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फूडपांडा इंडिया डिलिवरी नेटवर्क पर करेगी 400 करोड़ रुपये का निवेश

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फूड ऑडरिंग और डिलिवरी चेन फूडपांडा इंडिया ने सोमवार को कहा कि वह अपने नेटवर्क को मजबूत बनाने के लिए अगले 12 से 15 महीनों में 400 करोड़ रुपये का निवेश करेगी और 25,000 डिलिवरी राइडर्स को भर्ती करेगी।

यहां जारी कंपनी के बयान के मुताबिक, यह निवेश प्रौद्योगिकी और लॉजिस्टिक नेटवर्क के विस्तार के लिए किया जाएगा, जिससे ग्राहकों के लिए बढ़िया सेवा की सुरक्षा हो सकेगी। फूडपांडा इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रणय जिवराजका ने बताया, प्रौद्योगिकी द्वारा समर्थित एक मजबूत वितरण पारिस्थितिकी तंत्र बनाना, भारतीय खाद्य तकनीक उद्योग की सबसे मूलभूत आवश्यकताओं में से एक है।

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हमने फूडपांडा में इसकी पहचान की है, इसलिए सभी मेट्रो और प्रमुख शहरों में हमारी डिलिवरी नेटवर्क को मजबूती प्रदान करने के लिए हम 400 करोड़ रुपये का निवेश करेंगे।उन्होंने कहा, “हम 25,000 डिलिवरी राइडर्स की भर्ती कर अपनी कनेक्टिविटी का भी विस्तार करेंगे। साल 2017 के दिसंबर में ओला ने फूडपांडा का अधिग्रहण किया था और इसकी मूल कंपनी एएनआई टेक्नॉलजीज में 1,300 करोड़ रुपये निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई थी।

–आईएएनएस

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पीएनबी फर्जीवाड़े से कॉरपोरेट ऋण न रोके जाएं : एसोचैम

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फाइल फोटो

उद्योग संगठन एसोचैम ने कहा कि हीरा कारोबारी नीरव मोदी द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के तहत संचालित पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) को कथित 11,300 करोड़ रुपये की चपत लगाने से कॉरपोरेट ऋण की पूरी प्रणाली पर विराम नहीं लगना चाहिए।

एसोचैम के अनुसार इससे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (पीएसबी) के कर्मचारियों के उत्साह में कमी आएगी। एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) ने एक विज्ञप्ति में कहा कि धोखाधड़ी के कारण साख में जो गिरावट आई है, उसपर नियंत्रण किया जाना चाहिए, क्योंकि यह ऐसा दौर है जब साख में सुधार के संकेत मिल रहे थे और देश की अर्थव्यवस्था उच्च विकास दर की तरफ बढ़ रही है।

एसोचैम ने इस बात का जिक्र किया है कि पीएनबी घोटाले के बाद बैंकों की ओर से कुछ अव्यावहारिक नियम थोपकर व्यापार व पूंजी व्यवस्था की प्रक्रियाओं को सख्त बनाने की रपटें मिल रही हैं, जिनसे आयातक और निर्यातक दोनों प्रभावित होंगे।

उद्योग संगठन ने कहा कि हीरा कारोबारियों की ओर से कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किए गए साख-पत्र यानी लेटर्स ऑफ क्रेडिट (एलओसी) या वचन-पत्र यानी लेटर्स ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) वैश्विक व्यापार में वैध दस्तावेज हैं।

एसोचैम के महासचिव डी. एस. रावत ने एक बयान में कहा, “जब हम बैंकों के निजीकरण जैसे दीर्घकालिक समाधान की मांग करते हैं तो इस समय ईमानदार बैंककर्मियों और ईमानदार व्यवसायिक संस्थाओं को शक्ति प्रदान करने की जरूरत है। इन्होंने एक-दूसरे पर भरोसा कायम रखा है।”

