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मोदी की रैली में पंडाल गिरने से घायलों की संख्या 90 हुई

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photo credit (ANI)

केंद्र ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिदनापुर रैली में पंडाल गिरने की घटना पर पश्चिम बंगाल सरकार से रिपोर्ट मांगी है। इस घटना में कम से कम 90 लोग घायल हो गए। रैली में पंडाल उस वक्त गिरा जब मोदी भाषण दे रहे थे।

गृह मंत्रालय एक प्रवक्ता ने कहा, ‘केंद्र ने मिदनापुर में पंडाल गिरने की घटना पर पश्चिम बंगाल सरकार से एक रिपोर्ट मांगी है जिसमें कई लोग घायल हो गए।’ दरअसल, पंडाल उस वक्त गिरा जब मोदी अपना भाषण दे रहे थे।

अधिकारियों ने बताया कि मोदी ने अपने संबोधन के दौरान पंडाल गिरते देखा और उन्होंने तत्काल अपने पास खड़े एसपीजी कर्मियों को लोगों को देखने और घायलों की सहायता करने का निर्देश दिया।

पश्चिमी मिदनापुर के पुलिस अधीक्षक आलोक रजोरिया ने कहा कि 90 घायलों को पश्चिमी मिदनापुर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सम्पर्क किये जाने पर अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि घायलों में 50 महिलाएं शामिल हैं।

मोदी बाद में घायलों से मिलने अस्पताल भी पहुंचे। इसके साथ ही भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष और जिले के वरिष्ठ अधिकारी भी घायलों को देखने अस्पताल पहुंचे।

इससे पहले सोमवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि राज्य सरकार रैली में घायल हुए लोगों को हर संभव चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराएगी। ममता ने ट्विटर कर लिखा, ‘मिदनापुर रैली में आज घायल हुए लोगों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना करती हूं। सरकार उनके उपचार के लिए हर संभव मदद मुहैया करा रही है।’

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जेलों में भी रहता है भेदभाव कायम

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Jail
प्रतीकात्मक तस्वीर

भारतीय बैंकों से हजारों करोड़ रुपये लेकर फरार शराब कारोबारी विजय माल्या के लिए मुंबई के आर्थर रोड जेल को पूरी तरह से तैयार किया गया है।

आर्थर रोड जेल में उच्च सुरक्षा वाली बैरक तैयार की गई है। लेकिन जब भारतीय जेलों की वास्तविकता की बात आती है तो सच्चाई किसी से छिपी नहीं है। विजय माल्या के लिए तो जेल में खास इंतजाम कर दिए गए। इन इंतजामों में आर्थर रोड के जेल परिसर के अंदर दो-मंजिला इमारत में स्थित एक उच्च सुरक्षा वाली बैरक तैयार की गई है, जिसमें प्रत्यर्पण के बाद माल्या को रखा जाएगा।

जेलों की स्थिति को लेकर सर्वोच्च न्यायालय केंद्र व राज्यों की सरकारों को भी फटकार लगा चुका है। हाल ही में, न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने कारागारों और बाल सुधार गृहों में जाकर वहां की दशा देखने का निर्देश दिया था।

अपनी टिप्पणी में न्यायाधीशों ने कहा था कि अधिकारियों को अपने दफ्तरों से निकलकर जेलों की दशा देखने को कहिए। पानी के नल की टोंटियां काम नहीं करती हैं। शौचालय उपयोग में नहीं हैं। सब बंद हो चुके हैं और बदहाल हैं। उनको देखने को कहिए, जिससे वे समझेंगे कि कैदी किस तरह की दयनीय दशा में रहते हैं।

जेलों की दशा व वहां उपलब्ध इंतजामों व दूसरे कानूनी पहलुओं पर बिहार की 30 से भी ज्यादा जेलों का दौरा कर चुकीं व जेलों की कुव्यवस्था को अपनी किताब ‘न्यायपालिका कसौटी पर’ में उजागर करने वाली सर्वोच्च न्यायालय की अधिवक्ता कमलेश जैन से आईएएनएस ने जेलों के हालात पर विशेष बातचीत की।

