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पश्चिम बंगाल में 100 साल की वृद्धा से दुष्कर्म

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प्रतीकात्मक तस्वीर

पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में एक 20 साल के युवक द्वारा 100 साल की वृद्धा के साथ दुष्कर्म की घटना सामने आई है।

चकदाह पुलिस थाने के अधिकारी ने बुधवार को बताया, “यह घटना सोमवार आधी रात की है। अरघा बिस्वास उर्फ अभिजीत को घटना के बाद वृद्धा के परिवार के सदस्यों ने पकड़ लिया। मामले की शिकायत मंगलवार को दर्ज की गई।”

गंगाप्रसादपुर निवासी आरोपी अभिजीत को गिरफ्तार कर अदालत के समक्ष पेश किया गया। इस मामले पर कार्यवाही चल रही है और आवश्यक चिकित्सा परीक्षणों के बाद पीड़ित वृद्धा को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

–आईएएनएस

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अधिकारी, नेता अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाएं : सत्यपाल सिंह

चंढीगढ़ में स्थानीय अफसरों के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढते हैं, जिससे वहां स्कूलों की बुनियादी सुविधाएं बेहतर हुई है। इसके अलावा इन स्कूलों के परीक्षा परिणाम भी बेहतर हुए है।

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नई दिल्ली, 17 जनवरी | केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह ने गुरुवार को अधिकारियों और नेताओं से अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूल और अस्पतालों की सेहत में तभी सुधार होगा जब अधिकारियों के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ेंगे और वे अपने परिजनों का इलाज सरकारी अस्पतालों में करवाएंगे।

डॉ. सिंह यहां जनकपुरी स्थित सूरजमल स्मारक शिक्षा संस्था की ओर से ‘ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा-वर्तमान स्थिति, चुनौतियां एवं समाधान’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय विचार गोष्ठी में बोल रहे थे। उन्होंने देश के सभी सरकारी अफसरों और नेताओं से आह्वान करते हुए कहा कि वे सरकारी स्कूलों और अस्पतालों की हालत सुधारने में अपनी भूमिका का निर्वहन करें।

उन्होंने कहा, “यह तभी संभव हो पाएगा जब अधिकारी, नेता, प्रभावी और उंचे पदों पर बैठे लोग अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढाएंगे और अपने परिजनों का इलाज सरकारी अस्पतालों में कराएंगे।”

गोष्ठी में डॉ. सत्यपाल सिंह के अलावा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर वेद प्रकाश, प्रवर्तन निदेशालय के पूर्व निदेशक कर्नल सिंह, विचार गोष्ठी समिति के अध्यक्ष कप्तान सिंह ने भी ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा की स्थिति पर अपने विचार रखे।

वक्ताओं ने कहा कि चंढीगढ़ में स्थानीय अफसरों के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढते हैं, जिससे वहां स्कूलों की बुनियादी सुविधाएं बेहतर हुई है। इसके अलावा इन स्कूलों के परीक्षा परिणाम भी बेहतर हुए है।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर शिक्षक ड्यूटी से नदारद रहते हैं जो चिंतनीय है। इस अवसर पर संस्था की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों पर कराए सर्वेक्षण की रिपोर्ट की एक पुस्तिका का भी विमोचन भी किया किया।

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ज़रा हटके

बीरबल की खिचड़ी पकी, लोगों ने उठाया लुत्फ

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Khichdi (File Pic)

नई दिल्ली, 17 जनवरी | मुगल बादशाह अकबर के नवरत्नों में शुमार बीरबल की कहानी में खिचड़ी कभी नहीं पक पाई थी, मगर दिल्ली में एक बीरबल की खिचड़ी पक भी गई और लोगों ने इस मकर संक्रांति पर खिचड़ी के जायके का खूब लुत्फ भी उठाया। यह बीरबल कोई और नहीं, बल्कि समाजसेवी और लेखक डॉ. बीरबल झा हैं। मिथिलालोक फाउंडेशन के अध्यक्ष और लिंगुआ फैमिली के प्रमुख डॉ. बीरबल झा ने इस बार मकर संक्रांति के अवसर पर यहां ‘खिचड़ी पे चर्चा’ का एक कार्यक्रम रखा था। कार्यक्रम में शिक्षा, व्यापार, राजनीति समेत कई क्षेत्र से जुड़े लोग पहुंचे थे, जिनमें कई चर्चित लेखक व साहित्यकार भी मौजूद थे।

