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स्वास्थ्य

असम में नई पीढ़ी को अपंग बना रहा जहरीला पानी

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Polluted Water

नई दिल्ली, 13 मई | पानी के मोल पर फिल्म ‘रोटी कपड़ा और मकान’ के लिए गीतकार संतोष आनंद ने बेहद खूबसूरत बोल लिखे थे – ‘पानी रे पानी तेरा रंग कैसा, भूखे की भूख और प्यास जैसा।’

लेकिन उपभोक्तावादी समाज के स्वार्थ ने अमृत समान पानी को इतना मैला कर दिया कि अब यह प्यास तो बुझा रहा है, लेकिन साथ में दे रहा है धीमी मौत।

जहरीले पानी की समस्या के कारण असम के केवल होजई में ही पिछले छह साल के भीतर पांच साल से कम आयु के एक हजार से अधिक बच्चे फ्लोरोसिस के कारण अपंग हो चुके हैं।

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WATER POLLUTION HUMAN IMPACT

असम पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट (पीएचईडी) के अधिकारियों के मुताबिक, फ्लोराइड से दूषित होने पर पानी जहरीला हो जाता है और यही बच्चों को अपंगता के दलदल में धकेल रहा है। असम के 11 जिलों में पानी में फ्लोरिन का स्तर तय सीमा (1 मिलीग्राम प्रति लीटर) से अधिक पाया गया है, जिस कारण अनुमानित तौर पर 3,56,000 लोग खतरे के उच्च बिंदु पर हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर आपात कदम नहीं उठाए गए, तो इसके परिणाम भयावह होंगे।

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असम के पीएचईडी विभाग के अतिरिक्त मुख्य अभियंता नजीबुद्दीन अहमद के मुताबिक, “होजई जिले में पिछले कुछ वर्षो के दौरान पांच साल से कम उम्र के एक हजार से अधिक बच्चे अपंग हो चुके हैं।”

होजई असम के सबसे बड़े शहर गुवाहाटी से 170 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित है।

भूजल के इस्तेमाल में बढ़ोतरी होने के साथ ही फ्लोराइड प्रदूषण का खतरा हालिया वर्षो में केवल होजई ही नहीं, बल्कि राज्य में हर जगह बढ़ा है।

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अहमद ने कहा, “अगर अतीत की ओर रुख करें, तो लोग पेयजल के लिए सतह पर मौजूद जलस्रोतों पर निर्भर थे। लेकिन आज की तारीख में केवल 15 फीसदी आबादी सतह पर मौजूद जलाशयों पर निर्भर है, जबकि 85 फीसदी आबादी के लिए पेयजल का मुख्य स्रोत भूजल है। चूंकि जल स्तर घटता जा रहा है, इसलिए फ्लोराइड जैसे खनिजों की सांद्रता भूजल में बढ़ती जा रही है, जिससे पेयजल के फ्लोराइड से प्रदूषित होने का खतरा भी बढ़ गया है।”

स्थानीय गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) एन्वायरन्मेंट कंजर्वेशन सेंटर के सचिव धरानी सैकिया के मुताबिक, “फ्लोराइड जल में पाया जाने वाला स्वाभाविक खनिज है, लेकिन जलवायु में हो रहे परिवर्तन की वजह से इसकी मात्रा बढ़ती जा रही है।”

बारिश न होने के कारण पानी जमीन के अंदर नहीं जा पा रहा, जिससे भूजल स्तर गिरता जा रहा है। पेड़ों की अंधाधुंध कटाई ने समस्या को और विकराल कर दिया है।

सैकिया ने कहा, “बारिश भरपूर होती है, तो फ्लोराइड की मात्रा सामान्य रहती है, लेकिन बारिश कम होने की वजह से इसका स्तर बढ़ता है।”

पानी के जहर बनने का एक अन्य कारण बोरिंग के लिए जमीन की खुदाई है। खुदाई के दौरान चट्टानें टूटती हैं और वे भूजल में मिल जाती हैं। चूंकि ये चट्टानें खनिज से भरपूर होती हैं, इसलिए पानी में फ्लोराइड की मात्रा बढ़ना स्वाभाविक है।

सैकिया ने कहा, “गुवाहाटी में पहले 150-200 फुट की गहराई में पानी निकल आता था, लेकिन शहर में कुकुरमुत्तों की तरह फ्लैट व हाउसिंग सोसायटी बनने के कारण पानी की खपत बढ़ गई। नतीजतन भूजल स्तर 250-300 फुट नीचे चला गया।”