यह पूछे जाने पर क्या जेलों में मानवाधिकार जिंदा रहता है, या अधिकारों का हनन हो जाता है? इस संदर्भ में भारतीय जेलों को कैसे देखती हैं? सर्वोच्च न्यायालय की अधिवक्ता कमलेश जैन कहती हैं कि जेलों में मानवाधिकार रहने चाहिए, लेकिन इनका नितांत अभाव है।

मैं इसे जमीदारी प्रथा की तरह मनमाना आदेश देने की श्रेणी में रखती हूं। जिस तरह समाज में ऊंच-नीच, अमीर-गरीब, शिक्षित-अशिक्षित का भेद-भाव चलता है, उसी तरह से जेलों में अनपढ़ व कमजोर वर्ग का व्यक्ति चक्की में घुन की तरह पिसता है, वह वर्षो तक जेल में रहता है।

खाने से लेकर, शौच जाने, नहाने-कपड़े धोने से लेकर हर काम में उसे भेदभाव का शिकार होना पड़ता है। न्याय उसे मिलता नहीं या काफी देर से मिलता है। ऐसे में हमारी जेलें भेदभाव रहित नहीं हैं। विजय माल्या के लिए विशेष जेल की व्यवस्था की गई है। वह मुंबई आर्थर रोड जेल में रहेंगे? इसे किस लिहाज से देखती है? कमलेश जैन कहती हैं कि आर्थर रोड जेल एक सुरक्षित जेल समझी जाती है। वहां बड़े खूंखार अपराधियों को रखा जाता है।

सुरक्षा के लिहाज से विजय माल्या को वहां रखा जा रहा है। उस जेल में माल्या के लिए विशेष इंतजामात किए गए हैं। लेकिन सभी जेलों की व्यवस्थाएं बदलनी चाहिए, सिर्फ विशेष लोगों के लिए जेलों में विशेष इंतजाम क्यों?

यह पूछे जाने पर जेलों में भेदभाव खूब होता है, असमानता के इस स्तर को कैसे देखती हैं? न्यायपालिका कसौटी पर की लेखिका कमलेश जैन कहती हैं, “जेलों में असमानता अत्यंत बर्बर है। गरीब, अनपढ़ मनुष्य एक दास की तरह रहता है। सबकी गुलामी करता है, जेल स्टाफ की भी। ऐसे में व्यवस्थाओं को पारदर्शी बनाने की जरूरत है। मैंने बिहार की जेलों का बाकायदा दौरा किया है, जहां स्थितियां बद से बदतर रही हैं। जेलों में भी व्यापक भेदभाव कायम है।”

हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने कारागृहों और बाल सुधार गृहों की दशा सुधारने के प्रति सरकारी मशीनरी की बेरुखी और संवदेनहीन व्यवहार पर नाराजगी जाहिर की है। इस पर आप क्या कहेंगी? इस सवाल पर कमलेश जैन कहती हैं कि सर्वोच्च न्यायालय की कारागारों व बाल सुधार गृहों पर की गई टिप्पणी एकदम उचित है।

व्यवस्थाएं बदल नहीं रही हैं। बस चंद नाम हैं, जिसे हम गिनाने के लिए रखते हैं, आदर्श जेल की सूची में नाम बहुत कम हैं। कारागारों की दशा सुधारने के मुद्दे को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों दोनों को फटकार लगाए जाने को आप किस नजरिए से देखती हैं? जवाब में अधिवक्ता कहती हैं कि कारागारों की दशा सुधारने के लिए 1983 से ही सर्वोच्च न्यायालय फटकार लगा रहा है, पर भारत की जेलों में सुधार नहीं हो रहा है।

