Connect with us

स्वास्थ्य

’85 फीसदी लोग 30 की उम्र से पहले स्वास्थ्य बीमा लेने के पक्ष में’

एक पहलू जिसने भारतीयों को सबसे ज्यादा चिंता में डाला है, वह प्रदूषण है। वायु प्रदूषण से पिछले कुछ सालों में लोगों की सेहत सबसे ज्यादा खराब हुई है। यह हालात दिन पर दिन बदतर होते जा रहे हैं।

Published

on

HEALTH CARE

नई दिल्ली, 9 जनवरी | एक रिपोर्ट में इस बात का दावा किया गया है कि देश की हेल्थकेयर प्रणाली में लोगों का भरोसा और कम हुआ है। 96.5 प्रतिशत लोगों का हेल्थकेयर प्रणाली पर विश्वास नहीं है। 67.8 प्रतिशत लोग अस्पताल पर भरोसा नहीं करते। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्वास्थ्य देखभाल की बढ़ती कीमतों के कारण भारतीयों का झुकाव स्वास्थ्य बीमा के प्रति बढ़ा है। 62.8 प्रतिशत भारतीयों का विश्वास है कि हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेना बेहद जरूरी है और करीब 85 प्रतिशत लोग यह मानते हैं कि स्वास्थ्य बीमा 30 साल की उम्र तक ले लेना चाहिए।

‘इंश्योरेंस : एन इनवेस्टमेंट इन हेल्थ’ शीर्षक से प्रकाशित गोकी-इंडिया फिट की रिपोर्ट में यह बातें सामने आईं हैं।

प्रिवेंटिव हेल्थकेयर इकोसिस्टम गोकी ने बुधवार को पांचवीं इंडिया फिट रिपोर्ट 2019 जारी की। इंडिया फिट रिपोर्ट 2019 को सात लाख से ज्यादा गोकी यूजर्स की स्वास्थ्य संबंधी रिपोर्ट के एक साल लंबे अध्ययन के बाद तैयार किया गया है। यह अपने तरह की पहली रिपोर्ट है जिसका दावा है कि यह भारतीयों के स्वास्थ्य और लाइफस्टाइल का संपूर्ण विवरण पेश करती है।

गोकी ने एक बयान में कहा कि यह रिपोर्ट भारतीयों के स्वास्थ्य की विभिन्न पैमानों पर जांच करती है, जिसमें स्वास्थ्य रक्षा के लिए उठाए गए कदम, लाइफस्टाइल से उपजने वाली बीमारियां (डायबिटीज, दिल की बीमारियां और हाइपरटेंशन), बीएमआई (बॉडी मास इंडेक्स), पोषण, पानी, तनाव, नींद, आंतों की सेहत, रोग प्रतिरक्षा, धूम्रपान और शराब का सेवन आदि शामिल हैं। इस रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि भारतीय हेल्थ इंश्योरेंस के बारे में क्या सोचते हैं और क्या इसे स्वास्थ्य में निवेश के तौर पर देखा जा सकता है?

रिपोर्ट से ये संकेत मिलता है कि बीमा पॉलिसी के प्रति बढ़ती जागरूकता और जरूरत के बावजूद सर्वेक्षण में भाग लेने वाले 20 प्रतिशत लोगों ने अभी भी स्वास्थ्य बीमा नहीं कराया है। इस बारे में आम धारणा यह है कि बीमा प्रणाली काफी भ्रामक है। यह एक प्रमुख कारण है जो लोगों को हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेने के लिए हतोत्साहित करती है। इसके साथ ही स्वास्थ्य बीमा की ऊंची लागत की वजह से बहुत से लोग हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी नहीं खरीदते।

रिपोर्ट में बताया गया कि करीब 90 प्रतिशत लोगों का यह मानना है कि स्वस्थ लोगों को अपनी इंश्योरेंस पॉलिसी पर काफी कम प्रीमियम देना चाहिए। 70 प्रतिशत लोग प्रीमियम पर डिस्काउंट हासिल करने के लिए इंश्योरेंस कंपनियों के साथ स्वास्थ्य संबंधी आंकड़े और रिपोर्ट शेयर करने के लिए तैयार हैं।

