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कमजोर जीडीपी से शेयर बाजार की तेजी पर लगा ब्रेक

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भारतीय शेयर बाजार में इस सप्ताह घरेलू व विदेशी कारकों से भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। इस दौरान प्रमुख संवेदी सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी ने नई बुलंदियों को छुआ, लेकिन देश के जीडीपी के आंकड़े कमजोर आने से सप्ताह के आखिरी सत्र में बाजार की तेजी पर ब्रेक लग गया और सेंसेक्स 41,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के नीचे बंद हुआ, जबकि निफ्टी 12,000 के ऊपर रहा।

हालांकि पिछले साप्ताहिक आधार पर सेंसेक्स और निफ्टी में एक फीसदी से ज्यादा बढ़त दर्ज की गई।

बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स शुक्रवार को पिछले सप्ताह के मुकाबले 434.40 अंकों यानी 1.08 फीसदी की तेजी के साथ 40,793.81 पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी 141.65 अंकों यानी 1.19 फीसदी की तेजी के साथ 12,056.05 पर बंद हुआ।

बीएसई मिड-कैप सूचकांक पिछले सप्ताह के मुकाबले 346.19 अंकों यानी 2.35 फीसदी की तेजी के साथ 15,084.86 पर बंद हुआ, जबकि बीएसई स्मॉल कैप सूचकांक 206.79 अंकों यानी 1.55 फीसदी की बढ़त के साथ 13,560.57 पर रहा।

अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक मसलों को सुलझाने की दिशा में प्रगति की रिपोर्ट से उत्साहित विदेशी बाजारों से मिले मजबूत संकेतों से सप्ताह की शुरुआत में सोमवार को सेंसेक्स 529.82 अंकों यानी 1.31 फीसदी के उछाल के साथ 40,889.23 पर बंद हुआ और निफ्टी भी 164.60 अंकों यानी 1.38 फीसदी की तेजी के साथ 12,079 पर ठहरा।

हालांकि सप्ताह के दूसरे कारोबारी सत्र में मंगलवार को महाराष्ट्र के राजनीतिक घटनाक्रमों से बाजार पर विकवाली का दबाव दिखा, जिससे सेंसेक्स 67.93 अंक फिसलकर 40,821.30 रुका और निफ्टी भी 36.05 अंक नीचे फिसलकर 12,037.70 पर बंद हुआ।

अगले सत्र में बुधवार को सेंसेक्स ने 41,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर चढ़कर 41,120.28 की नई उंचाई बनाई और निफ्टी भी 12,132.45 के रिकॉर्ड स्तर तक उछला। सेंसेक्स बुधवार को पिछले सत्र के मुकाबले 199.31 अंकों यानी 0.49 फीसदी की बढ़त के साथ 41,020.61 पर, जबकि निफ्टी 63 अंकों यानी 0.52 फीसदी की तेजी के साथ 12,100.70 पर बंद हुआ।

तेजी का यह सिलसिला गुरुवार को भी जारी रहा और सेंसेक्स 109.56 अंकों की तेजी के साथ रिकॉर्ड स्तर 41,130.17 पर बंद हुआ, जबकि सत्र के दौरान सेंसेक्स अब तक के सबसे ऊचे स्तर 41,163.79 को छुआ। निफ्टी भी 53 अंकों की बढ़त के साथ 12,154.30 पर बंद हुआ, जोकि अब तक का रिकॉर्ड क्लोजिंग स्तर है। जबकि निफ्टी कारोबार के दौरान 12,158.80 के सर्वाधिक स्तर तक उछला।

सप्ताह के आखिरी सत्र में शुक्रवार को इस तेजी पर ब्रेक लग गया और सेंसक्स पिछले सत्र से 336.36 अंकों यानी 0.82 फीसदी फिसलकर 40,793.81 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 95.10 अंकों यानी 0.78 फीसदी फिसलकर 12,056.05 पर बंद हुआ।

