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चुनाव

AAP का ऐलान- मेघालय विधानसभा चुनाव में कम से कम 35 सीटों पर उम्मीदवार खड़े करेगी पार्टी

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फाइल फोटो

आम आदमी पार्टी ने कहा कि वह मेघालय विधानसभा का चुनाव लड़ेगी और कम से कम 35 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े करेगी। सोमवार को 60 सदस्यीय प्रदेश विधानसभा के लिए इस साल की पहली छमाही में चुनाव होंगे। छह मार्च को मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल समाप्त हो रहा है।

आप के प्रदेश अध्यक्ष वांश्वा नोंगत्दू ने संवाददाताओं से कहा कि हम अगले चुनाव में 35 उम्मीदवार खड़े करने की उम्मीद कर रहे हैं क्योंकि हमारे जीतने की अच्छी संभावना है। आप नेता ने यह भी विश्वास जताया कि पार्टी आम लोगों को अपने उम्मीदवार के तौर पर उतारकर अगली सरकार का गठन करेगी।

उन्होंने कहा कि हम आम आदमी हैं और आम आदमी ही हमारे उम्मीदवार होंगे, हमारे पास कुछ सेवानिवृत्त अधिकारी, कुछ बुद्धजीवी हैं, जो चुनाव लड़ना चाहते हैं और हम आम आदमी पार्टी के उम्मीदवारों के तौर पर इन उम्मीदवारों को तरजीह देते हैं।

नोंगत्दू ने उम्मीदवारों की पहली सूची की घोषणा करते हुए कहा कि पीटर एईबोरलांग डोहक्रूद मावलाई से दोरास रामसिएज मावकिरवात से वंडर लापलांग उमसनिंग और डेबरिक्ट बिनोन नोंगपोह सीट से चुनाव लड़ेंगे। लापलांग उमसनिंग सीट पर कांग्रेस अध्यक्ष सेलेस्टिन लिंगदोह के खिलाफ खड़े होंगे।

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शिवराज ने कहीं गले में घंटी तो नहीं बांध ली!

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भोपाल, 22 सितंबर | मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य में एससी/एसटी एक्ट का दुरुपयोग न होने देने और बगैर जांच के किसी की गिरफ्तारी नहीं होने देने का ऐलान कर नई बहस को जन्म तो दे दिया, लेकिन अब अपने ही बयान को दोहराने से शिवराज बच रहे हैं। सवाल उठ रहा है कि शिवराज ने अपने ही गले में घंटी तो नहीं बांध ली!

सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया था कि एससी/एसटी एक्ट के तहत तब तक गिरफ्तारी न हो, जब तक जांच पूरी नहीं होती। मगर इस फैसले के विरोध में देशव्यापी उग्र प्रदर्शनों के बाद केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को अध्यादेश के जरिए बदला और संविधान में संशोधन कर व्यवस्था कर दी कि शिकायत लिखाते ही मामला दर्ज कय् आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा और उसे छह माह तक जमानत नहीं दी जाएगी।

इस बीच सवर्णो के लगातार आंदोलन और उनके गुस्से को देखते हुए मुख्यमंत्री ने अपनी ही पार्टी की केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ बयान दे दिया है और सवाल उठने पर अपनी बात को दोहराने से परहेज करने लगे हैं।

मप्र उच्च न्यायालय के पूर्व महाधिवक्ता आनंद मोहन माथुर ने आईएएनएस से कहा, “संसद द्वारा किया गया संशोधन देश में लागू होता है, संविधान में हर व्यक्ति के अधिकार व सीमाएं तय हैं, इसके चलते कोई भी मुख्यमंत्री संविधान के खिलाफ बात नहीं कर सकता। साथ ही जो बात मुख्यमंत्री ने कही है, उसे वे अमल में नहीं ला सकते। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वोट की राजनीति के चलते समाज में विभेद और बंटवारा किया जा रहा है।”

देश के वरिष्ठ अधिवक्ता और कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने यहां संवाददाताओं के सवाल पर कहा, “कोई भी व्यक्ति संविधान से ऊपर नहीं हो सकता। संसद में अध्यादेश के जरिए संशोधन किया गया है। जहां तक शिवराज सिंह चौहान की बात है, उन्होंने सिर्फ बयान ही तो दिया है। जैसा उन्होंने कहा है, वैसा कर नहीं पाएंगे, यह बात वह भी अच्छी तरह जानते हैं।”

