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स्वास्थ्य

बाहर के बजाए घरों में वायु प्रदूषण 10 से 30 फीसदी अधिक

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दिन के दौरान घरों के अंदर वायु प्रदूषण बाहर से भी बदतर हो सकता है। यह वैक्यूमिंग, खाना पकाने, धूल झाड़ने या कपड़ों का ड्रायर चलाने जैसे कामों के कारण हो सकता है।

एक अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है। अध्ययन के मुताबिक घरों में प्रदूषण का स्तर बाहरी प्रदूषण की तुलना में 10 से 30 गुना अधिक हो सकता है। घरों के अंदर वायु प्रदूषण के नतीजे स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं, खासकर अस्थमा पीड़ित युवाओं और बुजुर्गों के लिए।

शोधकर्ताओं ने यह भी देखा कि प्रत्येक घर में वायु प्रदूषण की परिस्थितियां अलग-अलग होती हैं। हार्ट केयर फाउंडेशन (एचसीएफआई) के अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल ने कहा, “वायु प्रदूषण एक अदृश्य हत्यारा है। कुछ घरों में प्रदूषण का स्तर बाहरी प्रदूषण की तुलना में 10 से 30 गुना अधिक हो सकता है।

रोजमर्रा के उपभोक्ता उत्पादों और घरेलू चीजों जैसे पेंट, पालतू जानवरों से एलर्जी और कुकिंग गैस आदि वायु प्रदूषण का अतिरिक्त स्रोत हो सकते हैं। यह मानव शरीर के अधिकांश अंगों और प्रणालियों को प्रभावित कर सकते हैं।”

उन्होंने कहा, पर्यावरण में मौजूद कणों का सीधा वास्ता फेफड़ों से पड़ता है, जिसके कारण सीओपीडी, अस्थमा और फेफड़ों के कैंसर जैसे कई श्वसन रोग हो सकते हैं। धूल के कण जैसे प्रदूषक फेफड़ों की सूजन, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सेल साइकल डेथ को प्रभावित कर सकते हैं।

प्रदूषण की वजह से अस्थमा और सीओपीडी वाले लोगों में परेशानी हो सकती है। डॉ. अग्रवाल ने कहा, “इनडोर वायु प्रदूषण की समस्या को हल करना इतना आसान भी नहीं है। आदर्श समाधान तो यह है कि सभी खिड़कियों को खोला जाए और इनडोर प्रदूषकों को बाहर निकलने दिया जाए।

लेकिन, प्रदूषित शहरों में यह मुश्किल है क्योंकि बाहरी प्रदूषक घर के अंदर आ सकते हैं। डॉ. अग्रवाल ने कुछ सुझाव देते हुए कहा, “घर व कार्यालय में नमी को नियंत्रित करें, बाथरूम और रसोई में एगजॉस्ट फैन लगाएं, घरेलू उपकरणों को ठीक से साफ करें और धूल से बचाकर रखें, कालीन को साफ और सूखा रखें, तकिए, कंबल और बिस्तर को नियमित रूप से 60 डिग्री सेल्सियस तापमान पर धोया करें, टेक्सटाइल कारपेटिंग की जगह लकड़ी, टाइल या लिनोलियम का फर्श लगाएं, वैक्यूम क्लीनिंग और गीले पोछे से सफाई करना अच्छा तरीका है। “

–आईएएनएस

स्वास्थ्य

सिनेमा, संग्रहालय जाने से बुजुर्गों में अवसाद का जोखिम हो सकता है कम

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सिनेमा, थिएटर या संग्रहालय जैसी सांस्कृतिक गतिविधियों के नियमित रूप से संपर्क में रहने से बुजुर्ग अवसाद से दूर रह सकते हैं। एक नए अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है। अवसाद एक बड़ा मुद्दा है, जिससे लाखों लोग प्रभावित होते हैं, विशेषकर बुजुर्ग।

अध्ययन में सामने आया कि वे लोग जो प्रत्येक दो-तीन महीने में फिल्में, नाटक या प्रदर्शनी देखते हैं, उनमें अवसाद विकसित होने का जोखिम 32 फीसदी कम होता है, वहीं जो महीने में एक बार जरूर यह सब चीजें करते हैं उनमें 48 फीसदी से कम जोखिम रहता है।

ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन की वरिष्ठ रिसर्च एसोसिएट डेजी फैनकोर्ट ने कहा, “लोग मनोरंजन के लिए सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ते हैं लेकिन हमें इसके व्यापक फायदों के बारे में जागरूकता फैलाने की जरूरत है।”

