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‘शिखंडी, गब्बर, ईमानदार और विश्वासघाती’ जैसे जुमले तो केजरीवाल पर ही भारी हैं!

Arvind Kejriwal

विरोधियों को ‘शिखंडी’ या ‘गब्बर’ या ‘विश्वासघाती’ होने की जितनी भी जुमलेबाज़ी हुई है, वो उससे केजरीवाल की छटपटाहट के सिवाय और क्या सामने आया है…!

कौन नहीं जानता कि महाभारत की कथाओं की तरह ही भारतीय जनता पार्टी, नरेन्द्र मोदी और अमित शाह की महिमा भी उतनी ही अद्भुत है, जितनी कि आम आदमी पार्टी और अरविन्द केजरीवाल का दैवीय अवतार! वर्ना, केजरीवाल के प्रवक्ता अपने आक़ा के बचाव के लिए शिखंडी और गब्बर सिंह जैसी ‘हास्यास्पद’ उपमाओं का इस्तेमाल क्यों करते जिससे एक बार फिर से ये कौतूहल पैदा हो गया कि आख़िर ‘वो किस मिट्टी के बने हैं!’ दरअसल, आम आदमी पार्टी और बीजेपी दोनों ही, अच्छी तरह से जानते हैं कि उनका डीएनए एक ही है। इसीलिए, दोनों पार्टियों के बीच रही नौटंकी इन दिनों देश का सर्वश्रेष्ठ मनोरंजक धारावाहिक बन चुका है।

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अरविन्द केजरीवाल की ख़ाल बचाने का राजधर्म निभाते हुए ‘आप’ के प्रवक्ता का ये कहना बिल्कुल सही है कि ‘गब्बर सिंह के मुँह से अहिंसा का उपदेश’ किसी को नहीं सोहाएगा! दरअसल, बीजेपी और ‘आप’ दोनों फ़िल्म ‘दीवार’ (1975) के उन सगे भाईयों की तरह हैं जो मेले में बिछुड़ गये थे। उनमें से एक बड़ा होकर ‘डॉन’ अमिताभ बच्चन यानी ‘बीजेपी’ बनता है तो दूसरा ‘पुलिस इन्सपेक्टर’ शशि कपूर यानी अरविन्द केजरीवाल कहलाता है! अब पटकथा के क्लाईमेक्स वाला अमिताभ का वो संवाद याद कीजिए कि “जाओ पहले उस आदमी का साइन लेकर आओ जिसने मेरी माँ को ग़ाली देकर नौकरी से निकाल दिया। जाओ पहले उस आदमी का साइन लेकर आओ जिसने मेरे हाथ पर लिख दिया था कि मेरा बाप चोर है। उसके बाद तुम जिस काग़ज़ पर कहोगे मैं साइन कर दूँगा…!”

नौटंकी में अब एक नये पात्र की भी एंट्री हो गयी है। वो हैं अरविन्द की पत्नी सुनीता। पति की छीछालेदर ने उन्हें बेचैन कर रखा है। इसीलिए बेचारी क़ुदरत के क़ानून का वास्ता देते हुए कहती हैं कि ‘कपिल ने झूठ और विश्वासघात का जैसा बीज बोया है, वो वैसा ही काटेंगे!’ जवाब में कपिल मिश्रा ने भी उन पर मरहम लगाया और बोले, ‘वो अपने पति के पतन से परेशान हैं, सच से अनजान हैं। उनकी हर ग़ाली सिर-माथे। उनके ख़िलाफ़ कभी कुछ नहीं कहूँगा!’ मुमकिन है कभी कपिल ने सुनीता का नमक ख़ाया हो और वो उनकी ख़िलाफ़ नमकहरामी नहीं करना चाहते! बहरहाल, वापस लौटते हैं केजरीवाल के एक अन्य प्रवक्ता के बयान की ओर, जिसमें कहा गया कि बीजेपी में ‘दम है तो सामने आये, शिखंडी के पीछे छिपकर वार क्यों कर रहे हैं?’ ज़ाहिर है कि यहाँ शिखंडी हैं कपिल मिश्रा, वार किया जा रहा है पितामह भीष्म यानी अरविन्द केजरीवाल पर और शिखंडी की आड़ लेकर भीष्म पर वार करने वाला है अर्जुन यानी बीजेपी…!

