ब्लॉग

गहनों पर GST के नये फ़ॉर्मूले से बढ़ेगा ऐसे भ्रष्टाचार और काला धन…!

Related image

मोदी सरकार ने सोने-चाँदी के गहनों के लिए जैसा GST बनाया है, उससे राजस्व को तो बहुत मामूली फ़ायदा होगा, लेकिन घूसख़ोर अफ़सरों की पौ-बारह होना तय है! जिस ढंग से नोटबन्दी के बाद मोदी सरकार रोज़ाना नये-नये फ़रमान जारी कर रही थी, उसी तरह से GST लागू होने के बाद भी सरकार ने दो दिन में दो तरह के आदेश जारी किये। बहरहाल, अभी जो आदेश प्रभावी है, उसके मुताबिक अब यदि आप अपने पुराने गहनों को बेचकर उसके बदले या उससे अधिक क़ीमत के नये गहने ख़रीदने चाहते हैं तो आपको पुराने गहने के दाम पर कोई GST नहीं चुकाना पड़ेगा। जबकि गहनों के दाम में जो हिस्सा उसकी बनवायी यानी ‘मेकिंग चार्ज़’ होगा, उस रक़म पर आपको 18 फ़ीसदी GST भी देना होगा। रही बात पूरी तरह से नये गहनों के ख़रीद की तो उस पर तीन फ़ीसदी GST चुकाना पड़ेगा, जबकि उसके ‘मेकिंग चार्ज़’ पर लगने वाला GST, 18 फ़ीसदी ही रहेगा।

अब ज़रा इस टैक्स प्रणाली के व्यावहारिक पहलू को समझिए। मान लीजिए कि आप सोनार या सर्राफ़ा व्यापारी के पास एक लाख रुपये मूल्य का पुराना गहना लेकर गये। दुकानदार को इसे बेचने के बाद आपने उससे सवा लाख रुपये का नया गहना ख़रीद लिया। इस तरह आपके नये सोने की ख़रीद 25 हज़ार रुपये की हुई। इस 25 हज़ार पर आपको 3% GST यानी 750 रुपये और देना होगा। और, यदि नये गहने का ‘मेकिंग चार्ज़’ 10 हज़ार रुपये है तो इस 10 हज़ार पर 18% GST यानी 1800 रुपये भी देना होगा। इस तरह, सोनार का कुल बिल (25000+750+1800) 27550 रुपये होगा। साफ़ है कि सवा लाख रुपये की ख़रीदारी पर 2550 रुपये यानी 2.04% GST चुकाना होगा। इस तरह, GST की प्रभावी दर (Effective Rate) ‘मेकिंग चार्ज़’ के घटने-बढ़ने पर भी निर्भर करेगी।

आइए अब ये समझने की कोशिश करते हैं कि इस कारोबार में व्यावहारिक रूप से टैक्स की चोरी कैसे की जाएगी और कैसे टैक्स अधिकारी घूसख़ोरी करेंगे? दरअसल, छोटे सर्राफ़ा व्यापारी बड़े पैमाने पर पुराने गहने ख़रीदते हैं। वो जिन नये गहनों को बेचते हैं वो भी आज आधुनिक फैक्ट्रियों में बनते हैं, जिनकी ख़रीद-बिक्री बड़े व्यापारियों की मुट्ठी में है। तकनीकी तौर पर GST क़ानून में ये व्यवस्था की गयी है कि जब छोटा व्यापारी, पुराने गहनों को बेचने के लिए बड़े व्यापारी को दे तो बड़ा व्यापारी उससे 3 फ़ीसदी GST भी वसूले और उसे सरकार को दे। लेकिन यदि काग़ज़ों का पेट भरकर इस ख़रीद-बिक्री को ‘व्यापारी-व्यापारी’ की जगह ‘व्यक्ति-व्यापारी’ बना दिया जाए तो 3 फ़ीसदी GST को बहुत आसानी से ख़ुर्द-बुर्द किया जा सकता है!