कंपनी ने बताया कि सर्वेक्षण में भाग लेने वाले लोगों ने यह अटूट विश्वास जताया कि कैशलेस हॉस्पिटलाइजेशन (87.9 प्रतिशत) हेल्थ इंश्योरेंस का सबसे बड़ा लाभ है। इसके बाद सबसे बड़ा लाभ बीमा से मेडिकल बिलों का भुगतान (67.7 प्रतिशत) हो जाना है। हेल्थ इंश्योरेंस कराने वाले व्यक्तियों को अच्छे अस्पतालों में इलाज (59.0 प्रतिशत) कराने की सुविधा मिलती है।

बहुत से लोग कोई खास पॉलिसी खरीदने का फैसला इसलिए करते हैं क्योंकि इससे उन्हें अच्छे अस्पतालों के नेटवर्क में इलाज कराने (42.3 प्रतिशत) की सुविधा मिलती है। इसके अलावा लोग किसी खास बीमा कंपनी से इसलिए इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदते हैं क्योंकि उन्हें आसानी से क्लेम मिल जाता है (41.9 प्रतिशत)। आसानी से सुलभ होने वाले अस्पतालों में इलाज कराने की सुविधा मिलने की संभावना से (40.3 प्रतिशत) लोग स्वास्थ्य बीमा खरीदना पसंद करते हैं। कम लागत, अच्छी कवरेज और लाभ, आसान नियम और शर्तें भी लोगों को स्वास्थ्य बीमा खरीदने के लिए आश्वस्त करने के सबसे बड़े कारकों में से एक हैं।

रिपोर्ट से यह भी संकेत मिलता है कि 20 से 45 वर्ष के आयु वर्ग के लोग एक बार लाइफस्टाइल बीमारियों से पीड़ित होते हैं, जिसमें डायबिटीज, बीपी, दिल की बीमारियों, थायराइड, तीव्र जीआई और एसिडिटी शामिल हैं। पिछले दो सालों में लोगों में लाइफस्टाइल संबंधी बीमारियों में काफी बढ़ोतरी हुई है। इस साल लोगों में कोलेस्ट्रोल बढ़ने के मामलों में 10.1 प्रतिशत से 14.1 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। हाईब्लडप्रेशर के रोगियों में भी बढ़ोतरी हुई है। यह 9 प्रतिशत से बढ़कर 12 प्रतिशत हो गया है।

रिपोर्ट में बताया गया कि लाइफस्टाइल संबंधी बीमारियों में हुई बढ़ोतरी और इलाज कराने के बढ़ते खर्च ने लोगों में हेल्थकेयर सिस्टम के प्रति भरोसे का अभाव उत्पन्न किया है। इससे लोग अपने स्वास्थ्य की रक्षा के प्रति बहुत ज्यादा सतर्क हुए हैं।

गोकी इंडिया फिट रिपोर्ट 2019 से यह संकेत मिलता है कि 2017 की तुलना में 2019 में लोग अपनी सेहत ठीक रखने के लिए लोग सुबह दौड़ लगाने की ओर अधिक प्रेरित हुए हैं। 2017 में 22 प्रतिशत लोग अपनी सेहत की खातिर दौड़ लगाते थे। अब यह आंकड़ा 33 प्रतिशत तक पहुंच गया है। अपनी सेहत को ठीक रखने के लिए साइकिल चलाने के प्रति भी लोग ज्यादा प्रेरित हुए हैं। अपनी सेहत को ठीक रखने की कवायद में अब लोग ज्यादा घंटों तक सोने लगे हैं। वे आराम की ओर बहुत ज्यादा ध्यान देने लगे हैं। इस रिपोर्ट से यह भी खुलासा हुआ है कि भारतीय अब ज्यादा सोने लगे हैं। 2017 में जहां भारतीय एक दिन में 6 घंटे 32 मिनट की नींद लेते थे। इस साल वह औसत रूप में एक दिन में 6 घंटे 51 मिनट सोने लगे हैं।

शहरों के आधार पर, बेंगलुरु के लोग सेहतमंद होने के मामले में सबसे आगे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक बेंगलुरु ने मुंबई को पछाड़ते हुए भारत के सबसे सेहतमंद शहरों की लिस्ट में टॉप पर जगह बनाई है।

