुनाव एकसाथ कराने का कोई जिक्र नहीं है।”

उन्होंने कहा कि भाजपा ने ‘एक देश, एक चुनाव’ के विचार का समर्थन किया है, लेकिन किसी को भी इस बारे में गलतफहमी नहीं फैलानी चाहिए।

पात्रा ने कहा, “लोकतंत्र में किसी भी तरह के सुधार के लिए सकारात्मक चर्चा अवश्य होनी चाहिए। उन्होंने इसके लिए चर्चा करने का आह्वान किया है और कहा है कि इस मामले में सहमति बनती है तो, यह देश के लिए अच्छा होगा।”

भाजपा नेता ने कहा कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ‘एक देश, एक चुनाव’ का समर्थन किया है।

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चुनाव

एकसाथ चुनाव के लिए लोकसभा भंग करें मोदी : कांग्रेस

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Ashok Gehlot

नई दिल्ली, 14 अगस्त | कांग्रेस ने मंगलवार को कहा कि यदि एक साथ चुनाव कराए जाने हैं तो कुछ अन्य राज्यों में विधानसभा चुनाव पहले कराए जाए और साथ ही लोकसभा को भंग कर दिया जाए।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने कहा, “संविधान में संशोधन के बगैर एकसाथ चुनाव संभव नहीं है। चुनावों को एकसाथ कराने का सिर्फ एक तरीका है और वह यह है कि मोदीजी को आम चुनाव पहले कराने के लिए लोकसभा भंग कर देना चाहिए। हम इसका स्वागत करेंगे।”

गहलोत की यह टिप्पणी उस रपट के बाद आई है, जिसमें कहा गया है कि सरकार अगले साल कुछ राज्यों में पहले व कुछ राज्यों में देरी कर 11 राज्यों के विधानसभा चुनाव के साथ लोकसभा चुनाव कराने पर विचार कर रही है।

गहलोत ने कहा, “अगर वे लोकसभा को पहले भंग कर ऐसा करते हैं तो हम लोकसभा व राज्य विधानसभा चुनाव दोनों एक साथ लड़ने के लिए तैयार हैं।”

उन्होंने कहा कि सरकार ऐसा करने के प्रति गंभीर व ईमानदार नहीं है और इसका सिर्फ राजनीतिक रूप से फायदा लेना चाहती है।

उन्होंने कहा, “वे सिर्फ इसे दिखा रहे हैं कि वे राष्ट्र के बारे में बहुत चिंतित हैं और चुनाव पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है। वे सिर्फ इस पर राजनीति खेल रहे हैं।”

राजस्थान की मतदाजा सूचियों में गड़बड़ी के बारे में शिकायत करने के लिए निर्वाचन आयोग गए गहलोत के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा ने कहा कि राज्य विधानसभाओं की अवधि बढ़ाने के लिए संविधान संशोधन की जरूरत होगी।

तन्खा ने यह भी कहा कि अगर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में चुनाव टालने की कोशिश करती है तो वह अदालत जाएंगे।

–आईएएनएस

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चुनाव

मध्‍य प्रदेश, राजस्‍थान और छत्‍तीसगढ़ में कांग्रेस को बहुमत: ओपिनियन पोल

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Congress-reuters
प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

आगामी विधानसभा चुनाव में मध्य प्रदेश, राजस्‍थान और छत्‍तीसगढ़ में बीजेपी को झटका लग सकता है। ऐसा मानना है एबीपी न्यूज और सी-वोटर के ओपिनियन पोल सर्वे का। सर्वे की मानें तो कांग्रेस इस बार पूर्ण बहुमत के साथ सत्‍ता में आ रही है। 15 वर्षों से सत्ता पर काबिज मध्‍य प्रदेश की शिवराज सिंह और छत्‍तीसगढ़ की रमन सिंह सरकार के खिलाफ जबर्दस्त एंटी इन्कमबेंसी फैक्टर हावी होना बताया गया है।

तीनों ही राज्यों में बीजेपी सत्ता में है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में पिछले 15 वर्षों से बीजेपी की ही सरकार है।

इस सर्वे में कहा गया है कि राजस्‍थान, मध्‍य प्रदेश और छत्‍तीसगढ़ में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत मिल सकता है। एमपी में उसे 230 में से 117 सीटें, राजस्‍थान में 200 में से 130 सीटें और छत्‍तीसगढ़ में 90 में से 54 सीटें मिल सकती हैं। वहीं बीजेपी को मध्‍य प्रदेश में 106, छत्‍तीसगढ़ में 33 और राजस्‍थान में 57 सीटे पर सिमट सकती है।

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