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महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर कैदियों को विशेष माफी

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Mahatma Gandhi

नई दिल्ली, 18 जुलाई | प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर कारागारों से कैदियों को विशेष माफी देने के प्रस्ताव को बुधवार को मंजूरी दे दी। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, “महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर कुछ खास श्रेणी के कैदियों को विशेष माफी दी जाएगी और उन्हें तीन चरणों में रिहा किया जाएगा। पहले चरण में कैदियों को दो अक्टूबर (महात्मा गांधी की जयंती) को रिहा किया जाएगा। दूसरे चरण में कैदियों को 10 अप्रैल, 2019 (चम्पारण सत्याग्रह की वर्षगांठ) को रिहा किया जाएगा। तीसरे चरण में कैदियों को दो अक्टूबर, 2019 (महात्मा गांधी की जयंती) को रिहा किया जाएगा।”

रविशंकर ने कहा, “जिन कैदियों को रिहा किया जाएगा, उनमें महिला कैदी जिसकी आयु 55 वर्ष या इससे अधिक हो और जिसने अपनी 50 फीसदी वास्तविक सजा अवधि पूरी कर ली हो। ऐसे किन्नर कैदी, जिनकी आयु 55 वर्ष या इससे अधिक हो और जिनने अपनी 50 फीसदी वास्तविक सजा अवधि पूरी कर ली हो। ऐसे पुरुष कैदी, जिनकी आयु 60 वर्ष या इससे अधिक हो और जिनने अपनी 50 फीसदी वास्तविक सजा अवधि पूरी कर ली हो। ऐसे दिव्यांग/शारीरिक रूप से 70 प्रतिशत या इससे अधिक अक्षमता वाले कैदी, जिनने अपनी 50 फीसदी वास्तविक सजा अवधि पूरी कर ली हो। ऐसे दोष सिद्ध कैदी जिनने अपनी दो-तिहाई (66 फीसदी) वास्तविक सजा अवधि पूरी कर ली हो शामिल हैं।”

प्रसाद ने कहा, “ऐसे कैदियों को विशेष माफी नहीं दी जाएगी, जो मृत्युदंड की सजा का सामना कर रहे हैं, अथवा जिनकी मृत्युदंड की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया गया है। इसके अलावा दहेज मृत्यु, दुष्कर्म, मानव तस्करी और पोटा, यूएपीए, टाडा, एफआईसीएन, पोस्को एक्ट, धन शोधन, फेमा, एनडीपीएस, भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम आदि के दोषियों को भी इसमें शामिल नहीं किया गया है।”

उन्होंने कहा, “गृह मंत्रालय सभी पात्र कैदियों के मामलों की पहचान के लिए सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को परामर्श जारी करेगा। राज्य सरकार और केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन को इन मामलों की जांच के लिए एक समिति गठित करने की सलाह दी जाएगी। राज्य सरकार इस समिति की सिफारिशों को राज्यपाल के पास विचार और संविधान की धारा 161 के तहत मंजूरी के लिए भेजेगी। मंजूरी मिलने के बाद कैदियों को दो अक्टूबर, 2018, 10 अप्रैल, 2019 और दो अक्टूबर, 2019 को रिहा किया जाएगा।”

— आईएएनएस

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भूखी शार्क के बीच जा गिरी ये महिला, देखें वीडियो

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China

चीन में एक महिला गलती से एक टैंक में गिर गई जहां कई भूखी शार्क थीं। Jiaxing के शॉपिंग मॉल में महिला शार्के के टैंक के ऊपर से निकलने के चक्कर में अंदर जा गिरी। उस समय शार्क को खाना खिलाने की तैयारी चल रही थी। उस वक्त टैंक इसलिए खुला था क्योंकि उनको खाना डालने की तैयारी चल रही थी।

जैसे ही महिला गिरी तो दो लेमन शार्क उसके करीब आ गईं और आस-पास घूमने लगीं। सेक्यूरिटी गार्ड और आस-पास खड़े लोग तुरंत वहां पहुंचे और महिला को बाहर निला लिया गया। जरा सी चूक महिला की जान ले सकती थी।

मॉल के स्पोक पर्सन ने कहा कि खाने के लिए चैम्बर्स को खोला गया था। महिला इसलिए चैम्बर के ऊपर से गुजरने की कोशिश कर रही थी क्योंकि उसी समय एक मीटिंग थी। उन्होंने बताया कि महिला बिलकुल ठीक है और कोई चोट नहीं आई है।

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भारत के इन होटलों में भूतों का डेरा…

