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Viral सच

भारतीय राजनीति की सबसे बड़ी समस्या: तुम करो तो रासलीला, हम करें तो कैरेक्टर ढीला!

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जिन लोगों ने भारत को आज़ाद करवाने के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया, उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि आज़ादी के महज 70 साल बाद ही उनके वंशजों की राजनीति का सबसे बड़ा सूक्ति वाक्य होगा, ‘तुम करो तो रासलीला, हम करें तो कैरेक्टर ढीला!’ इसे ही शायर अकबर इलाहाबादी (1846-1921) ने कहा कि ‘वो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होती, हम आह भी भरते हैं तो हो जाते हैं बदनाम!’ दरअसल, भारतीय राजनीति अब बात का बतंगड़ बनाने की सारे सीमाएँ तोड़ चुकी है।

प्रधानमंत्री को ‘नीच’ कहा गया, लेकिन उन्होंने उसे ‘नीच कुल’ बना दिया। मणि शंकर अय्यर के बयान से मोदी इतनी बुरी तरह आहत हुए कि वो गुजरात की जनता के आगे वैसे ही सुबकते हुए अपनी चोट दिखाने लगे जैसे कोई छोटा बच्चे रोते हुए अपने भाई-बहनों या संगी-साथी से झगड़े की शिकायतें परिवार के बड़ों से करता है! इसकी पृष्ठभूमि वो झुझलाहट है जो मोदी को गुजरात के चुनावी माहौल में झेलनी पड़ रही है। इसीलिए चुनावी रैली में मोदी कहते हैं कि ‘श्रीमान मणिशंकर अय्यर ने आज कहा कि मोदी नीच है। मोदी नीच जाति का है। क्या यही भारत की महान परम्परा है? ये गुजरात का अपमान है। मुझे तो मौत का सौदागर तक कहा जा चुका है। गुजरात की सन्तानें इस तरह की भाषा का तब जवाब दे देगी, जब चुनाव के दौरान कमल का बटन दबेगा। मुझे भले ही नीच कहा है। लेकिन आप लोग अपनी गरिमा मत छोड़िएगा।’

मोदी का ये बयान एक-पक्षीय है। उनकी पार्टी का प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा, जहाँ उन्हीं के नक्शे-क़दम पर चलते हुए टीवी कैमरे के सामने भावुकता के आँसू बहाता नज़र आता है, वहीं इसी शख़्स को काँग्रेस और राहुल गाँधी को ‘बाबर भक्त’ और ‘ख़िलज़ी के रिश्तेदार’ कहते शर्म नहीं आयी। अभी-अभी गुजरात में ही राहुल को ढोंगी हिन्दू, नकली जनेऊधारी कहने वालों को क्या नरेन्द्र मोदी ने लताड़ लगायी? मोदी ये करते कैसे! वो तो ख़ुद अव्वल दर्जे के बड़बोले हैं। उन्होंने राहुल के शिव-भक्त होने पर चटकारें लीं। काँग्रेस के संगठन चुनाव और राहुल गाँधी के नामांकन को ‘औरंगज़ेब राज’ कहा। ये मोदी ही थे जिन्होंने शशि थरूर की पत्नी को 50 करोड़ की गर्लफ्रेंड कहा था।

अभी-अभी केन्द्रीय खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने काँग्रेस पार्टी को ‘ईस्ट इंडिया कम्पनी’ कह डाला। इससे पहले सोनिया गाँधी को विदेशी, इटालियन जैसी कितनी ही बातें संघियों ने बोली। सुषमा स्वराज ने भी 2004 में अपना सिर मुड़ाने की धमकी दी थी। अभी-अभी अमित शाह ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को ‘नमूना’ कहा। उन्हें देहाती औरत, मौनी बाबा, नपुसंक, साला, नामर्द वग़ैरह कितने ही विशेषणों से यही संघी नवाज़ चुके हैं। अमित शाह ने ही महात्मा गाँधी के लिए ‘चतुर बनिया’ जैसे बाज़ारू शब्दों का इस्तेमाल किया। तब भगवा ख़ानदान के बुज़ुर्गों और संस्कारी लोगों ने अपने चेले-चपाटियों को भाषायी संयम के उपदेश क्यों नहीं दिये? सच्चाई ये है कि संघियों के गन्दे बोल ने भारतीय राजनीति से सौहार्द ख़त्म कर दिया।

