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स्वास्थ्य

वायु प्रदूषण की जानकारी देगा ‘एयरलेंस डेटा’ मोबाइल एप

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प्रौद्योगिकी स्टार्टअप कंपनी परसेपियन ने एक नया मोबाइल एप ‘एयरलेंस डेटा’ लांच किया है, जो लोगों को निजी स्तर पर वायु प्रदूषण की जानकारी देगी। यह एप डाउनलोड के लिए मुफ्त उपलब्ध है।

कंपनी ने एक बयान में कहा कि अभी तक जो एप उपलब्ध हैं, वे शहर के स्तर पर वायु प्रदूषण की जानकारी देते हैं, लेकिन ‘एयरलेंस डेटा’ स्थानीय स्तर पर वायु प्रदूषण के आंकड़े मुहैया कराएगी और हर किसी को वायु प्रदूषण की सार्थक जानकारी मुहैया कराएगा।

कंपनी ने कहा कि यह एप सैटेलाइट, ट्रैफिक आंकड़े, मौसम पूर्वानुमान और विभिन्न सेंसरों के मिले आंकड़ों के आधार पर वायु प्रदूषण का सटीक आंकड़ा मुहैया कराने में सक्षम है। कंपनी ने शहर के विभिन्न इलाकों में खुद के सेंसर लगाए हैं।

शुरुआत में यह एप सिर्फ दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के लिए लांच किया गया है। बाद में इसे देश के अन्य भागों के लिए भी लांच किया जाएगा। परसेपियन के सहसंस्थापक डेवायन साहा ने बताया, धुंध एक विकट समस्या है, जिससे लोग पीड़ित हैं, क्योंकि प्रदूषण काफी बढ़ गया है।

इसे ध्यान में रखते हुए हमने ‘एयरलेंस डेटा’ मोबाइल एप लांच किया है। इससे पहले साल 2017 के अक्टूबर में परसेपियन ने एक नेसल प्यूरिफिकेशन डिवाइस लांच किया था। यह डिवाइस सांस में ली जानी वाली हवा को फिल्टर करती है।

–आईएएनएस

स्वास्थ्य

गोभी और ब्रोकली खाने से नहीं होगा आंतों का कैंसर…

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गोभी या ब्रोकली जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां खाने से आंत स्वस्थ रहते हैं और आंतों के कैंसर से बचाव होता है। एक नए अध्ययन में यह जानकारी दी गई है।

चूहों पर किए गए अध्ययन से पता चला कि जिन्हें इन्डोल 3 कार्बिनोल (आई3सी) युक्त आहार दिया गया, उनमें आंत में सूजन या आंतों के कैंसर से बचाव हुआ। गोभी और ब्रोकली में भी आई3सी पाया जाता है, जो एक एक्रियल हाइडोकार्बन रिसेप्टर (एएचआर) नाम के प्रोटीन को सक्रिय करता है, जिससे आंतों के कैंसर से बचाव होता है।

एएचआर एक पर्यावरणीय सेंसर के रूप में काम करता है तथा प्रतिरक्षा थंत्र और आंतों की एपिथिलिएल कोशिकाओं को संकेत देता है कि सूजन से बचाव करने की कोशिश करें और आंत में पाए जाने वाले खरबों बैक्टीरिया से प्रतिरक्षा प्रदान करता है।

शोध प्रमुख ब्रिटेन के फ्रांसिस क्रिक इंस्टीट्यूट की अमीना मेतीजी का कहना है, “जब कैंसर ग्रस्त चूहों को आई3सी से भरपूर डायट खिलाया गया, तो उनमें ट्यूमर की संख्या में कमी देखी गई। यह शोध इम्युनिटी नाम के जर्नल में प्रकाशित किया गया है।

