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स्वास्थ्य

मेडिकल गलतियों के कारण हर साल 26 लाख लोगों की मौत : डब्ल्यूएचओ

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प्रतीकात्मक तस्वीर

चिकित्सकों की गलतियों की वजह से हर साल 13.8 करोड़ से अधिक मरीजों को नुकसान पहुंचता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने ‘वर्ल्ड पेशेन्ट सेफ्टी डे’ मनाने के महज कुछ दिन पहले यह चेतावनी दी है। इस दिवस को मनाने का मकसद इस त्रासदी के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

समाचार एजेंसी एफे के मुताबिक, डब्ल्यूएचओ की रोगी-सुरक्षा समन्वयक डॉ नीलम ढींगरा-कुमार ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि बीमारी की सही पहचान नहीं हो पाना, दवा के नुस्खे व इलाज में त्रुटियां और दवाओं का अनुचित सेवन तीन मुख्य कारण हैं कि इतने सारे रोगियों को खामियाजा भुगताना पड़ा है।

विशेषज्ञ ने कहा, “ये गलतियां इसलिए होती हैं क्योंकि स्वास्थ्य प्रणालियां इन त्रुटियों से सही प्रकार से निपटने और उनसे सीखने के लिए उपयुक्त रूप से तैयार नहीं हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि कई अस्पताल यह छिपाते हैं कि उन्होंने क्या गलत किया है, जो अकसर उन्हें भविष्य में फिर ऐसा न हो इसके लिए उन्हें कदम उठाने से रोकता है।

डब्ल्यूएचओ द्वारा शुक्रवार को उपलब्ध कराए गए आंकड़े केवल मध्यम और निम्न आर्थिक स्थिति वाले देशों (जहां वैश्विक जनसंख्या का 80 प्रतिशत है) को दर्शाते हैं, जबकि अगर विकसित देशों को ध्यान में रखकर देखा जाए तो वास्तविक संख्या और ज्यादा हो सकती है क्योंकि विकसित देशों में भी, प्रत्येक 10 में से एक मरीज चिकित्सा संबंधी गलतियों का शिकार है।

इन गलतियों के उदाहरण के तौर पर, उन तरीकों से इलाज किया जाना जिनके लिए वे डिजाइन नहीं किए गए, ब्लड ट्रान्सफ्यूशन या एक्स-रे करने में गलती, गलत अंग काटकर निकाल देना या बीमारी वाले हिस्से में सर्जरी न करके मस्तिष्क के गलत हिस्से में सर्जरी कर देने जैसी बड़ी गलतियां सामने आती रहती हैं।

नीलम ने ऐसे कारकों का हवाला दिया जो इस तरह की गलतियों का कारण बनते हैं जैसे कि कुछ अस्पतालों में स्पष्ट हाइरार्की की कमी या कर्मचारियों के बीच पर्याप्त कम्युनिकेशन का अभाव होता है।

जिनेवा आधारित संगठन के अनुसार, दुनिया भर में केवल दवा के गलत नुस्खे के चलते ही हेल्थकेयर सिस्टम को करीब 42 अरब डॉलर (37 अरब यूरो) का नुकसान हुआ है।

इन समस्याओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए इस वर्ष से डब्ल्यूएचओ हर साल 17 सिंतबर को ‘वर्ल्ड पेशेन्ट सेफ्टी डे’ (विश्व रोगी सुरक्षा दिवस) मनाएगा।

–आईएएनएस

लाइफस्टाइल

टाइप-2 डायबिटीज से हृदय रोग का खतरा ज्यादा

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मधुमेह यानी डायबिटीज से पीड़ित लोगों को दिल की बीमारियों से मौत का खतरा बढ़ जाता है। टाइप-2 डायबिटीज वाले लोगों में लगभग 58 प्रतिशत मौतें हृदय संबंधी परेशानियों के कारण होती हैं।