वहीं भाजपा प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह का कहना है कि मुख्यमंत्री ने जो बात कही है, उसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।

केंद्र सरकार द्वारा अधिनियम में किए गए संशोधन के बाद मध्यप्रदेश में सवर्णो ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आलम यह है कि राज्य के किसी न किसी हिस्से से लगातार विरोध प्रदर्शन की खबरें आ रही हैं। जो करणी सेना ‘पद्मावत’ फिल्म का विरोध करने के बाद विश्राम कर रही थी, वह एक बार फिर से सड़कों पर उतर आई है।

भाजपा और कांग्रेस, दोनों के जनप्रतिनिधियों को विरोध का सामना करना पड़ रहा है। निशाने पर सबसे ज्यादा भाजपा के नेता और मुख्यमंत्री चौहान रहे हैं। चौहान की जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान कहीं पथराव तो कहीं, काले झंडे दिखाए गए।

संस्कृति बचाओ मंच के संभाग संयोजक ऐश्वर्य पांडे का कहना है कि सवर्णो के बढ़ते विरोध के चलते मुख्यमंत्री डर गए और उन्होंने शिकायत की जांच के बाद गिरफ्तारी की बात कह दी है, मगर सवाल यह उठता है कि क्या केंद्र सरकार द्वारा संविधान में किए गए संशोधन पर कोई राज्य सरकार सिर्फ ‘जुबान चलाकर’ बदलाव कर सकती हैं? यह तो लोगों में भ्रम पैदा करने की कोशिश भर है, जो ज्यादा असर नहीं करने वाली।

वहीं संविधान और संसदीय कार्यप्रणाली के जानकार गिरिजा शंकर का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकार संशोधन को पूरी तरह जनता के सामने नहीं रख पा रही है। भारतीय दंड विधान (सीआरपीसी) में यह प्रावधान है कि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद जांच अधिकारी जांच करे और जरूरी समझे तो गिरफ्तारी करे। इसलिए सर्वोच्च न्यायालय ने जांच से पहले गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी, उसे संसद में अध्यादेश के जरिए बदला गया है। लिहाजा, सरकार को वास्तविकता सामने लानी चाहिए, जिसमें वह नाकाम रही है।

वर्तमान हालात को देखते हुए और मुख्यमंत्री चौहान के रुख में आए बदलाव से एक बात लगने लगी है कि चौहान ने कहीं गलत बयान तो नहीं दे दिया। ऐसा इसलिए, क्योंकि शुक्रवार की रात चौहान होशंगाबाद में थे और जब पत्रकारों ने उनसे पूर्व में दिए बयान और संविधान की व्यवस्था का जिक्र करते हुए प्रश्न किया तो वे हाथ जोड़ते हुए आगे बढ़ गए, जवाब नहीं दिया।

केंद्र के संशोधन के चलते राज्य की लगभग 80 फीसदी आबादी में भाजपा के प्रति नाराजगी बढ़ रही है। इससे भाजपा को लगता है कि आगामी विधानसभा चुनाव में इससे उसे ज्यादा नुकसान हो सकता है। निचले स्तर से आ रही रिपोर्ट के आधार पर सरकार और संगठन दोनों संभलकर अपनी राय जाहिर कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री और पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष राकेश ने इस संबंध में तमाम नेताओं को दिशा-निर्देश भी जारी कर दिए हैं। सभी से कहा गया है कि इस संशोधन और आंदोलनों पर कोई राय जाहिर न करें।

पार्टी के तमाम निर्देशों के बावजूद भाजपा के एक विधायक मोहन यादव तो ऐसे हैं, जिन्हें लगता है कि सवर्णो के इस आंदोलन के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ है, जो प्रदेश और देश में अशांति फैलाना चाहती हैं।

मुख्यमंत्री अपनी घोषणा और जानकारों की राय के चलते सवालों के घेरे में हैं। शिवराज भले ही कुछ कहते रहें, मगर पुलिस को तो वही करना होगा जो व्यवस्था संविधान में है। यह तो ठीक वैसा ही है-‘दिल बहलाने के लिए गालिब यह ख्याल अच्छा है।’