ऐसा भी नहीं है कि बीजेपी के छुटभैय्ये नेताओं के अंटशंट बयान को काँग्रेसी नेताओं की ओर से प्रतिक्रियात्मक जबाव नहीं मिला। गुजरात दंगों पर जिस तरह से लीपापोती की गयी उसे देखते हुए नरेन्द्र मोदी को ‘मौत का सौदागर’ कहा गया। 2014 के चुनाव से पहले मणिशंकर अय्यर ने कहा था कि ‘मोदी चुनाव नहीं जीतने वाले। अलबत्ता, वो चाहें तो यहाँ काँग्रेस के अधिवेशन में आकर चाय ज़रूर बेच सकते हैं।’ इस बयान को तोड़मरोड़कर मोदी ने ख़ुद को ‘चायवाला’ बना लिया। अभी गुजरात की रैली में ही मोदी ने मणिशंकर अय्यर के हमले का जबाव देते हुए कहा कि ‘उनमें मुग़लों के संस्कार हैं। इसलिए वह इस तरह की बातें करते हैं। देश के पीएम के लिए ऐसे शब्द सिर्फ़ ऐसा ही व्यक्ति कह सकता है, जिसके संस्कारों में खोट हो।’ यहाँ मोदी ने अय्यर के संस्कारों पर हमला किया वो तो ठीक है, लेकिन उन्हें मुग़लों के संस्कार वाला बताने की क्या ज़रूरत थी?

यहाँ ये भी समझना बहुत ज़रूरी है कि आख़िर मणिशंकर अय्यर ने ऐसा क्या कहा था कि उन्हें राहुल गाँधी के दख़ल के बाद माफ़ी भी माँगनी पड़ी  और 75 साल की उम्र में पार्टी से निलम्बित होने की सज़ा भी मिली। अय्यर ने कहा था कि ‘मोदी को गाँधी परिवार के बारे में उस वक़्त ऐसी गन्दी बातें करने की क्या ज़रूरत थी जब दिल्ली में आम्बेडकर की याद में एक बड़े भवन का शुभारम्भ हो रहा है। इससे तो मुझे लगता है कि ये (मोदी) बहुत नीच किस्म का आदमी है। इसमें कोई सभ्यता नहीं है। ऐसे मौके पर ऐसी गन्दी राजनीति की क्या आवश्यकता है?’ यहाँ ये जानना भी दिलचस्प है कि ‘नीच’ स्वभाव को ज़ाहिर करने के लिए शब्दकोष में दर्जनों समानार्थी शब्द हैं। अँग्रेज़ी में तो इसके लिए कम से कम 74 शब्द हैं, जिन्हें इस लेख में अन्त में दिया भी गया है।

इससे पहले समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जवाहर लाल नेहरू पर भीमराव आम्बेडकर के साथ पक्षपात करने और उनकी भूमिका को कम करके दिखाने का आरोप मढ़े थे। उससे पहले मोदी ने सरदार पटेल और सुभाष चन्द्र बोस जैसे काँग्रेस के बड़े नेताओं को लेकर भी ख़ूब झूठी बातें की हैं। सच तो ये भी है कि संघ-बीजेपी के नेताओं की एक स्थायी नीति रही है ‘विरोधियों का चरित्रहनन’ करने की। बीजेपी के कुछ नेताओं ख़ासकर साक्षी महाराज, गिरिराज सिंह और विनय कटियार जैसे लोगों की तो पहचान की सिर्फ़ बिगड़े बोलों की वजह से है। संघ-बीजेपी के लिए सैकड़ों लोगों को बाक़ायदा ग़ालियाँ और अपशब्द लिखने के लिए भर्ती किया गया है। इनका काम ही है ‘विरोधियों का चरित्रहनन करना’ और उसे सोशल मीडिया पर फैलाना।

