मोदी विरोधी चेहरा के रूप में उभरीं 'दीदी' | WeForNewsHindi | Latest, News Update, -Top Story
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मोदी विरोधी चेहरा के रूप में उभरीं ‘दीदी’

देश की सभी संस्थाओं पर हमले हो रहे हैं। यह एक खतरनाक खेल है। प्रधानमंत्री कालिदास की तरह व्यवहार कर रहे हैं, वह जिस शाखा पर बैठे हैं उसी को काटने की कोशिश कर रहे हैं।

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, जिन्हें उनके समर्थक ‘दीदी’ कहते हैं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विरोधी अपनी लय को बरकरार रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर साल भर हमलावर रहीं। उन्होंने अपने भाषणों व सोशल मीडिया पर लेखों व व्यंग्य के जरिए मोदी सरकार पर कड़े हमले किए और उनकी सरकार का केंद्र से कई मुद्दों पर संघर्ष जारी रहा।

पौराणिक कथाओं से लेकर प्राचीन भारतीय इतिहास तक तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी मोदी पर सभी तरह के हमलावर रहीं, जबकि पश्चिम बंगाल में भाजपा का वोट शेयर विभिन्न उपचुनावों व स्थानीय निकाय के चुनावों में बढ़ना जारी रहा।

भाजपा ने जिस तरह से तृणमूल के विकल्प के तौर पर उभरने का प्रयास किया, ममता ने इसके उलट राष्ट्रीय तौर पर खुद को हिंदुत्व समूह के प्रमुख विरोधी के तौर पर पेश किया।

ममता ने क्षेत्रीय नेताओं के साथ मिलकर संघ परिवार का विरोध किया और अपने फैसलों व कार्रवाई से केंद्र के कामकाज पर दबाव बनाया व अपना हित साधा।

उन्होंने मोदी की प्रमुख नीतियों जैसे नोटबंदी व वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लेकर उन पर निशाना साधा, जबकि आर्थिक वृद्धि में गिरावट, अहिष्णुता, गोमांस प्रतिबंध व गोरक्षकों जैसे ज्वलंत मुद्दों से फायदा उठाने की कोशिश की।

हालांकि, वह मोदी पर जोरदार हमलों की वजह से सुर्खियों में रहीं।

ममता ने एक मौके पर मोदी की तुलना संस्कृत के महान कवि व नाटककार कालिदास से की थी। हालांकि उन्होंने तुलना उस कालिदास से की थी, जिसे कभी महान मूर्ख समझा जाता था। कहानी का संदर्भ यह था कि राजकुमारी विद्योत्तमा के लिए जब महामूर्ख की तलाश की जा रही थी तो देखा गया कि एक युवक बुद्धिमत्ता की कमी की वजह से जिस डाल पर बैठा था, उसी को काट रहा था। वह युवक कालिदास था, जो विद्योत्तमा के साथ विवाह के बाद बुद्धिमान बना।

ममता बनर्जी ने अपनी टिप्पणी में कहा, “देश की सभी संस्थाओं पर हमले हो रहे हैं। यह एक खतरनाक खेल है। प्रधानमंत्री कालिदास की तरह व्यवहार कर रहे हैं, वह जिस शाखा पर बैठे हैं उसी को काटने की कोशिश कर रहे हैं।”

ममता ने अपने एक अन्य आक्रामक भाषण में मोदी व रामायण महाकाव्य के दैत्य राजा रावण की तुलना की।

मोदी के 56 इंच के सीने की टिप्पणी का जिक्र करते हुए ममता ने कहा, “वह दावा करते हैं कि उनका सीना व कंधा चौड़ा है। रावण के कंधे भी चौड़े थे और उसके दस सिर थे।”

बंकुरा जिले में एक सार्वजनिक सभा में ममता बनर्जी ने मोदी पर फिर से हमला किया और मोदी सरकार को ‘गूंगा व बहरा’ बताया।