–आईएएनएस

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चुनाव

मायावती छत्तीसगढ़ चुनाव में अजित जोगी का देंगी साथ

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मायावती-अजीत जोगी (फाइल फोटो)

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने यहां गुरुवार को कहा कि छत्तीसगढ़ में होने वाले विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी पूर्व मुख्यमंत्री अजित जोगी की पार्टी ‘जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जोगी)’ के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी। बसपा गठबंधन के मुख्यमंत्री उम्मीदवार अजित जोगी का समर्थन करेगी। मायावती ने लखनऊ में अजित जोगी के साथ संयुक्त पत्रकार वार्ता कर यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बसपा ने फैसला लिया है कि छत्तीसगढ़ में होने वाले विधानसभा चुनाव में वह ‘जकांछ (जोगी)’ के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी।

मायावती ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 35 विधानसभा सीटों पर बसपा और 56 सीटों पर जोगी की पार्टी चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा कि मीडिया में तरह-तरह की खबरें सामने आ रही हैं, लेकिन वह जो बता रही हैं यही सच है, बाकी अफवाह है।

बसपा प्रमुख ने कहा, “हमारा साफतौर पर मानना है कि बसपा उसी पार्टी के साथ समझौता करेगी जो दलित, पिछड़े एवं आदिवासी लोगों के लिए काम करती हो ओर उनके कल्याण में जुटी हुई हो। हम यह भी देखेंगे कि उस पार्टी की सोच दलितों को लेकर कैसी है।”

मायावती ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में पिछले 15 वर्षो से भाजपा की सरकार है, लेकिन वहां गरीबों, आदिवासियों और पिछड़ों के हितों के लिए कुछ काम नहीं हुआ है। भाजपा सिर्फ मीडिया में ही बड़ी-बड़ी बातें करती नजर आती है।

बसपा प्रमुख ने कहा, “छत्तीसगढ़ में हम अजित जोगी के साथ इसीलिए गठबंधन कर रहे हैं, क्योंकि वे वहां के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं और उन्हें सरकार चलाने का भी अनुभव है। उनके कार्यो को देखते हुए पार्टी ने उनके साथ मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है।”

–आईएएनएस

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मप्र चुनाव के लिए बसपा की पहली सूची जारी

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प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

भोपाल। मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव के लिए बहुजन समाजवादी पार्टी (बसपा) ने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी। बसपा ने ऐलान किया कि वो सभी 230 सीटों पर अपने उम्‍मीदवार उतारेगी।

इस सूची में 22 उम्मीदवारों के नाम हैं। बसपा की पहली सूची में जिन 22 सीटों के लिए उम्मीदवार घोषित किए गए हैं, इनमें तीन वर्तमान विधायक हैं।

जारी सूची के अनुसार, मुरैना जिले के सबलगढ़ से लाल सिंह केवट, अम्बाह से सत्य प्रकाश, भिंड से संजीव सिंह कुशवाह, सेवढ़ा से लाखन सिंह यादव, करैरा से प्रागीलाल जाटव, अशोकनगर से बाल कृष्ण महोबिया, छतरपुर जिले के चंदला से पुष्पेंद्र अहिरवार को उम्मीदवार बनाया गया है।

बसपा के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार के अनुसार, दमोह के पथरिया से राम बाई परिहार, जबेरा से डेलन सिंह धुर्वे, सतना के रैगांव से उषा चौधरी, अमर पाटन से छंगे लाल कोल, रामपुर बघेलान से रामलखन सिंह पटेल, रीवा के सिरमौर से राम गरीब कोल, सेमरिया से पंकज सिंह पटेल, देवतलाब से सीमा सिंह, मनगंवा से शीला त्यागी, सिंगरौली के चितरंगी से अशोक गौतम, शहडोल के धोहनी से अवध प्रताप सिंह, उमरिया के बांधवगढ़ से शिव प्रसाद कोल, कटनी के बहोरीबंद से गोविंद पटेल और जबलपुर के सीहोरा से बबीता गोटिया को उम्मीदवार बनाया है।

बसपा के उम्मीदवारों की यह सूची राष्ट्रीय महासचिव व प्रदेश प्रभारी रामअचल राजभर और प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार के दस्तखत से जारी की गई है।

–आईएएनएस

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