एक पहलू जिसने भारतीयों को सबसे ज्यादा चिंता में डाला है, वह प्रदूषण है। वायु प्रदूषण से पिछले कुछ सालों में लोगों की सेहत सबसे ज्यादा खराब हुई है। यह हालात दिन पर दिन बदतर होते जा रहे हैं।

इंडिया फिट रिपोर्ट के नतीजों से पता चलता है कि वायु, जल और भोजन की गुणवत्ता को देखते हुए पुणे सबसे ज्यादा रहने लायक शहरों में से एक है। वायु प्रदूषण के संदर्भ में दिल्ली सबसे प्रदूषित शहरों में से एक है।

‘इंडिया फिट रिपोर्ट 2019’ के नतीजों पर टिप्पणी करते हुए गोकी के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी विशाल गोंडल ने कहा, “स्वास्थ्य रक्षा में लोगों का भरोसा और कम हुआ है। स्वास्थ्य रक्षा प्रणाली को फिर से दुरुस्त करने की बहुत आवश्यकता है। हमारा लक्ष्य लोगों को बहुत सक्रिय और इलाज संबंधी स्वास्थ्य रक्षा प्रणाली से निषेधात्मक स्वास्थ्य रक्षा प्रणाली की ओर ले जाना है।”

–आईएएनएस

स्वास्थ्य

पेट की अतिरिक्त चर्बी मस्तिष्क को पहुंचा सकती है नुकसान

Published

on

FAT
File Photo

चिकित्सकों का कहना है कि पेट की अतिरिक्त चर्बी आपके मस्तिष्क में ग्रे मैटर की मात्रा को कम कर सकती है और अतिरिक्त वजन मस्तिष्क के विशिष्ट क्षेत्रों में सिकुड़न से जुड़ा होता है।

इसके साथ ही मोटापे के रोगियों में हृदय रोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और डिस्लिपिडेमिया का भी खतरा बढ़ जाता है। हार्टकेयर फाउंडेशन (एचसीएफआई) के अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल ने कहा, “सामान्य वजन का मोटापा हमारे देश में एक नई महामारी है।

इसका एक प्रमुख कारण आज की जीवनशैली है। ऑन-द-गो और तेज-रफ्तार जीवन का मतलब है कि लोग नाश्ते को छोड़ देते हैं और बाकी पूरा दिन अस्वास्थ्यकर, क्विक फिक्स रिफाइंड कार्ब्स वाला भोजन खाते हैं। पेट के चारों ओर एक इंच अतिरिक्त वसा हृदय रोग की संभावना को 1.5 गुना बढ़ा सकती है।”

उन्होंने कहा, “पुरुषों में 90 सेमी और महिलाओं में 80 सेंटीमीटर से अधिक का उदर रोग एक संकेत है कि व्यक्ति भविष्य में दिल के दौरे की चपेट में आ सकता है। पुरुषों में 20 वर्ष की आयु के बाद और महिलाओं में 18 वर्ष की आयु के बाद पांच किलोग्राम से अधिक वजन नहीं बढ़ना चाहिए।

50 साल की आयु के बाद किसी के वजन की निगरानी करना और उसे उचित रूप से कम करना भी अनिवार्य है।”डॉ. अग्रवाल ने कहा, “एक बार जब किसी व्यक्ति का कद बढ़ना बंद हो जाता है, तो उसके अंगों का बढ़ना बंद हो जाता है और केवल मांसपेशियां ही एक हद तक निर्माण कर पाती हैं।

वसा का जमाव एकमात्र कारण है जो उस चरण के बाद शरीर के वजन को बढ़ाता है।”उन्होंने कहा, “जो लोग मोटे हैं, उन्हें परिष्कृत कार्बोहाइड्रेट के सेवन को सीमित करने का लक्ष्य रखना चाहिए क्योंकि वे रक्त शर्करा के स्तर और इंसुलिन के उत्पादन को बढ़ाते हैं।

इंसुलिन प्रतिरोध वाले लोगों में, इस वृद्धि से आगे वजन बढ़ सकता है। इसके अलावा, हर दिन लगभग 30 से 45 मिनट शारीरिक गतिविधि करने का लक्ष्य रखें, सप्ताह में पांच बार।”

डॉ. अग्रवाल ने कुछ सुझाव देते हुए कहा, “हर दिन व्यायाम करें और स्वस्थ आहार का सेवन करें, सभी सात रंगों और छह स्वादों का मिश्रण भोजन में शामिल करें।

