Connect with us

फोटो गैलरी

बैद्यनाथधाम : जहां लगती है दुर्लभ बेलपत्रों की प्रदर्शनी

Published

on

Baba-Baidyanath-Dham-Deoghar

देवघर, 31 जुलाई | महादेव के प्रिय महीने सावन में लाखों लोग प्रसिद्ध तीर्थस्थलों में एक झारखंड के देवघर जिले के बाबा बैद्यनाथधाम मंदिर पहुंचकर कामना लिंग पर जलाभिषेक करते हैं। मान्यता है कि सावन में गंगाजल से बाबा का जलाभिषेक करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, लेकिन गंगाजल के साथ बेलपत्र भी भगवान शिव को अतिप्रिय है।

बेलपत्र के इसी महत्व के कारण बैद्यनाथधाम के पुरोहितों द्वारा दुर्लभ बेलपत्रों की प्रदर्शनी लगाई जाती है। ये पुरोहित दूर-दराज के जंगलों से दुर्लभ प्रजाति के बेलपत्र चुन कर लाते हैं और मंदिर परिसर में दुर्लभ बेलपत्रों की अनोखी प्रदर्शनी लगाई जाती है। इस प्रदर्शनी को देखने के लिए हजारों श्रद्धालु इकठ्ठे रहते हैं।

पुरोहितों व बांग्ला पंचांग के मुताबिक, सावन संक्रांति के बाद प्रत्येक सोमवार को यहां बेलपत्र की प्रदर्शनी लगाई जाती है। बेलपत्र प्रदर्शनी में पुरोहित समाज के ही लोग हिस्सा लेते हैं, जिनमें ‘जनरैल’, ‘बरनैल’, ‘बमबम बाबा’ ‘राजाराम समाज’, ‘शांति अखाड़ा’ सहित विभिन्न पुरोहित समाज के लोग शामिल होते हैं।

बैद्यनाथ धाम के मुख्य पुजारी दुर्लभ मिश्रा बताते हैं कि यह प्रदर्शनी बांग्ला पंचांग के मुताबिक, सावन माह में संक्रांति के बाद प्रत्येक सोमवार की शाम मंदिर परिसर में लगती है। दुर्लभ बेलपत्रों को इकट्ठा कर चांदी के थाल में चिपकाया जाता है और मंदिर में चढ़ाने के बाद इसे प्रदर्शनी में शामिल किया जाता है।

एक अन्य पुजारी श्रीनाथ पंडा का कहना है कि ऐसा नहीं कि किसी भी बेलपत्र को प्रदर्शनी में लाया जा सकता है। इस प्रदर्शनी में उन्हीं बेलपत्रों को शामिल किया जाता है, जिनकी खोज पुजारी समाज के लोग खुद जंगलों से करते हैं।

उन्होंने बताया कि स्थानीय त्रिकूट पर्वत पर आज भी ऐसे कई बेल के वृक्ष हैं जो दुर्लभ हैं। इन्हीं वृक्षों के बेलपत्रों को इकट्ठा किया जाता है। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनी में शामिल बेलपत्रों में दुर्लभ बेलपत्रों की पहचान बुजुर्ग पुरोहित करते हैं।

अंतिम सोमवार को सबसे दुर्लभ तथा अद्भुत बेलपत्र लाने वाले पुजारी समाज को पुरस्कृत किया जाता है।

यह प्राचीन परंपरा और प्रदर्शनी श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनी रहती है।

राजाराम विल्वपत्र समाज के अध्यक्ष प्रेमशंकर मिश्र बताते हैं कि इस दुर्लभ प्रदर्शनी किसी अन्य ज्योतिर्लिगों में देखने को नहीं मिलती है। उन्होंने कहा कि यह परंपरा काफी प्राचीन है। सावन महीने के अंतिम सोमवार को अत्यंत दुर्लभ बेलपत्र को इकठ्ठा करने वाले पुरोहित समाज को पुरस्कृत किया जाता है।

देवघर स्थित प्रसिद्ध तीर्थस्थल बैद्यनाथ धाम में भगवान शंकर के द्वादश ज्योतिर्लिगों में नौवां ज्योतिर्लिग है। यह ज्योतिर्लिग ऐसे तो सभी ज्योतिर्लिगों में सर्वाधिक महिमामंडित माना ही जाता है।