असम में पानी के जहरीले होने के कारण का पता लगाने वाले पीएचईडी विभाग के पूर्व मुख्य अभियंता ए.बी. पॉल ने कहा कि उन्होंने दुर्घटनावश इसकी खोज की थी। साल 1999 में वे कार्बी आंगलोंग (फ्लोरोसिस से राज्य के सर्वाधिक प्रभावित जिलों में एक) जिले के तेकेलागुइन गांव के आधिकारिक दौरे पर गए थे, जिस दौरान उन्होंने एक लड़की देखी, जिसके दांतों की संरचना अजीब और धब्बेदार थी।

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उन्होंने कहा, “कई लोगों ने डेंटल तथा स्केलेटल फ्लोरोरिस के लक्षण दिखाए। जांच करने पर मैंने पानी में फ्लोराइड का स्तर 5-23 मिलीग्राम प्रति लीटर पाया, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, इसका स्तर एक मिलीग्राम प्रति लीटर होना चाहिए।”

सैकिया ने कहा, “एक अनौपचारिक सर्वेक्षण के मुताबिक, होजई जिले के 285 गांवों में 50,000 बच्चे फ्लोरोसिस (डेंटल या स्केलेटल) से प्रभावित हैं। नागांव तथा होजई में कुल 485 गांव फ्लोराइड प्रदूषण का शिकार है।”

इससे निपटने के प्रयासों के तहत पीएचईडी ने सीमा से अधिक फ्लोराइड वाले जल स्रोतों (जैसे ट्यूबवेल) को लाल रंग से चिन्हित किया है, ताकि लोग उस पानी का इस्तेमाल पेयजल या खाना बनाने के लिए न करें।

जल की जांच के लिए चार जिलों -कार्बी आंगलोंग, नागांव, होजई और कामरूप में प्रयोगशालाओं को उन्नत किया गया है। साथ ही कार्बी आंगलोंग, नागांव तथा कामरूप जिलों में सुरक्षित पेयजल के लिए रिंग वेल का निर्माण किया गया है और इनकी संख्या बढ़ाई जा रही है।

नागांव जिले के 11 ग्राम पंचायतों को ट्यूब वेल के लिए कोष का आवंटन किया था, जिन्हें अब रिंग वेल का निर्माण करने के लिए कहा गया है।

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सैकिया होजई के खासकर आकाशीगंगा ग्राम पंचायत में बीमारी के इलाज के लिए खुद दवाएं बांट रहे हैं।

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि इस समस्या का सबसे बेहतरीन समाधान प्रकृति की ओर लौटना है।”

(आंकड़ा आधारित, गैर परोपकारी, लोकहित पत्रकारिता मंच, इंडियास्पेंड के साथ एक व्यवस्था के तहत)

by : अजरा परवीन रहमान

–आईएएनएस

With the increase in the use of groundwater, the danger of fluoride pollution has not only increased in recent years, but also increased everywhere in the state.

स्वास्थ्य

किशोरावस्था में वजन घटाने की सर्जरी हृदय रोग में मददगार

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motapa-

बेरियाट्रिक सर्जरी (पेट की सर्जरी) करानेवाले किशोर/किशोरियों में हृदय रोग का खतरा कम हो जाता है। एक नए शोध में यह दावा किया गया है।

शोध के निष्कर्षो से पता चलता है कि बेरियाट्रिक या वजन घटाने की सर्जनी अगर किशोरावस्था में ही करा ली जाती है, तो यह जीवन में बाद में भी अनियमित ग्लूकोज चयापचय, एथोरोसलेरॉसिस की हृदय की विफलता और स्ट्रोक के विकास और प्रगति को कम करके अद्वितीय लाभ प्रदान कर सकती है।

अमेरिका के ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी कॉलेज के प्रोफेसर मार्क पी. मिचलस्की ने बताया, “यह बेरिएट्रिक सर्जरी के बाद किशोरावस्था में हृदय रोग के जोखिम कारकों में परिवर्तन के पूर्वानुमान को लेकर पहली बार बड़े पैमाने पर किया गया विश्लेषण है। यह शोध ऑनलाइन जर्नल पेडियाट्रिक्स में प्रकाशित किया गया है। यह अध्ययन 242 किशोर/किशोरियों पर किया गया, जिन्हें जांच में हृदय रोग होने की संभावना पाई गई थी।

शोध में पाया गया कि बेरियाट्रिक सर्जरी से पहले 33 फीसदी प्रतिभागियों में तीन या उससे ज्यादा तरह के हृदय रोग होने का खतरा था। बेरियाट्रिक सर्जरी से न सिर्फ वजन में कमी आती है, बल्कि किशोर/किशोरियों के बीच डायस्लिपेडेमिया का जोखिम भी कम हो जाता है, जो रक्त में कोलेस्ट्रॉल का असामान्य रूप से बढ़ा स्तर होने के कारण होता है।

