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एयर इंडिया के प्लेन में उड़ान के दौरान गिरी खिड़की

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अमृतसर से दिल्ली आ रहे एयर इंडिया के विमान में उस समय अचानक हड़कंप मच गया, जब उड़ान के दौरान एयरक्राफ्ट की खिड़की का पैनल अंदर गिर गया, जिससे तीन पैसेंजर घायल हो गए।

इस हादसे में कुछ ऑक्सिजन मास्क भी खुल गए। बोइंग 787 ड्रीमलाइनर (VTANI) में सफर के करीब 10-15 मिनट यात्रियों के लिए किसी आफत से कम नहीं रहे। एयरलाइन अथॉरिटीज और एविएशन एजेंसियां भी हैरान रह गए और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। यह घटना गुरुवार की है।

सूत्रों ने बताया, ‘AI 462 में अचानक झटका लगने से एक यात्री का सिर ऊपर के पैनल से टकराया, जिसके बाद उन्हें और दो अन्य यात्रियों को चोटें आईं। यात्री ने शायद सीट बेल्ट नहीं बांध रखी थी। विडों पैनल (18-A) नीचे आ गया, लेकिन शुक्र है बाहर की विंडो नहीं टूटी। यह देख यात्रियों में डर बैठ गया।’

एयरक्राफ्ट में कुछ ऑक्सिजन मास्क भी गिर गए थे, वहीं सीट 12-U के ऊपर लगे पैनल कवर पर भी क्रैक्स नजर आए। एयर इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘यह बड़ा अजीब हादसा है, एयर इंडिया और डीजीसीए इसकी जांच कर रहे हैं।’

दिल्ली लैंड करते ही तीनों घायल पैसेंजरों को अस्पताल ले जाया गया। एयर इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘हमारे इमर्जेंसी रेस्पॉन्स और एंजल्स ने घायलों का पूरा ध्यान रखा और उन्हें अस्पताल पहुंचाया।

जिस यात्री का सिर पैनल से टकराया था उन्हें टांके लगे हैं और अन्य दो की चोटें गंभीर नहीं थीं। सबकी हालत स्थिर है और प्राथमिक उपचार के बाद उन्होंने कनेक्टिंग फ्लाइट्स पकड़ लीं। हमारे एंजल्स सफर में उनके साथ रहे।’ डीजीसीए ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है और एयरक्राफ्ट ऐक्सिडेंट इन्वेस्टिगेशन बोर्ड को इसकी जानकारी दे दी है।

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दिल्ली : न्यूनतम मजदूरी वृद्धि दोबारा बहाल

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Minimum wage increase

नई दिल्ली, 18 अक्टूबर | दिल्ली सरकार ने गुरुवार को न्यूनतम मजदूरी वृद्धि को दोबारा बहाल किया। दिल्ली उच्च न्यायालय ने चार अगस्त को न्यूनतम मजदूरी वृद्धि को अमान्य घोषित कर दिया था। प्रदेश मंत्रिमंडल ने न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि के साथ-साथ सरकार द्वारा परिचालित बसों में इस्तेमाल होने वाले मेट्रो कार्ड पर 10 फीसदी की रियायत देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी प्रदान की।

मंत्रिमंडल की बैठक के बाद उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, “दिल्ली सरकार, बोर्ड और निगमों द्वारा जिन्हें न्यूनतम मजदूरी दरों पर सीधे अनुबंध पर नियोजित किया गया या दिल्ली सरकार के विभिन्न कार्यों के लिए ठेकेदारों द्वारा जिन्हें नियोजित किया गया उनको चार अगस्त से पहले विद्यमान दरों पर वेतन मिलता रहेगा।”

दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा चार अगस्त को आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा नगर में उच्च मजूदरी तय करने वाली मार्च 2017 की अधिसूचना को निरस्त करने के बाद यह कदम उठाया गया है।