उन्होंने कहा, “वह पहले खुद को चायवाला कहते थे। अब वह करोड़पति पेटीएम वाला बन चुके हैं।”

ममता बनर्जी ने नोटबंदी को ‘शर्मनाक’ बताया और ट्विटर पर मोदी के इस फैसले को ‘एक तानाशाह की दृष्टिहीन, उद्देश्यहीन व दिशाहीन फैसला’ बताकर खारिज किया था।

ममता बनर्जी ने लोकतांत्रिक प्रदर्शन के हर तरीके को अपनाया। उन्होंने तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का दरवाजा भी खटखटाया था और उनसे देश की अव्यवस्था को बचाने का आग्रह किया था।

ममता ने मोदी से इतर भाजपा के दूसरे नेताओं- लालकृष्ण आडवाणी, राजनाथ सिंह व अरुण जेटली के नेतृत्व को स्वीकार करने की बात कही।

जीएसटी को समर्थन देते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि मोदी सरकार ने इस नई प्रणाली को ‘विनाशकारी रूप से जल्दबाजी’ में एक जुलाई से लागू कर दिया। उन्होंने केंद्र के इस कदम को ‘एक अन्य बड़ी भूल’ बताया।

हालांकि, ममता बनर्जी ने ‘संयुक्त नेतृत्व’ के जरिए मोदी को चुनौती देने पर जोर दिया। लेकिन एक मीडिया कॉन्क्लेव में बीते महीने उन्होंने संकेत दिया कि वह 2019 में सभी विपक्षी दलों को भाजपा के खिलाफ एक मंच पर लाने में कोई भूमिका निभाने नहीं जा रही हैं, कोई ऐसा साझा मंच बनेगा तो उसका समर्थन जरूर करेंगी।

By : शीर्षेदु पंत

–आईएएनएस

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क्या अमेरिका F-16 विमान के बेज़ा इस्तेमाल के लिए पाकिस्तान को सज़ा देगा?

कभी पाकिस्तान के सबसे ख़ास दोस्त रहे अमेरिका के सामने अब धर्मसंकट है। अमेरिका को प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर ये स्वीकार करना होगा कि पाकिस्तान को लेकर उसकी पुरानी नीति ग़लत थी।

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F-16 jet

27 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के नौशेरा और राजौरी सेक्टर में भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनन्दन वर्तमान की ओर से दिखाये अदम्य साहस और वीरता ने पाकिस्तान को दो ऐसे गुनाहों को करने के लिए मज़बूर कर दिया, जिन पर पर्दा नहीं डाला जा सकता। पहला क़सूर है – 17 नवम्बर 2006 को अमेरिका से हुए क़रार को तोड़कर भारत के ख़िलाफ़ F-16 लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल और दूसरा गुनाह है – युद्ध बन्दियों के प्रति व्यवहार से जुड़ी जेनेवा संघि, 1949 का उल्लंघन।

दोनों अपराधों के सबूत सारी दुनिया के सामने हैं। चाहे सच्चा हो या झूठा और दुर्भावनापूर्ण, लेकिन अभिनन्दन का हरेक वीडियो वायरल हो चुका है। उसे भारत के सुपुर्द करने की प्रक्रिया का भी पाकिस्तानी मीडिया ने सीधा प्रसारण किया। ज़बरन पाकिस्तानी सेना की तारीफ़ करवाने और भारतीय मीडिया की आलोचना करवाने वाले वीडियो भी पाकिस्तान के गुनाह के जीते-जागते सबूत हैं। इसीलिए अभिनन्दन की रिहाई के बाद भारत सरकार और हमारे राजनयिकों को ये तय करना होगा कि वो संयुक्त राष्ट्र से इस अपराध के ख़िलाफ़ कैसी कार्रवाई की माँग करना चाहेंगे?