उन्होंने कहा, “एक या कुछ बुरे लोगों को हमारी वित्तीय प्रणाली को बिगाड़ने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। हमारी वित्तीय प्रणाली इस तरह के आघात को झेलने को लेकर काफी लचीली है। हालांकि आदर्श तरीका यह है कि ऐसे धक्कों से बचा जाएगा और सुधार के माध्यम से इनको रोका जाए।”

दूसरी तरफ, वित्तमंत्री अरुण जेटली ने बैंक धोखाधड़ी का पता लगाने में विफल रहने पर विनियामकों और बैंक के प्रबंधकों व अंकेक्षकों की आलोचना की है।

–आईएएनएस

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रोटोमैक स्कैम: 11 दिन की सीबीआई रिमांड पर भेजे गए विक्रम कोठारी और उनके बेटे

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रोटोमैक कंपनी के मालिक और बैंक घोटाले के आरोपी विक्रम कोठारी (फोटो- एएनआई)

रोटोमैक कंपनी के मालिक विक्रम कोठारी और उसके बेटे राहुल को दिल्‍ली की पटियाला कोर्ट ने शनिवार को 11 दिन की सीबीआई रिमांड पर भेज दिया। इससे पहले शुक्रवार को पटियाला कोर्ट ने ही दोनों को एक दिन की ट्रांजिट रिमांड पर सीबीआई को सौंपा था।

आरोप है कि इन्होंने 7 बैंकों के कंसोर्शियम को धोखा दिया और बेइमानी से 2919.29 करोड़ रुपए का बैंक लोन निकाला था। बैंक ऑफ बड़ौदा की शिकायत पर सीबीआई और एन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट ने इनके कानपुर स्थित घर और दूसरे ठिकानों पर लगातार दो दिन छापे डाले थे। इसके बाद इन्हें दिल्ली लाया गया था, जहां पूछताछ के बाद अरेस्ट कर लिया गया।

सीबीआई ने 21 फरवरी को बताया था कि रोटोमैक कंपनी के विक्रम कोठारी समेत 3 डायरेक्टर्स ने 7 बैंकों के कंसोर्शियम को धोखा दिया और बेइमानी से 2919.29 करोड़ रुपए का बैंक लोन निकाला। इसमें लोन का इंट्रेस्ट शामिल नहीं किया गया है। ब्याज जोड़कर ये रकम 3695 करोड़ रुपए हो जाती है। आरोप है कि कंपनी ने बैंक को यह रकम नहीं चुकाई है।

ऐसे आया मामला सामने

विक्रम कोठारी के खिलाफ 600 करोड़ का बाउंस चेक देने का केस हुआ है। इस मामले में आरबीआई ने इलाहाबाद बैंक को नोटिस भेजा है। बैंक ऑफ बड़ौदा की शिकायत पर सीबीआई ने कोठारी के खिलाफ केस दर्ज किया। इसके बाद अफसरों ने 19 फरवरी को उनके ठिकानों की सीबीआई और इन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ईडी) की ज्वाइंट टीम ने तलाशी ली।

इन दर्ज हुए केस इस केस में रोटोमैक ग्लोबल प्राइवेट लिमिडेट के डायरेक्टर विक्रम कोठारी, पत्नी साधना कोठारी और बेटे राहुल कोठारी का नाम है। कोठारी के खिलाफ मनी लाड्रिंग का केस भी दर्ज किया गया है।

बैंकों का क्या आरोप है?
बैंकों का आरोप है कि विक्रम कोठारी ने ना लोन की रकम लौटाई और न ही ब्याज दिया। इस पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की गाइडलाइंस पर एक आधिकारिक जांच कमेटी गठित की गई। कमेटी ने 27 फरवरी 2017 को रोटोमैक ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड को विलफुल डिफॉल्टर (जानबूझकर कर्ज नहीं चुकानेवाला) घोषित कर दिया।