वित्त वर्ष 2019-20 की दूसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के आंकड़े खराब आने और विदेशी संकेत भी कमजोर मिलने के कारण आखिरी सत्र में शेयर बाजार में विकवाली का दबाव दिखा। दूसरी तिमाही में भारत की जीडीपी विकास दर 4.5 फीसदी रही, जोकि सात साल का सबसे निचला स्तर है।

–आईएएनएस

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प्रमुख आर्थिक आंकड़ों का रहेगा इंतजार, विदेशी संकेतों से चाल पकड़ेगा बाजार

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नई दिल्ली, भारतीय शेयर बाजार बीते दो सप्ताह घरेलू और विदेशी कारकों से गुलजार रहा, लेकिन इस सप्ताह बाजार पर देश में कोराना के गहराते संकट के बीच निवेशकों को प्रमुख आर्थिक आंकड़ों का इंतजार बना रहेगा और बाजार की चाल तय करने में विदेशी संकेतों की अहम भूमिका रहेगी।

कोराना महामारी के गहराते संकट के बीच देश अनलॉक के दूसरे चरण में प्रवेश कर रहा है। कोरोना संक्रमण के आंकड़ों की बात करें तो भारत इटली से भी एक पायदान ऊपर छठे स्थान पर आ गया है। ऐसे में विदेशी बाजारों से मिलने वाले संकेतों के साथ-साथ घरेलू कारकों से भी बाजार की चाल प्रभावित रहेगी।

डॉलर के मुकाबले देसी करेंसी रुपये की चाल और अंतर्राष्ट्ररीय बाजार में कच्चे तेल के भाव पर भी बाजार की नजर होगी।

सप्ताह के दौरान देश की कई प्रमुख कंपनियां बीते वित्त वर्ष के आखिरी तिमाही के अपने वित्तीय नतीजों की घोषणा करेंगी, जिनका असर घरेलू शेयर बाजार पर देखने को मिलेगा, जबकि सप्ताह के आखिर में देश के औद्योगिक उत्पादन और महंगाई दर के आंकड़े जारी होंगे, जिसका निवेशकों को इंतजार रहेगा।

चालू वित्त वर्ष के आरंभिक महीने अप्रैल के औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े शुक्रवार को जारी होंगे। बता दें कि देशव्यापी लॉकडाउन के चलते अप्रैल में औद्योगिक गतिविधियां तकरीबन ठप पड़ गई थीं।

निवेशकों की निगाहें मई महीने की खुदरा महंगाई दर पर भी बने रहेगी, जिसके आंकड़े कारोबार सप्ताह के आखिरी दिन शुक्रवार को ही जारी होंगे।

हालांकि, बीते सप्ताह के आखिरी सत्र में अमेरिकी बाजार में रही जबरदस्त तेजी का असर घरेलू शेयर बाजार में इस कारोबारी सप्ताह के आरंभिक सत्र में सोमवार को देखने को मिलेगा। अमेरिका में गैर-कृषि क्षेत्र के रोजगार के आंकड़े उम्मीद से बेहतर आने से वैश्विक शेयर बाजार में तेजी रही।

घरेलू शेयर बाजार का रूख प्रमुख देसी कंपनियों के वित्तीय नतीजों से भी तय होगा। बीते सप्ताह के आखिर में वेदांता व अन्य कंपनियों के वित्तीय नतीजे जारी हुए और इस सप्ताह के आरंभ में सोमवार को ही टाइटन अपने वित्तीय नतीजे जारी करेंगी। इसके बाद मंगलवार को हीरोमोटोकॉर्प जबकि हिंडाल्को, महिंदरा एंड महिंदरा समेत कुछ अन्य कंपनियां बीते वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही के अपने वित्तीय नतीजे शुक्रवार को जारी करेंगी।

इसके अलावा अमेरिका चीन, जापान और यूरोपियन यूनियन में जारी होने वाले प्रमुख आर्थिक आंड़ों का भी बाजार पर असर देखने को मिलेगा। वहीं, बाजार की नजर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी एफपीआई और घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी डीआईआई के निवेश के प्रति रूझान पर भी बनी रहेगी।