बैद्यनाथधाम में कांवड़ चढ़ाने का बहुत महत्व है। शिव भक्त सुल्तानगंज से उत्तर वाहिनी गंगा से जलभर कर 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर यहां पहुंचते हैं और भगवान का जलाभिषक करते हैं।

यहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु आते हैं, परंतु सावन महीने में यहां शिवभक्तों का हुजूम उमड़ पड़ता है। प्रतिदिन यहां करीब एक लाख भक्त यहां आकर ज्योतिर्लिग पर जलाभिषेक करते हैं। इनकी संख्या सोमवार के दिन और बढ़ जाती है।

ज़रा हटके

‘मुस्लिम लड़कियों की घर व स्कूल की शिक्षा में फर्क नहीं’

Published

on

Muslim Girl

करीब एक दशक पहले लतिका गुप्ता ने जब दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापन आरंभ किया था तो वह यह जानने को लेकर उत्सुक थीं कि लड़कियों के जीवन पर धर्म और लैंगिक पहचान का परस्पर क्या प्रभाव पड़ता है। इस लगभग अनजान से पहलू की तलाश में वह जिस यात्रा पर निकलीं, उसका समापन एक एक पुस्तक के रूप में हुआ, जो हाल ही में प्रकाशित हुई है।

अंग्रेजी में लिखी गई पुस्तक ‘एजुकेशन, पॉवर्टी एंड जेंडर : स्कूलिंग मुस्लिम गर्ल्स इन इंडिया’ (शिक्षा, निर्धनता, लिंग : भारत में मुस्लिम बालिकाओं की स्कूली शिक्षा) में बच्चियों की शिक्षा पर धर्म और संस्कृति के प्रभावों को प्रमुखता से रेखांकित किया गया है और इसके लिए ‘घर’ और ‘विद्यालय’ के बीच के पारस्परिक प्रभावों की पड़ताल की गई है।

दिल्ली विश्वविद्यालय के केंद्रीय शिक्षा संस्थान में सहायक प्रोफेसर लतिका गुप्ता उस समय जिस पाठ्यक्रम में अध्यापन कर रही थीं, उसमें लड़कियों को अपने समाजीकरण पर विचार प्रस्तुत करने के मौके दिए जाते थे। उन्होंने पाया कि उनकी एक-दो छात्राओं को छोड़कर बाकी सब एक बात में समान थी कि वे सांस्कृतिक कसौटियों के पालन पर दृढ़ हैं लेकिन व्यक्तिगत विकास के प्रति उदासीन नजर आती हैं।

गुप्ता ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “मैं अक्सर हैरान रहती थी कि मेरी छात्राएं अपने घरों में धार्मिक कार्यक्रमों या घरेलू कामकाज में शामिल होने की वजहों से कक्षाएं छूटने से क्यों नहीं शर्मिदा महसूस करती हैं। ऐसी कौन-सी बात है जिनको लेकर उनमें अपने आपको विकसित करने की समझ पैदा नहीं हो पा रही है और वे पढ़ाई में अपनी ज्यादा-से ज्यादा ऊर्जा नहीं लगा पा रही हैं? यह मेरा व्यक्तिगत एजेंडा बन गया कि उन ताकतों का पता लगाऊं जो लड़कियों की जिंदगी और उनकी अपनी पहचान को आकार देतीं हैं।”

उनकी किताब में एक समुदाय की धार्मिक व सांस्कृतिक रूपरेखा और विद्यालय जीवन के पारस्परिक संबंध को तलाशने का प्रयास किया गया है। यह अध्ययन निम्न सामाजिक-आर्थिक हालात में में पल रहीं मुस्लिम बालिकाओं के शैक्षणिक अनुभव की जटिलता को समझने का साधन भी है। यह उस परिवेश में बारे में भी बताता है, जहां धर्म और लिंग के एक साथ मिलने से विशिष्ट सामाजिक व आर्थिक संदर्भ में एक सामाजिक ताकत का निर्माण होता है।

गुप्ता ने अल्पसंख्यकों के एक विद्यालय में पढ़ने वाली लड़कियों की पहचान का अध्ययन किया। इस विद्यालय का संचालन संविधान के अनुच्छेद 29 और 30 के तहत उल्लिखित प्रावधानों के तहत होता है, जिनमेंधार्मिक अल्पसंख्यकों को अपने शैक्षणिक संस्थान चलाने की इजाजत दी गई है।