आपराधिक प्रक्रिया संहिता में प्रावधान है कि उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, सेशन जज, जिले के न्यायाधीश समय-समय पर जेलों का निरीक्षण करे और वहां कि व्यवस्था सुधारने को लेकर कार्यवाही करे। लेकिन ऐसा नहीं किया जाता।यह पूछे जाने पर कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपनी टिप्पणी में कहा कि दुनियाभर में जेलों में कर्मचारियों की कमी का औसत 16 फीसदी है, लेकिनि भारत में 62 फीसदी है।

आप इसे किस तरह से देखती हैं? कमलेश जैन कहती हैं, “हमारी आपराधिक न्याय प्रणाली भी लचर है, 35 वर्षो से जेल में रूदल साहा व 37 बोका ठाकुर अडंर 1982-183 में मैंने पीआईएल फाइल किया। आज भी हालत जस की तस है। छोटे अपराधी जेल में सालों रहते हैं, अपनी सजा पूरी करने पर भी निकल नहीं पाते और बड़े अपराधियों को आसानी जमानत मिल जाती है।”

कर्मचारियों की कमी तो है ही, दो हजार कैदियों की जगह में चार हजार लोग रहते हैं, जेलों के आकार व नंबर दोनों को बढ़ाने की जरूरत है। सुविधाएं भी नहीं है, उन्हें भी बढ़ाना जरूरी है। गरीबों के लिए जेल नरक है।

–आईएएनएस

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पाकिस्तान की जेल से रिहा होने के बाद हामिद अंसारी पहुंचे दिल्ली

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Hamid Ansari
हामिद अंसारी photo credit (ANI)

पाकिस्तान की जेल से रिहा होने के बाद भारतीय नागरिक हामिद अंसारी दिल्ली पहुंच गए हैं। हामिद अंसारी ने कहा कि मैं पाकिस्तान से वापस आकर काफी अच्छा महसूस कर रहा हूं। 6 साल बाद पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय कैदी हामिद निहाल मंगलवार को भारत लौट थे।

पाकिस्तान में रावी नदी से पार कराने के बाद उन्हें एक जेल वैन के जरिए वाघा-अटारी सीमा पर लाया गया था। इस दौरान वाघा-अटारी सीमा परिवार के सदस्य बेसब्री से उनका इंतजार कर रहे थे। उनकी वतन वापसी में अहम भूमिका निभाने वाले पत्रकार देसाई के अलावा मां, पिता और भाई भी उनकी अगवानी के लिए इस दौरान मौजूद रहे।

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ISRO आज लॉन्च करेगा जीसैट-7ए उपग्रह

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gsat 7a
PC: ISRO (TWITTER)

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने मंगलवार को अपने संचार उपग्रह जीसैट-7ए को लांच करने का काउंटडाउन शुरू किया। श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से मंगलवार दोपहर 2 बजकर 10 मिनट पर इसकी उल्टी गिनती शुरू हो गई।

बुधवार को शाम 4 बजकर 10 मिनट पर जीएसएलवी-एफ11 रॉकेट को लेकर लांच किया जाएगा। इसरो द्वारा निर्मित जीसैट-7ए का वजन 2,250 किलोग्राम है और यह मिशन आठ साल का होगा। इसरो ने मंगलवार को कहा कि मिशन रेडिनेस रिव्यू कमेटी और लांच ऑथराइजेशन बोर्ड ने काउंटडाउन शुरू किया।

जीएसएलवी-एफ11 की यह 13वीं उड़ान होगी और सातवीं बार यह स्वदेशी क्रायोनिक इंजन के साथ लांच होगा। यह कू-बैंड में संचार की सुविधा उपलब्ध करवायेगा। इसरो का यह 39वां संचार उपग्रह होगा और इसे खासकर भारतीय वायुसेना को बेहतर संचार सेवा देने के उद्देश्य से लांच किया जा रहा है।

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