किसी भी रूप में रिफाइंड चीनी का सेवन न करें, क्योंकि यह रक्त प्रवाह में अधिक आसानी से अवशोषित हो सकती है और आगे की जटिलताओं का कारण बन सकती है। ध्यान और योग जैसी गतिविधियों के माध्यम से तनाव को कम करें।”

उन्होंने कहा, “प्रतिदिन एक खाद्य पदार्थ छोड़ें ताकि खाद्य प्रतिजन या फूड एंटीजेनिसिटी का ध्यान रखा जा सके। अगर आप गेहूं के प्रति संवेदनशील हैं तो आपको गेहूं पेट यानी व्हीट बैली की समस्या हो सकती है और आपको अपने भोजन की थाली से गेहूं को हटाना पड़ सकता है।”

— आईएएनएस

Continue Reading

स्वास्थ्य

‘देश में 30 फीसदी बढ़ सकता है दूध उत्पादन’

Published

on

Milk
File Photo

भारत दूध उत्पादन में अग्रणी देशों में शुमार है। यह तब है जब मैस्टाइटिस बीमारी की वजह से दूध उत्पादन पर खासा असर पड़ता है और अगर इस बीमारी पर लगाम लग जाए तो देश में 30 फीसदी दूध उत्पादन बढ़ जाएगा और किसानों की आय भी 30 से 35 फीसदी बढ़ जाएगी।

मूफार्म के संस्थापक परम सिंह ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “औसतन 1000 पशुओं की जांच में 600 में मस्टाइटिस की समस्या देखी जाती है और इस समस्या को दूर कर देश में दूध उत्पादन में 30 फीसदी की वृद्धि हो सकती है।”

स्तन में आई सूजन को मस्टाइटिस या स्थानीय भाषा में थनैला कहा जाता है। इसकी वजह से डेयरी किसानों को 30 से 50 फीसदी तक दूध उत्पादन का नुकसान उठाना पड़ता है। एक अनुमान के मुताबिक इससे डेयरी उद्योग को लगभग 52.6 करोड़ डॉलर का नुकसान होता है।

भारत में दूध उत्पादन का औसत महज तीन लीटर प्रति पशु है, जबकि यही औसत ऑस्ट्रेलिया में 16 और इजरायल में 36 लीटर प्रति पशु है।

प्रति पशु दूध उत्पादन में भारत को अग्रणी बनाने की दिशा में काम कर रहे मूफार्म के संस्थापक परम सिंह ने कहा, “क्लिनिकल मस्टाइटिस के बारे में किसानों को पता ही नहीं होता।

पांच लीटर दूध देने वाली गाय या भैंस जब तीन लीटर दूध देने लगती है तो किसान समझते हैं कि यह मौसम में बदलाव या किसी अन्य कारण से हो रहा है। जबकि इसकी वजह मस्टाइटिस हो सकती है और इसे थोड़ी सजगता से दूर किया जा सकता है।”

उन्होंने कहा, “मस्टाइटिस डेयरी पशुओं में पाया जाने वाला घातक संक्रमण है, जो इन पशुओं की स्तन ग्रंथियों को प्रभावित करता है। यह संक्रामक बैक्टीरिया के कारण होता है, जिसकी वजह से दूध का उत्पादन घट जाता है।

मवेशी के दूध की मात्रा और गुणवत्ता कम हो जाती है, कभी-कभी इसके कारण पशु की मृत्यु तक हो सकती है।”सिंह ने कहा, “एक अनुमान के अनुसार, भारत में मस्टाइटिस के कारण डेयरी उद्योग को लगभग 52.6 करोड़ डॉलर का नुकसान होता है।

मास्टाइटिस एक बड़ी समस्या है, लेकिन इस पर नियंत्रण संभव है। भारतीय डेयरी किसानों में जागरूकता की कमी है। वे मवेशियों की देखभाल के लिए आज भी सदियों पुरानी प्रथाओं का इस्तेमाल करते हैं।”