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उधर, कपिल मिश्रा की ओर से उठाये गये महाप्रश्न का भी अरविन्द के प्रवक्ता ने दे दिया है। उसने साफ़ किया कि ‘आप’ के पाँच नेताओं – संजय सिंह, राघव चड्ढा, आशीष खेतान, सत्येन्द्र जैन और दुर्गेश पाठक, ने अपने घर-परिवार के पैसों से विदेश यात्राएँ की थीं। वो कहते हैं, “हमारी फंडिंग और विदेश दौरों पर सवाल उठाये जा रहे हैं। मैं घर से सक्षम हूँ और ‘आप’ में आने से पहले भी फैमिली और ख़ुद के ख़र्च पर विदेश जाता रहा हूँ।” यानी, अब कपिल साबित करें कि ‘उनकी पार्टी’ (तकनीकी तौर पर कपिल अभी ‘आप’ में ही हैं) के प्रवक्ता झूठ बोल रहे हैं।

इसी साफ़-सफ़ाई वाले इपीसोड में ‘आप’ के प्रवक्ताओं के कमोबेश गिड़गिड़ाते हुए बीजेपी को चेतावनी दी कि वो “आप और केजरीवाल की ईमानदारी पर सवाल उठाना बन्द करे! क्योंकि दुनिया ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण को कैमरे पर पैसा लेते देखा है। कैमरे पर ही वाजपेयी सरकार में मंत्री रहे दिलीप सिंह जूदेव कह चुके हैं कि पैसा ख़ुदा तो नहीं, लेकिन ख़ुदा से कम भी नहीं!” ज़ाहिर ऐसी करतूते करने वाले उस अरविन्द केजरीवाल को कॉलर पकड़कर जेल में डालने की बात कैसे कर सकते हैं, जो ख़ुद शीला दीक्षित और पंजाब के अकालियों को जेल में डालने के क़सीदें पढ़ चुका हो! बहरहाल, वापस लौटते हैं ‘शिखंडी’ की कहानी पर। इसे पढ़कर ये समझने की कोशिश करें कि शिखंडी की उपमा देकर आख़िर आम आदमी पार्टी हासिल क्या करना चाहती है…?

शिखंडी की कहानी
भारत की पौराणिक कहानियों के मुताबिक, देवाधिदेव भगवान शिव को दुनिया का ‘आदि-प्लास्टिक सर्ज़न’ माना जा सकता है! उन्होंने गणेश के सिर पर नन्हें हाथी का सिर फिट करके प्लास्टिक सर्ज़री ही तो की होगी! हालाँकि, शिव चाहते तो उसी तकनीक़ से अपने पुत्र गणेश का काटा हुआ सिर भी वापस फिट करने का चमत्कार कर सकते थे! लेकिन महाभारत काल तक हालात काफ़ी बदल चुके थे। तब यक्ष यानी धर्मराज (यमराज) ने शिखंडी को ख़ुदकुशी से बचाने के लिए उसका लिंग परिवर्तन करके उसे अपना पुरुषत्व दे दिया था, जो शिखंडी की मौत के बाद यक्ष को वापस मिल गया था!

महाभारत की कथा के मुताबिक़, शिखंडी का जन्म राजा द्रुपद के घर में एक कन्या के रूप में हुआ था। यही कन्या पिछले जन्म में काशी नरेश की बड़ी बेटी अम्बा के रूप में जन्मी थी। उसकी दो और बहनें भी थीं – अम्बिका और अम्बालिका। देवव्रत भीष्म ने इन तीनों का उनके स्वयंवर से अपहरण कर लिया था। वो इनका विवाह अपने भाई और हस्तिनापुर से राजा विचित्रवीर्य से करवाना चाहते थे। हस्तिनापुर पहुँचने पर अम्बा ने बताया कि वो किसी और से प्रेम करती है। लिहाज़ा, भीष्म ने अम्बा को ससम्मान उसके प्रेमी के पास भेज दिया। लेकिन प्रेमी ने उसका तिरस्कार कर दिया। वो वापस हस्तिनापुर लौट आयी और अपने हाल के लिए भीष्म को ज़िम्मेदार ठहराया और उन पर विवाह करने का दवाब डाला। लेकिन भीष्म ने आजीवन ब्रह्मचर्य से प्रतिज्ञाबद्ध होने की लाचारी जतायी। तभी अम्बा ने भीष्म को श्राप दिया कि एक दिन वही उनकी मौत की वजह बनेगी।