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कहीं घूमने जाने को मन बना रहे हैं तो ये जानकारी आपके लिए जरूरी है। हर कोई अपनी ट्रिप को मजेदार बनाने के लिए क्या कुछ नहीं करता है। लोकेशन के चयन के बाद जो पहला काम होता है वो है होटल बुकिंग। अपने अनुभव को यादगार बनाने के लिए हम अच्छे से अच्छा होटल ढूंढते हैं।

भारत में अंग्रेजी शासन के दौरान बहुत से आलीशान भवनों और होटलों का निर्माण करवाया गया था। बहुत से भवनों को हेरिटेज घोषित किया गया, जबकि कुछ होटल खंडहर में तब्दील हो गए। माना जाता है कि उस दौरान बनाए गए बहुत से होटल आज अपनी संरचनात्मक खूबसूरती से ज्यादा डरावने अनुभवों के लिए चर्चा में रहते हैं। जानकारों का मानना है कि इन होटल्स में भूत-प्रेतों का साया है।

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मॉर्गन हाऊस पश्चिम बंगाल में कालिम्पोंग नामक हिल स्टेशन पर स्थित है। इस होटल की संरचना कुछ ऑस्कर वाइल्ड की प्रसिद्ध किताब ‘द कैंटरविले घोस्ट’ के महल से बहुत हद तक मेल खाती है। जॉर्ज मोरगन कभी यहां अपनी पत्नी के साथ रहा करते थे, लेकिन जब उनकी पत्नी का देहांत हो गया तो वे यह घर छोड़कर चले गए। बाद में इसे एक लॉज बना दिया गया, लेकिन वहां ठहरने वाले लोगों ने शिकायत की। उन्हें लग रहा था कि वहां कोई आत्मा है। लोगों को वहां किसी औरत के हाई हील्स में चलने की आवाजें आती हैं।

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ब्रिज राज भवन राजस्थान के कोटा शहर में स्थित है। इस होटल का इतिहास भी भारत में अंग्रेजों से जुड़ा है। इस भवन में कभी मेजर चार्ल्स बर्टन नाम का एक ब्रिटिश अधिकारी रहा करता था। जिससे इस भवन की रहस्यमयी कहानी जुड़ी है। इसका भवन निर्माण 19वीं शताब्दी के दौरान करवाया गया था, जिसे बाद में एक हेरिटेज होटल में तब्दील किया गया। माना जाता है कि 1857 की क्रांति के दौरान चार्ल्स बर्टन और उनके परिवार की इसी होटल में हत्या कर दी गई थी। कहते हैं यहां आज भी मेजर का भूत भटकता है, जानकारों का मानना है कि आधी रात के दौरान यहां अनहोनियां घटती रहती हैं।

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उत्तराखंड के मसूरी स्थित सवॉय होटल भारत के ऐतिहासिक होटल्स में से है। जिसका निर्माण 1902 में करवाया गया था। अपनी खूबसूरती के साथ-साथ ये होटल भारत के चुनिंदा भुतहा होलट में गिना जाता है। जानकारों का मानना है कि यहां किसी ब्रिटिश लेडी गारनेट ऑरमेकी की आत्मा भटकती है। जो सन् 1911 में यहां रहने आई थीं, लेकिन कुछ समय बाद गारनेट की रहस्यमयी तरीके से मौत हो गई थी। मौत की वजह आज तक पता नहीं लगी है। शाम के बाद होटल के कुछ कमरों में से अजीबो-गरीब आवाजें सुनाई देती हैं।

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बिहार : चंडिका स्थान के काजल से दूर होती है नेत्रपीड़ा

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BIHAR

बिहार के मुंगेर जिला मुख्यालय के समीप स्थित मां चंडिका स्थान शक्तिपीठ की पूजा करने से नेत्रपीड़ा से छुटकारा मिलता है। मान्यता है कि यहां पार्वती (सती) की बाईं आंख गिरी थी।

इस मंदिर को द्वापर युग की कहानियों से भी जोड़ा जाता है। बिहार के मुंगेर जिला मुख्यालय से करीब दो किलोमीटर दूर इस शक्तिपीठ में मां की बाईं आंख की पूजा की जाती है। कहा जाता है कि 52 शक्तिपीठों में से एक मां चंडिका स्थान में पूजा करने वालों की आंखों की पीड़ा दूर होती है।

चंडिका स्थान के मुख्य पुजारी नंदन बाबा ने आईएएनएस को बताया कि यहां आंखों के असाध्य रोग से पीड़ित लोग पूजा करने आते हैं और यहां से काजल लेकर जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां का काजल नेत्ररोगियों के विकार दूर करता है।