मधुमेह के साथ जुड़े ग्लूकोज के उच्च स्तर से रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचता है, जिससे रक्तचाप और नजर, जोड़ों में दर्द तथा अन्य परेशानियां हो जाती हैं।चिकित्सक के अनुसार, टाइप-2 मधुमेह सामान्य रूप से वयस्कों को प्रभावित करता है, लेकिन युवा भारतीयों में भी यह अब तेजी से देखा जा रहा है।

वे गुर्दे की क्षति और हृदय रोग के साथ-साथ जीवन को संकट में डालने वाली जटिलताओं के जोखिम को झेल रहे हैं। पद्मश्री से सम्मानित डॉ. के.के. अग्रवाल ने कहा, “देश में युवाओं के मधुमेह से ग्रस्त होने के पीछे जो कारक जिम्मेदार हैं, उनमें प्रमुख है प्रोसेस्ड और जंक फूड से भरपूर अधिक कैलारी वाला भोजन, मोटापा तथा निष्क्रियता।

समय पर ढंग से जांच न कर पाना और डॉक्टर की सलाह का पालन न करना उनके लिए और भी जोखिम भरा हो जाता है, जिससे उन्हें अपेक्षाकृत कम उम्र में ही जानलेवा स्थितियांे से गुजरना पड़ जाता है।”

उन्होंने कहा कि लोगों में एक आम धारणा है कि टाइप-2 मधुमेह वाले युवाओं को इंसुलिन की जरूरत नहीं होती है, इसलिए ऐसा लगता है कि यह भयावह स्थिति नहीं है। हालांकि, ऐसा सोचना गलत है। इस स्थिति में तत्काल उपचार और प्रबंधन की जरूरत होती है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि टाइप-2 डायबिटीज वाले युवाओं में कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। यदि कुछ दिखते भी हैं, तो वे आमतौर पर हल्के हो सकते हैं, और ज्यादातर मामलों में धीरे-धीरे विकसित होते हैं, जिनमें अधिक प्यास और बार-बार मूत्र त्याग करना शामिल है।

डॉ. अग्रवाल ने कहा, “यदि घर के बड़े लोग अच्छी जीवनशैली का उदाहरण पेश करते हैं तो यह युवाओं के लिए भी प्रेरणादायी होगा। इस तरह के बदलाव एक युवा को अपना वजन कम करने में मदद कर सकते हैं (अगर ऐसी समस्या है तो) या उन्हें खाने-पीने के बेहतर विकल्प खोजने में मदद कर सकते हैं, जिससे टाइप-2 मधुमेह विकसित होने की संभावना कम हो जाती है।

जिनके परिवार में पहले से ही डायबिटीज की समस्या रही है, उनके लिए तो यह और भी सच है।

उन्होंने कुछ सुझाव दिए :

  • खाने में स्वस्थ खाद्य पदार्थ ही चुनें।
  • प्रतिदिन तेज रफ्तार में टहलें।
  • अपने परिवार के साथ अपने स्वास्थ्य और मधुमेह व हृदय रोग के जोखिम के बारे में बात करें।
  • यदि आप धूम्रपान करते हैं, तो इसे छोड़ने की पहल करें।
  • अपने लिए, अपने परिवार के लिए और आने वाली पीढ़ियों के लिए मधुमेह और इसकी जटिलताओं संबंधी जोखिम को कम करने खातिर जीवनशैली में बदलाव करें।

–आईएएनएस

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लाइफस्टाइल

ठंड में शरीर को गर्म रखती हैं ये 5 चीजें…

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हम मानते हैं कि ऊनी कपड़े पहनने से शरीर गर्म बना रहता है लेकिन जरूरी है कि आपका शरीर अंदर से भी गर्म रहे। अब सवाल ये उठता है कि ऐसा कौन सा उपाय है जिसे आजमाकर आप अपने शरीर को गर्म रख सकते हैं?अगर हम आपसे ये कहें कि आपका खानपान ही आपको भीतर से गर्म रख सकता है तो शायद आप यकीन न करें लेकिन वाकई ये सच है।