इसके बाद, अम्बा ने घोर-तपस्या की। इससे ख़ुश होकर भगवान शंकर से उसे मनोकामना पूर्ण होने का वरदान मिला। फिर अम्बा ने अपनी प्रतीज्ञा पूरी करने के लिए पांचाल नरेश द्रुपद की बेटी के रूप में जन्म लिया, जिसका नाम शिखंडी पड़ा। उसके जन्म के वक़्त आकशवाणी हुई कि उसका लालन-पालन एक पुत्री के रूप में नहीं बल्कि एक पुत्र के रूप में किया जाए। लिहाज़ा, उसे युद्धकला का प्रक्षिक्षण मिला। कालान्तर में पुरुष रूप में ही उसका विवाह भी हुआ। सुहागरात के दिन शिखंडी की पोल खुल गयी। सच जानने के बाद उसे उसकी पत्नी ने अपमानित किया। आहत शिखंडी ने आत्महत्या का विचार लेकर पांचाल छोड़ दिया। तब एक यक्ष ने उसे बचाया और लिंग परिवर्तन करके अपना पुरुषत्व उसे दे दिया। इस तरह शिखंडी एक पुरुष बनकर पांचाल वापस लौट गया और अपनी पत्नी-बच्चों के साथ सुखी वैवाहिक जीवन बिताया। शिखंडी की मौत के बाद उसका पुरुषत्व यक्ष को वापस मिल गया।

शिखंडी ने महाभारत के युद्ध में अपने पिता द्रुपद और भाई धृष्टद्युम्न के साथ पांडवों की ओर से युद्ध किया। कौरवों की ओर से लड़ रहे भीष्म अजेय थे! उन्होंने ही कृष्ण और अर्जुन को अपनी मृत्यु की तरक़ीब बतायी। उन्होंने ये राज खोला कि शिखंडी वो योद्धा है, जो पूर्व जन्म में स्त्री था। मैं उसे पूर्व जन्म से जानता हूँ इसलिए मेरी नज़र में वो आज भी स्त्री ही है। अब यदि मेरे सामने स्त्री होगी तो मैं उससे युद्ध नहीं करूँगा। अगले दिन यानी कुरुक्षेत्र में युद्ध के दसवें दिन शिखंडी ने भीष्म को ललकारा। लेकिन उन्होंने शिखंडी के रूप में अम्बा को सामने पा हथियार त्याग दिये। तभी अर्जुन ने शिखंडी के पीछे से वार करके भीष्म पर बाणों की बौछार कर दी और उन्हें बाण शैय्या पर लिटा दिया। लेकिन इस वावजूद भीष्म ने प्राण तभी त्यागे जब सूर्य उत्तरायन में हुए। दरअसल, भीष्म को उनके पिता ने ईच्छा-मृत्यु का वरदान दिया था, क्योंकि उन्होंने पिता शान्तनु और माता सत्यवती की ख़ुशियों की ख़ातिर हमेशा अविवाहित रहने की प्रतीज्ञा की थी!

चलते-चलते: यहाँ शिखंडी की कहानी बताने का मक़सद सिर्फ़ इतना है कि शायद ‘आप’ के नेताओं को पता नहीं है कि उसकी असली कहानी क्या है? शिखंडी को सिर्फ़ भीष्म ने स्त्री माना था। बाक़ी वो युद्ध के वक़्त न तो स्त्री था और न ही स्त्री भेष में था! लिहाज़ा, विरोधियों को ‘शिखंडी’ या ‘गब्बर’ या ‘विश्वासघाती’ होने की जितनी भी जुमलेबाज़ी हुई है, वो उससे केजरीवाल की छटपटाहट के सिवाय और क्या सामने आया है…!

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