–आईएएनएस

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स्वास्थ्य

आठ घंटे से कम सोने से अवसाद का खतरा

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नींद
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अगर आप आठ घंटे से कम नींद ले रहे हैं तो सावधान हो जाइए। एक शोध के मुताबिक, आठ घंटे से कम सोने से अवसाद का खतरा बढ़ सकता है। नियमित तौर पर नींद में बाधा पड़ने से नकारात्मक विचारों से ध्यान हटाने में मुश्किल हो सकती है।

शोधकर्ताओं ने कहा कि अपर्याप्त नींद लेने से व्यक्ति के आसपास के नकारात्मक विचार उसके जीवन में दखल देते रहते हैं। बिंघाम्टन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मेरेडिथ कोल्स ने कहा, हमने पाया है कि लोगों के दिमाग में कुछ विचार अटक जाते हैं और उनके बढ़े हुए नकारात्मक विचार उनके लिए नकारात्मक उत्प्रेरकों से अलग होने को मुश्किल बना देते हैं।

कोल्स ने कहा, ऐसा माना जाता है ये नकारात्मक विचार लोगों में कई तरह के मनोवैज्ञानिक विकार, जैसे अवसाद व व्यग्रता (डिप्रेशन एवं एंग्जाइटी) पैदा करते हैं। इस शोध का प्रकाशन जर्नल साइंसडायरेक्ट में किया गया है। इसमें लोगों की नींद लेने की अवधि के साथ नकारात्मक विचारों का मूल्यांकन किया गया।

–आईएएनएस

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स्वास्थ्य

महिलाओं के बाल झड़ना ट्यूमर का संकेत!

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जिन महिलाओं के बाल लगातार झड़ते हैं, उनमें गैर-कैंसर वाले ट्यूमर का खतरा बना रहता है। यह ट्यूमर गर्भाशय की दीवारों के भीतर होता है।

सेंट्रल सेंट्रीफ्यूगल सिकेट्रिशियल एलोपेसिया (सीसीसीए) वाली महिलाओं में गर्भाशय के अंदर ट्यूमर का जोखिम पांच गुना अधिक होता है। एक नए शोध में यह पता चला है। फाइब्रॉएड गर्भाशय की दीवार पर पाए जाने वाले चिकनी पेशी के ट्यूमर हैं। वे गर्भाशय की दीवार के भीतर ही विकसित हो सकते हैं या इसके साथ जुड़े हो सकते हैं।

हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (एचसीएफआई) के अध्यक्ष पद्श्री डॉ. के.के. अग्रवाल ने कहा, “फाइब्रॉएड गर्भाशय की मांसपेशी के ऊतकों में शुरू होते हैं। वे गर्भाशय की कैविटी में, गर्भाशय की दीवार की मोटाई या पेट की गुहा में बढ़ सकते हैं। फाइब्रॉएड के लिए मेडिकल शब्द है- लेय्योमायोमा।

फाइब्रॉएड शरीर में स्वाभाविक रूप से उत्पादित हार्मोन एस्ट्रोजन द्वारा उत्तेजना की प्रतिक्रियास्वरूप विकसित होते हैं। इनकी वृद्धि 20 साल की उम्र में दिख सकती है, लेकिन रजोनिवृत्ति के बाद ये सिकुड़ जाते हैं, जब शरीर एस्ट्रोजेन का बड़ी मात्रा में उत्पादन बंद कर देता है।”

डॉ. अग्रवाल ने आगे कहा, “फाइब्रॉएड का उपचार लक्षणों, आकार, उम्र और रोगी के सामान्य स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। यदि कोई कैंसर पाया जाता है, तो यह रक्तस्राव अक्सर हार्मोनल दवाओं द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि कुछ खाद्य पदार्थ फाइब्रॉएड को बढ़ा सकते हैं। इसे रोकने के लिए संतृप्त वसा वाले खाद्य पदार्थो को फाइब्रॉएड रोगियों को नहीं देना चाहिए। ये वसा एस्ट्रोजेन स्तर को बढ़ा सकते हैं, जिससे फाइब्रॉएड बड़ा हो सकता है। कैफीन युक्त पेय पदार्थ गर्भाशय फाइब्रॉएड होने पर नहीं लेना चाहिए।

डॉ. अग्रवाल के मुताबिक, उच्च नमक वाले फूड्स अपने आहार से दूर रखें, क्योंकि वे आपके जिगर पर दबाव डालते हैं। जिगर विषाक्त पदार्थो को हटाने और हार्मोन संतुलन के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार अंग है।

–आईएएनएस

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