समाज में भी अब ऐसा नहीं रहा कि आप किसी को अपशब्द बोलेंगे और उससे प्रतिक्रिया नहीं मिलेगी। कभी ‘ग़ाली’ का जबाव ‘बड़ी ग़ाली’ बनता है, तो कभी ग़ाली-गलौज़ की वजह से ही मारपीट की नौबत आ जाती है। लगातार लोगों के दिमाग़ में जहर भरने से एक उन्मादी फ़ौज तैयार हो जाती है, जो ज़रा सा इशारा मिलने ही साम्प्रदायिक दंगों को जन्म देती है। ज़रूरत पड़ने पर इसी उन्मादी मानसिकता से वो कारसेवक पैदा होते हैं, जो कुछ ही घंटों में बाबरी मस्जिद को नेस्तनाबूद कर देते हैं। यही मानसिकता कुछ लोगों को आतंकवाद की ओर भी ले जाती है। लगातार लोगों के दिमाग़ में ज़हर भरने के नतीज़े वैसे ही भयावह होते हैं, जैसा हमने अभी-अभी मेवाड़ के राजसमन्द ज़िले में मेवाड़ी युवक शम्भू लाला रेगर की बर्बरता के रूप में देखा है, जिसने माल्दा के 50 वर्षीय मज़बूर अफ़राज़ुल को पीट-पीटते मार जाने के बाद उस पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। इसीलिए राजनीति के इतने छिछोरे स्तर तक गिर जाने को यदि आप हँसी-मज़ाक या लतीफ़ेबाज़ी समझकर नज़रअन्दाज़ करना चाहते हैं, तो याद रखिए कि लोकतंत्र के लिए अमर्यादित शब्द बेहद घातक साबित हो रहे हैं। क्योंकि यदि जहरीली बयानबाज़ियाँ बन्द नहीं हुईं तो वो दिन भी दूर नहीं जब हम अपने नेताओं को एक-दूसरे के ख़ून का प्यासा बनकर हाथों में नंगी तलवार लिये घूमता देखेंगे। यदि किसी को ये लगता है कि बयान-वीरों को सुधारने का काम उनकी पार्टियाँ ही कर लेंगी तो वो मुग़ालते में है। यदि ये मुमकिन होता तो राजनीति के अपराधीकरण पर भी नकेल कस ली जाती। नेताओं को सुधारने का काम जनता को ही करना होगा। चाहे इसमें वक़्त जो भी लगे। जनता को अनर्गल बयान देने वालों से नफ़रत करना सीखना होगा। चुनाव में उन्हें हराना होगा।

Hindi to English with Synonyms

– नीच

[neech]