खाने-पीने की कई ऐसी चीजें हैं जिनका सेवन करके आप अपने शरीर को अंदरुनी रूप से गर्म रख सकते हैं.ऐसे में अगर बाहर बहुत अधिक ठंड हो तो आप गर्म कपड़े तो पहनें ही लेकिन साथ ही इन खाने-पीने की चीजों का सेवन भी करें ताकि सर्दी आपको छूने भी न पाए।

1. हरी मिर्च
क्या आपने कभी हरी मिर्च चखी है? हरी मिर्च खाने से गर्मी आती है। इसका तीखापन शरीर का तापमान बढ़ाने का काम करता है। ऐसे में सर्दिर्यों में शरीर को गर्म रखने के लिए हरी मिर्च का इस्तेमाल किया जा सकता है।

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2. प्याज
प्याज खाने के बाद शरीर का तापमान बढ़ जाता है और ये पसीना लाने में भी कारगर है। प्याज का इस्तेमाल कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं को भी दूर रखने में मददगार होता है।

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3. अदरक वाली चाय

अपने आपको गर्म रखने का इससे बेहतर और सस्ता उपाय शायद ही कोई हो। अदरक वाली चाय पीने से शरीर का तापमान बढ़ जाता है।

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4. हल्दी
सर्दियों के लिहाज से हल्दी एक बेमिसाल औषधि है। ठंड भगाने और आराम दिलाने के लिए हल्दी का इस्तेमाल किया जा सकता है। आप चाहें तो इसे दूध के साथ भी ले सकते हैं।

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5. ड्राई फ्रूट्स

खजूर, मुनक्का और दूसरे ड्राई फ्रूट्स का इस्तेमाल करके आप खुद को इन सर्दियों में सुरक्षित रख सकते हैं। इसके साथ ही ये सेहत को बेहतर बनाने का भी अचूक उपाय है।

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स्वास्थ्य

इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट पर आसानी से विश्वास न करें : डब्लूएचओ

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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने कहा है कि सरकारें और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट जैसे अन्य उत्पादों के प्रचार पर आसानी से विश्वास न करें।

बयान में कहा गया है कि इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट से होने वाला नुकसान कम है, यह तंबाकू कंपनियों के प्रचार की एक रणनीति है। डब्लूएचओ ने अभी जारी 2019 वैश्विक तंबाकू महामारी रिपोर्ट में बताया कि लंबे समय में तंबाकू उद्योग, तंबाकू नियंत्रण के लिए अपनाए जा रहे कदमों के खिलाफ काम कर रहा है।

कई उद्योगों का कहना है कि पारंपरिक सिगरेट के बदले इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट सुरक्षित है और ये सिगरेट पीने की आदत छोड़ने में मदद करता है। प्रमाण के अनुसार अमेरिकी किशोरों में ई-सिगरेट तेजी से लोकप्रिय हो रही है।

डब्लूएचओ ने रिपार्ट जारी की थी कि इस बात के समर्थन में पर्याप्त सबूत नहीं है। जब सिगरेट पीने वाले पूरी तरह से निकोटीन छोड़ देंगे, तभी उन्हें लाभ मिलेगा। अमेरिकी खाद्य और औषधि प्रशासन ने हाल के वर्षो में इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट की बिक्री को नियंत्रित करने के लिए कई उपायों की घोषणा की है।

डब्लूएचओ तंबाकू नियंत्रण अधिकारी विनायक प्रसाद ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट और पारंपरिक सिगरेट पीने से होने वाले नुकसान एक जैसे हैं, सबसे बड़ा अंतर यह है कि इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट में कोई स्पष्ट धुआं नहीं है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट बाजार के पर्यवेक्षण को मजबूत करना चाहिए, जो डब्लूएचओ का एक स्पष्ट लक्ष्य भी है।

–आईएएनएस

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