वैसे जेनेवा संघि का उल्लंघन करने के लिए पाकिस्तान के ख़िलाफ़ निन्दा प्रस्ताव पारित करने के अलावा कड़े आर्थिक प्रतिबन्धों की भी कार्रवाई हो सकती है। ऐसी कार्रवाई की ज़ोरदार माँग करके भारत चाहे तो पाकिस्तान और उसके दोस्तों को और शर्मसार कर सकता है। इस लिहाज़ से भारत सरकार ने अभी तक अपने अगले रुख़ का इज़हार नहीं किया है। अलबत्ता, ऐसे संकेत ज़रूर मिले हैं कि भारत ने पाकिस्तान की ओर से अपने ख़िलाफ़ F-16 फ़ाइटर्स और हवा से हवा में मार करने वाली एमराम (AMRAAM) मिसाइल के बेज़ा इस्तेमाल के लिए अमेरिका से कार्रवाई की अपेक्षा की है। इसीलिए 28 फरवरी को तीनों सेनाओं की ओर से हुई साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में सबूत के दौर पर एमराम के मलवे को सारी दुनिया के सामने पेश किया गया था।

कभी पाकिस्तान के सबसे ख़ास दोस्त रहे अमेरिका के सामने अब धर्मसंकट है। अमेरिका को प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर ये स्वीकार करना होगा कि पाकिस्तान को लेकर उसकी पुरानी नीति ग़लत थी। भारत ने पाकिस्तान को लेकर अमेरिका को ख़ूब आगाह किया। लेकिन अमेरिका की आँख तो 9/11 (11 सितम्बर 2001) के आतंकी हमले से ही खुली। तब धीरे-धीरे अमेरिका ने पाकिस्तान की पीठ पर से हाथ खींचना शुरू किया। पाकिस्तान ने फिर भी कोई सबक नहीं लिया। आख़िरकार, 2 मई 2011 को ओसामा बिन लादेन के सफ़ाये से पाकिस्तान की रही-सही इज़्ज़त भी जाती रही।

झूठ और दग़ा, पाकिस्तान की जन्मजात पहचान रही है। भारत ने तो इसे हमेशा झेला है। इस्लामिक देशों के संगठन (आईओसी) की ओर से भारत और पाकिस्तान के प्रति दिखाये गये रवैये से लगता है कि अब इस्लामिक देशों की आँखों पर पड़ा पर्दा भी झीना पड़ चुका है। तभी तो बालाकोट ऑपरेशन के बाद चीन, सउदी अरब, यूएई, मिस्र और तुर्की जैसे पुराने दोस्तों ने भी पाकिस्तान से कन्नी काट ली। किसी भी देश ने पाकिस्तान को पीड़ित नहीं माना। किसी भी देश ने भारतीय कार्रवाई की आलोचना नहीं की। किसी भी देश ने पाकिस्तान के जवाबी हमले को सही नहीं ठहराया।

भारत और पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाईयों को ठंडा करवाने में अमेरिका ने भी अहम भूमिका रही। इसीलिए अब राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रम्प को ये अग्निपरीक्षा देनी है कि वो उस पाकिस्तान पर कार्रवाई करें, जिसने अमेरिका से वादा ख़िलाफ़ी करके उसके F-16 फ़ाइटर्स का भारत के विरूद्ध इस्तेमाल किया। पाकिस्तान ने अपनी आदत के मुताबिक़ झूठ बोला कि उसने भारत के ख़िलाफ़ F-16 विमानों का इस्तेमाल नहीं किया। जबकि भारत ने पुख़्ता सबूत हैं कि F-16 विमानों और सिर्फ़ उसी से लॉन्च हो सकने वाले एमराम (AMRAAM) मिसाइल का इस्तेमाल हिन्दुस्तान के ख़िलाफ़ किया गया है।