1. lowly: नीच, नम्र, अधीन, नीचा, अधम

2. wretched: नीच, अतिदुखी, घृणायोग्य, निकम्मा, अधम

3. low: निम्न, नीच, हल्का, सामान्य

4. cowardly: कायर, नीच

5. craven: डरपोक, नीच, उत्साहहीन

6. degenerate: भ्रष्ट, कुलाचार, अपकृष्ट, अधम, नीच

7. demiss: आत्‍म-समर्पणशील, नीच, अघम, पतित

8. execrable: घृणित, गर्हणीय, नीच, अधम

9. hang dog: कमीना, नीच, अधम

10. humble: नीच, क्षुद्र, अल्पमति, विनयशील

11. low clown: दीनहीन, नीच, कमीना

12. mingy: नीच, कमीना

13. pleb: नीच, घटिया व्यक्ति, निम्‍न वर्ग का व्‍यक्ति

14. proletarian: साधारण, नीच

15. sorry: नीच, दुःखी, शोकार्त, अधम

16. slavish: कमीना, दासवत, दास सम्बन्धी, नीच, परिश्रमी

17. sneak: नीच, अधम मनुष्य, मुखबिर, चुगलखोर

18. lousy: घटिया, गंदा, नीच, घिनावना, बीभत्स से भरपूर

– नीच

adjective

1. vile: नीच, घिनौना, नीचतापूर्ण, पाजी

2. despicable: नीच, घिनौना, कुत्सित, नफ़रत पैदा करनेवाला, तिरस्कार-योग्य

3. dishonorable: नीच, लज्जाजनक, अपमानपूर्ण, बेइज़्ज़त

4. ignoble: नीच, अकुलीन, अप्रतिष्ठित

5. sneaky: डरपोक, नीच, चापलूस, पाजी, ख़ुशामदी

6. sordid: घिनौना, नीच, पतित

7. moldy: खोटा, फफूंदी लगा हुआ, पुराने ढंग का, नीच, बुरा, पुराने फ़ैशन का

8. reprobate: नीच, पाजी, नीचतापूर्ण

9. poky: सँकरा, नीच, तंग, तुच्छ, गंदा, कम

10. miscreant: नीच, भ्रष्ट, पाजी

11. fiendish: पैशाचिक, नीच, दुष्ट

12. shabby: जर्जर, नीच, दरिद्र, कंजूस, मलीन, अन्यायी

13. mean: नीच, मध्य, तुच्छ, बीच का, मंझला, अधम

14. pitchy: नीच, रालयुक्त, राल का, रालदार, चिपचिपा, लसदार

15. sneaking: चापलूस, छिपा हुआ, नीच, पाजी, गुप्त

16. base: आधारभूत, बुनियादी, नीच, खोटा, क्षुद्र

17. villainous: शरारतपूर्ण, नीच, दुर्जनोचित, घिनौना, बुरा

18. ribald: नीच, अशिष्ट

19. dirty: गंदा, मैला, मलिन, नीच, मैली, गंदला

20. pitiful: दयापूर्ण, रहमदिल, कृपालु, दयालू, नीच, पाजी

21. ghoulish: घृणास्पद, घिनौना, शैतान का, दुष्ट, नीच, पिशाच का

22. dastardly: कायर, नीच, नीचतापूर्ण, डरपोक

23. scabby: खुजलीवाला, नीच, खुजली का, पपड़ीदार, रूखा

24. nasty: बुरा, दुष्ट, नीच, घिनौना, घृणास्पद

25. hangdog: नीच, पाजी, नीचतापूर्ण

26. picayune: छोटा, निकम्मा, नीच, पाजी, तुच्छ

27. unblooded: नीचा, नीच, अशुद्ध, अधम, ख़राब

28. scurvy: रूसीदार, पाजी, अशिष्ट, बेअदब, रक्तस्राव रोग का, नीच

29. nefarious: कुटिल, बेईमान, नीच, खोटा

30. abject: अधम, नीच

31. meanspirited: कंजूस, पाजी, लोभी, नीच, नीचतापूर्ण

32. scummy: झागदार, फेनिल, नीच, पाजी

33. paltry: तुच्छ, क्षुद्र, निकम्मा, नीच

34. shocking: भयानक, घिनौना, दिल दहलानेवाला, घृणाजनक, बीभत्स, नीच

35. unroyal: नीच

36. plebeian: लौकिक, असभ्य, नीच, अशिष्ट, सामान्य मनुष्य-संबंधी

37. bass: नीच

38. scoundrelly: नीच, अधम, पाजी, दुष्ट

39. undeveloped: अविकसित, पिछड़ा हुआ, अधकचरा, अनुन्नत, नीच

40. doggerel: खोटा, भद्दा, बेजोड़, असंगत, बेहूदा, नीच

41. rotting: पाजी, नीच, नीचतापूर्ण

42. stingy: कंजूस, नीच, मक्खीचूस, डंक मारनेवाला

43. third-rate: ख़राब, बुरा, नीच

44. dishonourable: नीच, लज्जाजनक, अपमानपूर्ण, बेइज़्ज़त