ब्रिटिश जर्नल ऑफ साइकियाट्री में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, इन सांस्कृतिक गतिविधियों की शक्ति सामाजिक संपर्क, रचनात्मकता, मानसिक उत्तेजना और सौम्य शारीरिक गतिविधि के संयोजन में निहित है, जो उन्हें प्रोत्साहित करती है।

फैनकोर्ट के मुताबिक, अगर हम तनाव या कुछ अलग सा महसूस करना शुरू कर देते हैं तो सांस्कृतिक जुड़ाव वह सामान्य चीज है, जिससे हम हमारे मानसिक स्वास्थ्य की सक्रिय रूप से मदद कर सकते हैं ताकि वह उस बिंदु तक न पहुंचे, जहां हमें किसी पेशेवर चिकित्सा मदद लेने की जरूरत आ पड़े।
अध्ययन के लिए, शोधकर्ताओं ने 50 से ज्यादा की उम्र के 2,48 से अधिक लोगों का अध्ययन किया।

–आईएएनएस

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राष्ट्रीय

ऑनलाइन दवा खरीद पर रोक

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प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

दिल्‍ली हाईकोर्ट ने दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पर रोक लगा दी है। ये रोक पूरे देश के लिए है। इससे पहले मद्रास हाईकोर्ट भी इस पर रोक लगाने का आदेश दे चुका है।

दिल्‍ली उच्‍च न्‍यायालय के मुख्‍य न्‍यायाधीश जस्टिस राजेंद्र मेनन और जस्टिस वीके रॉय की खंडपीड ने एक पीआईएल की सुनवाई पर फैसला सुनाया।

गौरतलब है कि सितंबर में स्वास्थ्य मंत्रालय ने दवाओं की ऑनलाइन बिक्री का एक ड्राफ्ट तैयार बनाया था। इस ड्राफ्ट के अनुसार, ऑनलाइन दवा की बिक्री के लिए ई फार्मेसी को एक केंद्रीय प्राधिकार के पास पंजीकरण करवाना होगा। इन कंपनियों को मादक द्रव्यों की बिक्री की अनुमति नहीं होगी। ऑनलाइन फार्मेसी को केंद्रीय औषध मानक नियंत्रण संगठन में भी पंजीकरण करवाना जरूरी है लेकिन दवा कंपनियां ऐसे करने से बचती हैं। ऑनलाइन दवा बिक्री के लिए ठोस कानून न होने से कंपनियां मनमानी पर उतर आई हैं।

WeForNews

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स्वास्थ्य

घर बैठे स्वास्थ्य के खतरों के बारे में जानकारी देगी ‘डीएनए वाईज’

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लोगों को उनके स्वास्थ्य के खतरों के बारे में जानकारी देने और आहार व कसरत में बदलावों के चयन का निर्णय लेने में मदद करने के लिए इंडस हेल्थ प्लस ने हाल ही में ‘डीएनए वाईज’ नाम से एक स्वास्थ्य सेवा लॉन्च की है।

इंडस हेल्थ प्लस के संयुक्त प्रबंध निदेशक अमोल नायकवडी ने कहा, “डीएनए वाईज व्यक्ति के डीएनए के अनुसार उसके स्वास्थ्य को होने वाले खतरे व खाने और कसरत की आदतों, गुण विशेषों का विश्लेषण करती है। इससे लोगों को उनकी स्वास्थ्य जांच का नियोजन अपने व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार करने में आसानी होती है और उस आधार पर वे एक सुरक्षित जीवनशैली का चयन कर सकते हैं।

उन्होंने कहा, “इसके साथ ही वह विभिन्न रोगों की तरफ अपने शरीर का जेनेटिक रुझान समझने से जीवनशैली में बदलाव कर आने वाले रोग को टाल सकता हैं।”नायकवडी ने कहा, “विशेष स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ और सस्ते दरों में उपलब्ध कराने के अपने लक्ष्य का अगला पड़ाव हमने डीएन वाईज जांच के माध्यम से पार किया है।”

डीएनए वाईज जांच, लार का नमूना देकर की जानेवाली एक बेहद आसान जांच है, जो कि लोग घर बैठे आराम से कर सकते हैं। ये पैकेज पूरे भारत में 14,999 रुपये की कीमत पर उपलब्ध है।

–आईएएनएस

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