राष्ट्रीय

यूपी के बाद नासिक के अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से 55 बच्चों की मौत

फाइल फोटो

उत्तर प्रदेश और झारखंड के बाद अब महाराष्ट्र के नासिक सिविल अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से बच्चों की मौत का मामला सामने आया है।

नासिक के सिविल अस्पताल में एक महीने के भीतर 55 बच्चों की मौत हो गई है। लेकिन प्रशासन इसमें किसी भी मेडिकल चूक की बात से इनकार कर रहा है। इस साल अप्रैल से लेकर अब तक हॉस्पिटल में 187 बच्चों की मौत हो चुकी है।

अस्पताल के अतिरक्त सिविल सर्जन डॉ. एमजी होले ने बताया कि अस्पताल में सिर्फ 18 इन्क्यूबेटर हैं जबकि यहां आने वाले बीमार बच्चों की संख्या कहीं ज्यादा होती है।

ज्यादातर निजी अस्पताल भी जब बच्चों को बचा पाने में समर्थ नहीं हो पते तब उन्हें सिविल अस्पताल में भेज देते हैं। आसपास आदिवासी इलाके होने की वजह से कम वजन के और इंफेक्शन वाले बच्चे भी इसी अस्पताल में लाए जाते हैं ऐसे में मौत का आंकड़ा बढ़ जाता है।

अस्पताल के रिकॉर्ड के मुताबिक, जून महीने में अस्पताल में 262 बीमार बच्चे इलाज के लिए भर्ती किए गए थे जिनमे से 35 की मौत हुई थी, जबकि जुलाई महीने में 314 बीमार बच्चों में से 46 की मौत हुई थी और अगस्त में 346 बीमार बच्चे इलाज के लिए लाए गए थे उनमें से 55 को नहीं बचाया जा सका।

इस साल अब तक इसी अस्पताल में 187 बच्चों की मौत हो चुकी है। हैरानी की बात है कि बीमार बच्चों की संख्या को देखते हुए अस्पताल की एक और विंग के लिए 21 करोड़ रुपये का बजट भी पास है लेकिन वहां मौजूद पेड़ों की वजह से मामला लटका पड़ा है।

उधर, महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. दीपक सावंत सिर्फ 18 इन्क्यूबेटर को सरकारी मानक पर सही बताते हुए बाहर से आने बच्चों की अवस्था और इन्फेक्शन को मौत के लिए जिम्मेदार बता रहे हैं। उन्होंने कहा कि मामले में जरुरी कदम उठाने के लिए समिति बनाई गई है जल्द ही नई रणनीति बनाई जाएगी।

इससे पहले यूपी के गोरखपुर के बीआरडी हॉस्पिटल में तो सिर्फ अगस्त के महीने में ही 415 बच्चों की मौत हो गई थी। इस मामले पर योगी सरकार घिर गई थी। कुछ बच्चे ऐसे थे जिनकी मौत कथित तौर पर ऑक्सीजन की कमी की वजह से हुई थी।

वही उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले के एक सरकारी अस्पताल में एक महीने में 49 बच्चों की मौद के बाद चीफ मेडिकल अफसर (सीएमओ), चीफ मेडिकल सुपरिटेंडेंट (सीएमएस) और अन्य डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गयी है।

wefornews bureau

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