कोरोनावायरस संक्रमण की रोकथाम को लेकर घोषित देशव्यापी लॉकडाउन के चरणबद्ध तरीके से खुलने के दूसरे चरण में सोमवार से होटलए रेस्तरा, कैंटीन जैसे हॉस्पिटैलिटी के सेक्टर खुल रहे हैं।

आईएएनएस

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राष्ट्रीय

कोरोना काल में चरमराई अर्थव्यवस्था, कैसे उबरा जाए?

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प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली, जब से कोरोना महामारी फैली है, तब से अनेक देशों की इकॉनोमी यानी अर्थव्यवस्था बिगड़ गई है। कोरोना वायरस के कारण पूरे विश्व को आर्थिक कीमत भी चुकानी पड़ी है। इसके कारण उद्योग-धंधों पर भी काफी हद तक ब्रेक लग गया है।

इसको देखते हुए वैश्विक जीडीपी में भी कमी की संभावना जताई गई है। कोरोना महमारी पर लगाम लगाने के लिए कई देशों में लॉकडाउन लगाया गया। दुनिया का शायद ही कोई ऐसा देश हो, जिसने लॉकडाउन का दौर ना देखा हो।

भारत में 25 मार्च से राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन का ऐलान हुआ था और उसी के असर की वजह से देश की आखिरी तिमाही में आर्थिक विकास दर कुछ कम हुई है। लेकिन अप्रैल और मई में भारत में सभी उद्योग-धंधे और कामकाज पूरी तरह से बंद रहे, इसलिए आने वाली तिमाही में विकास दर और कम रहने का अनुमान है। माना जा रहा है कि इस साल भारत की जीडीपी में 4 से 5 फीसदी की गिरावट आएगी।

अगर चीन की जीडीपी की बात करें जो भारत की जीडीपी से 5 गुना ज्यादा है, इस साल के शुरूआती तीन महीनों में चीन की जीडीपी भी 6.8 प्रतिशत तक घट गई, जो अब तक की सबसे बड़ी गिरावट है, जब से चीन ने 1992 से जीडीपी के आंकड़े जारी करना शुरू किया था।

इस साल की पहली तिमाही में जर्मनी की अर्थव्यवस्था भी 2.2 प्रतिशत तक सिकुड़ गई है, फ्रांस की जीडीपी विकास दर भी 5.8 प्रतिशत तक कम हो गई, स्पेन की जीडीपी की विकास दर में 5.2 प्रतिशत की कमी आयी है, यानी की कोरोना काल में दुनिया के ज्यादातर देशों की आर्थिक विकास दर में भारी कमी आयी है।

यह तो साफ है कि इस साल भारत की जीडीपी में गिरावट रहेगी और यह गिरावट 4 से 5 फीसदी तक हो सकती है। इस गिरावट का विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग असर हो सकता है। इस कोरोना संकट से भारत के तमाम अनौपचारिक क्षेत्र और लघु व मझौले उद्योग सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। लोगों की आमदनी पर भी बुरा असर पड़ रहा है। कई लोगों की नौकरी भी चली गई है। बेरोजगारी दर में वृद्धि बनी हुई है। जहां जनवरी में बेरोजगारी दर करीब 7 फीसदी तक थी, वहां मई में यह दर 27 फीसदी तक पहुंच गई है।

इस कोरोना काल में भारत के अनेक उद्योग विशेषकर सत्कार उद्योग जैसे पर्यटन, विमानन, होटल आदि पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। लेकिन कृषि क्षेत्र पर उतना खास फर्क देखने को नहीं मिल रहा, परंतु भारत का विनिर्माण क्षेत्र बुरी तरह से चरमरा गया है।