फ़िलहाल, ये साफ़ नहीं है कि F-16 विमानों और एमराम मिसाइलों को लेकर पाकिस्तान ने 2006 वाले जिस अमेरिकी क़रार तो तोड़ा है, इसके बदले में अमेरिका क्या क़दम उठाएगा? वो कैसे पाकिस्तान को दंडित करेगा? क्या अमेरिका अपने क़रार की अनदेखी करना चाहेगा? अनदेखी की नीति पर चलने से महाशक्ति अमेरिका और राष्ट्रपति ट्रम्प की प्रतिष्ठा पर आँच आएगी। वैश्विक स्तर पर यदि क़रारों और संधियों की प्रतिष्ठा नहीं रहेगी तो दुनिया की व्यवस्थाएँ कैसे चलेंगी?

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जंग के कुहासे में धूमिल पड़ गई सच्चाई

घंटों की चुप्पी के बाद भारत ने पुष्टि की कि उसका एक पायलट कार्रवाई में लापता है, लेकिन इससे ज्यादा कुछ बताने से मना कर दिया। इस बात की भी पुष्टि की गई कि भारत ने पाकिस्तान के एक विमान को मार गिराया, लेकिन यह नहीं बताया कि क्या यह एफ-16 है।

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Raveesh Kumar

जंग के कुहासे में सीमा पर हवाई मुठभेड़ को लेकर दावों और प्रतिदावों के बीच भारतीय वायुसेना (आईएएफ) के एक वरिष्ठ अधिकारी विदेश मंत्रालय संयुक्त सचिव (विदेश प्रचार) रवीश कुमार के साथ ब्रीफिंग में बुधवार को सामने आए, लेकिन सवालों के जवाब नहीं दिए और तथ्यों को कयासों पर छोड़ दिया।

एयर वाइस मार्शल आर. जी. के. कपूर वायुसेना मुख्यालय में सहायक वायुसेना प्रमुख (ऑपरेशन) हैं। वह आक्रामक हवाई सैन्य संचालन के प्रभारी हैं। दो दिनों में पहली बार आईएएफ के अधिकारी मीडिया के सामने आए, लेकिन पाकिस्तान द्वारा भारतीय पायलटों को हिरासत में लेने के दावों को लेकर उठे कई सवालों के जवाब नहीं दिए।

पाकिस्तान की हिरासत में लहूलुहान पायलट का परेशान करने वाला वीडियो वायरल होने से देश में पैदा हुई व्यग्रता के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला।

यहां तक कि आधिकारिक तौर पर उनकी पहचान की भी पुष्टि नहीं की गई, जबकि सोशल मीडिया पर उनकी पृष्ठभूमि के ब्योरे छाए हुए हैं।

पाकिस्तान के भीतर घुसकर मंगलवार को किए गए हवाई हमले का उन्माद पायलट के भावी हाल को लेकर चिंता में बदल गया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने दावा किया कि आईएएफ के दो पायलट उनकी हिरासत में हैं।

भारत का दावा है कि सिर्फ एक पायलट कार्रवाई में लापता है।

विदेश सचिव विजय गोखले ने मंगलवार के हवाई हमले को लेकर पहला बयान पाकिस्तान के इंटर सर्विसिस पब्लिक रिलेशंस के महानिदेशक, मेजर जनरल आसिफ गफूर द्वारा हमले को सार्वजनिक करने के घंटों बाद दिया।

सोशल मीडिया पर सुबह से ही पाकिस्तान की तरफ से जवान को भारी तैनाती के साथ सियालकोट में टैंक से जंग की खबरें छाई हुई थीं।

नियंत्रण रेखा (एलओसी) और जम्मू-कश्मीर की ओर फौरन कार्रवाई शुरू हो गई। पाकिस्तानी वायुसेना (पीएएफ) के लड़ाकू विमान द्वारा भारत के इलाके में बम गिराने की खबरों के बीच कश्मीर घाटी के बडगाम में एक विमान को मार गिराने की रिपोर्ट आई।

पाकिस्तान की तरफ से ही आधिकारिक दावे किए गए, जिसमें जवाबी कार्रवाई की बात कही गई।