उन्होंने कहा, “डेयरी किसानों को मवेशियों के स्वास्थ्य के बारे में जागरूक कर इन खामियों को दूर किया जा सकता है। हमने उनकी दशा सुधारने और डेयरी सेक्टर से जुड़ी समस्याओं के हल के लिए मॉडल को टेक्नोलॉजी से जोड़ दिया है और इसे एप से कनेक्ट कर दिया है।

अब इस टेक्नोलॉजी से जु़ड़े किसान को अपने हर पशु के बारे में अद्यतन जानकारी मिलती रहेगी।”उन्होंने कहा कि मूफार्म किसानों को मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से सहायता देती है तथा प्रशिक्षण सत्रों एवं जागरूकता शिविरों के माध्यम से लास्ट माईल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करती है।

उन्होंने कहा, “यह टेक्नोलॉजी और एक्सटेंशन का अनूठा मॉडल है, जिसमें डेयरी किसानों को अपने मोबाइल एप पर नियमित रूप से एलर्ट मिलते हैं, समय समय पर मवेशी के दूध की जांच कर मस्टाइटिस की पहचान की जाती है, डेयरी विशेषज्ञों द्वारा किसानों को प्रशिक्षण दिया जाता है।

इन सभी गतिविधियों का संचालन ग्रामीण स्तर के उद्यमी करते हैं, जिन्हें किसानों को डेयरी प्रथाओं पर शिक्षित करने के लिए मूफार्म एप्लीकेशन के बारे में प्रशिक्षण दिया जाता है।”

परम सिंह ने कहा, “आपको जानकर हैरानी होगी कि जब हमारे कार्यकर्ता ने राजपुरा, पंजाब में डेयरी विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में मस्टाइटिस जांच की, 65 फीसदी मवेशियों में इसके परिणाम पॉजिटिव आए।

यानी संक्रमित मवेशी के कारण किसान की मासिक आय में 4,600 रुपये का नुकसान हो रहा था।”उन्होंने कहा कि मूफार्म 2020 तक भारत के दो लाख डेयरी किसानों को प्रशिक्षित करेगी, और पशु पोषण जैसे क्षेत्रों में किसानों का कौशल बढ़ाने में मदद करेगी।

आईएएनएस

Continue Reading

स्वास्थ्य

कैल्शियम के कण दे सकते हैं दिल के रोग का संकेत

Published

on

Heart Disease

दिल की धमनी की दीवारों में चिपके कैल्शियम के कण, दिल से जुड़ी बीमारियों का संकेत दे सकते हैं, खासतौर से भारत सहित दक्षिण एशियाई देशों के पुरुषों में। इससे इलाज के तरीके विकसित करने में मदद मिल सकती है।

कैलिफोर्निया-सैन फ्रांसिस्को विश्वविद्यालय (यूसीएसएफ) के शोधकर्ताओं के दल के अनुसार, दक्षिण एशिया के लोगों में दिल संबंधी बीमारियां (कार्डियोवेस्कुलर डिजीज) होने की आशंका ज्यादा रहती है। 

दुनियाभर में दिल से जुड़ी बीमारियों के 60 फीसदी से ज्यादा मरीज इस क्षेत्र से आते हैं।

दिल से जुड़ी बीमारियां अन्य नस्ल व जातीय समूहों की तुलना में कम उम्र के लोगों में उच्च रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल व मधुमेह जैसे दूसरे जोखिम कारक भी विकसित करती हैं।

इसके अलावा दक्षिण एशियाई पुरुषों (8.8 फीसदी) में अपनी महिला समकक्षों (3.6 फीसदी) की तुलना में कैल्शियम के जमा (कैल्शिफिकेशन) होने की उच्च दर पाई गई है। 

यूसीएसएफ की प्रोफेसर अलका कनाया ने कहा, “कोरोनरी धमनी में कैल्शियम की मौजूदगी व बदलाव सजातीय जनसंख्या में जोखिम कारकों के पूर्व सूचना में सहायक हो सकती है व स्टेटिन व दूसरी रोकथाम उपचार के विवेकपूर्ण इस्तेमाल को गाइड कर सकती है।”