प्रदेश सरकार द्वारा गुरुवार को लिए गए फैसले के अनुसार, अकुशल कामगारों का न्यूनतम वेतन 9,724 रुपये से बढ़ाकर 13,896 रुपये मासिक कर दी गई है। वहीं, अर्धकुशल कामगारों का न्यूनतम मासिक वेतन 10,764 रुपये से बढ़ाकर 15,296 रुपये और कुशल कामगारों का न्यूनतम मासिक वेतन 11,830 रुपये से बढ़ाकर 16,858 रुपये कर दिया गया है।

न्यूनतम वेतन की ये दरें एक अप्रैल 2017 से प्रभावी हैं, लेकिन बाद में उच्च न्यायालय ने अपने आदेश के जरिए इसे निरस्त कर दिया था।

उच्च न्यायालय ने कहा कि न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी वाली मार्च 2017 की अधिसूचना पूरी तरह से त्रुटिपूर्ण है और यह फैसला जल्दबाजी में लिया गया है।

सिसोदिया ने कहा, “वेतन में की गई बढ़ोतरी के अनुसार दिल्ली सरकार उन लोगों के वेतन की भरपाई भी करेगी, जिन्हें उच्च न्यायाल के आदेश के बाद दो महीने के दौरान चाहे तो वेतन नहीं मिला या उनके वेतन में कटौती की गई है।”

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के पास राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में न्यूनतम मजदूरी दरों से ऊपर की राशि देने का पूरा अधिकार है।

प्रदेश के मुख्य सचिव को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि 31 अक्टूबर से पहले प्रत्येक कर्मचारी को पैसा मिल जाना चाहिए ताकि वह सम्मान के साथ दिवाली मना सके।

मंत्रिमंडल ने परिवहन विभाग के उस प्रस्ताव को भी मंजूरी दी, जिसमें दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के कार्ड का इस्तेमाल डीटीसी या क्लस्टर बसों में करने वाले यात्रियों को किराये में 10 फीसदी की रियायत देने को कहा गया है।

–आईएएनएस

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बिहार की शाही लीची दुनियाभर में अब जीआई टैग के साथ बिकेगी

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Lychee-
File Photo

बिहार के मुजफ्फरपुर की प्रसिद्ध शाही लीची को नई पहचान मिल गई है। अब देश-दुनिया में शाही लीची की बिक्री जीआई टैग के साथ होगी। बौद्धिक सम्पदा कानून की तहत शाही लीची को जीआई टैग मिला है।

ढाई सालों की जांच-पड़ताल में संतुष्ट होने के बाद शाही लीची को भौगोलिक उपदर्शन रजिस्ट्री ने टैग दिया है। बिहार लीची उत्पादक संघ ने जून 2016 को जीआई रजिस्ट्री कार्यालय में शाही लीची के जीआई टैग के लिए आवेदन किया था। मुजफ्फरपुर राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र के निदेशक विशालनाथ ने गुरुवार को बताया कि जीआई टैग मिलने से शाही लीची की बिक्री में नकल या गड़बड़ी की आशंकाएं काफी कम हो जाएंगी।

जीआई टैग मिलने से खुश विशालनाथ ने कहा कि मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, वैशाली व पूर्वी चंपारण के किसान ही अब शाही लीची के उत्पादन का दावा कर सकेंगे। ग्राहक भी ठगे जाने से बच सकेंगे। बिहार लीची उत्पादक संघ के अध्यक्ष बच्चा प्रसाद सिंह ने बताया कि काफी परिश्रम के बाद बिहार की शाही लीची को जीआई टैग मिल गया है।

उन्होंने बताया कि जीआई टैग देने वाले निकाय ने शाही लीची का सौ साल का इतिहास मांगा था। उन्होंने बताया कि कई साक्ष्य प्रस्तुत करने पर पांच अक्टूबर को शाही लीची पर जीआई टैग लग गया। जियोग्राफिकल आइडेंटिफि केशन किसी उत्पाद को दिया जाने वाला एक विशेष टैग है।

जीआई टैग उसी उत्पाद को दिया जाता है, जो किसी विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र में उत्पन्न होता है। लीची की प्रजातियों में ऐसे तो चायना, लौगिया, कसैलिया, कलकतिया सहित कई प्रजातियां है परंतु शाही लीची को श्रेष्ठ माना जाता है। यह काफी रसीली होती है। गोलाकार होने के साथ इसमें बीज छोटा होता है।