13 अप्रैल 2017 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रोटोमैक ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड को उसकी उन संपत्तियों या किस्तों का ब्योरा पेश करने का आदेश दिया था, जिनका बैंक ऑफ बड़ौदा को भुगतान किया गया।

सीबीआई की प्राथमिकी के अनुसार, कोठारी ने बैंक ऑफ इंडिया से 754.77 करोड़, बैंक ऑफ बड़ौदा से 456.63 करोड़, इंडियन ओवरसीज बैंक से 771.07 करोड़, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से 458.95 करोड़, इलाहाबाद बैंक से 330.68 करोड़, बैंक ऑफ महाराष्ट्र से 49.82 करोड़ और ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स से 97.47 करोड़ रुपये कर्ज लिए।

विक्रम कोठारी जाने-माने दिवंगत उद्योगपति एमएम कोठारी (मनसुख लाल महादेव भाई कोठारी) का बेटा है। एमएम कोठारी का जन्म कानपुर के छोटे से गांव निराली में हुआ था। वह 8 भाई-बहनों में सबसे बड़े थे। प्राइवेट नौकरी से करियर की शुरुआत की। धीरे-धीरे करके उन्होंने स्कूल समेत कई संस्थानों की शुरुआत की। पान पराग और रोटोमैक की नींव रखी। एमएम कोठारी के निधन के बाद उनकी विरासत दो बेटे विक्रम और दीपक के हाथ में आ गई थी। विक्रम ने रोटोमैक संभाला और दीपक ने पान मसाले के बिजनेस को आगे बढ़ाया।

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पीएनबी ने दस हजार डेबिट-क्रेडिट कार्ड्स के डेटा लीक से किया इनकार

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पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) ने उस खबर का खंडन किया है, जिसमें दावा किया गया था कि बैंक के दस हजार कार्डधारकों का डेटा लीक हुआ है। पीएनबी ने अपनी आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर में किसी भी तरह के डेटा लीक से मना किया है। हांगकांग की एक न्‍यूज वेबसाइट एशिया टाइम्‍स में छपी एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि पीएनबी के 10 हजार क्रेडिट और डेबिट कार्ड यूजर्स का डेटा लीक हुआ है।

स्टॉक एक्सचेंज को जारी बयान में बैंक ने 10 हजार क्रेडिट और डेबिट कार्डहोल्डर्स की डिटेल्स ऑनलाइन लीक होने वाली खबरों को खारिज किया। बैंक ने कहा, ‘बैंक की इन्फ्रास्ट्रक्चर सिक्यॉरिटी काफी मजबूत है और बैंक ने सभी जरूरी तकनीकी कदम उठा कर कस्टमर के डेटा को सुरक्षित किया हुआ है।’ गुरुवार को कुछ रिपोर्ट्स में इन्फॉर्मेशन सिक्यॉरिटी फर्म क्लाउडसेक के हवाले से दावा किया गया था कि क्रेडिट और डेबिट कार्ड यूजर्स का डेटा ऑनलाइन लीक हुआ है।

न्यूज वेबसाइट एशिया टाइम्स ने चीफ टेक्निकल ऑफिसर राहुल शशि के हवाले से लिखा था, ‘हमारा एक क्रॉलर डार्क वेब में लगा हुआ है। ये इंटरनेट की वह साइटें हैं जो गूगल और अन्य बड़े सर्च इंजन में नहीं मिलेंगी। ये साइटें गैर-कानूनी रूप से संवेदनशील डेटा खरीदने और बेचने का काम करती हैं।’ राहुल ने बताया कि क्रॉलर ऐसा डेटा पहचान लेता और इसे एक ऐसे सॉफ्टवेयर को भेजता है जो संदेहजनक डेटा अलग करता है। बता दें कि क्रॉलर एक विशेष तरह से डिजाइन्ड प्रोग्राम होता है जिसका काम डेटा और इन्फॉर्मेशन रीड कर ब्राउजर में इंडेक्स करना होता है।

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