आगंतुकों को खिचड़ी की दावत दी गई थी। बीरबल झा ने अपने निर्देशन में खिचड़ी का व्यंजन तैयार किया था। साथ में खिचड़ी के चार यार-घी, पापड,़ दही, अचार भी उपलब्ध थे। इस व्यंजन का लोगों ने खूब लुत्फ उठाया और इसकी खासियत की चर्चा की।

पाग पुरुष के नाम से चर्चित डॉ. झा ने कहा कि खिचड़ी सुपाच्य भोजन है, जो मरीजों के पथ्य से लेकर पंच सितारा होटलों के मेनू तक में आज शामिल है। मकरसंक्रांति पर खिचड़ी की दावत की परंपरा मिथिला में सदियों से चली आ रही है।

उन्होंने कहा कि खिचड़ी एक गुणकारी और जायकेदार व्यंजन है, जिसके कई रूप देखने को मिलते हैं। यह अंग्रेजी का शब्द हॉच- पॉच नहीं बल्कि फ्रेंच शब्द मिलॉन्ज का परिचायक है। मिलॉन्ज का अर्थ है मिश्रण। खिचड़ी में भी दाल, चावल, सब्जी और जायकेदार मसालों का मिश्रण होता है, जो काफी पौष्टिक होता है।

डॉ. झा ने कहा कि खिचड़ी के कई मुहावरे मिलते हैं, जिनका प्रयोग खानपान से इतर राजनीति, मनोरंजन, समाज समेत जीवन के कई क्षेत्र में अलग-अगल अर्थों में होता है। इस मौके पर दिल्ली विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के प्रोफेसर डॉ. अरुण कुमार झा ने कहा कि आज का विचार भी अब खिचड़ी बन गया है, जिसने साम्यवाद, पूंजीवाद व अन्यान्य वादों को समाहित कर लिया है।

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उत्तर प्रदेश : लखनऊ-कानपुर समेत 6 जिलों के अस्पतालों में आयकर छापा

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लखनऊ, 17 जनवरी । आयकर विभाग ने गुरुवार को लखनऊ, कानपुर समेत प्रदेश के छह जिलों में आठ स्थानों पर डॉक्टरों और अस्पतालों में छापे मारे। आयकर विभाग की टीम ने सभी जगह एक साथ सुबह आठ बजे छापे मारे।

गुरुवार की सुबह आयकर विभाग की आठ टीमों ने प्रदेश में एक साथ डॉक्टरों और अस्पतालों में छापा मारा। सभी डॉक्टरों के बारे में आयकर की टीमें काफी दिनों से जानकारी जुटा रही थीं।

प्रधान निदेशक आयकर जांच अमरेंद्र कुमार के निर्देशन में सभी स्थानोंपर सहायक निदेशकों ने छापे मारे हैं।विभागीय टीम को इन डॉक्टरों के पास अघोषित आय और निवेश की जानकारी मिली, इसके साथ ही लेखा पुस्तकों में भी छेडखानी के संकेत मिले हैं।

आयकर विभाग की टीम ने गुरुवार को राजधानी लखनऊ स्थित चरक हॉस्पिटल पर छापेमारी की।इसके साथ ही आयकर विभाग की टीम ने चरक ग्रुप के सभी ठिकानों पर छापेमारी की है।चरक अस्पताल के मालिक रतन सिंह के घर पर छापा मारा है।

आयकर विभाग को चरक हॉस्पिटल के डॉक्टरों व मालिक के पास में अघोषित आय और निवेश करने की जानकारी मिली थी, जिसके बाद में गुरुवार को आयकर विभाग की टीम ने इनके खिलाफ छापेमारी शुरूकी।

आयकर विभाग ने जहां जहां छापा मारने की कार्रवाई की है, उनमें डॉ. महेशचंद्र शर्मा, एसपीएम हास्पिटल एंड ट्रामा सेंटर, कानपुर, डॉ. महेशचंद्र शर्मा, एसआइपीएस हास्पिटल, लखनऊ, डॉ. रतन कुमार सिंह, चरक हास्पिटल लखनऊ, डॉ. प्रेमकुमार खन्ना, जेपीएमसी पैथ लैब, मुरादाबाद, डॉ. भूपेंद्र सिंह न्यूरोफिजिशियन मेरठ, डॉ. राजीव मोटवानी, नियो हास्पिटल नोएडा, डॉ. गुलाब गुप्ता, नियो हास्पिटल, नोएडा और डॉ. अंकित शर्मा, जीएस मेडिकल कालेज एंड हास्पिटल, पिलखुआ, हापुड़ शामिल हैं।

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