45. mouldy: खोटा, फफूंदी लगा हुआ, पुराने ढंग का, नीच, बुरा, पुराने फ़ैशन का

46. noun – नीच

47. reprobate: नीच, बदमाश, पाजी, कापुस्र्ष

48. miscreant: नीच, बदमाश, कापुस्र्ष, पाषंडी, नीच मनुष्य, विधर्मी

49. scoundrel: बदमाश, लुच्चा, दुष्ट, नीच, लफ़ंगा, दुरात्मा

50. rascal: दुष्ट, पापी, नीच, धूर्त व्यक्ति

51. rotter: बदमाश, कापुस्र्ष, पाजी, नीच

52. dog: कुत्ता, नीच, शूर, पाजी, बदमाश, लौंडा

53. pimp: दलाल, कुटना, भड़ुआ, पाजी, नीच, बदमाश

54. sycophant: चापलूस, अति अनुरोधी, चुगलखोर, नीच

55. groveller: अधम, नीच

Viral सच

लोगों ने 3 महीनों में व्हाट्सएप पर बिताए 85 अरब घंटे

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WhatsApp

सैन फ्रांसिस्को, 21 अगस्त | सोशल मीडिया प्लेटफार्म व्हाट्सएप के संबंध में एक रोचक जानकारी सामने आई है। एक रपट से पता चला है कि लोगों ने बीते तीन महीनों में फेसबुक के स्वामित्व वाले व्हाट्सएप पर 85 अरब घंटे समय बिताया। फोर्ब्स की सोमवार को रपट के अनुसार, अमेरिका स्थित एप विश्लेषक कंपनी एप्पटोपिया की ओर से जारी आंकड़े में बताया गया है कि बीते तीन महीनों में लोगों ने व्हाट्सएप पर अपने 85 अरब घंटे खर्च किए। इस एप को दुनिया भर में 1.5 अरब प्रयोगकर्ता इस्तेमाल करते हैं।

इसी प्रकार, प्रयोगकर्ताओं ने इस दौरान इसकी स्वामित्व वाली कंपनी, फेसबुक पर 30 अरब घंटे का समय बिताया।

एप्पटोपिया के प्रवक्ता एडम ब्लैकर ने कहा, “यह स्पष्ट है कि व्हाट्सएप पसंद किया जाने वाला वैश्विक मैसेजिंग एप है।”

दुनियाभर में प्रयोगकर्ता जिन 10 एप पर सबसे ज्यादा समय बिताते हैं, उनमें व्हाट्सएप, वीचैट, फेसबुक, मैसेंजर, पेंडोरा, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, ट्विटर, गूगल मैप्स और स्पॉटीफाई प्रमुख हैं।

–आईएएनएस

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Viral सच

लड़कियों की तुलना में लड़कों का यौन उत्पीड़न ज्यादा!

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Child Sexual Abuse in India

नई दिल्ली, 6 अगस्त | देश में अक्सर जब बात बच्चों से यौन उत्पीड़न के मामलों की आती है तो दिमाग में लड़कियों के साथ होने वाली यौन उत्पीड़न की घटनाएं आंखों के सामने उमड़ने लगती हैं, लेकिन इसका एक पहलू कहीं अंधकार में छिप सा गया है। महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय की 2007 की रिपोर्ट दर्शाती है कि देश में 53.22 फीसदी बच्चों को यौन शोषण के एक या अधिक रूपों का सामना करना पड़ा, जिसमें से 52.94 फीसदी लड़के इन यौन उत्पीड़न की घटनाओं का शिकार हुए।

चेंज डॉट ओआरजी के माध्यम से बाल यौन उत्पीड़न के मामले को उठाने वाली याचिकाकर्ता, फिल्म निर्माता और लेखक इंसिया दरीवाला ने मुंबई से फोन पर आईएएनएस को बताया, “सबसे बड़ी समस्या है कि इस तरह के मामले कभी सामने आती ही नहीं क्योंकि हमारे समाज में बाल यौन उत्पीड़न को लेकर जो मानसिकता है उसके कारण बहुत से मामले दर्ज ही नहीं होते और होते भी हैं तो मेरी नजर में बहुत ही कम ऐसा होता है। इस तरह के मामले सामने आने पर समाज की पहली प्रतिक्रिया होती है कि लड़कों के साथ तो कभी यौन शोषण हो नहीं सकता, क्योंकि वे पुरुष हैं और पुरुषों के साथ कभी यौन उत्पीड़न नहीं होता।”