समाज का सामान्य नियम है कि अफ़सरों की मिलीभगत के बग़ैर कोई चोरी नहीं हो सकती। इसके अलावा, यदि कोई व्यापारी हर तरह से नियम-क़ायदों के मुताबिक़ भी काम करे तो भी उससे घूस ऐंठने के लिए सरकारी अफ़सर उसे तरह-तरह से उलझाते हैं और अन्ततः चढ़ावा लेकर ही शान्त होते हैं। इसीलिए, तमाम सरकारी फ़ज़ीहतों से बचने के लिए व्यापारी सीधे-सीधे चढ़ावा चढ़ाना पसन्द करते हैं। भ्रष्ट अफ़सरों को भी ये ढर्रा बहुत पसन्द आता है। इसीलिए, उनकी तरह-तरह की छापेमारी भी सिर्फ़ रस्म-अदायगी होती है!

दरअसल, व्यापारियों के पास सोना-चाँदी पहुँचने का दो तरीक़ा है। पहला, विदेशी आयात से और दूसरा, पुराने सोने की ख़रीद से, जिसे गलाकर भी नये गहने बनाये जाते हैं। आयातित सोने के बिस्कुट पर सरकार कम से कम 10% आयात शुल्क (Import Duty) भी वसूलती है, जबकि आयातित गहनों पर तो ये कर 40% फ़ीसदी तक हो सकता है। विश्व में भारत, सोने का सबसे बड़ा उपभोक्ता है। देश में सोने की ख़पत का 99% आयात होता है। साल 2016-17 में आधिकारिक तौर पर 650 टन सोने का आयात हुआ। दस फ़ीसदी आयात कर के हिसाब से इससे सरकार को 20 हज़ार करोड़ रुपये का टैक्स मिला। यूपीए सरकार के वक़्त जब कच्चे तेल का दाम आसमान छूने लगा तो केन्द्र सरकार ने 2013 में व्यापार घाटे को काबू में रखने के लिए सोने पर 4% आयात शुल्क लगाया था। मोदी सरकार ने इसे बढ़ाकर 10% पर पहुँचा दिया है।

सोने पर जितना अधिक टैक्स होता है, उसकी तस्करी भी उतनी ही बढ़ती जाती है। वर्ल्ड गोल्ड काउन्सिल के मुताबिक, भारत में साल 2016-17 में 150 टन से ज़्यादा सोना तस्करी के रास्ते से आया। तस्करी से देश की अर्थव्यवस्था में जितना भी नया सोना आता है, सर्राफ़ा व्यापारी उसे पुराने सोने का नाम देकर अपने स्टॉक में दिखाते हैं। ये प्रवृत्ति GST के लागू होने के बाद भी निर्बाध रूप से जारी रहेगी। इसके अलावा, देश में हर साल 100-200 टन पुराना सोना बेचकर नया सोना ख़रीदा जाता है। पुराने गहनों की ख़रीद और उसके बदले नये गहनों की बिक्री पर GST के लागू होने से पहले तक 1% उत्पाद शुल्क (Excise Duty) और 1% बिक्री कर लगता था। इस 2% टैक्स के रूप में सरकार को 4000-6000 करोड़ रुपये का राजस्व मिलता था। सरकार को उम्मीद है कि GST के नये फ़ॉर्मूले के बाद इस ख़ाते में वो ज़्यादा टैक्स उगाहने में सफल होगी। आख़िरकार, इसमें जो भी इज़ाफ़ा होगा वो जनता पर बोझ ही तो होगा!

सोना, नया हो या पुराना, इसके व्यापारी अन्तर्राष्ट्रीय भाव के हिसाब से ही अपना कारोबार करते हैं। नये आयातित सोने का आवागमन छिपाना तो व्यापारियों के लिए आसान नहीं होता। लेकिन पुराने सोने की आड़ में वो कब-कितना बड़ा खेल खेलेंगे, इसे वो ख़ुद भी नहीं जानते। वो करोड़ों रुपये के नये गहनों को भी पुराने गहनों के एवज में बिका हुआ दिखाकर 3 फ़ीसदी GST को यथासम्भव चुराने की कोशिश करते रहेंगे। मज़े की बात ये भी है कि जो व्यापारी ऐसा करने से परहेज़ करेगा, उसका कारोबार कम रहेगा और उसके लिए सरकारी अफ़सरों की जेब गरम करना भारी पड़ जाएगा। लिहाज़ा, देर-सबेर ईमानदार व्यापारी भी बेईमानी करने के लिए मज़बूर होंगे, क्योंकि यही उनके धन्धे का दस्तूर बन जाएगा!

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Most Popular

To Top