स्वाद में काफी मीठी होती है। इसमें खास सुगंध होता है।बिहार के मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, वैशाली व पूर्वी चंपारण शाही लीची के प्रमुख उत्पादक क्षेत्र हैं। देश में कुल लीची उत्पादन का आधा से अधिक लीची का उत्पादन बिहार में होता है। आंकड़ों के मुताबिक बिहार में 32,000 हेक्टेयर में लीची की खेती की जाती है।

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खौफनाक! तांत्रिक दंपति ने सिद्धि प्राप्ति के नाम पर बेटे की बलि दी

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TOTKA
प्रतीकात्मक तस्वीर

अंधविश्वास में अंधे हुए एक दंपति ने तांत्रिक सिद्धि के नाम पर अपने मासूम बेटे की बलि चढ़ा दी। मामला बिहार से सामने बिहार के बांका जिले का है। वारदात को अंजाम देने के बाद से आरोपी तांत्रिक दंपति घर से फरार है।

दरअसल, मामला बांका जिले के बेलहर स्थित टेंगरा गांव का है। तांत्रिक दंपति ने अपने मासूम बेटे के सिर पर कील ठोककर बलि चढ़ा दी। जिस शख्स ने भी इस बाबत घटना के बारे में सुना वह कांप औऱ सिहर उठा। ग्रामीणों का कहना है कि मृतक बालक के पिता योगेंद्र पंडित पुराने तांत्रिक है। लोगों की झाड़-फूंक व तांत्रिक विधि से इलाज करने के लिए अक्सर वह दिल्ली सहित बिहार, झारखंड व उत्तर प्रदेश के जिलों में जाता रहा है। अंधविश्‍वास में फंसे लोग उसे झाड़-फूंक के लिए बुलाते रहे हैं।

बुधवार आलासुबह पंडित के तीन वर्षीय बेटे का शव झाड़ियों में खून से लथपथ अवस्था में पड़ा हुआ मिला। तांत्रिक पति और पत्नी गांव में मासूम की निर्दयता से हत्या की चर्चा होते सुन तभी से फरार है। उन्होंने कहा कि तंत्र सिद्धी की प्राप्ति के लिए दंपति ने अपने पुत्र की बलि चढ़ा दी।

जानकारी के मुताबिक, योगेंद्र पंडित ने पहली पत्नी की मृत्यु के बाद दूसरी शादी कर ली औऱ पिछले कई वर्षों से तांत्रिक योगेंद्र पंडित और उसकी दूसरी पत्नी मुनिया देवी तंत्र विद्या की सिद्धि में जुटे थे। दंपति आए दिन घर से बाहर रहते थे औऱ तंत्र की पट्टी ओढ़े थे। मंगलवार सुबह दंपति ने घर पहुंचकर तंत्र साधना आरंभ की। इसी दौरान दंपति ने तीन साल के मासूम बेटे गुलिया कुमार के सिर में कील ठोक कर उसकी नरबलि चढ़ा दी।

बालक की मौत की खबर ग्रामीणों को लगी तो उसके घर के आसपास लोगों की भीड़ जमा हो गई। कुछ लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दे दी। इसके बाद दोनों पति-पत्नी बेटे के शव को एक झाड़ी में फेंक कर वहां से फरार हो गए। बताया जाता है योगेन्द्र ने मुनिया को तांत्रिक विद्या सिखाने के चक्कर में वर्ष 2013 में उसके पति की ही बलि चढ़ा दी थी। उसके शव को कुएं में डाल दिया औऱ बाद में उसने मुनिया से शादी कर ली थी।

हैरानी की बात यह है कि पुलिस मामले को रफा-दफा करने में जुटी हुई है। थानाध्यक्ष का कहना है पुलिस को घटना की जानकारी नहीं है। हालांकि, बाद में उन्होंने पुलिस को घटनास्थल पर भेज कर मामले की जांच कराने की बात कही।

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