उन्होंने कहा, “समाज का जो यह नजरिया है लड़कों को देखने का ठीक नहीं है क्योंकि पुरुष बनने से पहले वह लड़के और बच्चे ही होते हैं। बच्चों की यह जो श्रेणी है काफी दोषपूर्ण है इसमें कोई लड़का-लड़की का भेद नहीं होता। लड़कों का जो शोषण हो रहा है अधिकतर पुरुषों द्वारा ही हो रहा है। मेरे हिसाब से यह काफी नजरअंदाज कर दी जाने वाली सच्चाई है और मैं पहले भी कई बार बोल चुकी हूं हम जो बच्चों व महिलाओं पर यह यौन हिंसा हमारे समाज में देख रहे हैं, कहीं न कहीं हम उसकी जड़ को नहीं पकड़ पा रहे हैं।”

लड़कों के साथ यौन उत्पीड़न होने पर बताने में कतराने की वजह के सवाल पर फिल्मनिर्माता ने कहा, “दरअसल जब समाज में किसी लड़की के साथ यौन उत्पीड़न की घटना होती है तो समाज की पहली प्रतिक्रिया हमदर्दी की होती है, उन्हें बचाने के लिए सपोर्ट सिस्टम होता है लेकिन अगर कोई लड़का अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न के मामले को लेकर बोलता भी है तो पहले लोग उसपर हंसेंगे, उसका मजाक उड़ाएंगे व मानेंगे भी नहीं और उसकी बातों का विश्वास नहीं करेंगे, कहेंगे तुम झूठ बोल रहे हो यह तो हो नहीं सकता। हंसी और मजाक बनाए जाने के कारण लड़कों को आगे आने से डर लगता है इसलिए समाज बाल यौन उत्पीड़न में एक अहम भूमिका निभा रहा है।”

उन्होंने बताया, “पिछले एक साल में जब से मैंने अपना अभियान और लोगों से बात करना शुरू किया है तब से काफी चीजें हुई हैं। इसलिए मैं सरकार की शुक्रगुजार हूं कि कम से कम वह इस ओर ध्यान दे रहे हैं। आज सामान्य कानूनों को निष्पक्ष बनाने की प्रक्रिया चल रही है, इसकी शुरुआत पॉस्को कानून से हुई और अब धारा 377, पुरुषों के दुष्कर्म कानून को भी देखा जा रहा है। अब अखिरकार हम लोग लिंग समानता की बात कर सकते हैं, जिससे वास्तव में समानता आएगी। लिंग समानता का मतलब यह नहीं है कि वह एक लिंग को ध्यान में रखकर सारे कानून बनाए, यह सिर्फ महिलाओं की बात नहीं है। पुरुष और महिलाओं को समान रूप से सुरक्षा मिलनी चाहिए।”

लेखक इंसिया दरीवाल ने कहा, “देखिए पॉस्को कानून निष्पक्ष है लेकिन जब आप लड़कों के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में दंड के प्रावधान को देखते हैं तो वह धारा 377 के तहत दिया जाता था। जैसे पहले अगर दो पुरुषों के बीच सहमति से हुआ तो भी धारा 377 के तहत दोनों लोगों को सजा मिलती थी और नहीं हुआ तो भी दोनों को इसी धारा के तहत सजा दी जाती थी। इसमें पीड़ित को भी सजा मिलने का खतरा था, हालांकि अब चीजों में सुधार हुआ है और इसपर अब काफी चर्चा हो रही है और समाज में भी बदलाव आ रहा है।”

महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी से मिले समर्थन पर उन्होंने कहा, “उन्होंने मेरे काम की सराहना की है और कहा कि यह काम काफी जरूरी है। मैंने उनसे एक स्टडी की मांग की थी, जिसमें यह देखना था कि बाल यौन उत्पीड़न की हमारे समाज में कितनी प्रबलता है और इसके जो प्रभाव हैं वह बच्चों और पुरुषों पर क्या हैं, इसमें यौन प्रभाव, उनके संबंधों पर क्या प्रभाव पड़ता है, उनके मानसिकता और शारिरिक स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता यह सब शामिल है। इस स्टडी के निष्कर्षो से मुझे मापदंड तैयार करने हैं और उन मापदंड़ों को मैं इसलिए तैयार करना चाहती हूं क्योंकि जब तक हम जड़ की जांच नहीं करेंगे तब तक नहीं पता चलेगा कि यह क्यों हो रहा है।”

बाल यौन उत्पीड़न मामलों में समाज की गलती के सवाल पर इंसिया ने कहा, “समाज कौन है हम लोग, इसलिए मानसिकता बदलना बहुत जरूरी है क्योंकि अगर हम लोग मानसिकता नहीं बदल पाए तो कानून कितने भी सख्त हो जाए तो उसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। जब भी कोई घटना होती है तो हम सरकार, कानून और वकीलों को दोषी ठहराते हैं लेकिन हमें कहीं न कहीं खुद को भी देखना चाहिए क्योंकि हमारे समाज में महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग भूमिका तैयार कर दी गई है, जिसे उन्हें निभाना पड़ता है, इसे बदलने की जरूरत है।”

भारत सरकार ने लिंग निष्पक्ष कानून बनाने के मद्दनेजर लड़कों के साथ होने वाले यौन शोषण को मौजूदा यौन अपराधों से बच्चों की सुरक्षा (पॉस्को) अधिनियम में संशोधनों को मंजूरी दे दी है जिसे कैबिनेट के पास मंजूरी के लिए भेजा जाना बाकी है।

–आईएएनएस

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Viral सच

अपहरण के आरोपी सबसे अधिक सांसद-विधायक भाजपा से

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नई दिल्ली, 30 जुलाई | भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कम से कम 16 सांसदों और विधायकों के खिलाफ अपहरण से संबंधित आपराधिक मामले दर्ज हैं। यह भारत में किसी भी राजनीतिक दल से सबसे ज्यादा है। मौजूदा 4,867 सांसदों और विधायकों द्वारा दाखिल हलफनामों के एक विश्लेषण से यह खुलासा हुआ है। चुनाव एवं राजनीतिक सुधारों के लिए काम करने वाली एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स द्वारा सोमवार को यह निष्कर्ष जारी किया गया।

निष्कर्ष में कहा गया है कि 770 सांसदों और 4,086 विधायकों के हलफनामों से यह खुलासा हुआ कि 1,024 या कुछ 21 फीसदी देश के सांसदों-विधायकों ने यह घोषित किया है कि उनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।

इसमें से 64 ने अपने खिलाफ अपहरण से संबंधित मामलों की घोषणा की है। इसमें से 17 विभिन्न राजनीतक दलों से ताल्लुक रखते हैं, जबकि चार निर्दलीय हैं।

भाजपा इस सूची में शीर्ष पर है। जबकि कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) दोनों दूसरे स्थान पर हैं। दोनों के छह-छह सदस्य इस सूची में शामिल हैं।

एडीआर के मुताबिक, सूची में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के पांच, बीजू जनता दल (बीजद) और द्रमुक के चार-चार, समाजवादी पार्टी (सपा), तेदेपा के तीन-तीन, तृणमूल कांग्रेस, माकपा, और शिवसेना के दो-दो सदस्य शामिल हैं।

साथ ही इस सूची में लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा), जद (यू), टीआरएस और उत्तर प्रदेश की निषाद पार्टी के एक-एक सदस्य का नाम भी शामिल है।

अपहरण से संबंधित आरोपों की घोषणा करने वाले विधायकों में बिहार व उत्तर प्रदेश से नौ-नौ, महाराष्ट्र के आठ, पश्चिम बंगाल के छह, ओडिशा व तमिलनाडु से चार-चार, आंध्र प्रदेश, गुजरात व राजस्थान से तीन-तीन, और छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, पंजाब व तेलंगाना से एक-एक सदस्य शामिल हैं।

–आईएएनएस

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