राष्ट्रीय

पिछले तीन सालों में शिक्षा से जुड़े बैड लोन में 142 प्रतिशत की वृद्धि हुई है

Student-Loan
शिक्षा ऋण(फाइल फोटो)

गत कुछ सालों में जिस रफ्तार से देश में वृद्धि दर बढ़ने के दावे हुए हैं, उस रफ्तार से देश के युवाओं को रोजगार के अवसर नहीं मिल पाए हैं।ऐसे में  रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा जारी किया गए डेटा एक औऱ समस्या की तरफ इशारा कर रहा है जिसमें बताया गया है कि शिक्षा से जुड़े बैड लोन में पिछले 3 सालों में 142 प्रतिशत की वृद्दि हुई है।

सरकारी बैंक पहले से कॉरपोरेट द्वारा लिए गए बैड लोन से तनाव में हैं और वहीं 6,336 करोड़ का शिक्षा से जुड़ा बैड लोन सरकारी बैंकों की हालत और भी खराब कर रहा है।

अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रैस द्वारा लगाई गई एक आरटी आई के जवाब में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बताया है कि दिसंबर 2016 तक शिक्षा से जुड़ा टोटल बैड लोन 72,336 करोड़ है जो मार्च 2013 तक 48, 382 करोड़ था।

शिक्षा लोन देने की स्कीम 2000 से 2001 में पी चिदंबरम द्वारा शुरू किया गया था।

2013 से 2016 तक जहां भारतीय उधोग जगत आवश्यकता औऱ वृद्धि के अनुसार रोजगार के अवसर पैदा नहीं कर पाया है,  कई ऐसे प्रोजेक्टस को बंद कर दिया गया और कई टॉप कॉरपोरेट्स का डिफोल्ट में चले जाना जैसी कई वजह हैं जिनके कारण कंपनियों की लेबर डिमांड में कमी आई है, जो शिक्षा संबंधी बैड लोन्स में बढ़ोतरी की एक मुख्य वजह है।

शिक्षा के लिए लोन सबसे ज्यादा आवेदक  दक्षिण भारत  में केरल और तमिलनाडु से हैं । आरटी आई के जवाब में ये भी बताया गया है कि इंजिनियरिंग और मैनेजमेंट के विषयों के लिए सबसे अधिक लोन लिया जाता है।

जॉबलैस ग्रोथ मोदी सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती है जो न सिर्फ उनकी सरकार द्वारा बढ़ाए गए प्रत्यक्ष पूंजी निवेश की असफलता को दर्शाता है बल्कि मेक इन इंडिया स्कीम के तहत रोजगार के अवसर बढ़ाने के दावों पर भी एक बड़ा सवाल उठाता है।

WeForNews Bureau

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