इस स्थान पर ऐसे तो सालभर देश के विभिन्न क्षेत्रों आए मां के भक्तों की भीड़ लगी रहती है, लेकिन शारदीय और चैत्र नवरात्र में यहां भक्तों की भीड काफी बढ़ जाती है।

नंदन बाबा ने बताया कि चंडिका स्थान एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ है। नवरात्र के दौरान सुबह तीन बजे से ही माता की पूजा शुरू हो जाती है। संध्या में श्रृंगार पूजन होता है। नवरात्र अष्टमी के दिन यहां विशेष पूजा होती है। इस दिन माता का भव्य श्रृंगार किया जाता है। यहां आने वाले लोगों की सभी मनोकामना मां पूर्ण करती हैं।

मंदिर के एक अन्य पुजारी कहते हैं कि इस मंदिर के विषय में कोई प्रामाणिक इतिहास उपलब्ध नहीं है, लेकिन इससे जुड़ी कई कहानियां काफी प्रसिद्ध हैं।

मान्यता है कि राजा दक्ष की पुत्री सती के जलते हुए शरीर को लेकर जब भगवान शिव भ्रमण कर रहे थे, तब सती की बाईं आंख यहां गिरी थी। इस कारण यह 52 शक्तिपीठों में एक माना जाता है। वहीं दूसरी ओर इस मंदिर को महाभारत काल से भी जोड़ कर देखा जाता है।

जनश्रुतियों के मुताबिक, अंगराज कर्ण मां चंडिका के भक्त थे और रोजाना मां चंडिका के सामने खौलते हुए तेल की कड़ाह में अपनी जान दे मां की पूजा किया करते थे, जिससे मां प्रसन्न होकर राजा कर्ण को जीवित कर देती थी और सवा मन सोना रोजाना कर्ण को देती थीं। कर्ण उस सोने को मुंगेर के कर्ण चौराहा पर ले जाकर लोगों को बांट देते थे।

इस बात की जानकारी जब उज्जैन के राजा विक्रमादित्य को मिली तो वे भी छद्म वेश बनाकर अंग पहुंच गए। उन्होंने देखा कि महाराजा कर्ण ब्रह्म मुहूर्त में गंगा स्नान कर चंडिका स्थान स्थित खौलते तेल के कड़ाह में कूद जाते हैं और बाद माता उनके अस्थि-पंजर पर अमृत छिड़क उन्हें पुन: जीवित कर देती हैं और उन्हें पुरस्कार स्वरूप सवा मन सोना देती हैं।

एक दिन चुपके से राजा कर्ण से पहले राजा विक्रमादित्य वहां पहुंच गए। कड़ाह में कूदने के बाद उन्हें माता ने जीवित कर दिया। उन्होंने लगातार तीन बार कड़ाह में कूदकर अपना शरीर समाप्त किया और माता ने उन्हें जीवित कर दिया। चौथी बार माता ने उन्हें रोका और वर मांगने को कहा। इस पर राजा विक्रमादित्य ने माता से सोना देने वाला थैला और अमृत कलश मांग लिया।

माता ने दोनों चीज देने के बाद वहां रखे कड़ाह को उलट दिया और उसी के अंदर विराजमान हो गईं। मान्यता है कि अमृत कलश नहीं रहने के कारण मां राजा कर्ण को दोबारा जीवित नहीं कर सकती थीं। इसके बाद से अभी तक कड़ाह उलटा हुआ है और उसी के अंदर माता की पूजा होती है।

आज भी इस मंदिर में पूजा के पहले लोग विक्रमादित्य का नाम लेते हैं और फिर चंडिका मां का। यहां पूजा करने वाले मां की पूजा में बोल जाने वाले मंत्र में पहले ‘श्री विक्रम चंडिकाय नम:’ का उच्चारण किया जाता है।

यह मंदिर पवित्र गंगा के किनारे स्थित है और इसके पूर्व और पश्चिम में श्मशान स्थल है। इस कारण ‘चंडिका स्थान’ को ‘श्मशान चंडी’ के रूप में भी जाना जाता है। नवरात्र के दौरान कई विभिन्न जगहों से साधक तंत्र सिद्घि के लिए भी यहां जमा होते हैं।

चंडिका स्थान में नवरात्र के अष्टमी के दिन विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। मां के विशाल मंदिर परिसर में काल भैरव, शिव परिवार और भी कई देवी-देवताओं के मंदिर हैं जहां श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते हैं।

–आईएएनएस

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