उन्होंने स्कूल में पढ़ने वाली लड़कियों से उनके जीवन व उनकी आकांक्षाओं और उनकी पहचान के विभिन्न आयामों के बारे लिखवाकर उनके जीवन के अनुभवों का संकलन किया। इस प्रकार करीब एक साल तक लगातार उनके अनुभवों और उनके माता-पिता से बातचीत का उन्होंने संकलन करके उन सारे तथ्यों का गहन अध्ययन व विश्लेषण किया।

गुप्ता ने पाया कि विद्यालय की ओर से अपनी छात्राओं में वैसी क्षमता व योग्यता नहीं पैदा की जाती है जिससे वे अपने जीवन में आर्थिक व बौद्धिक संभावनाओं का उपयोग अपने के लिए कर पाएं। घर की जिंदगी और बाहर के जीवन में इनकी लैंगिक पहचान को लेकर किसी तरह का दखल स्कूल का नहीं होता।

गुप्ता की किताब दरियागंज के एक स्कूल में किए गए अध्ययन पर आधारित है। हालांकि निजता को बनाए रखने के मकसद से पूरी किताब में स्कूल का जिक्र महज मुस्लिम गर्ल्स स्कूल (एसएसजी) के रूप में हुआ है।

अध्ययन में मुस्लिम समुदाय की लड़कियों के लिए स्कूल और घर के बीच के मूल्यों और व्यवहारों में एक निरंतरता पाई गई। दरियागंज की मुस्लिम लड़कियों के लिए कोई वैकल्पिक आचरण का रूप उपलब्ध नहीं है। लड़कियां जो घर में सीखती हैं, वही स्कूल में सीखती हैं। टीचर और मां, दोनों से उन्हें समान शिक्षा मिलती है जबकि टीचर शिक्षित होती हैं और उन्हें पेशागत तालीम भी मिली होती है।

गुप्ता ने कहा कि एमजीएस की लड़कियों के जीवन में स्कूल की भूमिका लैंगिक सामाजीकरण के सुव्यवस्थित लक्षणों और महिला जीवन के पूर्व निर्धारित व स्पष्ट मकसदों के मध्य आती है। दोनों तरफ के दबाव के कारण लड़कियों को ज्ञान के विविध क्षेत्रों की जानकारी हासिल करने व उनमें शामिल होने की इजाजत देने के लिए स्कूल के पास बहुत कम संभावना बच जाती है। साथ ही अध्ययन में पाया गया कि अधिकांश मुस्लिम छात्राएं हिंदुओं के बारे में अच्छा और सहिष्णु नजरिया रखती हैं।

गुप्ता ने कहा कि अध्ययन में उन्होंने पाया कि लड़कियों का यह मानना है कि पत्नी के लिए जरूरी है कि वह सास-ससुर, पति व बच्चों की सेवा करे। वे पति से अपनी जरूरतों की पूर्ति के लिए सहज आर्थिक योगदान की अपेक्षा रखती हैं। किसी भी लड़की को यह नहीं लगता कि एक महिला के लिए अच्छी पत्नी होने के लिए परिवार को अपने दम पर आर्थिक सहयोग देना आवश्यक है।

Continue Reading

फोटो गैलरी

गूगल ने बिल्बर स्कोविल का बनाया डूडल

Published

on

Continue Reading

फोटो गैलरी

हैप्पी बर्थडे इमरान खान

Published

on

Continue Reading
Advertisement
Sridevi
मनोरंजन19 mins ago

मशहूर सैंड आर्टिस्ट ने रेत पर तस्वीर बना श्रीदेवी की दी श्रद्धाजंलि

hooda
राजनीति29 mins ago

खट्टर सरकार पर हुड्डा का हमला, कहा- ‘पूरी तरह चरमरा गई है कानून-व्‍यवस्‍था’