अगर देखा जाए तो इस समय भारत की जीडीपी का करीब आधा हिस्सा रेड जोन से आता है और लॉकडाउन की वजह से कामकाज पूरी तरह से ठप है। लॉकडाउन खत्म किये बिना वहां सामान्य स्थिति बहाल नहीं की जा सकती।

यदि लॉकडाउन खत्म कर भी दें तो भी विमानन, रेस्तरां, होटल, और अनौपचारिक क्षेत्र के मजदूरों पर निर्भर उद्योगों में गतिविधि सामान्य से कम ही रहेगी, और जो प्रवासी मजदूर अपने गांव चले गये थे, उन्हें लौटने में वक्त भी लगेगा।

खैर, इस साल नेगेटिव ग्रोथ के बाद अगले साल 2021-22 में जीडीपी बढ़ेगी। लेकिन 5 से 6 फीसदी बढ़ भी गई तो यह सिर्फ वापसी भर ही कहा जाएगा, क्योंकि इस साल 4 से 5 फीसदी की गिरावट होगी, और यह वृद्धि हमें फिर वहीं पहुंचायेगी जहां साल 2019-20 में थे। यदि भारत साल 2022-23 में 6 से 7 फीसदी की वृद्धि कर पाता है, तब हम कह सकेंगे कि भारत मौजूदा संकट से उबर चुका है।

उसके लिए भारत को आश्वस्त करने वाली वित्तीय स्थिति निर्मित करने, सुचारू ढंग से काम करने वाला बुनियादी ढांचा बनाने, जल्दी ही बैंक की सकल गैर-निष्पादित आस्तियां (एनपीए) दशार्ने वाले गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) सहित बैंकिंग प्रणाली को मजबूत करने और निवेशकों व खासतौर पर विदेशी निवेशकों को लुभाने के लिए खास प्रयास करने होंगे। तब जाकर इस कोरोना संकट में चरमराई भारतीय अर्थव्यवस्था उभर सकेगी

–आईएएनएस

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ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े लोगों में फैल रहा कोरोना : अटवाल

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नई दिल्ली: ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने आशंका जाहिर की है कि ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े लोगों में बड़े पैमाने पर कोविड-19 वायरस का प्रसार हो रहा है, और इस व्यवसाय से जुड़े 20 करोड़ लोगों में वायरस संक्रमण का खतरा पैदा हो गया है।

ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के अध्यक्ष कुलतरण सिंह अटवाल ने कहा है, “हमारी आशंका अब सही साबित हो रही है। बड़ी संख्या में हमारे लोगों मे कोविड-19 के मामले सामने आ रहे हैं। लिहाजा ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े लोगों के परिवार वालों में संक्रमण बढ़ रहा है। नतीजा उनके परिवार वालों को क्वॉरंटीन किया जा रहा है।”

उन्होंने बताया कि इस तरह के ज्यादातर मामले दिल्ली, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश से सामने आ रहे हैं।

अटवाल ने कहा है, “देशभर में ट्रांसपोर्ट व्यवसाई से 20 करोड़ लोग जुड़े हुए हैं। इनमें से 85 फीसदी लोगों की माली स्थिति ठीक नहीं है। हमने पहले ही सरकार को आगाह किया था कि वह ड्राइवर और क्लीनर के लिए सेफ्टी मेजर्स की व्यवस्था करे। लेकिन सरकार ने ध्यान नहीं दिया।”

उन्होंने कहा कि ट्रांसपोर्ट कांग्रेस सरकार से मांग करती है कि तुरंत टोल प्लाजा पर ट्रकों का सैनिटाइजेशन हो, ड्राइवर और क्लीनर में मास्क और सैनिटाइजर बांटे जाएं। ज्यादा से ज्यादा जीरो ह्यूमन कनेक्ट हो और सभी ड्राइवर्स का कोविड इंश्योरेंस कराया जाए।

अटवाल ने आशंका जाहिर की कि अगर सरकार ने सुरक्षा के उपाय नहीं किए, तो देश भर में आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति बाधित हो सकती है।

–आईएएनएस

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