हालांकि दावे के तथ्य बदलते रहे। पाकिस्तान ने घोषणा की कि उसने भारत के दो पायलट को अपने कब्जे में ले लिया है। इस खबर के फैलने से पहले खबर आई कि आईएएफ ने पाकिस्तान के एफ-16 को मार गिराया।

इस खबर का उन्माद बहुत देर नहीं रहा, क्योंकि भारत के पायलट के पकड़े जाने का कथित वीडियो पाकिस्तानी मीडिया पर वायरल हो गया।

घंटों की चुप्पी के बाद भारत ने पुष्टि की कि उसका एक पायलट कार्रवाई में लापता है, लेकिन इससे ज्यादा कुछ बताने से मना कर दिया। इस बात की भी पुष्टि की गई कि भारत ने पाकिस्तान के एक विमान को मार गिराया, लेकिन यह नहीं बताया कि क्या यह एफ-16 है।

जंग पर नजर रखने वाली वेबसाइटों ने भारत और पाकिस्तान सीमा पर खाली हवाई क्षेत्र दिखाया है, जिससे घबराहट बनी हुई है।

दावे काफी अधिक हो रहे हैं, लेनिक तथ्य बहुत कम हैं।

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पाकिस्तान को पानी रोकने पर विशेषज्ञों की राय बंटी

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नई दिल्ली, 16 फरवरी | सीआरपीएफ की टुकड़ी पर गुरुवार को पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले के बाद कड़ी कार्रवाई करने की मांग को देखते हुए विशेषज्ञ पश्चिम और पूरब की तरफ बहने वाली सिंधु और ब्यास नदियों का पानी पाकिस्तान जाने से रोकने पर विचार कर रहे हैं। वहीं, कुछ इसकी संभाव्यता पर शक जता रहे हैं।

जल संसाधन मंत्रालय के सेवानिवृत्त शीर्ष अधिकारी एम. एस. मेनन का कहना है कि पाकिस्तान को दिए जानेवाले पानी को रोका जा सकता है। उन्होंने सिंधु जल समझौते पर लंबे समय से काम किया है।

उन्होंने कहा, “हमने अधिक पानी उपभोग करने की क्षमता विकसित कर ली है। स्टोरेज डैम में निवेश बढ़ाकर हम ऐसा कर सकते हैं। झेलम, चेनाब और सिंधु नदी का बहुत सारा पानी देश में ही इस्तेमाल किया जा सकता है।”

भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हुआ सिंधु जल समझौता पूरब की तरफ बहने वाली नदियों – ब्यास, रावी और सतलुज के लिए हुआ है और भारत को 3.3 करोड़ एकड़ फीट (एमएएफ) पानी मिला है, जबकि पाकिस्तान को 80 एमएएफ पानी दिया गया है।

विवादास्पद यह है कि संधि के तहत पाकिस्तान को भारत से अधिक पानी मिलता है, जिससे यहां सिंचाई में भी इस पानी का सीमित उपयोग हो पाता है। केवल बिजली उत्पादन में इसका अबाधित उपयोग होता है। साथ ही भारत पर परियोजनाओं के निर्माण के लिए भी सटीक नियम बनाए गए हैं।

एक दूसरे सेवानिवृत्त अधिकारी, जो मंत्रालय में करीब दो दशकों तक सिंधु आयुक्त रह चुके हैं। उनका कहना है कि पाकिस्तान को पानी रोकना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि यह अंतराष्ट्रीय संधि है, जिसका भारत को पालन करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा, “मैं नहीं समझता कि इस प्रकार का कुछ करना संभव है। पानी प्राकृतिक रूप से बहता है। आप उसे रोक नहीं सकते।”

पूर्व अधिकारी ने कहा कि अतीत में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई है, लेकिन लोग ऐसी मांग भावनाओं में बहकर करते रहते हैं।

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