अंतरराष्ट्रीय53 mins ago

अमेरिका साइबर युद्ध की तैयारी में : उत्तर कोरिया

चुनाव1 hour ago

शासन करने वाली सरकारों ने पुडुचेरी के साथ अन्याय किया: पीएम

Sridevi
मनोरंजन2 hours ago

श्रीदेवी के निधन से शोक में डूबा बॉलीवुड

Sridevi_1
मनोरंजन3 hours ago

श्रीदेवी का दुबई में निधन, देर शाम मुंबई लाया जाएगा पार्थिव शरीर, अंतिम संस्‍कार कल

jammu and kashmir
राष्ट्रीय3 hours ago

जम्मू एवं कश्मीर में सुरक्षा चौकी पर हमला

rahul gandhi in karnataka
राजनीति3 hours ago

राहुल का मोदी पर प्रहार- ‘नीरव, माल्‍या, ललित मोदी भाग गए, ‘चौकीदार’ ने कुछ नहीं बोला’

sri davi
राष्ट्रीय4 hours ago

ममता ने श्रीदेवी के निधन पर शोक जताया

Sridevi AND Rajnikanth
मनोरंजन4 hours ago

श्रीदेवी के निधन पर रजनीकांत ने कहा- मैंने अपना सबसे गहरा दोस्त खोया

Gandhi Ji
ओपिनियन4 weeks ago

बात महात्मा गांधी की, काम उसके ठीक उलट : राजगोपाल

Tribal Village MP
ब्लॉग3 weeks ago

मप्र : आदिवासियों की बस्ती में न शौचालय बने, न गैस कनेक्शन मिले

Salim
राष्ट्रीय4 weeks ago

कासगंज हिंसा: मुख्य आरोपी सलीम गिरफ्तार

diamond trader Nirav Modi
राष्ट्रीय1 week ago

PNB SCAM : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आवास पर की थी ‘मेहुल भाई’ की मेजबानी

Kapil Sibal
ब्लॉग4 weeks ago

बढ़ती असमानता और सिकुड़ती आज़ादी ही अब भारतीय जनतंत्र की पहचान बनी

Petrol & Diesel in GST
ब्लॉग4 weeks ago

आख़िर क्यों मोदी सरकार पेट्रोलियम उत्पादों को कभी जीएसटी के दायरे में नहीं ला पाएगी?

राष्ट्रीय2 weeks ago

सुंजवान आर्मी कैंप हमले में 6 जवान शहीद

anita
लाइफस्टाइल4 weeks ago

लैक्मे फैशन वीक : अनीता डोंगरे पेश करेंगी ‘समर वेडिंग’ लाइन

DELHI
शहर2 weeks ago

DU की छात्रा के साथ चलती बस में छेड़छाड़, पीड़िता ने सोशल मीडिया पर वीडियो बनाकर किया अपलोड

Abhishek_
मनोरंजन3 weeks ago

जन्‍मदिन विशेष- अभिषेक बच्‍चन: ऐसा अभिनेता जिनकी फिल्‍में भले ही कुछ ना कर सकीं खास लेकिन अभिनय की हुई हमेशा तारीफ…

SRI DEVI
मनोरंजन7 hours ago

देखिए, श्रीदेवी का आखिरी वीडियो

mumbai
शहर1 day ago

मुंबई: मासूम बच्ची को पलक झपकते कैसे उठा ले गया शख्स, देखें वीडियो

Kapil Sibal
राजनीति1 day ago

NiMo-G पर बोले सिब्बल, अगर RBI ने नहीं की कार्रवाई तो हम करेंगे उसके खिलाफ कार्रवाई!

pm modi
राष्ट्रीय2 days ago

कनाडा और भारत के बीच हुए कई समझौते

murli manohar joshi
शहर3 days ago

कैंची नहीं मिलने पर भड़के जोशी, हाथ से ही उखाड़ा रिबन

IRFAN-KHAN--
मनोरंजन3 days ago

दूसरों को ‘ब्लैक मेल’ करने के चक्कर में खुद ब्लैकमेलर के जाल में फंसे इरफान खान, देखें वीडियो

banaras-hindu-university
राष्ट्रीय3 days ago

BHU में गोडसे के महिमामंडन पर हुआ कार्यक्रम, वीडियो हुआ वायरल, NSUI ने दर्ज कराई शिकायत

JustinTrudeau
राष्ट्रीय3 days ago

कनाडा पीएम अपने परिवार संग पहुंचे जामा मस्जिद

baaghi-2-
मनोरंजन4 days ago

‘बागी 2’ में दिखा टाइगर का जबरदस्त ऐक्शन,देखें वीडियो

poster
शहर5 days ago

RSS से जुड़े पोस्टर में वाल्मीकि और संत रविदास के लिए लिखे ‘अपशब्द’, गुस्से में दलित समाज

Most Popular