–आईएएनएस

Continue Reading
Advertisement
sheila dikshit-min
ओपिनियन2 hours ago

बसपा-सपा गठबंधन से स्थायित्व के संकेत नहीं : शीला दीक्षित

CBI
टेक2 hours ago

सीबीआई ने साई निदेशक सहित 6 लोगों को किया गिरफ्तार

Students School Bags
शहर3 hours ago

अधिकारी, नेता अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाएं : सत्यपाल सिंह

khichdi
ज़रा हटके3 hours ago

बीरबल की खिचड़ी पकी, लोगों ने उठाया लुत्फ

akhilesh yadav
राजनीति3 hours ago

सपा-बसपा गठबंधन से भाजपा का हिसाब गड़बड़ाया : अखिलेश

income tax
शहर3 hours ago

उत्तर प्रदेश : लखनऊ-कानपुर समेत 6 जिलों के अस्पतालों में आयकर छापा

Nitish Modi
राजनीति3 hours ago

मोदी दोबारा बनेंगे प्रधानमंत्री : नीतीश

Tejashwi Yadav
राजनीति3 hours ago

मोदी झूठ बोलने की फैक्ट्री ही नहीं, डिस्ट्रीब्यूटर भी : तेजस्वी

shot dead
शहर4 hours ago

मध्य प्रदेश : मंदसौर में भाजपा नेता की गोली मारकर हत्या, हंगामा

ram rahim
राष्ट्रीय7 hours ago

गुरमीत राम रहीम को पत्रकार हत्या मामले में उम्रकैद

rahul gandhi
राजनीति3 weeks ago

‘फोटो खिंचवाने के बजाय खनिकों को बचायें मोदी’

Abhishek-Manu-Singhvi
राजनीति2 weeks ago

जेटली बने राफेल डिफेंसिव मिनिस्‍टर, 72% बढ़े बैंक फ्रॉड: सिंघवी

kapil sibal
राष्ट्रीय2 weeks ago

CBDT सर्कुलर ने नेशनल हेराल्ड मामले में सरकार को किया बेनकाब : कपिल सिब्बल

heart
लाइफस्टाइल3 weeks ago

सर्दियों में ऐसे रखें अपने दिल का ख्याल

Kader-Khan-Twitter
मनोरंजन2 weeks ago

काबुल से कनाडा तक ऐसा रहा कादर खान का सफरनामा…

Communal Violence
ब्लॉग3 weeks ago

चुनाव को सामने देख उत्तर प्रदेश में निकल पड़ा ब्रह्मास्त्र!

टेक3 weeks ago

नया आईफोन अमेरिका में ज्यादा एंड्रायड यूजर्स को लुभा रही

rahul-gandhi-pti
ब्लॉग3 weeks ago

राहुल प्रभावी प्रचारक, रणनीतिकार के तौर पर उभरे – 2018 in Retrospect

health Issue
Viral सच1 week ago

जहां 40 की उम्र में आता है बुढ़ापा

real-estate
ब्लॉग3 weeks ago

सस्ते मकानों की बिक्री से रियल स्टेट में आया सुधार – 2018 in Retrospect

Priya Prakash
मनोरंजन3 days ago

प्रिया प्रकाश की फिल्म ‘श्रीदेवी बंग्लो’ का टीजर जारी

Makar Sankranti 2019
राष्ट्रीय3 days ago

कुंभ में पहला शाही स्नान शुरू

Game of Thrones
मनोरंजन3 days ago

Game of Thrones सीजन 8 का टीजर जारी

BIHAR
शहर5 days ago

वीडियो: देखें, बिहार में रंगदारों का आतंक

Ranveer Singh-
मनोरंजन1 week ago

रणवीर की फिल्म ‘गली बॉय’ का ट्रेलर’ रिलीज

Nageshwar Rao
राष्ट्रीय2 weeks ago

आंध्र यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर बोले- टेस्ट ट्यूब बेबी थे कौरव

Vikram Saini
राजनीति2 weeks ago

बीजेपी विधायक बोले- ‘असुरक्षित महसूस करने वालों को बम से उड़ा दूंगा’

Ranveer Singh-
मनोरंजन2 weeks ago

फिल्म ‘गली बॉय’ का फर्स्ट लुक जारी

Gazipur Cops Killed
राष्ट्रीय3 weeks ago

पीएम मोदी की जनसभा से लौट रहे भाजपा समर्थकों की गाड़ियों पर पथराव, कॉन्स्टेबल की मौत

isis
शहर3 weeks ago

श्रीनगर की मस्जिद में लहराया ISIS का झंडा

Most Popular