–आईएएनएस

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स्वास्थ्य

डिजिटल डिवाइसों की नीली रोशनी से अंधेपन का खतरा

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प्रतीकात्मक फोटो

वाशिंगटन| डिजिटल डिवाइसों से निकलनेवाली नीली रोशनी अंधेपन का कारण बन सकती है। शोधकर्ताओं ने यह निष्कर्ष दिया है।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ की सोमवार की रिपोर्ट में बताया गया कि अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ टोलेडो में किए गए एक शोध के मुताबिक, लगातार नीला प्रकाश देखने से आंखों की प्रकाश के लिए संवेदनशील कोशिकाएं में जहरीले अणु उत्पन्न हो सकते हैं, जो धब्बेदार अपघटन का कारण बन सकता है। यह अमेरिका में अंधापन के प्रमुख कारणों में से एक है।

यूनिवर्सिटी के रसायन और जैवरसायन विभाग के सहायक प्रोफेसर अजित करुणाथने ने बताया, “यह कोई रहस्य नहीं है कि नीला प्रकाश हमारे देखने की क्षमता को हानि पहुंचाता है और आंख की रेटिना को नुकसान पहुंचाता है। हमारे शोध से यह पता चलता है कि ऐसा कैसे होगा। हमें उम्मीद है कि इससे इसे रोकने के लिए दवाइयां बनाने में मदद मिलेगी और नए प्रकार का आई ड्रॉप बनाया जा सकेगा।”

धब्बेदार अपघटन का मुख्य कारण फोटोरिसेप्टर कोशिकाओं का मरना है, जो प्रकाश के प्रति संवेदनशील कोशिकाएं होती हैं।

–आईएएनएस

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स्वास्थ्य

कैंसर के बारे में जागरूकता फैलाएगी अनूठी पहल ‘तरंग’

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देश में कैंसर पीड़ित माताओं और बच्चों की संख्या बढ़ने के मद्देनजर पूर्वी दिल्ली के पटपड़गंज स्थित मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल ने ‘तरंग’ नाम की एक अनूठी पहल की शुरुआत की।

तरंग’ में छोटे बच्चों के साथ उनके माता-पिता, शिक्षकों और साथ ही शहर के प्रमुख डॉक्टरों ने भी भाग लिया। कार्यक्रम में ड्राइंग, फैशन शो, ग्रुप डांस जैसी प्रतियोगिताओं में विवेकानंद इंटरनेशनल स्कूल आईपी एक्सटेंशन, सेंट एंड्रयूज स्कॉट सीनियर सेकेंडरी स्कूल, हिलवुड अकादमी और रॉकमैटिस अकादमी के कई छात्रों ने भाग लिया।

इस दौरान यहां डॉक्टरों की एक टीम उपस्थित थी, जिन्होंने बच्चों व उनके अभिभावकों को कैंसर के बारे में जागरूक किया। मैक्स हैल्थकेयर, जोन 2 के डायरेक्टर नीरज मिश्रा ने कहा, एक स्वस्थ जीवनशैली को अपनाते हुए नियमित जांच और रखरखाव से इस जानलेवा बीमारी को रोका जा सकता है।

महिलाओं को स्तन कैंसर और सर्वाइकल कैंसर जैसे दो कैंसर सबसे अधिक प्रभावित करते हैं, समय पर रोकथाम से हम जल्दी से ठीक हो सकते हैं। दवाइयों के जरिए कैंसर को जड़ से खत्म किया जा सकता है और एक कीमती जान बच सकती है।

डॉक्टरों की टीम ने उपस्थित सभी लोगों को नियमित स्क्रीनिंग और स्वस्थ जीवनशैली के महत्व के बारे में बताते हुए कैंसर के खिलाफ लड़ाई में शामिल होने के लिए भी प्रोत्साहित किया।

‘तरंग’ को बचपन में होने वाले कैंसर से बचने के लिए छोटे पैमाने पर सहायता प्रदान करने के लिए शुरू किया गया है, जिसमें बच्चों और उनके अभिभावकों को भी शामिल किया गया है। इस मुहिम का उद्देश्य कैंसर जागरूकता को बढ़ावा देना है।

–आईएएनएस

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